नंदोई के साथ ज़बरदस्त चुदाई की कहानी

नंदोई और भाभी के बीच हो रहे एरॉटिक सेक्स में आप सब का फिर से स्वागत है.

मैं डीव्यश से डोर होने लगी, और नाटक करने लगी. लेकिन डीव्यश एक पक्का खिलाड़ी था. उसको पता था एक औरत को कंट्रोल में कैसे करना है. उन्होने मुझे पीछे से पकड़ लिया, और अपने दोनो हाथ से मेरे दोनो बूब्स को मसलना शुरू कर दिया. वो लोवर के उपर से उनका लंड मेरी गांद पर रग़ाद रहे थे.

डीव्यश: भाभी आप बस एंजाय करो. कुछ ग़लत नही है. हम दोनो की इक्चा है तो अब उससे कोई फराक नही पड़ता, की कोई और क्या सोचेगा. हम दोनो यहाँ ये सब कर रहे है, वो आपके और मेरे साइवा किसी को नही पता.

मैं: आप तो कल शिवानी को सब कुछ बता दोगे.

डीव्यश: भाभी आप कहो तो नही बतौँगा.

मैं (उनके लंड पर मेरी गांद रग़ाद कर): आपने कभी कोई बात शिवानी से च्छुपाई है?

डीव्यश: आज तक मैने और शिवानी ने कोई बात नही च्छुपाई.

मैं: तो आप ये बात भी शिवानी से करोगे. मुझसे कोई झूठा वादा करने की ज़रूरत नही है.

डीव्यश अब सोफा पर बैठ गये, और मुझे उनकी गोदी में बिता दिया. वो मेरी पनटी में हाथ डाल कर मेरी छूट को मसल रहे थे. मेरी छूट तो शिवानी और विजय की हॉट चुदाई देख कर ही गीली हो गयी थी. डीव्यश मेरी छूट में उंगली डाल कर फिंगरिंग करने लगे. और दूसरे हाथ से मेरा बूब मसल रहे थे.

मैं: ह्म.. अया.. डीव्यश कुमार, ये क्या कर रहे हो आप? क्यूँ मेरी प्यास बढ़ा रहे हो?

डीव्यश: मैं आपको पसंद करता हू, और मैं आपको छोड़ना चाहता हू.

मैं अब उठ कर घुटनो पर बैठ गयी, और डीव्यश के ट्रॅक पंत में लंड बाहर निकाल कर हिलने लगी.

मैं: आपने तो मुझे चूड़ने के लिए मजबूर कर दिया. अब मेरी प्यास बुझा दो प्लीज़.

डीव्यश (स्माइल के साथ): ठीक है भाभी. पहले मेरे लंड को आचे से गीला करो. उसको आपके मूह में जाने की तलब लगी है.

मैं समझ गयी की डीव्यश फिर से मुझे अपना लंड चुसवाना चाहते थे. मैने भी स्माइल की, और मेरे बालों को बाँध कर उनकी आँखों में देखते हुए उनका लंड चूस रही थी. मैने एक प्रोफेशनल रंडी के जैसे उनका लोड्‍ा चूस रही थी. पता नही पर अब मुझे नये-नये मर्दों के लंड चूसना और उनके साथ चूड़ने की आदत लग रही थी. डीव्यश भी समझ गया था की अब मैं उनके कंट्रोल में थी, और वो मुझे जैसे चाहे वैसे ट्रीट कर सकता था.

मैं: वाह… कुमार आपका लंड तो आपके सेयेल से भी मस्त है.

डीव्यश: सच कह रहे हो भाभी?

मैं: हा इसको देख कर तो मैं संजय को चीट करने लगी हू. आप बहुत बुरे इंसान हो. मुझे भी आप लोगों जैसा बना दिया.

संजय (मुस्कुराते हुए): असली मज़ा तो दूसरे के साथ सेक्स करने में आता है. आपको आज एक नया लोड्‍ा मिल रहा है. उसकी खुशी आप के फेस पर नज़र आ रही है.

मैं (शर्मा कर): क्या आप कुछ भी बोल रहे हो! ऐसा नही है. सच तो ये है की मैं आपको पहले से पसंद करती हू. पर कभी सोचा नही था की हम दोनो के बीच ऐसा रिश्ता बन जाएगा. और मुझे आपसे प्यार हो गया है.

डीव्यश: सच कह रहे हो ना?

मैं: हा सच कह रही हू. ई लोवे योउ टू.

