नौकरानी के लिए हवस पैदा होने की कहानी

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम अविषेक है. मैं मुंबई में रहता हू. हमारा एक 2भक फ्लॅट है वाहा, जिसमे मेरे मम्मी-पापा और मैं रहता था. मैने ग्रॅजुयेशन कंप्लीट करने के बाद एक मंक में काम करना शुरू ही किया था, की कोविद 19 आ गया. कुछ समझने से पहले ही मेरी पूरी फॅमिली कोविद से क्वॉरंटीन सेंटर में भारती हो गे. और उसी में मेरी मम्मी चल बसी.

फिर 7 दिन बाद मेरे पापा भी चल बसे. मैं जैसे-तैसे कोविद से रिकवर हो के घर आया. बुत मैं सूब कुछ खो चुका था. करीब 2-3 महीने क्या खाया, कैसे दिन निकाले, कुछ याद नही. बुत तोड़ा-तोड़ा रिकवर हो गया.

इस बीच मुझे घर के काम कुछ नही आते थे. तो मैने घर का कूड़ा-खाना बना के रखा था. ऑफीस से भी वफ् चालू हो गया था, और आने वाली 80% सॅलरी फुड ऑर्डर करने में ही निकल जाती थी. बचे 20% लाइट बिल आंड मेंटेनेन्स में निकल जाते थे.

अब कोविद कम होते जेया रहा था. एक दिन मेरे दोस्त का मुझे कॉल आया. उसकी शादी हो रही थी, तो वो घर पर निमंत्रण देने आ रहा था. उसने मेरे घर की हालत देख कर अपने सिर पे हाथ मारा, और मुझे बोलने लगा की मैं एक नौकरानी रख लू.

मैने कहा: अर्रे यार, इधर लास्ट में 500₹ नही बचते, नौकरानी कहा से रखू?

तो उसने मुझसे कहा: मैं मम्मी को बोल के कोई नौकरानी भिजवाता हू.

मैने उसे इग्नोर किया. फिर कुछ दिन बाद उसकी शादी हो गयी और वो भी बिज़ी हो गया. मैं भी भूल गया. थोड़े दीनो बाद मेरे दोस्त का कॉल आया, और उसने मुझे बताया-

दोस्त: एक नौकरानी मिली है. बुत उसका कोई नही है. वो फुल टाइम तेरे घर पे रहेगी. चलेगा क्या?

मैने उसे बोला: नही भाई, ऑलरेडी अकेला हू. कोई आयेज-पीछे नही. कोई मार के भी चला जाएगा तो किसी को पता नही चलेगा.

फिर 2 दिन बाद उसकी मम्मी का फोन आया. उन्होने मुझे कहा: मेरी पहचान वाली है वो, तो कोई प्राब्लम नही होगी.

और मैं उन्हे माना नही कर पाया.

ऐसे ही 3-4 दिन निकल गये. एक दिन मैं मॉर्निंग में वफ् कर रहा था, की मेरा फोन बजा. मैने फिर फोन उठाया तो एक औरत का फोन आया. उसने मुझे कहा-

औरत: मुझे पुष्पा आंटी ने भेजा है आपके घर काम के लिए. मुझे घर का रास्ता बता दीजिए.

मैने उसे अड्रेस बताया तो वो 10 मिनिट में घर के डोर पे पहुँची. फिर उसने बेल बजाई तो मैने डोर ओपन किया. मैने देखा के एक 16-17 साल की लड़की खड़ी थी. मैं तोड़ा परेशन हुआ, की अगर चाइल्ड लेबर रखी तो और प्राब्लम हो जाएगी.

तो मैने उसे कहा: मैं छ्होटी बच्ची को काम पे नही रख सकता. तुम जेया सकती हो.

उसने मेरे पैर पकड़ लिए और कहा: मैं बहुत डोर से आपके घर पे काम करने के लिए आई हू इस शहर में. मुझे कोई नही जानता, और मैं 19 साल की हू.

