ऑफीस बॉय ने पाटकर मुझे जमकर चोदा

ही.. फ्रेंड’स मेरा नाम रजनी है और मई देल्ही मई रहती हू. और मई देसी कहानी की एक न्यू रीडर हू.

जब भी मई इस वेबसाइट पर कहानी पढ़ती हू तो मेरी वासना जाग जाती है इससे ज़्यादा सेक्सी स्टोरी और कही नही मिलती. थॅंक्स फॉर देसीकाहानी2.नेट.

तो फ्रेंड’स मुझे भी लगा की मुझे भी अपनी लाइफ के बारे मई कुछ शेर करना चाहिए. मेरी आगे 37 है और मेरी शादी को 15 साल हो चुके है. लेकिन जो मज़ा शादी के कुछ साल तक रहता है अब वो नही रहा. और मेरे जैसी लड़की के लिए तो बिल्कुल भी नही जिसने शादी से पहले अपनी खूब चुदाई करवाई हो.

खैर छोड़ो वो वक़्त ही कुछ और था. उस वक़्त मेरा फिगर इतना सेक्सी था की लड़को का लंड देखकर ही खड़ा हो जाए लेकिन अब मई थोड़ी मोटी हो गयी हू.

शादी के 15 साल हो गये और 2 बच्चे इंसब मई अपने फिगर का ध्यान नही दिया. लेकिन अब भी मेरा फिगर 36-28-36 है. और मेरी गांद कुछ ज़्यादा ही उठ गयी है.

लेकिन मेरी सेक्स लाइफ अब कुछ खास नही रही. हज़्बेंड के साथ सेक्स हुए भी 6-6 महीने बीट जाते है. कभी कभी मेरा मान करता की किसी जवान से लड़के से चुदाई करवा लू और वो मुझे पूरी रात छोड़े.

चलो अब मई अपनी स्टोरी बतती हू. ये बात करीब एक साल पहले की है.

मई एक कंपनी मई अकाउंट मई जॉब करती हू. कंपनी ज़्यादा बड़ी नही है 15-20 आदमियो का स्टाफ है जिसमे 2 फीमेल है और बाकी माले है. इस कंपनी मई मे पिछले 4 साल से जॉब करती हू.

वही कंपनी मई एक नवीन सिर है. जिनके साथ मेरा आफ्फ़िर है. आफ्फ़िर क्या मेरी मजबोरी है. वो सीनियर मॅनेजर है और उनके साथ रहने से मेरी सॅलरी बढ़ गयी है.

उन्होने मुझे कई बार छोड़ा है बीटी मुझे उनके साथ कभी मज़ा नही आया. उनका छोटा सा लंड है और वो भी 7-8 धक्के मार्कर फूसस हो जाता है.

लेकिन पिछले साल हुमारी कंपनी मई एक लड़का न्यू आया. डर्सल उसे क्लार्क की जॉब के लिए रखा था. उसका नाम संजीव था, उसकी आगे 24 साल के आस पास थी लेकिन कद कती का मजबूत था. उसे देख कर लगा कस्स ऐसा लड़का चुदाई करे मेरी तो मज़ा आ जाए.

खैर धीरे धीरे वो हम सबके साथ घुल मिल गया.

मैने नोटीस किया की वो हुमेशा मुझसे बोलने की कोसिस करता. कभी छाई के बहाने कभी पानी कभी कुछ. जब मई किसी काम की लिए अपनी जघा से दोसरि जघा जाती तो मेरी हिलती हुई मोटी गांद को घूरता रहता. मई साँझ गयी थी इसे मेरी गांद पसंद है. लेकिन मई उसे ये ज़तती जैसे मैने कुछ नही देखा और उसके सामने अपनी गांद को और उठाके चलती..

