पड़ोसी घर की कमसिन नौकरानी की चुदाई की कहानी

ही फ्रेंड्स, मेरा नाम दीपक है, और मैं लुक्कणोव का रहने वाला हू. मेरी उमर 35 साल है, और मैं एक शादी-शुदा आदमी हू. लंड मेरा 7 इंच का है, और हमेशा चुदाई का प्यासा रहता है. अब ज़्यादा बोर ना करते हुए मैं सीधा कहानी पर आता हू.

पिछले महीने पहले की बात है. मेरे पड़ोस की फॅमिली और मेरी फॅमिली में आचे रिलेशन्स है. उन्होने 3 महीने पहले एक कांवली को नौकरी पर रखा था. वो कांवली एक 22 साल की लड़की थी. उसका नाम पिंकी था.

दिखने में वो ठीक-ताक थी. रंग उसका ठीक था ज़्यादा गोरा नही था. बूब्स उसके छ्होटे ही थे अभी तकरीबन 30″ के होंगे. लेकिन उसकी गांद मस्त थी, जो 34″ की होगी.

गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी थी, और पड़ोस की फॅमिली घूमने जेया रही थी. उन्होने पिंकी को पीछे से घर का ध्यान रखने के लिए बोला. उनका बेटा जो मेरा दोस्त था वो एक चाबी मुझे भी दे गया, ताकि मैं बीच-बीच में चक्कर लगता राहु.

इधर मेरी फॅमिली ने भी घूमने जाने का प्लान बनाया. मुझे भी जाना था, लेकिन ऑफीस से मुझे छुट्टी नही मिली. फिर मैने अपनी बीवी और बच्चो को घूमने के लिए भेज दिया. अब मैं घर पर अकेला था.

मेरी फॅमिली को बाहर गये 2 दिन हो गये थे. मैं शाम को ऑफीस से वापस आया, और जब मैं अपने घर का दरवाज़ा खोलने लगा, तो मुझे पड़ोस के घर से सॉंग की आवाज़ आने लगी. किसी ने ज़ोर से सॉंग लगा रखे थे. अक्सर उनके घर के बच्चे सॉंग्स लगते थे, तो मुझे लगा वो लोग वापस आ गये होंगे.

फिर अंदर जाके मैं फ्रेश हुआ, और त-शर्ट और पाजामा पहन लिया. उसके बाद मैने सोचा चलो मिल के आता हू पड़ोस में, और ट्रिप के बारे में पूच कर आता हू की कैसा गया. मैने दरवाज़ा नॉक किया, लेकिन वो खुला हुआ था.

फिर मैं अंदर चला गया. अंदर जाके देखा, तो कोई दिखाई नही दे रहा था. फिर मैं उस रूम में गया जहा म्यूज़िक लगा हुआ था. जैसे ही मैने दरवाज़ा खोला, तो अंदर का सीन देख कर हैरान हो गया.

भाभी का वॉर्डरोब खुला हुआ था, और उनके कपड़े और गहने सब बेड पर बिखरे हुए थे. फिर मुझे पिंकी दिखी, उसने ब्रा और पनटी पहनी हुई थी, और वो शीशे के सामने खुद को देख रही थी.

वो अलग-अलग तरह के सेक्सी-सेक्सी पोज़ बना रही थी. फिर उसने भाभी जी की ज्यूयेल्री ट्राइ करनी शुरू की. पिंकी की मस्त गांद देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया. मुझे ये बड़ा अछा मौका लगा उसको छोड़ने का. क्यूंकी ना तो उस घर में कोई था, और ना ही मेरे घर में.

ये सोच कर मैं वापस गया, और बाहर का दरवाज़ा बंद कर दिया. फिर मैने अपने कपड़े उतारे, और सिर्फ़ अंडरवेर रहने दिया. उसके बाद मैने चुपके से उस रूम का दरवाज़ा खोला जिसमे पिंकी थी, और अंदर चला गया.

पिंकी शीशे में अपने आप को देखने में मस्त थी. उसकी मटकती गांद देख कर मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था. फिर मैं उसके पीछे गया, और उसको बाहों में भर लिया. अचानक मेरे ऐसा करने से वो घबरा गयी, और झटपटाने लगी.