उसने मुझे आधार कार्ड दिया और स्कूल लीविंग दिखाया, तो सच में उसकी आगे 19 साल थी. बुत उसको मैने ठीक से देखा तो वो एक-दूं छ्होटी बच्ची लग रही थी, जैसे कोई 16-17 साल की लड़की. मैने उसे काम पे रखने का फिक्स किया, और उसे पूरा घर दिखाया और मैं अपना काम करने लग गया.

1 घंटे बाद उसने मुझे आवाज़ दी. फिर मैं रूम से बाहर गया तो देखा उसने एक बोरी में कचरा जमा किया था. वो मुझे पूच रही थी की कचरा कहा फेंकू. मैने उससे कहा-

मैं: बाहर रख दो, हाउस्कीपिंग वाले कल सुबा उठा के ले जाएँगे.

फिर उसने मुझे खाने के लिए पूछा.

तो मैने उसे कहा: जो बनाना आता है वो बनाओ.

फिर वो किचन में चली गयी, और मैं अपने काम में लग गया. बुत वो 10 मिनिट में मेरे रूम में आई, और मुझे कहने लगी-

वो: मालिक घर में तो कुछ समान है ही नही.

मैने उससे कहा: फिलहाल बाहर से ऑर्डर करता हू, शाम को समान ले आएँगे. तुम लिस्ट बना के रखो.

मेरा ब्रेक हुआ. तब तक खाना भी आ चुका था. फिर हम खाना खाने बैठे, तो मैने उससे बात करनी चालू की. उसने बताया की उसका नाम प्रिया था. उसकी मा की डेत उसके जानम के टाइम ही हो गयी थी, और उसके पिता जी ने सब दारू के चक्कर में बेच के गाओं छ्चोढ़ दिया था, और नॉइदा में एक घर में माली का काम करते थे. तो वाहा उसने भी नौकरी की थी.

बुत उसके पिता जी का देहांत होने के बाद उन लोगों ने उसे सहारा दिया. फिर वो लोग भी सब बेच के कॅनडा चले गये, और उसको काम से निकाल दिया. मैने उससे पगार की बात की तो उसने 10000 रुपीज़ कहा. मैं शॉक में आ गया, और मैने उससे कहा-

मैं: मैं 19000 कमाता हू, तुम्हे 10 हज़ार दूँगा तो मैं घर के खर्चे नही पुर कर पौँगा. बस 6000 दे सकता हू मैं.

उसने मेरी हालत देखी, और उसके पास कोई ऑप्षन नही था. ये देख के वो मान गयी.

फिर मैं अपने काम में लग गया. 5 बजे तक मेरा सब काम पूरा हुआ तो मैने सोचा तोड़ा आराम करता हू, और फिर शॉपिंग पे ले जाता हू. 6 बजे मैं बाहर गया, और उसे कहा-

मैं: रेडी हो जाओ, हम समान लेने जाते है.

मैने देखा की मेरे पास ज़्यादा पैसे नही बचे थे, और सॅलरी आने में 7-8 दिन थे, और इन्षुरेन्स के पैसे भी अब तक आए नही थे. मैं रेडी हो कर बाहर आया तो देखा उसने वही सेम ड्रेस पहनी हुई थी. फिर जब मैने उससे पूछा तो उसने बताया की उसके पास कपड़े नही थे.

वो जो समान लाई थी उसमे सिर्फ़ थोड़ी किताबे ही थी. मैने उससे कहा-

मैं: ठीक है.

और मैने घर लॉक किया. फिर मैं उसे बिके पे लेके बेज़ार की और गया. उसने समान की लिस्ट दुकान वाले को दी, तो समान लेने के बाद मेरे पास सिर्फ़ 600 र्स बचे थे. तो मैने उसे 2 जोड़ी कपड़े लेने के लिए सोचा. बुत इस बजेट में कुछ नही आने वाला था, तो मैने प्लान कॅन्सल किया.

समान लेके घर आया तो मैने उसे अपनी एक त-शर्ट और शॉर्ट्स दिए और कहा-

मैं: ये उसे करो.

