नाज़ुक सी कली नाज़नीन

मेरी उम्र 46 साल की है और सेहत एकदम टनाटन है, शारीरिक और कामुक दोनों तरह से परफेक्ट हूँ।

मगर बीवी के बीमार होने की वजह से कामुक गतिविधि रुक गई।

ऐसे ही एक दोस्त से इस विषय में बात की तो उसने एक दलाल के ज़रिये एक कॉल गर्ल बुलवा ली जिसे हम दोनों यारों ने बारी बारी चोदा।

मगर यह तो ऐसा काम है कि भूख की तरह फिर से जाग जाता है।

तो 4-5 दिन बाद मेरा फिर से किसी फ़ुदिया को चोदने का दिल करने लगा।
उस दलाल का मोबाइल नम्बर तो मेरे पास था ही, मैंने नंबर मिलाया और उससे बात की।

बातों बातों में उसने मुझसे पूछा- सर आप यह बताइए कि आपको कैसा पीस चाहिए, मेच्यौर, आंटी, लड़की, मोटी, पतली, कॉलेज या स्कूल गर्ल? और आपका बजट कितने तक हो सकता है?

कॉलेज गर्ल का नाम सुन कर तो मैं भी चौंक गया।
मेरी बेटी भी तो कॉलेज में पढ़ती है।

मैंने उससे पूछा- क्या किसी भी कॉलेज की लड़की ला सकते हो?

उसने जवाब दिया- जी बिल्कुल, आप जिस कॉलेज का नाम लें उसी का माल हाजिर कर देंगे… बताइए?

मैंने पहले तो थोड़ा सा सोचा फिर अपनी बेटी के कॉलेज का नाम बताया।

‘ओके सर… अपने लिंक हैं वहाँ, बहुत सी लड़कियाँ पैसे के लिए, झूठी शान दिखाने के लिए यह काम करती हैं। कोई ख़ास क्लास, सेक्शन या लड़की का नाम?’
उसने पूछा।
तो मैंने अपनी बेटी की ही क्लास बता दी।

उसने जवाब दिया- ठीक है सर, मैं देख लेता हूँ, पता करके आपको बता देता हूँ।

फ़ोन काटने के बाद मैं सोचने लगा कि अगर खुदा न खास्ता इसने मेरी ही बेटी का नाम बता दिया, या अगर नाम न भी बताया, सीधा मेरे सामने ला कर उसे खड़ा कर दिया तो मैं क्या करूँगा।

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पहले सोचा कि कैंसल कर देता हूँ…
फिर सोचा पहले पता तो लगे… फिर देखी जाएगी।

खैर थोड़ी देर बाद उसका फ़ोन आया- सर आपके बताये हुए कॉलेज और क्लास की एक लड़की मिल गई है, बड़ी मुश्किल से तैयार हुई है, बताइये कहाँ लेकर आऊँ?

मैंने कहा- मैं होटल में जा रहा हूँ, रूम बुक करके तुम्हें कमरा नम्बर बता दूँगा, तुम सिर्फ लड़की को अन्दर भेजना, खुद मत आना।

मैंने उसे ताकीद की, ताकि अगर लड़की मेरी जान पहचान की हुई तो इस दलाल को पता न चले।

मैं अपने एक दोस्त के ही होटल में पहुँचा, कमरा लेकर मैंने फिर उस दलाल को फ़ोन किया और होटल का नाम और रूम नम्बर बता दिया।

मैं कमरे में जाकर बैठ गया।

करीब बीस मिनट बाद दरवाज़े पर दस्तक हुई, मैं दौड़ कर बाथरूम के अन्दर गया और अन्दर से ही कहा- खुला है, आ जाओ।

जब लड़की अन्दर आई तो उसने दरवाज़ा लॉक कर दिया और बेड पर जाकर बैठ गई।

पहले मैंने दरवाजे से झांक कर देखा, लड़की देखी हुई नहीं थी।

कमरे में एक 19-20 साल की खूबसूरत सी लड़की बैठी थी, अच्छा खासा, रंग-रूप, सुंदर बदन, टॉप और लेग्गिंग में बड़ी प्यारी लग रही थी।

मैं ऐसे बाथरूम से बाहर निकला जैसे कोई ख़ास बात न हो।

मैं उसके पास जाकर बैठ गया।

वो उठ कर खडी हो गई, मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे बिठाया- क्या नाम है तुम्हारा?

मैंने पूछा- नाज़नीन…

‘नाज़नीन’ मैंने अपने दिमाग में सोचा, इसका नाम सुना है, मेरी बेटी इस नाम की अपनी किसी क्लासमेट का ज़िक्र किया करती है।

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मैं बेड पे लेट गया तो वो अपना टॉप उतारने लगी।

‘अरे इतनी जल्दी क्या है बेटा…’ मेरे मुँह से बेटा निकल गया।
‘आराम से… मुझे कोई जल्दी नहीं है… क्या तुम्हें कोई जल्दी है?’

‘नहीं मैं तो तीन बजे तक फ्री हूँ।’ उसने बताया।
‘मतलब तीन बजे कॉलेज की छुट्टी होती है तब तक…’

मैंने उसे अपने पास लेटाया, वो मुझसे चिपक कर लेट गई, अक्सर मेरी बेटी भी मुझसे ऐसे ही चिपक कर लेट जाती है, मगर मुझे कभी ऐसा एहसास नहीं हुआ।

सारा सोच का फर्क है।

उसने अपना सर मेरे कंधे पे रखा हुआ था और मैं उसकी पीठ पे हाथ फेर रहा था।

मैंने उससे काफी देर बातें की, उससे उसकी क्लास की सब लड़कियों के बारे में पूछा, सच कहूँ तो मैं तो यह जानना चाहता था कि कहीं मेरी बेटी तो ऐसे किसी चक्कर में तो नहीं पड़ गई।

मगर उसने बताया के विक्की (मेरी बेटी) एक बहुत ही शरीफ और पढ़ाकू किस्म की लड़की है, न उसका कोई बॉयफ्रेंड है और न ही कोई और लफड़ा!

जब उसने यह बताया तो मेरे मन में अपार ख़ुशी हुई।

मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गाल पर चूम लिया।

जबउसे बाँहों में भरा तो उसके दो नर्म नर्म नाज़ुक से स्तन मेरे सीने से लग गए।

मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसके ब्रा के ऊपर हाथ फेरा- यू आर वैरी सेक्सी नाज़नीन…

मैंने कहा तो उसने भी ‘थैंक्यू’ कह कर जवाब दिया।

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