नेक्स्ट पार्ट ऑफ गे सेक्स स्टोरी-
नाना जी मेरे पास आए. मैं अपने दोनो हाथो को चुचो के आयेज क्रॉस करके लटता हुआ था, जिस वजह से मेरे चुचे और मोटे लग रहे थे (मैने बनियान उतार रखी थी).
नाना मुझे घूरते रहे. फिर मेरे पेट पर गुदगुदी करते हुए बोले, “चल गरमा-गरम कचोरी खा ले. और तेरा फेवोवरिट पाइनॅपल जूस भी लाया हू.”
मैं खड़ा हो कर प्लेट्स लेने रसोई में जाते हुए बोला, “बिना नहाए हुए नाश्ता करोगे क्या?”
नाना: कचोरी ठंडी हो जाएगी तब तक.
मैं प्लेट्स लेकर आया. तभी नाना मुझे उल्टा घुमा कर मेरी पीठ कर हाथ फेरते हुए कुछ हटाने लगे.
नाना: छ्चाटी पे के निशान है, मुझे लगा कुछ चल रहा है.
मैं: आपने तो दर्रा ही दिया था.
नणु: कितना कोमल और गोरा बदन है तेरा. इतने ज़ोर से निशान च्चप गये.
मैं: अब ठंडा नही हो रहा नाश्ता?
ये बोल कर हम नाश्ता करने लगे. तभी मेरे दिमाग़ में ये योजना बनी. मैने जान-बूझ कर जूस मेरे मूह से होते हुए चुचो पर गिरा दिया.
मैं: आबे यार!
नाना: कोई नही, नहाएगा तो सही.
अब मैने वो किया जो नाना ने सोचा भी नही होगा. मैने आपनी चार उंगलियों से चुचो के उपर से जूस पोंछते हुए जीभ से हाथ को चाट लिया. फिर दोबारा ऐसे ही किया और अब की बार अपनी उंगलियों को चूस लिया.
नाना मुझे भूखे भेड़िए की तरह देख रहे थे. वो थोड़ी देर तक देखते रहे. फिर जैसे ही मेरी नज़र नाना से मिली, तब नाना ने मेरे सर पर बड़े प्यार से हाथ मारा और बोले, “कामीने, ये कैसे-कैसे सॉफ कर रहा है?”
ये बोल कर नाना अपने रुमाल से मेरे चुचो को सॉफ करने लगे. मैं बीच-बीच में नाना का हाथ पकड़ कर चुचो को ज़ोर लगा कर सॉफ कर रहा रहा था. नाना ने रुमाल एक तरफ रख दिया और दोनो हाथ से चुचो पर हल्का सा थप्पड़ मार कर बोले, “अब हुआ ना सॉफ.”
दोस्तों मेरा बदन बहुत मुलायम और कोमल है, इसलिए ये सब करते हुए मेरे चुचे पुर लाल हो गये थे.
मैं: क्या सॉफ, दोनो लाल कर दिए हो आप.
नणु हासणे लगे.
मैं: आप नहा लो, मैं घर का काम करके ही नाहोँगा.
नणु ने भी मेरे साथ काम करवाया. सब काम कटम करने में हमे 10 बाज गये थे. हम दोनो ही तक गये थे और पसीने भी आ रहे थे. मैं नहाने के लिए अपने कपड़े लेने रूम में गया और आया तो देखा नाना अपने सारे कपड़े निकाल कर सिर्फ़ अंडरवेर में पंखे के नीचे लेट गये थे.
नाना: पसीना सुका ले, फिर नहा लियो. आजा मेरे पास.
मैं नणु के पास चिपक कर लेट गया. चारपाई छ्होटी थी इसलिए एक-दूसरे से चिपके हुए थे. 2 मिनिट ऐसे ही हम दोनो चुप-छाप लेते हुए थे. पसीना सूकते ही मैने नणु के पेट पर बैठ कर बोला, “अब बताओ नणु, घूमने चलोगे या कहानी? बोलो-बोलो नणु.”
ये बोलते ही मैने नणु के गाल खींचे. तभी नणु ने मेरी कमर को ज़ोर से पकड़ कर मुझे तोड़ा नीचे करते हुए अपने लोड पर धक्का दिया. फिर मेरे सर को एक हाथ से नीचे खींचते हुए मेरे गाल पर ज़ोर का चुम्मा ले लिए.
मैने कमर और गाल को मसालते हुए बोला, “फिर से लाल कर दिया.”
नणु (हेस्ट हुए चुचो को दोनो हाथ से पकड़ते हुए): तेरे मोटे-मोटे चुचे तो अभी भी लाल है, और अब गाल और कमर भी कर दी.
नणु ने तभी मुझे गोद से नीचे उतारते हुए एक तरफ लिटा दिया. फिर खुद मेरे पीछे चिपक कर अपने एक हाथ से मेरी कमर को पीछे खींचते हुए गांद को अपने लोड से चिपका रहे थे. उन्होने मेरे उपर अपना एक पैर रख दिया.
