नवी ऑफीसर को रंडी बीवी ने सिड्यूस किया

ही फ्रेंड्स, एक बार फिर आपका दोस्त राहुल, और आपकी हॉट भाभी काव्या अपनी आयेज की स्टोरी लेकर आपके सामने है. जिन दोस्तों ने ओल्ड पार्ट रेड ना करे हो, वो पहले कर ले, तभी आयेज का समझ आएगा.

दोस्तों अब मेरे को और काव्या को इसमे मज़ा आने लगा था. हम न्यू न्यू लोगों से मिलने लगे, और एंजाय करने लगे.

इस कहानी में हमारी दोस्ती एक नेवी वाले के साथ हुई. फ्ब से ही बात हुई, और अची बात होने लगी. कुछ दिन में हम आचे दोस्त बन गये. नेवी वाले को नही पता था हमारे सेक्स का, और नॉर्मल दोस्ती थी.

कुछ दिन बाद वो देल्ही आया, और उसने मेरे से कॉंटॅक्ट करा. मैं उससे मिलने गया, बुत मैं वाइफ को साथ ले गया. बिकॉज़ मैने वाइफ को पिक दिखाई थी, और उसे लड़का अछा लगा था, और नेवी और आर्मी का एक अलग स्वॅग होता है. हम देल्ही में एक रेस्टोरेंट में मिले. मैने उसे अपनी वाइफ से इंट्रोड्यूस कारया. थोड़ी देर हमने बात करी, और लंच करा साथ में.

उस टाइम मेरी फॅमिली घर पे नही थी, तो वाइफ ने मेरे से पूच के नेवी वाले को नाइट डिन्नर के लिए इन्वाइट कर दिया. विक्रम नामे चेंज करा है बिकॉज़ ऑफ सेफ्टी.

काव्या: विक्रम आज डिन्नर आप हमारे साथ करिए हमारे यहा पे.

विक्रम: भाभी नाइट में आना फिर वापस आपके यहा से घर आना मुस्किल हो जाएगा. फिर कभी सही.

मैं: विक्रम तो क्या हुआ? नाइट आप हमारे यहा रुक सकते हो. हमे कोई इश्यू नही है अगर आपको ना हो तो.

विक्रम: राहुल भाई इश्यू कैसा? बस आप लोगों को प्राब्लम ना हो.

मैं: अर्रे भाई कैसी बात कर रहे हो? ऐसा कुछ नही है. आप हमारे साथ चल लो अगर आप फ्री हो तो.

विक्रम: कम तो कुछ नही है आज मेरा. बुत कल रिपोर्टिंग है, तो 11 बजे से पहले आना होगा.

मैं: विक्रम कोई नही, मैं ड्रॉप कर दूँगा. टेन्षन मत लो.

काव्या: विक्रम इतना क्या सोच रहे हो यार, वी अरे गुड फ्रेंड्स. क्या हम कभी आपकी सिटी में आए तो आप इन्वाइट नही करोगे?

विक्रम: भाभी जी क्यूँ नही, ज़रूर.

काव्या: तो सोचो मत, लंच फिनिश करके तोड़ा शॉपिंग करनी है. फिर घर चलते है. इतना भी बुरा खाना नही बनती मैं.

और सब हासणे लगे.

हम लोग ना लंच करके तोड़ा घूमे साथ में, शॉपिंग करी, और 5 बजे तक घर आ गये. काव्या और विक्रम की अची बन रही थी, तो मैं तोड़ा साइड होके चल रहा था कॉल, और कभी मेसेज का बहाना बना के. घर पहुँच के हम फ्रेश हुए. मैने अपना लोवर त-शर्ट विक्रम को दे दिए चेंज करने के लिए.

काव्या ने छाई बनाई, और सब ने बैठ के पी. फिर बात करते रहे, और 7 बाज गये थे. मैने काव्या से खाने के बहाने से साइड बुला के बात करी, की लड़का पसंद है. काव्या ना बोला पसंद नही होता तो घर के लिए बोलती?

फिर मैने बोला: कैसे बात आयेज करे? तुमको क्या लगता है वो मान जाएगा?

काव्या: ये तो नही पता, ट्राइ करके देखो. मैं रेडी हू.

मैने काव्या से बोला: मैं समान लेने के बहाने से जाता हू, तुम दोनो को अंदर अकेले छ्चोढ़ के. ट्राइ करो आज तुम कुछ बात बने तो.