एक दिन मई अपनी टेबल के उपेर झुक कर डरॉरे से कुछ निकल रही जहा. मई झुक के खड़ी थी वाहा से कोई निकलता तो मेरी गांद को टच करता निकलता. ये देखकर संजीव ने इसका फ़ायड उठा और मेरी गांद से लंड रगड़ता हुआ निकालने की कोसिस करने लगा. उसके टच करते ही मई चॉक पड़ी तो वो सॉरी बोलने लगा.

मैने बोला कोई बात नही और हल्की सी स्माइल दे दी.

उसका टच मुझे अच्छा लगा करेंट सा दूड गया बॉडी मई.

ऑफीस मई काम ज़्यादा था तो सबसे लास्ट मई ही जाती थी और संजीव को भी मेरे जाने के बाद जाना पड़ता. जिसकी वजा से हम दोनो काफ़ी घुल मिल गये थे. उसको खुश करने के लिए सबके जाने के बाद मई अपने दुपट्टे को साइड रख देती. जिससे संजीव मेरी भारी भारी चुचिया देख सके.

एक दिन मैने मज़ाक मई संजीव को बोला संजीव तुम भी मेरी वजा से लाते हो जाते हो.

संजीव बोला नही माँ आपके लिए मई पूरी रात रुक सकता हू, और हल्की से स्माइल करने लगा.. बदले मई मैने भी हल्की सी स्माइल क्र दी. और कहा तुम्हारी शादी हो गयी है?

संजीव बोला नही माँ अभी नही हुई.

मैने पोछा कोई गफ़?

वो बोला नही माँ कोई गफ़ बनती ही नही और ना ही कोई पसंद आती है.

मैने पोछा कैसी गफ़ चाहिए तुम्हे?

वो बोला आपके जैसी मेरी जैसी.

मैने बोला क्यो मुझमे ऐसा क्या है?

वो बोला आप इतनी अची, हो सुंदर हो..

मई हासकर बोली कहा हू सुंदर, मोटी हो गयी हू..

ऐसे ही बातयन हुए हम ऑफीस से निकल गये और फिर रात मई करीब 11 ब्जे उसका फोन आया और बोला सॉरी माँ आपको कुछ बुरा तो नही लगा आज मई कुछ ज़्यादा ही बोल गया.

मैने कहा नही ऐसी कोई बात नही है. तुम मेरे दोस्त के तेरहा हो तुम मुझसे कैसी भी बात क्र सकते हो.

ये सुनकर वो खुश हो गया और फोन रख दिया. मई साँझ गयी थी ये मुझे छोड़ने के चक्कर मई लग गया है. पर सच तो ये था मई भी उससे चूड़ना चाहती थी वो भी बुरी तेरहा. क्योकि कई साल हो गये थे मेरा पानी निकले हुए. मेरी वासना की आग चरम पर थी जिसे संजीव बुझा सकता था.

(संजीव के बारे मई कुछ बताती हू आपको संजीव बिहार का रहने वाला था और मीरूत मई कमरा लेकर किराए पर अकेला रहता था.)

हुमारी कंपनी से हर साल 2 दिन घूमने के लिए ऋषिकेश तौर जाता था. इस साल भी हम सब जाने के लिए निकल पड़े. आयेज हम दो लड़किया और बाकी सब पीछे बैठे थे.

मैने उस दिन एक ब्लॅक कलर का स्लिम फिट सूट पहना था जिसमे मेरी बॉडी कुछ ज़्यादा ही उभर के आई थी. नवीन सिर ने बोला क्या सबके लंड लेने का इरादा है. चल आज तुझे ऋषिकेश मई छोड़ता हू.

जब वो मुझसे ये बात कह रहे तो संजीव ने सुन लिया और वो पोर रास्ते मुझे देखा तक नही. ऋषिकेश पहुचने के बाद मैने संजीव को बोला क्या हुआ तुम्हे तुम खुश नही हो यहा आकर? तो वो बोला नवीन सिर ने आपको जो बोला मुझे अछा नही लगा.