मैने उसको अपनी तरफ घुमाया, और उसके होंठो पर अपने होंठ चिपका दिए. वो मुझे अपने से डोर करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी कोशिश बेकार थी.

किस करते हुए मैं उसको लेके बेड पर गिर गया. अब वो मेरे नीचे से और मैं उसके होंठ चूस रहा था. मेरा लंड नीचे उसकी जांघों पर टच हो रहा था.

पहले 2-3 मिनिट उसने मेरा साथ नही दिया, लेकिन फिर वो मेरा साथ देने लग गयी. मैं समझ गयी थी, की वो गरम हो चुकी थी. फिर किस करते-करते मैं उसकी ब्रेस्ट दबाने लग गया. अब वो कामुक आहें भर रही थी.

फिर मैं उसकी गर्दन चूमने लग गया, और उसकी ब्रा निकाल दी. उसके बूब्स ज़्यादा बड़े नही थे, लेकिन निपल्स बड़े-बड़े थे. वो आ आ कर रही थी, लेकिन म्यूज़िक की वजह से ज़्यादा आवाज़ नही आ रही थी.

फिर मैं किस करते हुए नीचे गया, और उसकी नाभि पर किस करने लगा. उसकी पनटी गीली हो चुकी थी. मैने उसकी पनटी उतरी, और उसकी छूट मेरे सामने थी. हल्के बाल थे उसकी छूट पर, और एक-दूं टाइट थी. लेकिन ये उसकी पहली चुदाई नही थी.

फिर मैने उसकी छूट पर अपनी जीभ लगाई, और उसको चाटना शुरू कर दिया. इससे वो तड़पने लग गयी. कुछ देर मैने उसकी छूट छाती. वो गांद हिला-हिला कर मज़ा ले रही थी.

फिर मैने अपना अंडरवेर उतरा, और मेरा लंड स्प्रिंग की तरह उछाल कर बाहर आ गया. मेरा लंड देख कर वो घबरा गयी. फिर मैने उसको इशारा किया, और लंड चूसने को बोला. पहले तो वो माना करने लगी, लेकिन फिर मान गयी.

वो घोड़ी बन कर लंड के सामने बैठी, और मैने लंड उसके मूह में डाल दिया. फिर वो ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को चूसने लग गयी. मैने उसके बाल पकड़े, और उसके मूह में धक्के देने लगा. मैं किसी रंडी की तरह उसका मूह छोड़ रहा था.

फिर मैं उसके पीछे आया, और पीछे से उसकी छूट पर अपना लंड रगड़ने लग गया. उसकी छूट पानी-पानी हो रही थी. उसके बाद मैने लंड छूट के मूह पर टीकाया, और अंदर धक्का देने लगा.

मेरा लंड आराम से उसकी गीली छूट में चला गया. बड़ी गरम और क़ास्सी हुई छूट थी साली की. लंड रग़ाद-रग़ाद कर अंदर जेया रहा था. फिर मैने उसके चूतड़ पकड़े, और लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया.

बड़ा मज़ा आ रहा था. वो भी आँखें बंद करके चुदाई का मज़ा ले रही थी. धीरे-धीरे मैने अपनी स्पीड तेज़ कर दी. इससे उसको और भी मज़ा आने लगा. मैं चेक करना चाहता था की उसको मज़ा आ रहा था या नही. इसलिए मैं धक्के मारता हुआ रुक गया.

जब मैं रुका, तो वो खुद अपनी गांद आयेज-पीछे करके लंड अंदर-बाहर करवाने लगी. फिर मैं दोबारा से धक्के मारने लगा. 20 मिनिट मैने पिंकी को मज़े से छोड़ा. फिर हम दोनो का पानी एक साथ निकल गया.

उस चुदाई के बाद जब तक पड़ोस वाले नही आए, मैने रोज़ पिंकी को छोड़ा. वो भी बिना कोई आना-कानी किए मुझसे आराम से चूड़ी.

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