Pahla Pyar.. Pahla Lund- Part 1

अन्तर्वासना पर सेक्स स्टोरी पढ़ने वाले सभी पाठकों का लव शर्मा का एक बार फिर से नमस्कर।

दोस्तो, आज मैं हाज़िर हुआ हूँ अपने जीवन के सबसे पहले प्यार और सेक्स की कहानी को लेकर!
पहले प्यार को पाने का आनन्द ही अलग होता है।

बात उस समय की है, जब मैं पढ़ता था और मुझे सेक्स, प्यार, लंड, चूत और गांड के बारे में कुछ ज्यादा पता नहीं था और ना ही मुझे कुछ समझ आता था।
पहले मैं एक गाँव में रहा करता था और गाँव के ही स्कूल में पढ़ता था। वो कहने का ही गाँव था.. पर काफी उन्नत गांव था और वहाँ का स्कूल भी कॉन्वेंट स्कूल था.. जिसमें कि मैं पढ़ता था।

मैं बचपन से ही उसी स्कूल में पढ़ रहा था.. और उसी समय से ही मुझे मेरी ही कक्षा का एक लड़का अच्छा लगता था। जब मैं छोटी क्लास में था.. तब से ही वह मेरे दिल को भाता था लेकिन मुझे कुछ पता नहीं था कि ये सब क्या है और ऐसा क्यों है।

मैं बस जब भी समय मिलता.. उसके साथ रहता.. बोलता.. खाता और समय बिताता था। कभी-कभी जब वो स्कूल नहीं आता.. तो मुझे उसकी याद भी आती, लेकिन मैं कुछ समझ नहीं पाता कि ऐसा क्यों है। क्योंकि मैं तो अभी किशोर अवस्था का ही था।

उसका नाम राजेश था.. वह बचपन से ही काफी हैंडसम और मर्दाना था। उसका गोरा अंडाकार चेहरा.. खूबसूरत आँखें उसके आकर्षण को और बढ़ाते थे।

वह अपनी शर्ट की एक बटन खुला रखता था और चूंकि वो गांव का लौंडा था.. और जाति का बंजारा था इसलिए कामुकता तो उसमें कूट-कूट कर भरी थी।

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ऐसे ही दिन बीतते गए.. उसके लिए मेरे मन में आकर्षण भी बढ़ने लगा, उम्र के साथ वह और भी सेक्सी होने लगा.. उसकी मर्दानगी भी बढ़ने लगी।
वह हर समस्या का समाधान था.. सबकी जिम्मेदारी लेने वाला भी था, सबको साथ में लेकर चलने वाला था, किसी से पंगा हो जाने पर वो अपने मजबूत मर्दाना हाथों से मुँह तोड़ देने वाला मर्द था।
मतलब वो मेरी क्लास का हीरो था।

धीरे-धीरे मुझे भी उससे लगाव बढ़ता गया और अब हम लोग स्कूल की अंतिम कक्षा में आ चुके थे और मुझे थोड़ा-थोड़ा समझ में आने लगा था कि मुझे वह क्यों अच्छा लगता है। लेकिन मैंने उसे कभी यह बात नहीं बताई थी।

जैसा कि वह गांव का मदमस्त बंजारा था.. तो उसकी अदाएं भी मदहोश कर देने वाली थीं। आप ये मान लीजिए कि पूरे स्कूल में उसके टक्कर का कोई लौंडा नहीं था। वह गांव के अखाड़े में कसरत भी करता था.. जिससे कि उसकी छाती में उभार आने लगा था और भुजाएं भी मजबूत हो चुकी थीं। वह गांव का गबरू जवान था.. अपने खेतों में भी थोड़ा कामकाज देखता था.. जिससे कि उसकी गोरी और चौड़ी हथेलियां काफी सख्त हो चुकी थीं।

अब मुझे उसे देखकर कामुकता का नशा छाने लगता था और दिल करता था कि बस इसके बदन को किसी बहाने छू लूँ.. हालांकि सेक्स में अब भी मुझे कुछ समझ नहीं आता था.. इसलिए इस तरह का कुछ भी दिमाग में नहीं था कि राजेश का लंड लेना है.. या सेक्स करना है.. बस उसके मदमस्त बदन को छूने का दिल करता था।

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मेरा बेस्ट फ्रेंड दूसरा लड़का था.. इसलिए मैं राजेश के पास नहीं बैठता था, लेकिन जैसे ही मुझे मौका मिलता.. मैं उसके पास जाकर बैठ जाता या खड़ा हो जाता और मौका मिलते ही उसकी कठोर भुजाओं को पकड़ लेता और उसके कठोर उभार को महसूस करता।
इसके अलावा उसके बदन से एक अलग ही खुशबू आती थी.. जो किसी और से बिल्कुल अलग थी। मैं मौका पकर उसके बगल में खड़ा हो जाता और उस मदमस्त महक का आनन्द लेने की कोशिश करता रहता।

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