और फिर मैं अंदर चला गया. 9 बजे उसने मुझे आवाज़ दी, तो मैं बाहर गया और खाना खाया. बहुत टेस्टी खाना बनाया था, और ऑलमोस्ट 5-6 महीने बाद घर का खाना खाने से जो सुकून मिला, वो बता नही सकता. फिर मैं उसे गुड नाइट बोल के सोने चला गया.

दूसरे दिन सुबा 7 बजे नींद खुली तो बाहर से कुछ आवाज़ आ रही थी. तो मैने बाहर जाके देखा तो वो किचन सॉफ कर रही थी. मैने उसे देखा तो उसने मेरी त-शर्ट पहनी थी, और शॉर्ट्स नही पहनी थी. फिर मैने उसे ठीक से देखा, तो वो करीब-करीब 4.3 फुट की थी, और छ्होटे से नींबू के साइज़ के उसके बूब्स थे.

उसके पतले पैर थे, और उनपे थोड़े-थोड़े बाल थे. उसने मुझे देखा तो वो मुझे पूछने लगी-

प्रिया: मालिक छाई पिएँगे?

मैने हा में सर हिलाया और अंदर चला आया. वो 10 मिनिट में छाई लेकर आई. मैने छाई का कप लिया और उससे पूछा-

मैं: शॉर्ट्स नही पहना?

तो उसने बताया: वो पहना तो था, बुत मेरी कमर पे रुकती नही.

ये सुन कर मैं हासणे लगा, और बोला: 2-4 दिन रूको, सॅलरी आने पर देखते है.

फिर वो मुझसे मेरे बारे में पूछने लगी. तो मैने उसे सब बता दिया. वो थोड़ी एमोशनल हो गयी, और दूसरे कमरे के बारे में पूछने लगी. फिर मैने उसे बताया, की वो मम्मी पॅपा के रूम है, जो 6 महीने से बंद है.

तो उसने कहा: वो रूम खोल दीजिए सफाई करनी है.

मैने उसे माना किया और कहा: जितना घर है उसे संभलो, उस रूम को बंद ही रहने दो.

वो ज़्यादा मेरी बात काटना नही चाहती थी, तो वो वाहा से चली गयी. सॅटर्डे था तो मेरी छुट्टी थी, तो मुझे कुछ काम नही था. मुझे बुरा भी लगा की मैने उसे दांता. तो मैं बाहर कप रखने गया, और उसे सॉरी बोला.

फिर उसको कहा: चलो रूम देखते है, और मैं चाबी लेने चला गया. तब तक वो मेरे पीछ-पीछे कपड़ा और बाल्टी में पानी ले कर आ गयी.

मैं रूम में घुसते ही तोड़ा एमोशनल हो गया. पिछले 6 मंत्स से मैं ये वाले रूम में आया नही था. क्यूंकी मुझे मम्मी पापा की याद आने लग जाती.

मेरी आँखों में आँसू देख कर वो भी समझ गयी. फिर उसने सब कचरा उठाया, और धूल सॉफ करने लगी. एक-दूं से वो मेरे सामने नीचे झुकी. मैने देखा तो उसने शॉर्ट्स ना पहनने के वजह से उसके पतले-पतले पैर दिख रहे थे, और उसकी त-शर्ट और उपर हो गयी.

तब उसकी फाटती हुई चड्डी में से उसके नीचे का जंगल दिखने लगा मेरा. इससे मेरा लंड खड़ा हो गया. मैने जैसे-तैसे संभाला खुद को, और अलमारी चेक करने लग गया. तब मुझे लॉकर में कुछ पैसे मिले, और मम्मी की ज्यूयलरी मिली.

