निखिल की मा नीलम की चुदाई

हेलो एवेरिवन इस कहानी में अब तक आपने पढ़ा की मैने और मेरे दोस्त निखिल ने मा को लॉक्कडोवन् में छोड़ा. अब अनलॉक स्टार्ट हो गया था और हुमारे प्लान के अनुसार अब हूमें निखिल की मा नीलम को छोड़ना था. तब एक दिन-

मे – निखिल तुम्हे अपना वादा याद है?

निखिल – हा बिल्कुल.

मा – कों सा वादा?

निखिल – ऋतिक बता दे आंटी को.

मे – तुम बताओ.

मा – अरे बताओ भी कोई मुझे भी तो पता चले आख़िर क्या प्लान चल रहा तुम लोगो का.

निखिल – आंटी वो हुँने प्रॉमिस किया था की हम अपनी अपनी मा पर ट्राइ करेंगे.

मा – मतलब अब तुम्हारी मा का टाइम है?

निखिल – हा ऐसा ही कुछ.

मा – कितने कामीने हो तुम लोग!

मई उठा और मा को किस किया और बोला अभी तुमने हुमारी कमीनपंति देखी कहा है.

मा – और जो पिछले 3 महीने से देख रही हू वो क्या है. .

मे – वो तो बस ट्रेलर है आयेज देखो क्या क्या होता है.

निखिल – तो क्ब निकलना है मा भी पूछ रही क्ब आ रहे?

मे – क्यू उन्हे भी चूड़ने की जल्दी है क्या…

निखिल – पता नही पर बुला रही…

मे – तब बोल दो आज शाम को आ रहे दोनो लोग.

निखिल ने कॉल किया और अपनी मा को बता दिया. मा ये सुन कर निराश हुई की हम जेया रहे पर मैने उन्हे समझाया.

मा – ठीक है अब जेया ही रहे हो तो एक बार और हो जाए?

उस दोपहेर हुँने मा को फिर मिल कर छोड़ा और शाम को निखिल के घर के लिए निकल गये. हम उसके घर रात में पहुचे, हूमें पहुचने में लाते हो गया था. क्यूंकी निखिल ने अपनी मा को बता दिया था तो उन्होने गाते खुला चोर दिया था और खुद सो चुकी थी. इसलिए उस रात हम गये और डाइरेक्ट निखिल के रूम में सो गये.

अगली सुबह मुझे निखिल ने उठाया-

मे – तेरी मा नही आती क्या उठाने?

निखिल – नही यहा खुद उठना पड़ता है.

मे – चलो तब चल कर तुम्हारी मा का दर्शन किया जाए.

निखिल – एक मिनिट, पहले बता टाइम क्या हो रहा है?

मैने मोबाइल देखा तो टाइम सुबह के 9 बाज रहे थे, मैने उसको टाइम बताया.

निखिल – चलो तब पापा ऑफीस निकल गये होंगे.

हम रूम से निकल कर किचन में गये जहा निखिल की मा यानी नीलम आंटी खाना बना रही थी. उन्होने लग्गीएस और कुरती पहन रखा था और उनके खंधे पर उनकी ब्रा की स्ट्रीप दिख रही थी. जिसका मतलब था की उन्होने ब्रा पहना हुआ था.

उनका दुपट्टा उनके सरीर पर नही था और उनके 38 के बूब्स बिल्कुल किसी फुटबॉल की तरह मेरे सामने थे. निखिल ने मुझे देखा और मुझे पिंच किया और खुद जेया कर मा के पैरों को छुआ और आशीर्वाद लिया और फिर मैने भी ऐसा किया.

निखिल – मा तुम खाना बना कर फ्री हो जाओ तब हम बात करते है.

नीलम – हा ये ठीक रहेगा और तब तक तुम ऋतिक को घर घुमा दो.

निखिल – हा ये ठीक रहेगा क्यूँ निखिल?

मई तो जैसे किसी सपने से बाहर आया क्यूंकी मई बस नीलम के बूब्स देखे जेया रहा था.

मे – हा चलो कर के आते है.

नीलम – क्या कर के आते है घर देखने को बोला है बाहर मत निकलना पोलीस अब भी यहा घूम रही है.

मे – हा ठीक है आंटी.

निखिल मुझे ले कर टेरेस पर गया तो मैने नोटीस किया की उसका 2 फ्लोर का बिल्डिंग था. नीचे उसका रूम, किचन और पूजा रूम था और उपर उसके मा-पापा का कमरा, गेस्ट रूम और एक कमरा ऐसे ही खाली था. हम सीधी के पास बैठ गये.

निखिल – भाई कोई प्राब्लम ना हो जाए.

मे – सेयेल मेरी मा के टाइम में तो तू तुरंत मान गया था अपनी के टाइम में भागने लगा.

निखिल – मई भाग नही रहा पर देख तेरा बाप घर कम रहता है तो तेरी मा तोड़ा आसान शिकार हुई. पर मेरा बाप तो घर पर ही रहता है.