तभी मेरे चुचो से कमर तक हाथ फेरते हुए बोले, “चल कहानी सुनाते हुए तेरे लाल बदन को आराम दे देता हू.”
मैं: वाउ नणु, जल्दी सूनाओ फिर.
नणु एक बहुत पुरानी कहानी सुना रहे थे. ये कहानी मैने बहुत बार सुनी थी, लेकिन मुझे कहानी से ज़्यादा नणु जो कमर और चुचो पर हाथ फेर रहे थे, वो अछा लग रहा था. बीच-बीच में अपने लोड को भी मेरी गांद में चुभाने की कोशिश करते.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरे निपल्स एक-दूं सख़्त हो चुके थे. तभी मुझे महसूस हुआ नणु का लोड्ा मेरी गांद पर बहुत ज़ोर से चुभ रहा था. नणु मेरे चुचो पर से हाथ ही नही हटा रहे थे.
मैं (अंजान बनते हुए): नणु पीछे कुछ चुभ रहा है.
नणु ने तुरंत मेरी शॉर्ट्स को चड्डी के साथ खींचते हुए नीचे किया और देखते हुए बोले, “क्या चुभ रहा है?”
मैने तुरंत शॉर्ट्स उपर करी, “नणु, क्या आप भी!”
नणु: क्या लड़की जैसा शर्मा रहा है? बचपन में कितनी बार तुझे देसी उपतन से नंगा ही नहलाया है.
मैं: देसी उपतन, वो क्या है?
नणु चारपाई से तुरंत खड़े हुए. उनका लोड्ा अभी भी खड़ा ही था. लेकिन नणु को कोई शरम नही थी.
वो बोले: चल बातरूम में, आज भी देसी उपतन से नहला देता हू. साबुन से बदन की गंदगी नही जाती.
नणु रसोई में चले गये और मुझे वहाँ से बातरूम में इंतेज़ार करने को बोलने लगे. 10 मिनिट बाद नणु बातरूम में आए, उनके हाथ में एक बड़ा कटोरा और एक आयिल की बॉटल थी.
नणु: ये चंदन, हनी और कुछ चीज़ों का पेस्ट है, जो स्किन के लिए अछा होता है और ये कोकनट आयिल है एक्सट्रा हेल्ती स्किन करने के लिए.
मैं: मुझे तो याद ही नही की आप बचपन में इन सब चीज़ों से मुझे नहलते थे.
नणु: जाने दे ये बातें, जल्दी से ये लगवा ले.
मैं जल्दी से अपनी शॉर्ट्स निकाल कर सिर्फ़ छड़ी में आ गया. मनु उपतन सबसे पहले मेरे मूह पर, फिर पेट पर, फिर बहुत आराम-आराम से मेरे चुचो पर लगाने लगे. छोचो को बहुत टाइम तक मसलते ही रहे. फिर चुचो को दोनो हाथ में लेकर ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगे.
मैं: एयेए, आराम से, दर्द हुआ.
फिर नणु पैरों पर उपतन लगाने लगे. दोनो पैरों पर लगते-लगते नणु मुझे उल्टा करके धीरे-धीरे उपर मेरी गांद तक आने लगे.
मेरे बदन में एक झंझनाहट होने लगे. नणु ने मेरी चड्डी पकड़ कर निकाल दी. मैं एक-दूं चौंक गया और बोला, “नणु…!”
नणु: बदन के सभी अंग सॉफ होना बहुत ज़रूरी है.
वो मेरी गांद को उपतन लगा-लगा कर पुर मज़े से मसालने लगे. नणु ने मुझे दीवार की तरफ चिपका रखा था, और मेरी गांद के पुर मज़े मसल-मसल कर ले रहे थे.
नणु: कितने फूले हुए, गोल-मटोल चुतताड है बच्चू तेरे.
मैं: बस नणु, मुझे शरम आ रही है.
वैसे मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा था. तभी नणु ने मुझे नीचे बिता कर मेरे उपर पानी डालना शुरू किया और सारा उपतन हटता कर बदन सॉफ कर दिया.
मेरा मूह नणु की तरफ था. नणु का लोड्ा बहुत मोटा था. वो एक-दूं नणु के गीले कच्चे पर चिपका हुआ बदन से एक तरफ लटक रहा था. तभी नणु ने आयिल की बॉटल से आयिल हाथ में लिया.
मैं: इसका क्या करोगे?
नणु: गुप्तँग के लिए, वहाँ उपतन नही लगता.
मैं: मुझे शरम आएगी.
नणु ने मेरे गाल पर किस किया और बोले, “नाना हू तेरा. मेरे सामने क्या शर्मा रहा है?”
नणु ने मुझे ऐसे ही बैठे हुए मेरा लोड्ा जो तोड़ा-तोड़ा खाद था, हाथ में लिया. मुझे जैसे एक-दूं करेंट सा लग गया हो, ऐसा पागल हो गया.
आयेज के पार्ट में देखना कैसे नाना ने मेरे बदन को पूरा जवान कर दिया.