मई बोली अछा तो तुम इस लिए गुस्सा हो. देखो संजीव कभी कभी हम ना चाहकर भी वो करते है जो ह्यूम पसंद नही.

वो बोला समझा तो आप उसके साथ करोगी..

मई बोली अरे उसके साथ कुछ करने की ज़रूरत नही है. उसका तो उठता भी नही ख़तम की रिपोर्ट है. उसकी तुम टेन्षन मत लो खुश रहा करो. क्या पता तुम्हारी खुआईश भी पोरी हो और मई हास दी..

वो भी स्माइल करने लगा.

फिर हम ऋषिकेश मई खूब घूमे और फिर वापस चलने की तैयारी होने लगी. इस बार मई संजीव के पास बैठ गयी और शाम के 8 बजे हम वाहा से निकल लिए.

तभी संजीव धीरे से मेरा हाथ पकड़ के बोला एक बात काहु?

मई बोली कहो.

वो बोला आप मुझे पसंद हो और मेरी इचा है आपके साथ सेक्स करने की. उसकी बात सुनकर मे हास पड़ी.

ये स्टोरी आप देसीकाहानी2.नेट पर पढ़ रहे है.

मई बोली संजीव तुम तो अभी बचे हो नही. वो बोला माँ मई आपको पूरा सुख दूँगा जो आपको नही मिलता.

तुम्हे कैसे पता की मुझे सुख नही मिलता?

वो बोला ब्स मुझे पता है अगर मई ग़लत हू तो मेरी कसम खाओ.

मई चुप रही..

ये बात करते हुए रात हो गयी थी और सब थकान के कारण सो रहे थे. तब मैने फोन निकाला और हज़्बेंड को कॉल किया की मुझे आते हुए लाते हो जाएगा आप सो जाओ. मई अपनी फ्रेंड्स के साथ ही रुक जवँगी. ये सुनकर संजीव खुश हुआ.

मैने संजीव का हाथ हाथ मई लेकर बोली संजीव सच मे मुझे खुश कर दोगे… और उसको लीप किस किया. उसने आपने हाथ मेरी चुचियो पर रख दिए .मेरी बॉडी मई सनसनाहट डॉड गयी.

मैने संजीव के लंड को पेंट के उपेर से सहलाना शुरू किया. उसका लंड काफ़ी बड़ा लग रहा था. थोड़ी देर ऐसे करने के बाद मे रुक गयी.

संजीव बोला क्या हुआ?

मैने कहा मई अपने आप को रोक नही पवँगी, हम बाद मे करते है ये सब. संजीव बोला मीरूत आने वाला है आज रात मेरे पास रुक जाऊ. मैने बोला नही. तो संजीव रिक्वेस्ट करने लगा तो मई माना नही क्र पाई.

मीरूत आया मई और संजीव दोनो बस से उतार कर उसके रूम पर चले गये रात के करीब 12 बाज गये थे.

रूम पर पहुचने के बाद हुँने कपड़े चेंज किया. मैने एक सेक्सी निघट्य पहें ली और संजीव सिर्फ़ अंडर वेर मई आकर मुझे किस करने लगा.

थोड़ी देर किस करने के बाद उसने मुझे अपने बेड पे लिटा दिया और मेरी निघट्य उठा कर मेरे निपल चूसने लगा. मई कसमसा उठी ह्म्‍म्म्मम ऊवजजज्ज्ज्ज हह संजीव चूसो इन्हे…… ओमम्म्मम आअहह आआहह संजीव ह्म्‍म्म्म ऐसे ही चूसो ज़ोर सीईई आअहमम्म्ममम ऊऊहह…

निपल चूस्ते हुए संजीव ने अपना हाथ मेरी छूट पर रख दिए और 2 उंगली मेरी रसीली छूट मई डाल दी. छूट गीली होने के कारण उंगली सीधी अंडर चली गयी. किसी पराए मर्द का हाथ पाकर मेरी छूट फूल सी गयी थी.