मैने डीव्यश के लंड पर किस और उनको आँख मार कर लॉलिपोप की तरह लंड चूसने लगी. उसके बाद मैने उनके लंड को मेरे थूक से चिकना बना दिया. डीव्यश ने मेरा फेस पकड़ कर खड़ा किया, और मेरे मूह में थूका, और मेरे लिप्स को चाटने लगे. हम दोनो का थूक मिक्स हो कर मेरे बूब्स पर लार बन कर गिर रहा था.

दोस्तों ऐसा किस का एक्सपीरियेन्स तो पहली बार कर रही थी. हमारा वो किस इतना वाइल्ड हो गया था, की पूछो नही यार. उसके बाद डीव्यश ने मुझे सोफा पर बिता दिया, और मेरी पनटी को खीच कर निकाल दिया. पहले तो उन्होने मेरी पनटी को स्मेल किया.

डीव्यश: भाभी आपकी छूट की खुश्बू मुझे मदहोश कर रही है.

मैने उनको स्माइल किया, और मेरी टाँगें उनके सामने फैला दी. वो भी मुझे सेक्सी स्माइल देते हुए मेरी चिकनी छूट को चाटने लगे. डीव्यश में कुछ तो जादू था दोस्तों. उसका किस करने का तरीका और जिस तरह मेरी छूट को चाट रहा था. वो एक्सपीरियेन्स मेरे लिए अनोखा था. ऐसा मज़ा मुझे और किसी के साथ नही आ रहा था.

शायद अब मुझे हर एक नये मर्द के साथ नया कुछ फील हो रहा था. मेरा बॉडी अब झटके मारने लगा. डीव्यश बहुत एक्सपीरियेन्स्ड था. वो समझ गया की अब मैं झड़ने वाली थी, तो वो बहुत ही स्लो मेरे ग-स्पॉट पर अपनी जीभ का टॉप लगा रहा था. इससे मैं और तपद रही थी. मेरे मूह से बहुत लाउड्ली सिसकारियाँ निकल रही थी.

मैं: डीव्यश प्लीज़ अब और ना तड़पाव. मैं झड़ने वाली हू.

डीव्यश ने अब मेरी छूट पर लंड रगड़ना चालू कर दिया. मैं चूड़ने के लिए पागल हो रही थी. मेरी छूट में इतनी खुजली हो रही थी, की मैं बस सोच रही थी कब डीव्यश मेरी चुदाई करेंगे.

मैं: जानू क्यूँ तडपा रही हो?

डीव्यश: ऐसे नही भाभी, पहले आपको मेरी बात माननी पड़ेगी.

मैं (उनको मेरे उपर खीच कर उनके लिप्स को काट कर): जानू अब मैं आपकी हू. आप मेरे मलिक हो और मैं अपनी रंडी हू. जब कहोगे, जहाँ कहोगे मैं आपसे चूड़ने के लिए तैयार रहूंगी.

मैं (तोड़ा एमोशनल हो कर): डीव्यश आप पहले हो जो मुझे ऐसे छ्छू रहे हो, और प्यार कर रहे हो. मैने आज तक किसी गैर मर्द से रिश्ता बनाया नही है. ना बनाना चाहती थी. लेकिन मुझे आप पर भरोसा है क्यूंकी मैं आपसे प्यार करने लगी हू. प्लीज़ मुझे कभी धोका नही देना. ई लोवे योउ. डीव्यश… ई लोवे योउ

डीव्यश (मेरे लिप्स पर किस करते हुए): लोवे योउ टू बेबी.

अब डीव्यश ने मुझे ई लोवे योउ कहते हुए मेरी छूट में लंड उतार दिया. मुझे इतना सुकून मिला की पूछो मत. मैने उनको बाहों में भर लिया, और बहुत एमोशनल और रोमॅंटिक हो कर उनसे चुड रही थी. वो बहुत स्लोली मुझे छोड़ रहे थे, और मेरी छूट पानी छ्चोढते हुए चुड रही थी. क्या फीलिंग थी वो स्लोली चुदाई होने पर. मेरी बॉडी पर गूसेबूमप्स आ गये थे. मैने उनकी पीठ पर हाथ घुमा रही थी, और रलोब को चाट रही थी.

डीव्यश: बेबी.. ई लोवे योउ. ऐसा मज़ा आज तक किसी ने नही दिया.

