नरम बेड पे गरम मामी की चुदाई

ही दोस्तो मेरा नान नबील है. हम और मेरे मामू एक ही मुहाल मैं रहते हैं, हुमारा घर साथ, साथ है इस लिए उनके घर मेरा आना जाना लगा ही रहता है.

मेरे ममो की शादी को 6 साल हो गये हैं लेकिन उनकी एक ही बेटी है. मैं अपनी मामी साथ बोहट फ्रॅंक हूँ और उनका देवना भी.

मामी की उमर 28-29 साल है और हाइट 5 फीट. मामी का रंग दूध की त्रहा सफैइड है, मामी का जिस्म स्लिम और कमर पतली और कर्वी है.

अब उस चीज़ की बात करते हैं जिसका मैं देवना हूँ मतलब् उनकी गांद और बूब्स. मामी की गांद रौंद शेप की है बाकी बॉडी की निसबत मोटी है और बड़े, बड़े बूब्स हमेशा ब्रा के आंद्र कसे हुए.

मैं हमेशा ही हसरत से मामी को देखता और दिल ही दिल मई मामी का गोरे गोरे बूब्स चोस्टने का सोचता. अक्सर बिके पे मामी को बाज़ार ले के जाता तो मोटे मोटे बूब्स को अपनी कमर पे टच होता महसूस करता. और सोचता के काश कभी यह बूब्स मुझे नंगे मिल जाएँ तो सारी पियास भुजा लून और इनको काट काट के लाल कर डून.

मामू का ज़्यादा टाइम ऑफीस गुज़रता था और उनकी बेटी का स्कूल. मैं अक्सर उनके घर जाता तो मामी अकेली घर होती तो मैं मामी की गांद और बूब्स को टच करने का सोचता. के मामी शर्मीली है किसी को नहीं ब्ताए गी. लेकिन मैं अपने उपर कंट्रोल रख लेता.

मामी मेरे साथ काफ़ी फ्रॅंक थी और हम एक दोसरे से काफ़ी मज़ाक भी करते थे. लेकिन मैने कभी उसको ऐसी नहीं लगने दिया के मैं उसके नरम जिसम का मज़ा लेना चाहता हूँ.

एक दिन मैं मामी के घर गया तो मामी अकेली थी और किचन मे काम कर रही थी. उसने टाइट शलवार-कमीज़ पहली थी और दुपटा नहीं लिया था. जिससे उसके मममे बड़े सॉफ दिख रहे थे.

जैसे ही वो समान उठाने के लिए हिलती तो उसकी गोल गोल गांद भी हिलने लग जाती. जिसको देख के मेरा दिल मचल परा. और मैने फ़ैसला कर लिया के आज इसकी गांद मई अपना लूँ रगर के ही जाओं गा चाहे जो मर्ज़ी हो जाए.

थोरी दायर बाद मामी किचन से फारिग हो के आई तो मैने लडो खेलने का कहा और मामी मान गई. हम 30-40 मिंट तक खेलते रहे मैं मोके की तलाश मैं था के कब मामी कोई मस्ती करे और मुझे इसकी नरम गांद को टच करने का मोका मिले.

मैने जब बोझ के लडो मैं घपला किया और शोअर दल दिया. मामी ने भी इस्पे शोअर दल दिया कियू-के इस त्रहा वो हर रही थी. 2-3 मिंट शोअर के बाद मामी ने पास परा हुवा ताकया उठाया और मज़ाक से मुझे मार दिया. मैं इसी मोके की तलाश मैं था मैने भी ताकया उठाया और मामी को मारा. जिससे हम दोनो एक दोसरी को ताकया से मरने लगे.

ताकया मरते हुए मामी के मममे (बूब्स) उछाल रहे थे और मेरी नज़र बार बार इन मोटे मॅमन पे जा रही थी. जिसकी वजा से मेरा लंड फूल टाइट हो गया.

