मेरी नादान मोहब्बत सेक्स कहानी

nadan mohabat ke sath sex kahani हेलो दोस्तो मैं आपका दोस्त राज शर्मा एक और नयी कमसिन कली की चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हूँ अब ये फ़ैसला तो आप ही करेंगे कहानी आप सब को कैसी लगी दोस्तो कोमेंट देना मत भूलना
मेरी उम्र करीब 32 साल है मैं एक प्राइवेट कोम्पनी मैं मेनेज़र हूँ एक दिन शाम को ऑफीस से जल्दी घर जा रहा था.रास्ते मे अचानक एक बोल्ल मेरे सिने पर लगी.मेने नजर उठा कर देखा तो एक घर की छत पर एक 15 साल की लड़की ओर एक 10 साल का लड़का खड़े थे,जो की शायद खेल रहे होगे ओर उनकी बोल्ल मुझे आकर लगी.मेने वो बोल उठाई ओर उनकी तरफ फैंकते हुए कहा की ध्यान रखकर खेलो, किसी को लग जाएगी.वो कुछ भी नही बोले.

ओर मेरी तरफ देखते रहे.फिर मे जाने लगा.काफ़ी दूर जाकर मेने सोचा की क्या बात हो सकती हे ये बच्चे मुझे बड़े गोर से देख रहे थे.इसी कशमकश मे मेने पलट कर देखा,तो मेने पाया की वो दूर से अभी तक भी मुझे देख रहे थे.फिर मे चला गया.ओर अपने घर आकर अपने कामो मे मशरूफ हो गया.दूसरे दिन मे रात को 9 ब्जे वही से निकला , तो मेने देखा की वो 15 साला लड़की छत पर खड़ी किसी का इन्तिजार कर रही थी.मेने गुज़रते हुए एक बार उसकी तरफ देखा, तो पाया की वो बड़े ही गोर से मेरी तरफ देख रही हे.मुझे एसा महसूस हुआ की शायद वो मेरा ही इन्तिजार कर रही थी.खैर मे चुप चाप वाहा से चला गया.मेने इस बात को नॉर्मल ही लिया.तीसरे दिन ऑफीस मे ज़्यादा काम होने की वजह से मे रात 11 बजे फारिग हुआ.ओर घर की तरफ जाने लगा.

तो मेने देखा की वही लड़की छत पर बैठी मेरा इन्तिजार कर रही है.मैं हेरत भरी निगाहो से उसे देखता हुआ चला गया.अब रात को मेरा सोना भी दुश्वार हो गया.सोचता रहा की ये लड़की जिसकी उम्र मुझसे आधी भी नही हे,ये क्यू मेरा इन्तिजार करती है ? आख़िर क्या बात है,ये रोजाना मुझे मोहब्बत भरी निगाहो से क्यू देखती है.ओर ये क्या चाहती हे.इन्ही ख़यालो मे मैं कब नींद की आगोश मे चला गया मुझे पता भी नही चला.इस तरह ये सिलसिला कई माह तक चला मे रोजाना ऑफीस से घर को जाता ओर देखता रास्ते मे वही लड़की अपने घर की छत पर मेरा इन्तिजार कर रही होती.उसे ये भी मालूम था की शुक्रवार को मेरी छुट्टी रहती है इसलिए वो शुक्रवार को इन्तिजार नही करती.मुझे भी पता नहीं क्या हो गया की गुज़रते हुए मे उसकी छत पर ना चाहते हुए भी ज़रूर देखता. एक बार रात को मे ऑफीस से लॉट रहा था तो मेने उस लड़की की छत पर देखा मुझे वो नजर नहीं आई.

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फिर मेरी नज़र उसके घर के दरवाजे पर पड़ि , मेने देखा की वो दरवाजे पर खड़ी शायद मेरा ही इन्तिजार कर रही थी.मुझे आता देख कर वो मेरी तरफ आने लगी.ओर मेरे पास आकर एक लेटर मेरी तरफ बढ़ाते हुए बोली की ये लो, ये आपके लिए है.मेने पूछा की ये क्या हे ? तो वो बोली की इसे घर जाकर पढ़ना सब समझ मे आ जाएगा.मेने कुछ सोच कर वो लेटर लेलिया.ओर चलने लगा.घर पहुचते ही मेने जल्दी से उस लेटर को खोला ओर देखा , तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गई , उसमे लिखा था ” ए अजनबी इंसान, जब से आपको देखा है आप ही के ख़यालो मे गुम हू.जिस दिन आपका दीदार न्ही होता वो दिन मेरी जिंदगी का सब्से बेकार दिन होता है.रोजाना आपके दीदार से अपनी आँखो की प्यास बुझाती हू.ओर आपके दीदार के लिए दिन भर रात के आने का इन्तिजार करती हू.हर वक्त आपके ख़यालो मे गुम रहती हू, खाना पीना खेलना कुछ भी अछा न्ही लगता.इसे मे क्या कहूँ ,

मोहब्बत का नाम दुगी तो शायद आपको बुरा लग जाए.की आपकी ओर मेरी उम्र मे बहुत ज़्यादा फरक है.मगर प्यार उम्र को न्ही देखता , दिल को ओर उसके ज़ज्बात को देखता है.मे न्ही जानती की आप मुजसे मोहब्बत करेगे या न्ही मगर मे आपसे बेहद मोहब्बत करने लगी हू.अगर मुझे अपनी मोहब्बत के काबिल समझो तो मेरे लेटर का जवाब ज़रूर देना.ये लेटर पढ़कर मे सोचता ही रह गया , ये नादानी है या प्यार ? वो लड़की अभी तक बच्ची है,फिर उसने ये सब केसे किया क्यू किया.इसी तरह सोचते सोचते मुझे नींद आगाई.ये प्यार न्ही बलकी ये तो बचपना है,नादानी है.मेने सोचा की करू भी तो क्या करूँ.फिर इसमे मुझे अपनी भी कुछ ग़लतिया नजर आई,वो ये की क्यू मे रोजाना वाहा से गुज़रता हू.ओर क्यू मेरी नज़र उसे देखती है.मुझे अपने उपर सरमींदगी महसूस हुई.फिर मेने सोचा की इसको समझना चाहिए.मेने एक जवाबी लेटर लिखा जिसमे मेने उससे अकेले मे मिलने की ख्वाहिश का इज़हार किया.वो पढ़कर बहुत खुश हुई.ओर मिलने को राज़ी हो गई.एक पार्क मे हम दोपहर के वक्त मिले.

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मेने उसे कहा की देखो अभी तुम बहुत छोटी हो, तुम्हारी इन सब चीज़ो की उम्र न्ही है.तो वो बोली की प्यार उम्र न्ही देखता.मेने कहा की जिसे तुम प्यार का नाम देती हो वो प्यार न्ही , बलकी नादानी हे, बचपना है.वो बोली की आप मुजसे प्यार करते है या न्ही मे न्ही जानती , मगर मे आपसे अपनी जान से ज़्यादा मोहब्बत करती हू.मेने उसे हर तरीक़े से समझने की कोशिशे की मगर वो कम उम्र लड़की मेरी हर बात का जवाब देकर मुझे खामोश कर देती.आख़िर मे मेने कहा की आज के बाद मे उस रास्ते से न्ही गुजरगा, जहा तुम रहती हो.वो बोली की मे फिर भी इन्तिजार करूगी.फिर वो चली गई.ओर मे भी घर आ गया.मे हर वक्त यही सोचता रहता की इसकी नादानी इसकी जिंदगी बर्बाद कर देगी,

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