मैं: दूसरी सब तो आपसे अपनी हवस मिटाने के लिए चुड़वति होंगी. पर मैं तो आपसे सक्चा प्यार करती हू. आपको पहली बार देखा तब से मैं आपको पसंद करती थी.

डीव्यश: तो आज तक मुझे कहा क्यूँ नही? मैं भी आपको फर्स्ट टाइम देखा तब से चाहने लगा था.

मैं: मुझे माफ़ करना. आपसे इतने सालों तक डोर रही. मैने आपको दिल से अपना मान लिया है. आप मुझे इस्तेमाल करके छ्चोढ़ तो नही दोगे ना?

डीव्यश (मेरे फेस पर से बालों को हटा कर): कभी नही बेबी.

वो मेरी लिप्स को चूसने लगे. मैं भी उनको किस में रेस्पॉन्स देने लगी. वो मेरी ऐसे ही चुदाई कर रहे थे. उसके बाद वो सोफा पर बैठ गये, और मैं उनकी गोदी में बैठ कर उछाल-उछाल कर चूड़ने लगी. वो चुदाई करते हुए मेरे निपल चूस रहे थे, और मैं उनके सर को सहलाते हुए सिसकारी भर रही थी. हमारा सेक्स स्लो और रोमॅंटिक हो रहा था.

उन्होने अब मुझे सोफा के उपर घोड़ी बनाया, और नीचे बैठ कर पीछे से मेरी छूट को चाटने लगे. उसके बाद मेरा एक पैर सोफा के उपर रख कर पीछे से डॉगी स्टाइल में चुदाई करने लगे. उन्होने मेरे दोनो बूब्स को पीछे से पकड़ लिया था, और मैं आहह उउई की आवाज़ करते हुए चुड रही थी.

डीव्यश: भाभी मैने बहुत औरतों और लड़कियों की चुदाई की, पर आप जैसी आज तक नही मिली. मैने आप जैसा फिगर नही देखा, ना आप जैसी फीलिंग किसी में आई.

मैं: जानू ये हमारा प्यार है. हम एक-दूसरे से प्यार करते है ना, इसलिए.

डीव्यश (मुझे सीधा घुमा कर मेरी आँखो में देखते हुए): आप सच कह रहे हो ना? भाभी आप प्लीज़ प्यार का मज़ाक ना करे.

मैं (उनको थप्पड़ मार कर गले लगा लिया): मैं मॅर जौंगी अगर आपने कभी मेरे प्यार को मज़ाक कहा तो. आपसे सक्चा प्यार किया है, तभी तो आपसे सेक्स कर रही हू. आप मुझे शिवानी जैसी ना समझे.

डीव्यश: भाभी सॉरी, मैं आपको ऐसा हर्ट करना नही चाहता था. लेकिन सच ये है की आपके साथ मुझे जो फील हो रहा है. उसके बाद मुझे भी आपसे सक्चा प्यार हो गया है.

मैं: अगर कभी मुझे धोखा देने की कोशिश की, तो जान निकाल दूँगी. डीव्यश आप मुझे जैसे भी रखोगे मैं आपकी बन कर रहना चाहती हू.

डीव्यश मेरी बातों से भावुक हो गये थे. मैने उन पर मेरा जादू चला दिया था. वो मुझसे लिपट गये. मेरी आँखों में भी आँसू आ गये थे. मैं उनके सामने देख कर मुस्कुराइ, और अपनी टाँगें फैला कर सोफा पर लेट गयी. मैने अपनी बाहों को खोला और बोली-

मैं: आइए मुझे प्यार करे. मैं आपकी दीवानी हू.

डीव्यश ने मेरी छूट में लंड डाला और बोले: मैं भी आपके प्यार का भूखा हू. हम दोनो कभी जुड़ा नही होंगे.

उसके बाद वो मुझे बहुत सही तरीके से छोड़ रहे थे. वो चुदाई के दौरान मैं दो बार झाड़ गयी. मैं नीचे से अपनी गांद उठा कर छुड़वा रही थी. हम दोनो ने एक-दूसरे को बहुत प्लेषर दिया. आख़िर में डीव्यश मेरी छूट में झाड़ गये.

मैं: जानू आप ये बात किसी से नही कहना. मेरी बहुत बदनामी होगी.

डीव्यश: आप कहो तो शिवानी से भी नही कहूँगा.

मैं: शिवानी से आप कहना, लेकिन किसी और से नही कहना. और मेरी एक बात मनोगे?