मम्मी का ताकया नीची घिर गया और अब उसने मेरा ताकया चीन लिया. मैं अपना ताकया वापिस चीन’नाइ की कोशिश करने लगा. लेकिन मामी उस तकये के उपर उल्टा लाइट गई.

मामी की नरम घंड मेरे सामने थी लेकिन अफ़सोस अभी वो नंगी नहीं थी. मैं ताकया वापिस लेने की आक्टिंग करते हुए मामी के उपर आ गया और मामी को कस्स के पकड़ लिया.

जैसे ही मैने मामी को पाकारा मेरा लंड नरम गांद के दरमियाँ जा लगा. मामी जो पहले हंस रही थी अब थोरी सीरीयस हो गई और खुद को चुराने लगी. लूँ मामी की गांद मई लगने से और टाइट हो गया और मेरा कॉन्फिडेन्स भी आसमान पे पोंच गया. मैने दोबारा लूँ गांद के आंद्र गुस्सा दिया और मामी को और ज़ोआर दे कस लिया.

8 इंच का लंड अपनी गांद मई महसूस कर के मामी बे-चैन हो गई खुद को चोरने लगी. मामी स्मझ चुकी थी के यह जान बोझ के लूँ आंद्र गुस्सा रहा है.

मामी बोली नबील क्या कर रहा है मैं तेरी मामी हूँ. मैं उस वाक़त मामी की गांद के नाशी मई बोला मामी जे बांझे का भी कुछ हक़ है ना.

यह कहते ही मैने एक हाथ से ज़िप खोली और लूँ बहिर निकल के मामी की गांद मई ताइज़ ताइज़ रगार्ने लगा. अब मेरा मिशन मामी की शलवार उतरना था. मैने मामी को चोमना शुरू कर दिया जिस की वजा से मामी थोरी मस्त हो गई और एंजाय करने लगी.

मैने मामी के नरम होंतों मैं अपने होन्ट दल के उसके होन्ट चूसने शुरू कर दिए, मामी मेरा साथ देने लगी. 5 मिंट तक होंतों का मज़ा लेने के बाद मैने मामी की शलवार पकड़ कर नीची की तरफ़ खांची. लेकिन मामी बोली जो करना है शलवार के उपेर से ही कर.

मैं किसी मजबूर की त्रहा मामी से मिनट (रिक्वेस्ट) करने लगा के 5 मिंट के लिए गांद नंगी कर दो ब्स लंकेआ टोपा गांद मई रागरों गा. मामी इस शर्त पे मान गई के मैं उसके आंद्र नहीं ढालों गा.

मैने ज्लडी से वहशी दरिंदे की त्रहा मामी की शलवार पकारी और उतार दी.

ब्स क्या ब्ताओं दोस्तो मामी की फुल गोरी और नरम गांद मेरे सामने थी. मुझे यक़ीन नहीं आ रहा था के मामी ने अपनी सेक्सी गांद मेरे लिए नंगी कर दी है.

मैने लंड पे थूक लगाई और मामी की पतली गांद मई अपना मोटा लूँ रगरना शुरू कर दिया. मामी की गोरी गांद मई अपना कला लूँ देखने का मेरा सपना पोरा हो रहा था. लंड रग्रार्ता हुवा कभी गांद के आंद्र घूम हो जाता और कभी बहिर आ जाता.

मामी सिसकियाँ लेने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे उसको मज़ा आ रहा है. मामी उपेर उठी और मेरा लूँ पकड़ के मसालने लगी. मैने कभी सोचा भी नहीं था के मेरा लंक्ेअभी मामी के गोरे हाथों मई होगा.

5 मिंट ऐसा करने के बाद मामी ने दराज़ से एक कॉंडम निकल लिया और मेरे लूँ पे छरहा लिया. मैं समझ गया के अब मामी मेरा लूँ अपनी फुदी मई लेने वाली है.

कॉंडम लूँ पे छरहा के मामी ने मुझे बेड उपेर वेल हिस्से के साथ टके लगा के तंगायन सीधी करने का कहा. और सारी शलवार उतार के मेरी गोड मई आ के मेरे होन्ट चूसने लगी.