मे – हा ये बात तो सही है पर उसका चिंता मत कर हम कुछ ना कुछ जुगाड़ कर ही लेंगे.

निखिल – पक्का ना पर अगर कही गड़बड़ हुआ तो फिर लॉड लग जाएँगे.

मे – तू डरता बहुत है रुक अभी तेरा मूड सही करता हू.

इतना बोल कर मैने मा को वीडियो कॉल किया. मा ने सारी पहना हुआ था.

मा – क्या हुआ बेटा इतनी जल्दी याद आ गयी मेरी?

मे – अब क्या करू मा तुम हो ही ऐसी की तुमसे डोर रह ही नही पता हू.

मा – तो आ जाओ वापस किसने रोका है.

मे – सोच तो मई भी रहा मा की निखिल को ही भेज डू वो वैसे भी अपनी मा के टाइम में दर रहा है.

मा – हा तो निखिल को भेज दे तू वही रह जेया जब तू काम ख़तम करना तो निखिल चला जाएगा.

मे – बोल निखिल ये सही रहेगा?

निखिल – नही, जब स्टार्ट साथ में किया ह तो एंड भी साथ ही करेंगे.

मे – ये हुई ना बात.

मे – मा कुछ दर्शन करा दो यहा बस उपर उपर से देखने को मिल रहा.

मा – क्या देखना है सब दिख तो रहा.

मे – कहा दिख रहा मा.

मा – ये देख.

इतना बोल कर मा ने अपना पल्लू गिरा दिया और उनके बूब्स ब्लाउस में से हल्के हल्के दिखने लगे.

मे – मा खोल कर दिखाओ ना उनको.

मा – इससे ज्यदा नही मिलेगा देखने को.

मे – वो क्यूँ भला?

मा – ताकि तुम लोग डिसट्रॅक्ट ना हो और काम पर फोकस करो.

निखिल – आंटी आप बहुत इंटेरेस्ट ले रही इसमें.

मा – हा मई तो लूँगी ही, ज़रा मई भी तो देखु किसकी मा में ज़्यादा दम है.

मे – अक्चा मा जब कुछ दिखा नही रही तो एक किस ही दे दो.

मा ने हूमें किस किया और फिर फोन कट कर दिया. निखिल अब जोश में आ चुका था और एक बार फिर हम अपना पुराना खेल खेलने के लिए तैयार थे. पर इस बार डिफिकल्टी तोड़ा ज़्यादा थी मगर हम तैयार थे.

करीब 1 घंटे बाद हम फिर से निखिल के रूम में थे. इस बार मई, निखिल और नीलम 3 लोग थे. उन्होने वही कुरती और लग्गीएस पहन रखा था और दुपट्टा इस बार भी नही था.

हम तीनो आपस में बातें कर रहे थे. नीलम के क्लीवगे दिख रहे थे और जब वो हस्ती या हल्का झुकती तो तोड़ा और दर्शन होते हूमें उसके बूब्स के. मैने प्लान निखिल को मेसेज किया और उसने मेसेज रेड किया और फिर बोला-

निखिल – ऋतिक तू कल सो गया था ना रात में?

मे – हा सो ही गया था.

निखिल – पक्का ना या कही ऐसा तो नही की जगा रहा हो और मा से शर्मा कर झुत बोल रहा?

मे – अरे भाई बोला ना सो गया था.

नीलम – क्यूँ ऐसा क्या ह की वो नही सोएगा क्यूँ ऋतिक>

निखिल – वो क्या है ना मा (मेरी तरफ देखते हुए) बता डू ना ऋतिक?

नीलम – ऐसा क्या है बता ज़रा मई भी तो जानू?

निखिल – वो क्या है ना मा इसको अपने मा के बिना सोने की आदत नही ह और इसीलिए तो इसने हॉस्टिल चोर दिया फिर जब इसकी मा आई तो दोनो लोग रूम लेकर वही रहते थे.

नीलम – क्यू बेटा ये बात सच ह क्या?

मे – वो क्या है आंटी की मई हुमेशा मा के साथ रहा हू इसीलिए तोड़ा अटॅचमेंट ज़्यादा ह उनसे.

नीलम – तब सो पाओगे ना अकचे से यहा. .

मे – हा आंटी सो जौंगा और वैसे भी क्ब ट्के मा के साथ सौंगा.

नीलम – हा ये बात भी सही है एक ना एक दिन तो बीवी के साथ ही सोना पड़ेगा.

निखिल कुछ बोलना चाहता था पर मैने उसे रोक दिया. फिर नीलम वाहा कुछ देर और रही और फिर अपने कमरे में चली गयी. हूमें कुछ समझ ही नही आ रहा था की हम क्या करे तो हुँने फिर कुछ किया भी नही.

