मां के साथ बेटे की हवस भरी हरकतों की कहानी

मेरा नाम जगदीश (बदला हुआ) है। हम परिवार में तीन भाई और मम्मी पापा है। मेरे पापा आर्मी में है तो अक्सर साल भर बाहर ही रहते हैं, और सिर्फ गर्मियों की छुट्टियों में ही घर आते हैं । घर में हम 4 लोग ही रहते हैं।

मेरी मम्मी (सुनैना) की उम्र 44 साल है। 5 फुट 3 इंच की एक-दम दूध जैसी सफेद औरत है, जिनके बाल एक-दम काले-काले लंबे, और कमर तक आते है। मम्मी की शादी 18 साल में ही हो गई थी, क्योंकि वो बहुत जल्दी ही आकर्षक यौवन की मालकिन बन गई थी। मैं एक-दम अपने पिता जी पर गया हूं। पर कभी-कभी सोचता हूं कि मेरे पिता जी को मेरी मम्मी जैसी अप्सरा कहां से मिली।

खैर यह तो होगी हमारी पारिवारिक जानकारी। अब मैं आपको बताता हूं कि कैसे मम्मी ने अपने बेटे के प्यार में खुद चुदवा ही लिया। बात उस समय की है जब मेरी मम्मी की उम्र 41 साल थी और मैं 21 साल का था, जिसने पोर्न देखना शुरू कर दिया था, पर कभी सोचा नहीं था कि मेरी मम्मी ही मेरे सपनो की रानी बनेगी।

हमारे घर में तीन रूम है। एक में दोनों भाई सोते थे, एक में मैं और मम्मी 1 बेड पर साथ सोते थे। पापा नौकरी में बाहर ही रहते थे। जब वो आते थे, तब मैं भाइयों के साथ सोता था, वरना मम्मी के पास ही सोता था। बेड पति-पत्नी के सोने के लिए एक-दम सही था। घर में दो कूलर थे। एक भाइयों के रूम में लगता था, और एक हमारे कमरे में।

मेरी मां रात को साड़ी पहन कर नहीं सोती है, वह एक मैक्सी पहन कर सोती है। कभी-कभी मम्मी मैक्सी के अंदर बिना ब्लाउज के सिर्फ ब्रा पहन कर सोती थी। मम्मी कूलर वाली तरफ सोती थी और मैं उनके पीछे की तरफ, क्योंकि मुझे ठंड ज्यादा लगती थी।

एक रात की बात है। मुझे बुखार हुआ था। मैं जल्दी खाना खा कर आया और बिस्तर पर जाकर सो गया। कुछ देर बाद मम्मी आई और उन्होंने मेरे सिर पर विक्स लगा कर मालिश की, फिर बाहर चली गई। मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला। रात करीबन 1:00 बजे मुझे ठंड लगने लगी, तो मेरी आंख खुली।

मैं ठंड से कांप रहा था‌। मैंने देखा कि मम्मी आज मेरी जगह पर सोई थी, और मैं उनकी जगह कूलर के सामने सोया था। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। तो मैंने कूलर बंद कर दिया और वापस जाकर सो गया। थोड़ी देर बाद मम्मी को गर्मी लगने लगी तो मम्मी उठी और वापस कूलर चालू करके सो गई।

बाद में मुझे वापस ठंड लगने लगी तो मैं दूसरी तरफ मुंह करके सोने लगा। तभी मेरे हाथ पर कुछ गर्मी सी महसूस हुई। मैंने ध्यान से देखा तो पाया कि मेरा हाथ मम्मी के पेट से सटा हुआ था। क्या गजब का एहसास था, मखमली सा। मन कर रहा था कि यही गर्मी मेरे पूरे शरीर को मिले।

मैंने अपना हाथ मम्मी के पेट के नीचे किया और पेट से थोड़ा सा अंदर की तरफ कर दिया। इससे मेरे हाथ की कलाई पूरी मम्मी के पेट के नीचे दब गई। क्या गजब एहसास था गरम-गरम, मुलायम मुलायम। मम्मी के पेट किसी मखमली तकिए की तरह लग रहा था।