नीची से लूँ बार बार मामी की नंगी फुदी को टच हो रहा था और फुदी के आंद्र आंद्र गूस्सने के लिए बिल्कुल त्यआर था. मेरे मामी को कहा कमीज़ उतार के अपना ज्ल्वा दिखाओ ना.

मामी ने हंसते हुए अपनी कमीज़ भी उतार दी. अब वो ब्स एक ब्रा मई थी. मामी के मोटे मोटे 2 मममे ब्रा मैं फुल टाइट थे. ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी जैल मई क़ैद हूँ और बहिर निकलने के लिए बे-चैन हूँ.

मैने मामी की ब्रा के उपेर से मॅमन पे हाथ फायर्ते हुए कहा के मामी इनको आज़ाद कर दो ना इन्हो ने आपका क्या भीगरा है. यह सुनते ही मामी थोरी शरमाई और बोली के तुझे इनका बोहट एहसास है, खुद ही आज़ाद कर दे ना.

ब्स यह बात सुनते ही मैने मामी की ब्रा के पीछी हाथ डाला और ब्रा खोल के बेड से नीची फाँक दी. वा 2 गोल, नरम, मोटे और गोरे मामी मेरे सामने चमकने लगे. जिनको देख के मेरा खुद पे कंट्रोल ख़तम हो रहा था.

मामी ने शर्मा के दोनो हाथ मॅमन पे रख के अपने मस्त बूब्स छुपा लिए. लेकिन मैने जल्दी से दोनो हाथों को पाकारा और हटा दिया. मामी ने शर्मा के मूह रिघ्त साइड पे कर लिया. मामी की यह अड़ह देख के मैं फुल नाशी मैं आ गया और मामी के बूब्स पे टूट परा. काबी रिघ्त मम्मा मूह मई ले के चूस्टा कभी लेफ्ट.

मामी बोली कमीने इनको आज़ाद कर के अपने क़ब्ज़े मई ले रहा है. मैने कहा मामी जी ऐसी चीज़ों को आज़ाद तो नहीं चोर सकते ना. मामी फुल मस्त हो चुकी और हाथ चुरा के नीची से मेरा लूँ पकड़ के अपनी फुदी पे सेट कर के उपेर बेत्ने लगी.

लेकिन इस से पहले के वो लूँ आंद्र लेती मैने ज़ोआर से उपेर की तरफ़ जटका मारा और मोटा टोपा मामी की नरम फुदी के आंद्र गुस्स गया. फुदी बोहट टाइट थी और टोपा आंद्र जाते ही मामी की दर्द से चीख निकल आई. और इसे बहिर निकालने के लिए उपेर उठने लगी.

लेकिन मैने ज्लडी से उसकी हिरण जैसी पतली कमर को जाकर लिया. और एक और जटका मारा जिससे पोरा लूँ मामी की टाइट फुदी मैं गुस्स गया. मामी पोरा लूँ आंद्र जाते ही ज़ोआर से चीखी. और बोली कमीने चोर मुझे और लूँ बहिर निकल तेरा लूँ बोहट मोटा है, ज्लडी निकल.

यह कहते हुए मामी ने हिरण की त्रहा ज़ोआर लगा के अपनी पतली कमर चुराना शुरू कर दी. काबी एक हाथ से ज़ोआर लगती और कभी दोसरे से. लेकिन मैं भोखे शायर की त्रहा मामी को कस्स के पकड़ के उसकी टाइट फुदी मार रहा था.

मामी की यह हालत देख के मैं बोहट मज़े ले रहा था. मैने तो खुवाबों मैं ही मामी को फुल नंगा कर के उसकी फुदी मरने का सोचा था. लेकिन आज वो सच मैं मेरा लूँ आंद्र ले के तारप रही थी.

