मस्त फ़ीगर वाली पड़ोसन भाभी की मस्त चुत चुदाई

फ़िर भाभी ने अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिए व 5 मिनट तक हम दोनों किस करते रहे।
अब भाभी काफी उत्तेजित हो चुकी थीं। उन्होंने मेरे पजामे के नाड़े को खींचना चालू कर दिया व कुछ ही पलों में उसको अलग करके मेरी चड्डी को खींचने लगीं। मैंने भी उन्हें सहयोग किया और भाभी ने मेरी चड्डी को भी उतार दिया। चड्डी के उतरते ही वो मेरे लंड को हैरानी से निहारने लगीं व लंड को मुँह में लेने के लिए आगे को हुईं।

मैंने भी लंड उनके मुँह की तरफ बढ़ा दिया तो वो अपने हाथ से लंड को ऊपर-नीचे करके अपने मुँह में लेने लगीं। अब लंड भाभी के मुँह से स्पर्श कर चुका था.. इसी के साथ मेरे मुँह से भी ‘आहह.. आहह.. की आवाजें आने लगीं, मैंने सीत्कार भरते हुए कहा- आह्ह.. भाभी जरा धीरे!
परन्तु वो काफी गर्म होने के कारण कुछ भी नहीं सुन रही थीं।

मैं भी काफी गरम हो गया था। पांच मिनट लंड चूसने के बाद मैंने भाभी की साड़ी को जोर से खींचा व निकाल दिया और उनके पेटीकोट को खींचने लगा।

भाभी का पेटीकोट खींचने के चक्कर में भाभी का पेटीकोट फट गया। मैंने देखा कि भाभी ने काली पेंटी पहन रखी है। अब मैंने भाभी को अपने नीचे खींचा व उनकी पेंटी को उतार फेंका।

मैंने देखा भाभी की चुत पर एक भी बाल नहीं है..मेरे मुँह से निकल पड़ा- वाव भाभी.. आपकी तो चिकनी चमेली है!
तो भाभी शर्माते हुए बोलीं- हाँ.. दो दिन पहले ही बाल साफ किए थे।

मैंने अपना मुँह भाभी की चुत पर लगा दिया व जोर-जोर से चुत चूसने लगा। भाभी सीत्कारने लगीं- आहह.. ओह माई गॉड.. ओहहह..
वो काफी तड़पने लगीं व मुझे अपने ऊपर खींचने लगीं।

मैंने भी देर ना करते हुए अपना लंड को ठिकाने पर लगते हुए भाभी की चुत में डाल दिया व तेज-तेज धक्के मारना चालू कर दिया।

मेरे इस एकदम से हुए एक्शन से भाभी जोर से चिल्लाने लगीं- उह.. मर गई.. आहह.. ओहह.. बंसत धीरे करो.. धीरे.. बंसत धीरे करो.. मेरी मारो.. पर आराम से यार.. आहह.. मर गई रे.. तूने तो मार दिया।

मैंने भाभी को घोड़ी बनाया व पीछे से उनकी चूत में लंड पेल कर वापस धक्के मारने लगा।
वो जोर से चिल्लाने लगीं- आहह.. मार दिया रे.. आहह रे..
कुछ मिनट बाद मुझे लगा भाभी का हो गया है क्योंकि भाभी की चुत से गरम पानी निकलने लगा व ‘पच.. पच..’ की आवाजें आने लगी थीं।

अब मुझसे भी नहीं रहा गया और मैं भी जोर-जोर से धक्के लगाने लगा, भाभी जोर से ‘आहह.. आहह..’ करने में लगी हुई ही थीं।

तभी मैंने जोर के धक्के से अपना पानी भाभी की चुत में छोड़ दिया। मैं भी पानी निकालते समय ‘आहहह.. आहह..’ करने लगा और भाभी के ऊपर ही ढेर हो गया।

हम दोनों एकदम से निढाल हो गए थे.. और हम दोनों की आँखें मुंद गईं.. कब नींद के आगोश में चले गए, कुछ पता ही नहीं चला।

दो घन्टे बाद भाभी की बेबी जागी.. तो उसके रोने की आवाज से हमें होश आया व हम दोनों ने अपने कपड़े पहने व मैं अपने घर जाने लगा।
भाभी को मैंने एक लम्बी किस दी व अपने घर चला गया।

जैसा कि आपको पता ही है भाभी मेरी पड़ोसी हैं और भैया के ना होने पर जब भी मन होता है.. मैं व भाभी सेक्स करते हैं। यह सिलसिला आज तक जारी है। एक बार तो मैंने भाभी की गांड भी मारी।

मुझे पार्लर का और मसाज का काम आता है.. जिसके कारण भाभी ने मुझसे अपनी व अपनी सहेलियों की मसाज करवाती हैं, जिससे मेरी भी काफी आमदनी भी हो जाती है.. और उनकी सहेलियों की हसरतें भी पूरी हो जाती हैं।

मेरी कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करके जरूर बताएं..

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