डीव्यश: डार्लिंग आप हुकुम करो. ऐसे पूछना थोड़ी होता है.

मैं (मुस्कुराते हुए): आप शिवानी को ये नही कहना की हम दोनो ने उन दोनो की चुदाई देखी है. ये बात मैं खुद उसको कहने वाली हू. ये राज़ हम तीनो के बीच रहना चाहिए. विजय को पता नही चलना चाहिए की मैने आपके साथ सेक्स किया है, उसको बुरा लगेगा. मैं शिवानी से भी कह दूँगी.

डीव्यश: वो वैसे भी नही कहेगी. कोई भी लड़की अपने माइके वालो की बातें बाहर नही आने देती.

डीव्यश की बात तो सच थी. मैं भी अपने भाइयों के साथ चूड़ी थी. वो बात को भी राज़ ही रखा था. हम दोनो ऐसे ही नंगे लिपट कर पड़े रहे. उसके बाद हमने कपड़े पहने, और लिपट कर सो गये. सुबह हम जल्दी घर के अंदर चले गये. हम नीचे आए तब शिवानी छाई बना रही थी.

उसने वहीं पर्पल सारी पहनी थी. मैने विजय की तरफ देखा तो उसकी आँखें बता रही थी की वो रात भर नही सोया. मैने उसको इशारे से पूछा रात कैसी गयी, तो उसने भी बताया की बहुत मज़ा आया. मैं अब शिवानी के पास किचन में गयी.

मैं: शिवानी रात कैसी गयी? विजय ने ज़्यादा परेशन तो नही किया?

शिवानी: नही भाभी, विजय भाई मुझे क्यूँ परेशन करेंगे?

मैं: चल अब भोली नही बन. मैने रात को सब देख लिया, और सुन भी लिया. मेरी मासूम दिखने वाली ननद कितनी बड़ी रंडी है.

शिवानी (फुल टेन्षन में): भाभी मुझे माफ़ कर दो. आज के बाद फिर कभी ऐसा नही करूँगी.

मैं (उसके लिप्स पर उंगली रख कर): एक बात कहूँ? आप दोनो की ज़बरदस्त चुदाई देख कर मैं और डीव्यश कुमार ने भी…

शिवानी (स्माइल के साथ): सच भाभी?

मैं: हा.. और इतने सालों से अकेले मज़ा लूट रही हो. कभी अपनी भाभी का ख़याल नही आया?

शिवानी: भाभी डीव्यश तो पहले से आप पर लट्तू थे. पर हमे दर्र था की आप ये सब आपको समझना कैसे है.

मैं: और तू विजय को बताना नही मैने डीव्यश कुमार के साथ किया है. वो मेरे उपर बहुत गुस्सा करेगा.

शिवानी: भाभी आप नही भी कहते तो भी उसको नही बताने वाली थी. भाभी कैसा लगा अपने नंदोई के साथ, मज़ा आया?

मैं (शर्मा कर): नंदोई जी तो बहुत शैतान है. ऐसा मज़ा तो तुम्हारे भैया के साथ भी नही आया.

शिवानी: विजय भी कुछ कम नही है. पूरी रात मुझे सोने नही दिया. आदमी है की मशीन.

मैं (तोड़ा डरते हुए): शिवानी प्लीज़ ये बात बाहर ना जाए.
मुझे बहुत दर्र लग रहा है.

शिवानी: डॉन’त वरी भाभी. मैं सब संभाल लूँगी.

उसके बाद हमने हग किया, और छाई लेकर आए. तब तक विजय और डीव्यश फ्रेश हो गये थे. हम ने छाई पी और हमारे घर आ गये. उस दिन के बाद विजय कुछ 10-12 दिन इंडिया रुका. इतने टाइम में उसने 2 बार शिवानी से सेक्स किया, और एक बार शालिनी को उसके घर पर छोड़ कर आया. मोहित की वाइफ नही थी, तो वो तो एक वीकेंड को हमारे घर पर नाइट स्टे किया. उस रात मेरी थ्रीसम चुदाई हुई.

मैं आपकी शीला आप सब को अलविदा कहती हू. यहाँ मेरी स्टोरी ख़तम होती है, पर मेरी लाइफ में चुदाई का सिलसिला आज भी चालू है. मेरे पास समय की बहुत कमी है. कोशिश करूँगी किसी और कहानी से आप लोगों तक मेरी चुदाई के किससे सुनौउ. धन्यवाद.

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