नाइटी पहना कर बेटे ने की मा की चुदाई

मा-बेटा सेक्स स्टोरी अब आयेज-

रात की मस्ती भारी मुलाक़ातों के बाद, अगले कुछ दिन एक अलग ही वाइब में बीते. पापा ऑफीस के काम से बाहर थे, तो घर में हूमें थोड़ी और आज़ादी मिल गयी थी.

मम्मी और मैं, दोनो ही बाहर से नॉर्मल दिखाते, पर अंदर ही अंदर हमारे बीच एक खामोश अग्रीमेंट और आँखों में शरारत रहती, जो सिर्फ़ हम दोनो ही समझ सकते थे. जॉइंट फॅमिली में केर्फुल रहना पड़ता. पर यही चुप्पी और नज़रों का खेल हमारे लस्टी मोमेंट्स को एग्ज़ाइटिंग बनता. घर के सब अपनी रुटीन में बिज़ी रहते और उन्हें हम पर कोई ख़ास शक नही होता.

एक सुबह, ब्रेकफास्ट करते हुए, मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया, मम्मी को सर्प्राइज़ करने का. मुझे लगा, क्यूँ ना मम्मी के लिए कुछ ऐसा लू जो उन्हें अंदर से खुश कर दे और हमारी रातों को और भी गरम बना दे.

ऑफीस में हाफ-दे की च्छुतटी लेकर मैं सीधा माल के लाइनाये सेक्षन में गया. वहाँ इतनी सारी नाइटीस थी की समझ नही आ रहा था कौन सी लू. मेरी नज़र एक डीप पर्पल शियर निघट्य पर गयी. उसे देखते ही मेरे दिमाग़ में मम्मी की नंगी तस्वीर घूम गयी और मेरा लंड तंन गया. मैने तुरंत उसे खरीद लिया. शॉपकीपर ने उसे एक एलिगेंट गिफ्ट बॉक्स में पॅक किया, जिस पर ब्लॅक सॅटिन रिब्बन लगा था. मैने उसे डिसक्रीट्ली ऑफीस के बाग में डाल लिया.

शाम को मैं घर पहुँचा, दिल में एग्ज़ाइट्मेंट और चेहरे पर कॅषुयल एक्सप्रेशन थे. वो गिफ्ट बॉक्स मैने अपने रूम में च्छूपा दिया.

रात को डिन्नर के बाद, जब सब अपने कमरो में चले गये, मैं अपने रूम में मम्मी का वेट कर रहा था. कुछ देर बाद, दरवाज़ा खुला और मम्मी अंदर आई. मैने उनके हाथ में गिफ्ट बॉक्स दिया. उनके चेहरे पर अब खुली मुस्कान और उत्सुकता थी.

मम्मी (धीमी, उत्तेजित आवाज़ में): क्या ले आए हो, आराव? और इतना चुपके से क्यूँ?

मैं (कान में फुसफुसते हुए): आपको पसंद आएगा, मम्मी. ये सिर्फ़ हमारी रातों के लिए है.

मम्मी ने गिफ्ट बॉक्स को हाथ में लिया और रिब्बन खोला. नज़रें बॉक्स पर थी, पर चेहरे पर नॉटी मुस्कान, जैसे वो जान-बूझ कर मुझे और टीज़ कर रही हो. ढक्कन उठाते ही, उनकी नज़र निघट्य पर पड़ी और आँखें चौड़ी हो गयी.

उन्होने निघट्य को बाहर निकाला और उसके सॉफ्ट नेट फॅब्रिक को महसूस किया. शॉर्ट लेंग्थ और बोल्ड डिज़ाइन देख कर उनके चेहरे पर एक अजीब सा नशा च्छा गया.

मम्मी (धीमी, कामुक आवाज़ में): आराव… ये तो… बहुत ही… (वो शब्दों के लिए झाड़ रही थी, चेहरा लाल हो गया था).

मैं (उन्हें करीब खींच कर): कैसी लगी, मम्मी? पसंद आई?

मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए, अब शरम नही, सिर्फ़ हवस थी): पसंद? आराव, ये तो कमाल है. तुम ना बहुत नॉटी हो गये हो.

उन्होने निघट्य एक तरफ रखी और मेरे गालों पर हाथ रखा. उंगलियाँ मेरे चेहरे पर फेरी, और होंठो पर मदहोश मुस्कान थी.

मम्मी (मदहोश आवाज़ में): इस निघट्य में तो मैं… और भी ज़्यादा… सेक्सी हो जौंगी.

मैं (उनके कान में फुसफुसते हुए): तो फिर पहन कर दिखाए ना, मम्मी. मुझे देखना है आप इसमें कितनी सेक्सी लगती है.

मम्मी ने एक नॉटी स्माइल दी और सिर हिलाया. उन्होने निघट्य उठाई और फिर मेरी तरफ देखा.

मम्मी (मुस्कुराते हुए): ठीक है, मेरे बेटे. पर पहले तुम अपनी आँखें बंद करो. मैं चाहती हू की जब तुम मुझे इस निघट्य में देखो, तो वो एक सर्प्राइज़ हो.

मैने मुस्कुराया और आँखें बंद कर ली. मेरी धड़कन तेज़ हो चुकी थी. मम्मी की शरारत और इस सस्पेनस ने मेरे जुनून को और बढ़ा दिया था. कुछ देर तक कमरा खामोश रहा, बस हल्की सी सरसराहट की आवाज़ आई. मैं कल्पना कर रहा था की .उम्मी अब कैसी दिख रही होंगी. हर गुज़रते पल के साथ मेरी बेचैनी बढ़ती जेया रही थी.

मम्मी (धीमी, नशीली आवाज़ में): अब… खोलो अपनी आँखें, मेरे आराव.

मैने धीरे से आँखें खोली. मेरी साँसें एक पल के लिए थम गयी. मम्मी मेरे सामने खड़ी थी. निघट्य उनके हर कर्व पर ऐसे लिपटी थी जैसे उसके लिए ही बनी हो. उसके नेट फॅब्रिक से उनका भरा हुआ जिस्म सॉफ्ट्ली उभर कर सामने आ रहा था. बस्ट एरिया पर लगी डेलिकेट लेस डीटेलिंग उनके बूब्स को टेंप्टिंग बना रही थी, और डीप व-नेकलिन से उनकी क्लीवेज सॉफ दिख रही थी.

निघट्य की शॉर्ट लेंग्थ उनकी गोरी, सुडौल जांघों को पूरी तरह एक्सपोज़ कर रही थी. जब वो तोड़ा सा हिलती, तो साइड स्लिट्स से उनकी जांघें और भी सेन्ल्युयस्ली दिखती. उनकी आँखों में अब गहरा नशा था, और होंठो पर कामुक मुस्कान थी. उनका हर अंदाज़ मुझे इन्वाइट कर रहा था. मेरा लंड बॉक्सर में पूरी तरह तंन चुका था.

मम्मी (अपने बदन को हल्का सा घूमते हुए): कैसी लग रही हू, आराव?

मैं (मेरा लंड बॉक्सर में पूरी तरह तंन चुका था): मम्मी… आप… ला-जवाब लग रही है. आपको इस निघट्य में देख कर तो मेरा कंट्रोल और भी मुश्किल हो गया है.

मम्मी ने एक नॉटी स्माइल दी और धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ी. हर कदम के साथ शियर फॅब्रिक उनके बदन पर रग़ाद खा रहा था, और उनकी मादक खुश्बू पुर कमरे में फैल रही थी. वो मेरे सामने आ कर खड़ी हो गयी, आँखों में जुनून सॉफ दिख रहा था.

मम्मी (मेरे करीब आ कर, चेहरे पर हाथ रखते हुए): तो क्या इरादा है, मेरे बेटे? आज मम्मी को ये निघट्य उतार कर दोगे, या इसी में ही अपना प्यार दिखाओगे?