उसकी हालत देख के मुझे और जोश आ गया और मैने कमर की ग्रिप और ज़्यादा कुस्स ली और ज़ोआर ज़ोआर से जटके मरने लगा. मामी बेचारी मेरे सामने अपनी फुदी नंगी कर के पचता रही थी. कियू के फुदी मेरा मोटा लूँ से नहीं पा रही थी और वो आ आ अहह कर रही थी. और उसकी आवाज़ें सुनके लूँ और ज़्यादा लोहा ब्न रहा था.

मैने जटके और ताइज़ कर दिए और मामी की ह आह भी ताइज़ हो गई. लंक्ेअभी उसकी फुदी से बहिर आता और कभी फुदी को चीरता हुवा बचा-दानी के आंद्र गुस्स जाता.

जैसे जैसे मामी को जटके लगते उसके मॅमी हवा मैं उछल रहे थे. यह देख के मुझसे रहा नहीं गया और मैने दोबारा बूब्स पे हमला कर दिया. और वेशी कुत्ते की त्रहा कभी उनको चूस्टा और कभी चट्टा. नीची से लूँ फुदी का गाज़ाब खेल भी जारी था. जिस मैं लूँ जीत रहा था और फुदी बुरी त्रहा से चुड रही थी.

20 मिंट तक मस्त चुदाई करवाने के बाद मामी बोली के चोर दे कमीने देख मेरी क्या हालत हो गई है, कमर भी दर्द हो रही है. मैने कहा मामी ग आपकी फुदी लूँ बहिर नहीं आने दे रही.

यह कहते ही मैने आराम आराम से चुदाई करना स्टार्ट कर दी. मामी को अब मज़ा आ रहा था. लूँ प्यार के साथ फुदी के आंद्र जाता और मामी फुदी की ग्रिप कुस्स के लंकेआ मज़ा लेती.

फिर मैं आहिस्ता से लूँ बहिर निकलता और फिर इस त्रहा आंद्र घुसता. 5 मिंट तक यही मस्ती चलती रही. अब मैं तक चुका था लेकिन ना ही मेरा लूँ तका था और ना ही मामी की फुदी.

मैने मामी की कमर चोरी तो वो मेरी गोड से उठ के बेड पे उल्टा लाइट गई. मामी की कमर रेड हो चुकी थी और फुदी सोझ के चुल चुकी थी. मैने मामी की गांद के नीची 2 तकये रख के फुदी को लंके ब्राबार कर लिया. और ज़ोआर से जटका मार के पोरा लूँ फुदी के आंद्र गुस्सा दिया और मामी के उपेर लाइट गया.

मामी बोली अब ज़ोआर से छोड़ ना कमीने आज मोका मिला है तो फार दे आइसे.

यह सुनते ही मेरा जोश वापिस आ गया और मैं गांद पे उछाल उछाल के फुदी मरने लगा. कमरे से टुक टुक की आवाज़ैईन आना शुरू हो गयीं और मामी भी ह ह करने लगी और अपनी फुदी कुस्स के लंकेओ जाकर लिया.

मैं उपेर उठा और मामी की गोरी फुदी मैं अपना कला लूँ आंद्र बहिर होने का नज़ारा देखने लगा. वा क्या नज़ारा था. पतली कमर, गोरी गांद और टाइट फुदी के आंद्र लोहे जैसा 8 इंच का लंक्ेअभी आंद्र जाता और कभी बहिर निकल आता.

मैने दोनो हाथों से गांद को पाकारा और इस नज़ारी को देखते ही देखते आंद्र ही झार गया. कॉंडम डालने की वजह से मामी को भी मेरे आंद्र झरने से कोई प्राब्लम नहीं थी. और उसने अपनी फुदी पोरी तरहा कस्स के लंकेआ एक एक कटरा निकल दिया.

झरने के बाद 1 मिंट तक मामी के उपर लैयता रहा और फिर लूँ बहिर निकल के कॉंडम उतार के उसी रूम की बास्केट मैं दल के पंत उपेर की. और आखरी दफ़ा मामी की आँखों मैं देखा. तो मामी ने शर्मा के मूह पे ताकया रख लिया और मैं भी हंस के वहाँ से निकल आया.
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