मैने पैसे उठाए और जेब में डाले, और ज्यूयलरी वही लॉकर में रखी. मैं बाहर आया और अकेले में पैसे गिनने लगा. ऑलमोस्ट 1 लाख रुपय थे. मैं वो सब मेरी अलमारी में रख कर वापस वो रूम में गया. प्रिया मम्मी का मेकप का समान देख रही थी, तो मैने उसे कहा-

मैं: तुम्हे जो चाहिए वो लेलो. पहले उसने माना किया, बुत बाद में 2-4 चीज़े उठा ली. मैं फिरसे वो रूम लॉक करके रूम में आके नहाने जाने लगा. बातरूम में जाते टाइम मैने फिरसे प्रिया की तरफ देखा, तो वो नीचे झुक कर काम कर रही थी.

मेरा दिमाग़ फिरसे खराब होने लगा. मैने बातरूम में जेया कर उसे याद करके लंड हिला के पानी निकाल दिया. फिर शवर चालू करके प्रिया के बारे में सोचने लगा. मेरे पास अब थोड़े पैसे थे, तो मैं सोचने लगा की उसे तोड़ा घुमा फिरा कर उसका विश्वास जीटा जाए, ताकि अगर मैं कल से जॉब पर जौ तो वो घर ठीक से संभाले.

मुझे उसपे अभी तक पूरा भरोसा नही था. तो मैं बस तोड़ा ही उसे घुमा फिरा कर तोड़ा मुंबई की हवा दिखना चाहता था. मैं नहा कर बाहर निकला तो तब तक उसने ब्रेकफास्ट बना के रेडी कर दिया था. तो मैने वो खाया, और उसे कहा की वो रेडी हो जाए, हम लंच बाहर करेंगे.

फिर मैं रूम में गया, और सोचने लगा की इसको कैसे अपने साथ कर लू, सो ये मेरे लिए काम भी करे और घर भी संभाले. मैं रेडी हो कर बाहर निकला, तो मैने देखा प्रिया ने वही अपना पुराना वाला ड्रेस पहना हुआ था, और तोड़ा मेक उप भी किया था. फिर हम बिके से एक माल पहुँचे. वो माल देख कर एक-दूं से खुश हुई. उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी.

मैं उसे एक शॉप में कपड़े दिलाने ले गया, तो वाहा उसका साइज़ नही था. फिर वाहा की सेल्स गर्ल ने मुझे किड्स सेक्षन में जाने को सजेस्ट किया. हमने वाहा से एक ड्रेस मिनी वन पीस उठाया ब्लॅक कलर का, और उसे चेंजिंग रूम में जेया कर पहनने को कहा. फिर वो बाहर आई तो उसमे वो अची दिख रही थी. तो मैने उसे वही पहन के चलने को कहा. लेकिन उसने माना किया.

मैने पूछा तो उसने मुझे अपने हाथ उपर करके आर्म्पाइट्स के बाल दिखाए. ये देख मैं हासणे लगा, और कुछ नही बोला. फिर वो चेंज करके आई, और हमने वो ड्रेस खरीद ली. फिर मैने उसे फुड कोर्ट ले जेया कर म्सी’द से बर्गर ऑर्डर किया, और हम खाते-खाते बात करने लगे. तब मुझे उसकी बातों से पता चला के उसे सिटीस के बारे और मॉर्डन लाइफ में ज़्यादा आकर्षण था.

फिर मैने उससे कहा मैं उसे मॉर्डन बनने में हेल्प करूँगा, तो वो और खुश हो गयी. मैने अपने लिए भी 2 त-शर्ट्स ली, और अंडरगार्मेंट की स्टोर में घुसे तो मैने मेरे लिए अंडरवेर ले लिए.

फिर उसके लिए ब्रा और पनटी देखने लगे. बुत उन्होने कहा के उनके पास इतनी छ्होटी साइज़ नही थी. तो उन्होने दो पतली से स्ट्रिंग वाले कोमोसेल्स सजेस्ट किए, और 2 पनटी ले लिए, और बिल करके वाहा से निकल कर मोविए देखने चले गये.

अब आयेज क्या, हुआ वो नेक्स्ट स्टोरी में बतौँगा. स्टोरी थोड़ी लंबी है.

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