शाम को निखिल के पापा आए तो घर का माहूल ही चेंज हो गया था और निखिल भी बिल्कुल सीरीयस हो गया था. मैने ज़्यादा कुछ किया भी नही और खाने खाने के बाद हम सो गये,हुमारा प्लान कल से शुरू होने वाला था.

अगली सुबह भी हम लाते ही उठे और तब ट्के अंकल जेया चुके थे. हम डाइरेक्ट किचन में गये जहा नीलम थी. उसने आज भी सलवार सूट पहन रखा था और क्ल की तरह आज भी उसने दुपट्टा नही लिया था.

निखिल – मा ऋतिक आज वापस जाना चाहता है.

नीलम – वो क्यूँ क्या घर उसे पसंद नही आया क्या?

निखिल – नही मा वो बात नही ह.

नीलम – तो क्या पूरी रात जगा था क्या ये?

निखिल – हा.

नीलम – क्यूँ बेटा ऋतिक मा की इतनी याद आ रही थी क्या?

मे – नही आंटी बात ये है की मई सो नही पता हू ऐसे.

नीलम – और घर जाओगे तो तुम्हारी मा कहेंगी की हुँने निखिल को 3 महीने रखा और उन्होने तुम्हे 3 दिन में भगा दिया.

मे – नही आंटी ऐसी कोई बात नही है मई समझा लूँगा उनको.

नीलम – नही यही बात है चलो तुम्हारी प्राब्लम का कोई सल्यूशन निकलते है.

निखिल – वो कैसे मा?

नीलम (कुछ सोचने के बाद) – मई आ जौंगी रात को, फिर जब ये सो जाएगा तो मई वापस अपने रूम में चली जौंगी.

निखिल – पर आप कहा सोअवगी मा?

नीलम – तू एक साइड रहना बीच में ऋतिक फिर मई.

निखिल – ये ठीक रहेगा.

नीलम – क्यू बेटा ऋतिक ये सही रहेगा ना?

मे – हा ठीक ही रहेगा आंटी.

अब हूमें रात का इंतेज़ार था और फिर आख़िरकार रात हो गयी. मैने एक बात नोटीस किया इन 2 दीनो में की जब अंकल घर आते तब नीलम अपना दुपट्टा ले लेती थी. खैर मैने इस बात पर ज़्यादा ध्यान नही दिया और हम खाना खा कर सोने चले गये.

निखिल – क्या लगता है यार मा आएगी?

मे – आ भी सकती है नही भी.

मे – अक्चा नीलम रात को पहनती क्या है?

निखिल – मैने जब लास्ट बार देखा था तब निघट्य पहनी थी फुल बॉडी का वन पीस वाला, हो सकता है अब भी वही पहनती हो.

मे – निघट्य में आएगी तब तो मज़ा ही आ जाएगा उसके बड़े बूब्स क्या जबरदस्त लगेंगे निघट्य में.

निखिल – अक्चा तुझे क्या लगता है नीलम के बूब्स बड़े है या वंदना के?

मे – ये भी कोई पूछने की बात है, नीलम के ही बड़े ह, हुमेशा डाबते जो रहते है.

निखिल – नही भाई अब वो ज़्यादा नही चुड्ती.

मे – तुझे कैसे पता?

निखिल – मैने बहुत बार देखा है पापा छोड़ नही पाते मा को अकचे से.

मे – तब तो ये हुमारे लिए और भी अक्चा है.

मे – कोई जगह है क्या रूम में देखने का?

निखिल – हा है पर आज नही कभी और देखने चलेंगे.

मे – ओक.

हम ऐसे ही तोड़ा देर बात करते रहे और फिर सो गये. मेरी नींद कुछ घंटे बाद खुली तो देखा की नीलम मेरे बगल में लेती थी पर लाइट ओं ना होने के वजह से कुछ समझ नही आ रहा था और फिर नींद भी लग रही थी तो मई सो गया.

अगली सुबह जब मई उठा तब ट्के नीलम जेया चुकी थी. मैने निखिल को उठाया और हम नीचे गये तो आज अंकल घर पर थे क्यूंकी आज सनडे था और आज आंटी ने भी सलवार समीज़ पहन रखा था वित दुपट्टा. हुमारी कुछ ख़ास बातचीत नही हुई और हम फिर एक बार टेरेस पर आ गये.

मे – भाई एक बात बता, तेरी मा जब तेरा बाप घर होता है तब दुपट्टा क्यू ले लेती है?

निखिल – भाई मेरे पापा थोड़े ओल्ड जमाने के ह इसीलिए उन्हे पसंद नही की जब मई या कोई और रहे तो वो बिना दुपट्टे के रहे.

ये पार्ट यही रोकते है, मिलते है नेक्स्ट पार्ट में जहा इससे भी ज़्यादा रोमांच होगा. तब ट्के के लिए लेते ह विदा और अपने सजेशन्स आंड रेटिंग्स और अपने कोई अनुभव मेरे साथ शेर करिए.

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