पड़ोस की भाभी ने लंड देख कर घर बुलाया

हेलो दोस्तों मेरा नाम युवी है. ये मेरी पहली स्टोरी है. वैसे तो मैं ड्के पे काफ़ी टाइम से स्टोरीस पढ़ रहा हू. अगर स्टोरी में कोई ग़लती हो जाए तो बता देना. मैं अपने बारे में बता डू पहले. तो लुक्स नॉर्मल है, कोई हीरो जैसा नही दिखता. बॉडी भी नॉर्मल है, और मेरे लंड का साइज़ 5 या 6 इंच का ही है. मोटा भी 2-3 इंच ही है. अब आपको सीधा स्टोरी पे ले चलता हू.

ये बात तब की है, जब कोविद का लॉक्कडोवन् फिनिश ही हुआ था. लॉक्कडोवन् की वजह से हमारी कॉलोनी में काफ़ी लोग अपने होमटाउन में शिफ्ट हो गये थे, और न्यू लोग आ रहे थे रेंट पे रहने. हमारे मकान के पास वाले मकान में एक फॅमिली आई थी रहने.

जो फॅमिली थी, उसमे हज़्बेंड-वाइफ ही थे बस. भैया का नाम केशव और भाभी जी का नाम रोहिणी. भैया एक मंक में जॉब करते थे, तो ज़्यादातर वो घर से बाहर ही रहते थे. भाभी जी हाउसवाइफ थी. भाभी जी के बारे में बता डू. वो बाला की खूबसूरत थी. रंग गोरा, चिकनी कमर, ना ज़्यादा पतली, ना मोटी.

फिगर में बूब्स और गांद भरे हुए थे. वो सारी नाभि के नीचे बाँधती थी, जिससे देखने वाले का लोड्‍ा पंत में ही तंबू बना देता था. सनडे के दिन की बात है. मैं घर पे ही था, तो डोरबेल बाजी. मैने गाते खोला तो देखता ही रह गया. गाते पे रोहिणी खड़ी थी.

वो गीले बालों में थी, जिससे पता चल रहा था की वो अभी नहा कर ही आई थी. मैने गाते खोला, तो वो सीधे अंदर आ गयी, और मम्मी के बेडरूम की तरफ चली गयी.

मम्मी: कैसे आना हुआ तेरा?

रोहिणी: अर्रे यार दीदी, वो नहा कर निकली तो बाल सूखने के लिए हेर ड्राइयर निकाला. वो चल ही नही रहा, तो सोचा आपके पास आ जौ आपका लेने.

मम्मी: युवी के रूम में होगा. वो ही उसे करता है ऐसी चीज़ें.

रोहिणी अब मेरे रूम की तरफ आ रही थी, और उधर मैं मस्त रूम में लेटते-लेटते देसीकाहानी पे एक सेक्स स्टोरी पढ़ते हुए अपना लोड्‍ा हिला रहा था. तभी रोहिणी अंदर आ गयी, और मुझे लोड्‍ा हिलाते हुए देखने लगी. मैने उसपे ध्यान ही नही दिया, और अपना लोड्‍ा हिलता रहा, जब तक मेरा पानी नही निकल गया.

जैसे ही पानी निकला, मेरा ध्यान सीधा उसपे गया, और वो मेरा लोड्‍ा घूरे जेया रही थी. मैने झट से लोड्‍ा अंदर किया और उसे सॉरी बोला. तब उसे भी होश आया, और वो मुझे गुस्से में देखते हुए बोली-

रोहिणी: हेर ड्राइयर चाहिए. लेकिन हाथ धो कर देना. पता नही रूम में क्या-क्या गंदी हरकतें करता रहता है. तेरी शिकायत करनी पड़ेगी.

मेरी तो गांद ही फटत गयी की बहनचोड़ ये क्या कांड हो गया. फिर मैने उसे सॉरी बोला, और हाथ धो कर उसे हेर ड्राइयर दिया. मुझे ये दर्र लग रहा था की कही वो मम्मी को ये ना बता दे की मैं उसका और मम्मी का नाम लेकर हिला रहा था.

वो हेर ड्राइयर लेकर चुप-छाप मम्मी के रूम में चली गयी. मैं भी उसके पीछे दबे पैरों से मम्मी के रूम की तरफ गया उनकी बातें सुनने के लिए. फिर अंदर का सीन देख कर दिमाग़ और लंड दोनो और तंन गये. अंदर रोहिणी दरवाज़े की तरफ पीठ करके कमर झुकाए बालों पे हेर ड्राइयर कर रही थी.

कमर झुकी होने से उसकी गांद और बाहर निकल कर आ रही थी. मेरा लोड्‍ा जो अभी खाली हुआ था, वो फिर तंन गया.

रोहिणी: दीदी युवी अब बड़ा हो गया है काफ़ी.

मम्मी: हो तो गया है बड़ा, पर करना क्या है उसका, जो तुम उसके बड़े होने की चिंता कर रही हो?