मेरी मम्मी मोटी नहीं है, बस हल्का सा पेट बाहर की तरफ है। नॉर्मली इस उम्र तक कुछ पेट बाहर आ ही जाता है। 5-10 मिनट तक मैंने हाथ को ऐसे ही रहने दिया। फिर मन में गुदगुदी होने लगी कि क्यों ना कुछ और आगे बढ़ कर शरीर को भी टच किया जाए।

मैंने हिम्मत करके अपना हाथ पेट के नीचे से निकाला। मम्मी ने कोई हरकत नहीं की। मम्मी शांति से सोई हुई थी। कमरे में धीमी सी रोशनी थी नाइट बल्ब की। मम्मी मेरी तरफ मुंह करके सोई थी। उनके चेहरे पर थकान साफ दिखाई दे रही थी। मैंने अपना सिर आगे करके मम्मी के मुंह के एक-दम सामने किया और ध्यान से देखने लगा। आज मैं अपनी मम्मी के चेहरे को बड़े ध्यान से देख रहा था।

आज मुझे मम्मी का चेहरा कुछ अलग सा लग रहा था। वह आंखें जो पलकों से बंद थी, ढेर सारे समुद्र की गहराई को छुपाई हुई थी। यह गुलाबी-गुलाबी मखमली से होठ, जिसे पीने के लिए कोई भी हद से गुजर जाए। वो रेशमी से बाल, जो कुछ सुर्ख गालों पर थे, और बाकी पीछे। मैंने बड़ी सावधानी से इन बालों को उंगली से पीछे किया।

मम्मी के गाल जैसे बर्फ पर रूहअफजा मिला के रखा हो। मम्मी अपने पैर मोड़ कर सोई थी, इस वजह से मम्मी की कमर पीछे हो गई थी और मम्मी के घुटने आगे थे। मैंने सोचा पहले चेक कर लिया जाए कि मम्मी गहरी नींद में सोई थी कि नहीं।

मैंने अपना हाथ मम्मी के पेट के ऊपर रखा और बिना हलचल किए वैसे लेटे रहा। तीन-चार मिनट तक कोई हलचल नहीं हुई। मैंने एक आंख खोल कर देखा तो मम्मी अभी भी गहरी नींद में सोई हुई थी। फिर मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गई। मैंने जो हाथ पेट के ऊपर रखा था, उससे हल्के-हल्के मम्मी के पेट के अगले हिस्से को सहलाना शुरू कर दिया। क्या गजब एहसास था। जैसे मखमली तकिये को हाथ लगने पर जो एहसास मिलता है, उससे भी गजब एहसास मम्मी के पेट से आ रहा था।

कूलर की ठंडी हवा में मम्मी के शरीर की गर्मी मेरा हाल बेहाल कर रही थी। तीन-चार मिनट ऐसे ही सहलाने के बाद भी जब मम्मी की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई, तो मैं समझ गया कि मम्मी गहरी नींद में सो चुकी थी। मैंने अपनी चादर हटाई, और जितना हो सके मम्मी के करीब जाकर लेट गया। मैं 5 फुट 7 इंच का था।

मैंने मम्मी के मुड़े घुटने को अपने पेट के निचले हिस्से तक आने दिया, जिससे मेरा मुंह और मम्मी का मुंह आमने-सामने आ गए। हालांकि मम्मी का पेट वाला भाग पैर मुड़े होने के कारण दूर ही था। पर अब मैं अपने पेट पर मम्मी के घुटने से आने वाली गर्मी को महसूस कर पा रहा था। और मेरे चेहरे के बहुत करीब होने के कारण मम्मी की सांसे मुझे महसूस होने लगी थी। अब मैंने इस हालत में अपने उपर वापस से चादर डाल ली, तांकि मम्मी को कोई शक ना हो।

