नंगी बहन ने नंगे भाई की मूठ मारी

हेलो दोस्तों, कहानी के अगले पार्ट में आपका स्वागत है. पिछले 6 पार्ट्स को आप लोगों ने पढ़ा और बहुत से लोगों को मेरी कहानी अची लगी. ऐसे ही आप सब मुझे सपोर्ट करते रहे. जिसने ये सीरीस अभी तक नही पढ़ी है, वो एक बार ज़रूर इस कहानी को पढ़े.

अब तक आप लोगों ने पढ़ा, की मेरा बर्तडे था, और मैं और मनु दीदी ग़मे खेल रहे थे. तभी मैने दीदी को अपनी छूट दिखाने को बोला. आयेज क्या हुआ, इस पार्ट में पढ़े.

दीदी खड़ी होके मेरी तरफ बॅक करके अपना ट्राउज़र और पनटी दोनो एक साथ निकाल देती है. उनकी गांद मेरे फेस के बिल्कुल पास होती है. मैने आप लोगों को पहले भी बताया था की दीदी की गांद बहुत बड़ी है, और एक-दूं कर्व वाली है.

फिर दीदी पनटी और ट्राउज़र फ्लोर से उठाने के लिए नीचे झुकती है. तभी दीदी की गांद का च्छेद मुझे दिखता है, और उसके पास बिल्कुल नीचे ही दीदी की छूट होती है. सही से नही दिख रही होती अंधेरे में दीदी की छूट.

फिर मैं दीदी के गांद पे हाथ रख के उनको अपनी तरफ घूमता हू. दीदी की छूट मेरे सामने आती है. क्या बतौ मुझे उस वक़्त कैसा लग रहा था. दीदी की छूट बहुत छ्होटी थी. थोड़े-थोड़े बाल होते है, जैसे एक हफ्ते पहले ही सॉफ किए हो. दीदी की छूट से तोड़ा तोड़ा पानी निकल रहा था, शायद वो गरम हो गयी थी.

मैं दीदी की छूट से निकलते पानी को देख रहा था, जो उनकी जांघों पर आ रहा था.

हम दोनो इतने गरम हो चुके थे, की हमे ठंड भी महसूस नही हो रही थी. मैं तो बस अब दीदी को छोड़ना चाहता था. मेरा लंड अपने पुर साइज़ में आ चुका था. दीदी मेरे सामने अपने पैर खोल के बैठ जाती है. शायद इसलिए ताकि मैं छूट देख साकु.

दीदी की तरफ से मुझे काफ़ी ग्रीन सिग्नल मिल रहे थे. पर थी तो वो मेरी मनु दी ही. अपनी बेहन को छोड़ने में गांद तो फट-ती ही है. मुझे भी दर्र लग रहा था. दीदी भी शायद यही चाहती थी की मैं पहले कुछ करू, क्यूंकी लड़कियाँ कभी शुरुआत नही करती है, पहले लड़के को ही कदम उठना पड़ता है दोस्तों.

रात के 2 बाज रहे होते है. मेरा लंड भी 2 घंटे से खड़ा था, इसलिए मेरी बॉल्स दुखने लगी थी (इसको साइन्स में ब्लू बॉल्स कहते है). मुझे दीदी को बताने में भी शरम आ रही थी. मैं दीदी को सोने के लिए बोलता हू, पर उनका चेहरा उतार जाता है. शायद वो चाहती थी आयेज कुछ हो.

हम दोनो एक ही कंबल में बिना कपड़े पहने ऐसे ही घुस के लेट जाते है. पर हम दोनो को ही नींद नही आ रही होती है

दीदी: क्या हुआ राहुल, तुझे नींद नही आ रही क्या? तब तो तू सोने को बोल रहा था?

मैं: नही दीदी सोना था, पर मेरा लंड खड़ा था, तो मुझे नींद नही आ रही.

दीदी इसको एक मौके की तरह देखती है, ताकि मेरा दर्र कम हो जाए.

दीदी: अछा तो हिला के सो जेया, बैठ जाएगा.

मैं: क्या दीदी, अभी आपके सामने कैसे कर सकता हू?

दीदी: रात को मैं सो जाती थी, तब तो तू मूठ मार लेता था. अब क्यूँ शर्मा रहा है?

मैं: सॉरी दीदी, अब से नही मारूँगा.

दीदी: अर्रे हिला ले, मैं माना थोड़ी कर रही हू. मेरे सामने भी कर सकता है, मैं कुछ नही बोलूँगी.