मैं (उनकी आँखों में देखते हुए): मम्मी, आपकी ये निघट्य तो इतनी सेक्सी है की इसे उतारने का दिल ही नही कर रहा. इसी में प्यार करू, तो मज़ा और बढ़ जाएगा. अनिरुढ़ भाई ने तो आपको ऐसे सेक्सी निघट्य में बहुत बार छोड़ा है. आज मुझे आपका ये रूप देखने का मौका मिला है.

मम्मी: अछा तो तुझे अनिरुढ़ जी से जलन हो रही थी?

मैं: नही मम्मी, उनकी वजह से तो आप मुझे मिले हो. उन्होने तो आपको बिगड़ दिया है (मैं हासणे लगा).

मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए): सच कहा बेटा, अनिरुढ़ जी ने तो मुझे वापस चुड़क्कड़ बना दिया. उन्होने मुझे ऐसे ही सेक्सी निघट्य में बहुत छोड़ा है. तुमने तो वो पल याद दिला दिए.

मैने मम्मी को अपनी तरफ खींच लिया, उनकी बॉडी-हगिंग निघट्य मेरे बदन से चिपक गयी. शियर फॅब्रिक के बावजूद, उनके हर कर्व का एहसास मुझे अंदर तक उत्तेजित कर रहा था. मैने अपने होंठो को उनके होंठो पर रख दिया और एक पॅशनेट किस शुरू कर दी. मम्मी ने भी उतनी ही शिद्दत से मेरा साथ दिया, उनकी ज़ुबान मेरे मूह में घुस गयी.

किस करते-करते मेरे हाथ मम्मी की कमर पर फिरे, और फिर धीरे से उनके कुल्हों पर चले गये. मैने उन्हें और कस्स के अपनी तरफ खींच लिया. उनकी साँसें तेज़ हो चुकी थी, और उनकी सिसकारियाँ किस के बीच में सुनाई दे रही थी. मम्मी ने किस तोड़ी, होंठ चमक रहे थे.

मम्मी (हानफते हुए): अया… आराव… तुम तो… पागल कर दोगे मुझे. ऐसी निघट्य… ये तो हर बार नशा चढ़ा देती है.

मैने एक हाथ से उनकी कमर को पकड़ा और दूसरा हाथ धीरे से निघट्य के अंदर सरका दिया. मेरा हाथ उनके नरम कुल्हों पर था, और मैं उन्हें धीरे-धीरे मसल रहा था. मम्मी ने एक गहरी आ भारी.

मैं (धीमी, नशीली आवाज़ में): अभी तो बस शुरुआत है, मम्मी. आज रात आपको ऐसे प्यार करूँगा की आप कभी भूल नही पाएँगी.

मम्मी ने अपना हाथ मेरे बॉक्सर पर रखा, और मेरे खड़े लंड को महसूस किया. उनके होंठो पर एक नॉटी स्माइल थी.

मम्मी (मदहोश आवाज़ में): मेरा शेरनी का बच्चा तो पहले से ही तैयार बैठा है. चलो फिर शुरू करते है.

उन्होने धीरे से मेरा बॉक्सर नीचे सरका दिया. मेरा लंड आज़ाद हो कर उनकी शियर निघट्य के फॅब्रिक से टकराया. निघट्य का सॉफ्ट टेक्सचर मेरे लंड पर एक अजीब सा एहसास दे रहा था. उन्होने मेरा लंड अपने हाथ में लिया, और उस पर हल्का सा दबाव डाला.

मम्मी (आँखें मेरी आँखों में गद्दाए हुए): तेरी मम्मी ने अनिरुढ़ जी को ऐसा मज़ा दिया है की आज तक तेरे पापा को भी नसीब नही हुआ.

मम्मी ने एक कामुक हँसी दी और मुझे अपनी तरफ खींच लिया. उन्होने अपने हाथो से मेरी त-शर्ट को उतार दिया, और मेरे नंगे सीने पर अपने हाथ फेरे. फिर मम्मी ने बिस्तर पर तोड़ा नीचे सरक कर अपनी पनटी को पकड़ा. निघट्य के अंदर से ही उन्होने अपनी पनटी को एक झटके में नीचे खिसका दिया, और वो उनकी जांघों के बीच तक आ गयी. अब उनकी गुलाबी छूट निघट्य के शियर फॅब्रिक के नीचे से सॉफ चमक रही थी, रस्स से भीगी हुई.