काव्या: मेरे से नही होगा.

मैं: ट्राइ तो करो, नही होगा तो देखते है.

फिर बाहर जाके बोला: विक्रम भाई, मैं आता हू. कुछ समान लेके, आप और काव्या जब तक बात करो.

विक्रम: भाई मैं साथ चलता हू.

मैं: अर्रे कोई बात नही, मैं लेके आता हू. आप आराम करो.

विक्रम: भाई अछा नही लगता. आस-पास वाले क्या सोचेंगे?

काव्या: मेरे से दर्र लग रहा है क्या जो आप भाग रहे हो?

विक्रम: वो बात नही है भाभी. सोसाइटी वाले ग़लत ना सोचने लगे.

मैं: भाई साथ आए हो मेरे पीछे नही जो कोई ग़लत सोचेंगे.

फिर मैं निकल गया और वो दोनो घर में थे. मेरे जाने के बाद काव्या और ये बात करने लगे.

फिर काव्या ने बोला: आओ किचन में काम करते-करते बातें करते है.

दोनो कित्चान में आ गये. काव्या ने लोवर और त-शर्ट डाला था लूज़. काव्या काम कर रही थी, और बात भी. विक्रम भी रिप्लाइ कर रहा था. काव्या को समझ नही आ रहा था की बात आयेज कैसे बधाई जाए. उसको कुछ समझ नही आया तो सोचा की तोड़ा दिखा के कुछ हो सके शायद. फिर काव्या विक्रम के सामने झुक के काम करने लगी, और समान उठाने लगी.

जब वो झुकती, तो पीछे से त-शर्ट उठ जाती, जिससे कमर दिख रही थी. और आयेज से त-शर्ट डाउन हो रही थी, तो बूब्स की लाइन दिख रही थी. काव्या नॉर्मल बात करती रही पसंद ना पसंद और सब, और काम करती रही.

थोड़ी देर बाद वाइफ ने नोटीस करा की विक्रम का जो लोवर था, उसमे टेंट बन गया था. आक्च्युयली लोवर तोड़ा टाइट आ रहा था विक्रम की बॉडी पे, तो क्लियर दिख रहा था. काव्या की हस्सी निकल गयी देख के.

विक्रम: क्या हुआ भाभी?

काव्या: कुछ नही, कुछ याद आ गया था तो हस्सी आ गयी.

विक्रम: हमे भी बता दो, हम भी हस्स लेते है.

काव्या: अर्रे ऐसे कुछ नही था छ्चोढो.

अछा ये बताओ आपकी गफ़ कितनी है?

वाइफ के डाइरेक्ट सवाल से विक्रम तोड़ा सा अनकंफर्टबल हुआ.

काव्या: क्या हुआ, सब की होती है. आप स्मार्ट हॅंडसम हो, नेवी में हो, आपको देख के तो कोई भी फिदा हो जाए आप पे.

विक्रम: भाभी ऐसी किस्मत कहा हमारी.

काव्या: ऐसा क्यूँ बोल रहे हो आप?

विक्रम: भाभी हमारा अपना नही पता कब कहा हो. गफ़ के लिए टाइम देना होता है, जो हमारे पास नही होता.

काव्या: फिर कोई तो होगी जो आपको अची लगती हो, चाहते हो उसको.

विक्रम: भाभी ऐसी तो अभी तक कोई नही मिली.

काव्या: आपको कैसी पसंद है लड़की?

विक्रम: सच बोलू तो आपकी तरह भाभी .

इतना बोलते ही काव्या के फेस पे स्माइल आ गयी और वो बोली: ऐसा क्या है मेरे में?

विक्रम: आप स्वीट हो, क्यूट हो, और ब्यूटिफुल हो. घर क और पति दोनो के ख़याल रख सकते हो आप.

काव्या (स्माइल करते हुए कहा): अछा तो भगा के ले चलो.

और दोनो हासणे लगे.

काव्या की नज़र बार-बार उसके टेंट पे जेया रही थी. एक बार विक्रम अपने डिक को सेट करने के लिए हाथ से अड्जस्ट कर रहा था, जब काव्या ने उसको देख लिया. इस बार विक्रम ने भी देख लिया था काव्या को उसको देखते हुए.

इससे आयेज की कहानी आपको अगले पार्ट में पता चलेगी. यहा तक की कहानी अगर अची लगी हो, तो मैल करे

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