रोहिणी: चिंता नही दीदी, मतलब हाइट बॉडी अची ख़ासी लगती है उसकी. स्मार्ट भी लगता है. गफ़ तो बहुत सी होंगी उसकी.

मम्मी: अर्रे नही रे, वो तो इंपे ध्यान ही नही देता.

रोहिणी मम्मी की बात सुन कर मॅन ही मॅन शैतानी हस्सी हासणे लगी. रोहिणी वैसे तो मोहल्ले में एक-दूं शरीफ बन के रहती थी. लेकिन थी हरामी (जिसका पता मुझे उसे छोड़ने के टाइम पता चला). पर मैं कुछ कर नही सकता था बिना कन्फर्म हुए. बाल सूखने के बाद वो हेर ड्राइयर देने मेरे रूम में वापस आई और बोली-

रोहिणी: ये ले तेरा समान. वैसे तेरा समान है बड़ा मस्त.

मैं: क्या बोला आपने? क्या मस्त लगा आपको?

रोहिणी: ये हेर ड्राइयर अछा काम करता है. अब तो मुझे ज़रूरत पड़ेगी तो मैं तुझसे मंगवा लूँगी. या तुझे ही अपने घर बुला लूँगी.

और एक सेक्सी स्माइल करते हुए मुझे आँख मार के चली गयी. 3 दिन बाद मुझे एक अननोन नंबर से कॉल आई-

मैं: हेलो.

रोहिणी: हेलो, क्या कर रहे हो तुम? मुझे काम है तुमसे कुछ. अभी मेरे घर आओ.

मैं: लेकिन आप बोल कोब रही है? शायद आपने ग़लत नंबर लगा दिया है.

रोहिणी: तुम युवी ही हो ना?

मैं: हा.

रोहिणी: अर्रे मैं रोहिणी बोल रही हू. मेरे घर आओ, मुझे कुछ काम है.

फिर मैं उसके घर चला गया. मैने जेया कर डोरबेल बजाई तो रोहिणी मस्त ट्रॅन्स्परेंट गाउन में आई. उसने गाते खोला, और गाते खुलते ही मेरा लोड्‍ा उसे देख कर तंन गया, जो शॉर्ट्स में सॉफ दिख रहा था.

रोहिणी: ऐसे ही हर जगह खड़ा नही होना चाहिए.

और एक नॉटी स्माइल देते हुए अंदर चली गयी.

मैं: क्या काम था आपको?

रोहिणी: यार आल्मिराह के उपर से बाग उतारना है. आल्मिराह उँची है, और स्टूल टूटा हुआ है. वो घर पे नही है वरना वो मुझे गोद में उठा कर उपर कर देते.

मैं: स्टूल तो हमारे पास भी नही है. अगर आपको कोई प्राब्लम ना हो तो मैं उठा कर उँचा कर डू आपको?

रोहिणी: तू उठा लेगा क्या?

मैं: ये लूस त-शर्ट के नीचे थोड़ी बहुत बॉडी बनाई है.

रोहिणी: पहले बॉडी दिखा, फिर सोचती हू की उठाने डू या नही.

मैने झट से अपनी त-शर्ट उतार देता हू, और उसे बोलता हू-

मैं: चू कर देखो, स्ट्रॉंग है.

रोहिणी जैसे ही मुझे टच करती है, उसकी हल्की सी आअहह निकलती है, जो मैं सुन लेता हू. फिर मैं उसे उसकी मोटी गांद के नीचे से बाहों में लेता हू, जिससे मेरा मूह उसकी छूट वाले पोर्षन पे आता है, और वो उँची हो जाती है. फिर वो बाग उतार लेती है.

उसे नीचे सरकाते टाइम मेरा फेस उसकी छूट से होता हुआ उसके पेट, फिर उसके बड़े-बड़े बोबो पे आ जाता है. उसकी साँसे तेज़ और गरम हो जाती है. फिर जैसे ही वो पूरी नीचे आती है उसके होंठ मेरे होंठो के आमने-सामने होते है. उसकी नज़रें मेरे होंठो पे टिक जाती है.

फिर आयेज क्या हुआ ये मैं आपको कहानी के अगले पार्ट में बतौँगा, की कैसे मैने रोहिणी को पटाया और कैसे उसे अपने लोड के नीचे लिया. उसके बाद हर च्छेद में लोड्‍ा डाल कर उसे छोड़ा. तब तक के लिए आप अपनी फीडबॅक और मैल मुझे मेरी ईद सिन्घYउवि3@गमाल.कॉम पे मैल कर सकते है.

अगर किसी लड़की को, किसी भाभी को, या किसी आंटी को सेक्स भी करना है, तो वो भी मुझे मैल कर सकती है. प्राइवसी का पूरा ध्यान रहेगा. तो मिलते है दोस्तों फिर अगले पार्ट में, तब तक के लिए बाइ.

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