मैं (धीमी, उत्तेजित आवाज़ में): आपकी छूट तो पहले से ही प्यासी लग रही है, मम्मी.

मम्मी (साँस लेते हुए): हा, आराव. और तेरे लंड के लिए तड़प रही है. आ ना, अब और इंतेज़ार मत करवा.

मैने मम्मी के चेहरे पर एक गरम किस किया और उनकी टाँगों के बीच आ गया. फिर मैने बिना किसी देर के मम्मी की छूट को चाटना शुरू किया. मेरी जीभ उनकी गीली, गरम छूट पर ऐसे चल रही थी जैसे प्यासा पत्थर पर. मम्मी ने एक तेज़ आ भारी और उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में फँस गयी.

मैने उनकी छूट के हर हिस्से को छाता, दाने को चूस्टा रहा, और उनकी रस्स भारी गुफा में अपनी जीभ को गहराई तक ले गया. निघट्य का फॅब्रिक उनके कुल्हों पर तोड़ा उपर उठा हुआ था, जिससे मेरी पहुँच और आसान हो गयी थी.

मम्मी (मदहोशी में चिल्लाते हुए): अया… आराव… और तेज़… मेरी जान… मेरी छूट को खा जा.. हा… ऐसे ही… उम्म्म…

उन्होने मेरे सर को और कस्स के अपनी छूट पर दबाया. मैं उनकी छूट का हर बूँद रस्स पी रहा था, और उनकी मदहोश आहें मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी. कुछ देर में मम्मी का बदन झटके खाने लगा, और उनकी छूट ने गरम रस्स की बौछार कर दी. उन्होने झाड़ते हुए मुझे कस्स कर पकड़ लिया.

मम्मी के झड़ने के बाद भी, उनकी हवस शांत नही हुई थी. उन्होने मेरे सर को अपनी छूट से हटाया, उनका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था, पर उनकी आँखों में एक नया जुनून था.

मम्मी (साँस लेते हुए): अब मेरी बारी है, आराव. आज तुझे ऐसा मज़ा दूँगी की आज तक किसी ने नही लिया.

उन्होने धीरे से मेरा लंड छूट से बाहर निकाला और करवट लेकर डॉगी स्टाइल में हो गयी. उन्होने अपने कुल्हों को उपर उठाया और मेरी तरफ देखा. उनकी छूट पीछे से सॉफ दिख रही थी, गुलाबी और भीगी हुई, मुझे अंदर आने का इशारा कर रही थी.

मैं (खुश होते हुए): जी मम्मी! जो आप बोले.

मैं उनके पीछे आया और अपना लंड उनकी छूट के मुहाने पर रखा. एक बार फिर, बिना किसी देर के, मैने अपना पूरा लंड मम्मी की छूट में डाल दिया.

मम्मी (ज़ोर से सिसकते हुए): अया… आराव… ज़ोर से… और अंदर तक…

मैने उनकी कमर को पकड़ा और उन्हें ज़ोर-ज़ोर से छोड़ना शुरू किया. हर धक्के के साथ, मेरा लंड उनकी छूट की गहराइयों तक जा रहा था. मम्मी अपने हाथों से बिस्तर को पकड़े हुए थी, और उनका बदन हर धक्के के साथ आयेज-पीछे हो रहा था. उनकी साँसें और सिसकारियाँ पुर कमरे में भर गयी थी.