मैं (शरमाते हुए): ठीक है दीदी.

और कंबल के अंदर मैं लेटते-लेटते अपने लंड को हिलने लगता हू. दीदी की नज़र मेरे उपर थी. वो कंबल को देख रही थी, जो मेरे मूठ मारने से हिल रहा था. दीदी मेरे और पास आ जाती है, और करीब लेट के मेरे उपर अपना हाथ रखती है. शायद दीदी को मेरा लंड देखना था.

दीदी के सामने मैं मूठ मार रहा होता हू. ये मुझे बहुत एग्ज़ाइट कर रहा था. मैने थोड़ी हिम्मत की, और अपना हाथ दीदी के हाथ पे रखा, और दूसरे हाथ से मूठ मार रहा था. दीदी ने कुछ नही बोला, तो मैने उनका हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया.

दीदी की आँखें बंद हो गयी. पर वो कुछ नही कर रही थी, बस हाथ रखे हुए थी. तो मैने उनका हाथ अपने लंड पे रब करना शुरू किया, और फिर लंड को उनके हाथ में पकड़ा दिया. फिर मैने अपनी कमर धीरे-धीरे हिलनी शुरू कर दी. दीदी ने अपनी आँखें खोली, और मेरे लंड को तोड़ा ज़ोर से पकड़ लिया. धीरे-धीरे दीदी की पकड़ मज़बूत होती गयी.

अब उन्होने मेरा लंड हिलना शुरू कर दिया. दीदी की शरम भी डोर हो गयी, तो उन्होने मेरे उपर से कंबल हटा दिया, और लंड को देख के मूठ मारने लगी. दीदी का हाथ मेरे लंड की गर्मी बढ़ा रहा था. कुछ ही मिनिट में मेरा पानी निकालने को हो गया. मेरी साँस भारी हो गयी, और मेरे मूह से हल्की-हल्की आवाज़ आने लगी.

दीदी समझ गयी की मेरा पानी निकालने वाला था, तो दीदी ने लंड तेज़ी से हिलना शुरू कर दिया. तभी मेरे लंड से तेज़ पानी निकलता है, और सारा पानी मेरे पेट और दीदी के हाथ पे गिर जाता है. दीदी और मैं बहुत तक जाते है, और दोनो ऐसे ही सो जाते है.

सुबह दीदी उठती है, तो उनके हाथ में मेरा लंड होता है. हम दोनो बिना कपड़ों के होते है. दीदी कपड़े पहनती है, और मेरे उपर कंबल डाल देती है. दीदी मेरे सारे कपड़े कंबल के नीचे च्छूपा के चली जाती है, ताकि किसी को शक ना हो. थोड़ी देर बाद मम्मी मुझे उठाने आती थी.

मम्मी की नज़र मेरे बेड के नीचे गिरे अंडरवेर पे जाती है. शायद दीदी जल्दी-जल्दी में अंडरवेर भूल गयी थी. मम्मी अंडरवेर उठती है, और उनको मुझपे शक होता है की मनु दीदी के होते हुए क्यूँ मैं बिना अंडरवेर के सो रहा था.

आज मेरा बर्तडे था, तो उस टाइम मम्मी कुछ नही कहती है. वो बस चुप-छाप अंडरवेर उठा के बेड पे रख देती है. पर मम्मी को ये बात अंदर ही अंदर परेशन कर रही थी, की मैं अपनी बेहन के साथ बिना अंडरवेर के सोता था.

दोस्तों मेरी मम्मी भी आप सभी की मम्मी के जैसे ही बहुत रिलिजियस थी. बिल्कुल सॉफ दिल की, और भगवान में मानने वाली. पर मम्मी को पता था की लोग मॉडर्न हो रहे है, तो वो थोड़े-थोड़े खुले विचार भी रखती है.

मम्मी ने सोचा की मुझे बाद में समझाएगी जब घर पे कोई नही होगा. एक तरफ मैं और दीदी एक-दूसरे के नज़दीक आ रहे थे. दूसरी तरफ मम्मी ने फैंसला किया की वो मेरा और दीदी का भाई-बेहन का रिश्ता खराब नही होने देंगी.

अगले पार्ट में पढ़िए दीदी या मम्मी में से किसका प्यार किस पर भारी पड़ता है. आपको इस कहानी की कोंसि बात आक्ची लगती है, वो ज़रूर कॉमेंट करके बताए.

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