फिर 5-10 मिनट तक मैं मम्मी के पेट को सहलाता रहा। मैंने अपने हाथ को थोड़ा और आगे की तरफ किया, तो अब मेरा हाथ मम्मी की कमर के कोनों को महसूस कर पा रहा था। क्या कर्व्स थी, एक-दम पिक्चर वाली हेरोइन की, 0 फिगर वाली फीलिंग दे रही थी। बस उनकी तरह कमर पतली नहीं थी, बल्कि भरी कमर होने के कारण मेरे हथेली में मम्मी का पेट और कमर दोनों महसूस हो रहे थे।

अब मैं महसूस कर पा रहा था कि जब से मैंने मम्मी को छूना शुरू किया था, और अब तक मम्मी का शरीर बहुत ज्यादा गर्म लग रहा था। जैसे मानो मैंने गर्म रोटी पकड़ रखी थी। अब मैंने अपना मुंह थोड़ा और आगे किया, और अपने होंठो को मम्मी के होंठो के एक-दम करीब कर दिया, पर टच नहीं किया। और उधर मेरा हाथ मम्मी के पेट और कमर को धीरे-धीरे सहला रहा था। इसी में मैं भी उत्तेजित हो गया था, और इसी उत्तेजना में मैंने वो गलती कर दी, जिसने उस रात का मजा खराब कर दिया।

हुआ यह कि, मेरा लंड बिल्कुल तना हुआ था और केप्री से बाहर आने को बैचेन हो रहा था। इसी कारण वो झटके मार रहा था। पर केप्री टाईट होने के कारण लंड कच्छे में ही घिसने लगा। और इसी उतेजना में मेरे लंड ने अपना काम-रस उगल दिया। संयम ना होने से मैंने गलती से अपनी कमर को आगे धक्का दे दिया। इससे मम्मी का घुटना, जो मेरे पेट से लगा हुआ था, उस पर भी धक्का लग गया, और तुरंत ही उनकी नींद खुल गई।

मैं तो एक-दम से डर गया। मैंने अपना हाथ जो कि मम्मी के पेट को सहला रहा था, उसे एक-दम से खींच के, अपना मुंह मम्मी के होठों से दूर करके, चादर को पूरे मुंह के ऊपर डाल लिया, और सोने का नाटक करने लगा। मैंने चादर के एक कोने को उठा कर देखा तो मम्मी मुझे ही देख रही थी शायद। मम्मी सोच रही होंगी कि मैं उनके इतना पास कैसे आ गया था।

पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। मुझे एक दो बार हिला कर उठाया, और पूछा क्या हुआ, ठंड लग रही है क्या?

मैंने कहा: हां मम्मी, बहुत ठंड लग रही है।

तो उन्होंने कहा: ठीक है, तुम इस तरफ आ जाओ, मैं कूलर के सामने सो जाती हूं।

और फिर मैं इस तरफ आ गया और मम्मी कूलर के सामने होकर मेरी तरफ पीठ करके सो गई। अब आज की रात मेरी हिम्मत जवाब दे गई थी। तो मैं बिना कोई हरकत किए आंखें बंद करके चुप-चाप सो गया।

अगली सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैंने पाया कि मम्मी पहले ही उठ चुकी थी, और किचन से बर्तनों की आवाज़ आ रही थी। मैं उठ कर बाथरूम गया, ब्रश करके कॉलेज के लिए तैयार होकर नीचे आया तो देखा मम्मी ने नाश्ता बना दिया था मेरा। मुझे देखकर मेरे लिए नाश्ता लेकर आई और बोली-

मां: आज तो बहुत देर हो गई तुझे उठने में? मैं बस उठाने आने ही वाली थी। तेरे भाई तो कब के चले गए है। अब उन्हें मैं क्या बताता कि रात को तो मजबूरी में सोना पड़ा था, वरना सोने कौन वाला था।