मैं (ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारते हुए): अया… मम्मी… कैसा लग रहा है…

मम्मी (हानफते हुए, अपनी कमर हिलाते हुए): अया… बहुत अछा… आराव… मत रुकना… मेरी छूट को फाड़ दे… और तेज़…

हम दोनो ही परमानंद में डूबे हुए थे. रात गहरी हो चुकी थी, और कमरे में सिर्फ़ हमारी चुदाई की आवाज़े थी. हम दोनो ने काई और पोज़िशन्स में सेक्स किया, कभी मैं उनके उपर, कभी वो मेरे उपर, कभी डॉगी स्टाइल, कभी साइड से. हर पोज़िशन में, उनकी हवस और मेरा जुनून बढ़ता ही जेया रहा था. उनकी छूट अब पूरी तरह से लाल हो चुकी थी, और मेरा लंड भी थकने लगा था, पर हम दोनो ही रुकने का नाम नही ले रहे थे.

अंत में, जब हम दोनो बिल्कुल तक चुके थे, और हमारा जिस्म पसीने से लत-पाठ था, मैने आखरी धक्का मारा और अपना सारा वीरया मम्मी की छूट में उधेल दिया. मम्मी भी मेरे साथ ही झाड़ गयी, उनकी आँखें बंद थी और उनके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि थी.

मैं मम्मी के उपर ही तोड़ा देर लेता रहा, हमारी साँसें तेज़ी से चल रही थी. कुछ देर बाद मैं मम्मी से अलग हुआ और वो भी मेरे बगल में लेट गयी. उनका बदन अभी भी गरम था और उनकी छूट से मेरा वीरया बाहर निकल रहा था.

मम्मी ने धीरे से मेरा लंड पकड़ा, जो अब तोड़ा ढीला पद चुका था, और उसे अपने होंठो तक ले गयी. उन्होने मेरे लंड के सुपारे को चाटना शुरू किया, और फिर धीरे-धीरे उसे पूरा अपने मूह में भर लिया और सॉफ करने लगी. उनकी जीभ मेरे लंड पर ऐसे चल रही थी, जैसे वो उसे पूरी तरह से सॉफ करना चाहती हो. उन्होने मेरे वीरया के हर कतरे को चाट लिया.

मम्मी (मेरा लंड छ्चोड़ते हुए, साँस लेते हुए): अया… कितना मज़ा आया, आराव. तूने मेरी छूट को बिल्कुल ठंडा कर दिया. अब मैं पूरी तरह से संतुष्ट हू.

मैने मम्मी के माथे पर किस किया. वो मेरी तरफ मूडी, और अपने हाथो से मेरे चेहरे को सहलाया.

मैं: आपको सुकून मिल गया ना मम्मी?

मम्मी (मुस्कुराते हुए, उनकी आँखों में प्यार था): हा, आराव. पूरा सुकून मिल गया. अनिरुढ़ जी तो बस एक बहाना थे, असली सुख तो तू ही देता है. तू ही मेरा सब कुछ है, मेरा प्यार, मेरी हवस, मेरा सुकून.

उन्होने मुझे कस कर गले लगा लिया. हम दोनो ऐसे ही थोड़ी देर तक एक-दूसरे के बाहों में लेते रहे, थके हुए पर पूरी तरह से संतुष्ट. बाहर चाँद की रोशनी मेरे कमरे में आ रही थी, और रात अब गहरी हो चुकी थी.

मम्मी (धीरे से, आँखें बंद किए हुए): अब सो जाते है, आराव. आज की रात बहुत लंबी थी.

मैने सर हिलाया. हम दोनो ने एक-दूसरे को और कस्स कर पकड़ा और नींद की आघोष में समा गये. आज की रात हमारे रिश्ते को और भी गहरा कर गयी थी.

जब तक पापा घर पर नही थे, मम्मी और मैं रात-रात भर उस जुनून में डूबे रहे. हर रात हमारे लिए एक नया संसार थी, जहाँ हम अपनी हर हड्द पार कर रहे थे. पर जैसे ही पापा वापस आए, वो प्यारा सिलसिला, वो आज़ादी, एक पल में ही ख़तम हो गयी. अब दिन और रातें काटना मुश्किल हो गया था, क्यूंकी हम दोनो का जिस्म और रूह उस बीते हुए सुख के लिए, उस चुदाई के लिए, बेपनाह तड़पने लगे थे.

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