मई पूछो मत कोन्से आसमान मई थी और सिसकारिया ले रही त्ीईीउउुुुुउउम्म्म्मम आआअहह हमम्म्म ओूवहजज्ज्ज सनजीईईईई आआअहह…

थोड़ी देर बाद संजीव मेरे उपर आ गया और अपना लंड मेरी चुचियो के उपर रख दिया/ हाययययी कितना बड़ा और मोटा लंड था उसका. तभी उसने लंड मेरे होतो पर रख दिया और मई उसे चूसने लगी.

पहली बार किसी का लंड चूसा वो भी 10 मिंट अब उसका लंड बिल्कुल लोहे की तेरहा टाइट हो गया था.

अब वो मेरे उपर से हाथ कर मेरे पैरो के बीच मई आ जाता है और अपना लंड मेरी छूट के छेड़ पर सेट करके हल्का सा धक्का मरता है. उसका लंड छूट की दीवारो को खोलता हुआ अंदर जाता है और मेरे हॉस उड़ जाते है..

उूउउइई माआ मार गैइइ और मई छटपटाने लगती हू. तभी संजीव मुझे कासके दबोच लेता है और एक जोरदार धक्का और मारता है. इस बार पूरा लंड अंदर सीधे बच्चे दानी से टकराता है. मई पागल सी हो जाती हुई दर्द हो रहा है.. संजीव छोड़ो…

नही मेरी जान थोड़ी देर और फिर मज़ा आएगा. तेरी मोटी गंद फाड़ने का मज़ा ही अलग है. बहुत मूठ मारी है तेरे नाम की..

ऐसी बाते करता हुआ वो मुझे छोड़ता है. करीब 5 मिंट बाद मेरा दर्द मज़ा मई बदल जाता है और मई आहे भरने लगती हू आअहह ऊओह हमम्म्म आअहह आआहह आआहह… छोड़ो मुझे ज़ोर से छोड़ो संजीव…

ये सुनकर संजीव की स्पीड बढ़ जाती है और कमरे मई छाप छाप छाप की आवाज़े गूंजने लगती है. संजीव का हर धक्का मेरी बच्चेड़नी के छेड़ को छूटा तो मुझे बड़ा मज़ा आता.

आअहह संजीव तुम बहुत अच्छी चुदाई करते हो… आअहह ऊहजाआअहह छोड़ो आअहह ओह आआहह हमम्म्मममम ऐसे ही…..हमम्म्ममो आहह…

साली मुझे पता था तू बड़ी चुड़ाकड़ निकलेगी तेरी गांद देखकर ही साँझ गया था मई. चल साली घोड़ी बन और, मई घोड़ी बन जाती हू.

संजीव मेरे पीछे आकर लंड डालके छोड़ना शुरू करता है. तो मई भी अपनी गंद तो उँचा कर देती हू. ये देख कर संजीव और ज़ोर से छोड़ता है..

साली रंडी आज तेरी छूट अपने माल से भर दूँगा.. और फिर ज़ूर्से धक्के मरने लगता है.

मई भी अपनी गांद उठाकर उसका साथ देती हू. जैसे ही वो झड़ने वाला होता है तो वो बड़ी ज़ोर से धक्का मरता है जिससे उसका लंड बच्चेड़नी के छेड़ के अंदर उसके लंड का आयेज का टोपा घुसके पोरा माल छोड़ देता है. उसका जो आनंद मुझे ज़िंदग़िमे पहली बार मिला और मेरा सरीर कपने लगा, मई झाड़ गयी 2.

घंटे के इस चुदाई मई मे 5 बार झड़ी संजीव सच मई मेरी उम्मेड से भी ज़्यादा उतरा. उस पूरी रात उसने मुझे सोने नही दिया पोरी रात छोड़ा. मेरी छूट भी सूजा दी, तबसे मई उसस्से चुड रही हू.

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