दीदी की ननद की बेटी की चुदास

मेरा नाम रंगीला है.. मैं 28 साल का हट्टा-कट्टा और एकदम गोरा चिट्टा युवक हूँ।
मैं आप लोगों के लिए मेरी एक नई और सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ, यह घटना यही साल भर पहले की है।
जवानी की शुरूआत में ही मुझे मेरी भाभी ने अच्छा ख़ासा ज्ञान और अनुभव दे दिया था.. जिसके कारण मैंने अपनी बहन और भाभी दोनों से सेक्स का मजा बहुत लिया है।

उम्र के साथ-साथ मेरी सेक्स की भूख भी बढ़ती जा रही थी, अब तो जिस भी सेक्सी लड़की को देखता.. तो उसे चोदने के लिए बेचैन हो उठता… किसी भी लड़की की चूचियां देखते ही मेरे हाथों में खुजली होने लगती, उसकी उभरी गांड को देखते ही लंड खड़ा हो जाता।
एक दिन मैं अपने घर पर ही था कि घर के बाहर गाड़ी के रुकने की आवाज सुनाई दी। मैंने मेनगेट खोला तो देखा मेरी दीदी की ननद ऑटो से उतर रही थीं.. साथ में उनकी बेटी सपना भी थी।
वे लोग बिहार के हाज़ीपुर के रहने वाले हैं।
मैंने उन दोनों का स्वागत किया और उन्हें घर के अन्दर ले गया, मेरे घर वाले उन्हें देख कर बहुत ही खुश हुए।
थोड़ी बहुत बातचीत के बाद बेबी दी (दीदी की ननद का नाम) गेस्ट रूम में फ्रेश होने के लिए चली गईं।
यहाँ मैं बता दूँ कि दीदी की ननद जो कि मुझसे बड़ी थीं.. उन्हें भी मैं दीदी कह कर ही बुलाता था।
सपना अभी भी हम लोगों के पास बैठी थी, सपना से बातचीत के बाद पता चला कि वो हमारे शहर में एग्जाम देने आई है।
सपना बहुत ही खूबसूरत और बोल्ड लड़की थी, वो मुझे बहुत ही सेक्सी लग रही थी, पर मैं उसे जी भर के देख नहीं पा रहा था क्योंकि वो मेरी भतीजियों के साथ थी, वे सब आपस में बातें कर रही थीं।
सपना की उम्र यही कोई 20 साल की होगी, उसकी चूचियाँ संतरे के आकार की होंगी और उसकी गांड भी बड़ी और उठी हुई थी।
वो लैगीज और शार्ट कुरती में कयामत ढा रही थी।
चूंकि मेरी भतीजियां भी उसे घेर कर बैठी थीं.. तो मैं चोरी से सबकी नजरें बचा कर सपना की नुकीले पहाड़ सी तनी हुई चूचियों को देख कर अपने लंड को मसल रहा था।
मैं मन ही मन उसे चोदने का प्लान सोच रहा था। वो हमारे यहाँ करीब एक सप्ताह रुकने वाली थी, यह सोच कर मैं बहुत खुश हो रहा था कि एक सप्ताह में साथ दिन होते हैं यानि कि जब दुनिया एक सप्ताह में सात बार घूम सकती है तो क्या कोशिश करने से मैं एक बार सपना की बुर नहीं चूम सकता।
खैर.. जैसे-तैसे दिन बीता। मैं ज़्यादा समय सपना के आगे-पीछे मौके की तलाश में घूमता रहा.. पर उसके चूचियों को छूने का कोई मौका नहीं मिला, हाँ एक-दो बार मैंने उसके चूतड़ों को हल्के हाथों से टच जरूर कर लिया था.. जिसका उसे पता नहीं चला.. या शायद उसे पता भी चल गया होगा.. पर मैंने इस अंदाज में उसके गोल मुलायम उभरे हुए चूतड़ों को टच किया था कि उसे लगा होगा कि ये अंजाने में हुआ।
शरीर से चिपकी हुई मुलायम कपड़े की लैगीज के ऊपर से भी मैंने उसकी गांड की गर्मी को महसूस किया था।
मेरा लंड का तो हाल पूछो ही मत दोस्तो.. अगर मैं पजामे के अन्दर चड्डी नहीं पहना होता.. तो शायद लंड महाशय अब तक पजामे को फाड़ चुके होते।
जब वो चलती.. तो मेरी नजर उसकी बल खाती पतली कमर के साथ ऊपर-नीचे होती गांड पर ही जम कर रह जाती। बुर की प्यास से मेरा गला बार-बार सूख रहा था.. जिसे पानी नहीं भिगो पा रहा था।
उस वक़्त मेरे पास मेरी प्यास बुझाने वाला और कोई भी नहीं था।
इतनी हसीन लड़की को अपने घर में पा कर मैं चुदाई करने के लिए बेचैन हो गया था। अगर सपना कभी अकेली मिलती.. तो मैं उसे खींच कर बात भी करता.. पर मेरी भतीजियां उसे अकेला छोड़ ही नहीं रही थीं।
किसी तरह समय बीत रहा था।
सपना को चोदना है.. इसके अलावा मेरे दिमाग़ में और कुछ आ भी नहीं रहा था कि मैं कोई प्लान भी बना सकूँ। उसकी चूचियां और चूतड़ ही मेरे दिमाग़ में घूम रहे थे। उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल था.. जिसे मेरी भाभी ने पढ़ लिया।
जब सब रात का खाना खा रहे थे, तो भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने को कहा। भाभी की उम्र अभी करीब 40 साल की होगी। अब वो मुझे उतना समय नहीं दे पाती थीं क्योंकि मेरा पूरा घर बच्चों से भर गया था। साथ ही भाभी का भी सेक्स में इंटरेस्ट कम हो गया था, बस अब वो भैया तक ही सिमट कर रह गई थीं, कभी कभार ही महीनों में मुझे चान्स मिलता.. जब भैया कहीं बाहर होते।
खैर.. मैं भाभी के रूम में गया, तो भाभी मेरा इंतजार कर रही थीं। भाभी ने मुझे अपने पास बैठाया.. फिर मुझसे बोलीं- क्या बात है तुमने खाना क्यों नहीं खाया और इतने परेशान से क्यों हो?
मैं भाभी से क्या छुपाता.. मैंने उन्हें सच-सच बता दिया कि सेक्स की भूख मुझे बेचैन कर रही है।

यह कहानी भी पड़े  प्रिंसिपल सर के साथ मस्ती

Pages: 1 2 3 4 5

Dont Post any No. in Comments Section

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!