खैर, मेरे भाई भी कॉलेज में थे, और वो दोनों पैदल ही जाते थे। उन्हें साइकिल से जाने में शर्म आती थी। पर मैं तो मेरी मां का हीरो था, काहे की शर्म। मैंने नाश्ता किया और कॉलेज के लिए निकल गया। फिर दोपहर को आकर ट्यूशन चला गया। फिर ट्यूशन से आने के बाद खेलने चला गया। शाम को 8:00 बजे खेल कर आया।

फिर आकर खाना खाया और फिर अपने रूम में जाकर सोने की तैयारी करने लगा। तभी मैंने आज नोटिस किया कि जो कूलर पहले चारपाई के एक-दम सामने लगा रहता था, आज वह सिरहाने की तरफ से लगा हुआ था। मतलब जब कूलर चलेगा तो हवा मम्मी और मेरे दोनों के सिर की तरफ से आएगी। पहले वैसे मम्मी की तरफ ही आती थी।

मैं सोच में पड़ गया कि इतने सालों में आज कूलर इस तरह क्यों लगा था? मैं बिस्तर पर आकर मोबाइल चलाने लगा, और मम्मी का इंतजार करने लगा। मम्मी काम निपटा कर रूम में आई। मैंने आज देखा कि मम्मी ने लाल रंग की मैक्सी पहनी हुई थी सिल्क वाली।

जिसमें मम्मी के बूब्स देख कर पता चल रहा था कि मम्मी ने आज ब्लाउज नहीं पहना था। क्योंकि मैक्सी के ऊपर से ब्रा की स्ट्रिप लाइन साफ दिखाई दे रही थी।

मैंने मम्मी से पूछा: मम्मी आज कूलर इस तरफ से क्यों लगाया है?

तो मम्मी बोली: बेटा, सीधी हवा लगने से मेरे घुटने दर्द करने लगते हैं, इसलिए मैंने इसे ऊपर की तरफ लगाया है। तुझे कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना?

मैंने कहा: नहीं मम्मी, मुझे कोई दिक्कत नहीं। मैं तो चादर ओढ़ के सो जाऊंगा।

मम्मी हंस के बोली: हां तू तो पूरा मुंह ढक कर ही सोता है।

फिर मम्मी भी बिस्तर पर आकर मोबाइल चलाने लगी। आधे घंटे मोबाइल चलाने के बाद मम्मी ने अपना और मेरा फोन रखवा दिया, और लाइट बंद करके बिस्तर पर लेट गई। मम्मी मेरी तरफ मुंह करके लेटी थी, और हम दोनों बातें करने लगे। उन्होंने आज पूरे दिन में मैंने क्या किया, कॉलेज में क्या हुआ सब पूछा और उसके बाद दूसरी तरफ मुंह करके सोने लगी।

पर मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी। फिर भी मैं किसी तरह से अपने आप पर कंट्रोल करते हुए सो गया। क्योंकि मैं रात में 1-2 बार पेशाब करने उठता ही हूं, तो क्या दिक्कत है, और आज ऐसे भी मैंने ज्यादा पानी पिया था ताकि नींद खुल जाए। करीब 2:00 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा मम्मी चादर ओढ़ के मेरी तरफ पीठ करके सोई हुई थी। चादर उनके पेट तक ही थी। मैं उठ कर पेशाब करके वापस आया तो सामने से देखा तो मम्मी गहरी नींद में लग रही थी।

मैंने सोचा 1 बार पक्का कर लेता हूं। मैं मम्मी के एक-दम पास गया, और हल्के से मम्मी को पुकारा पर मम्मी ने कोई जवाब नहीं दिया। फिर एक और बार वापस पुकारने पर भी मम्मी ने कोई जवाब नहीं दिया, तो मैं समझ गया था कि मम्मी गहरी नींद में सो चुकी थी। अब मेरा समय आ गया था। आज मैं पुरानी गलती नहीं करने वाला था,‌ इसलिए मैं बाथरूम करने के बाद अंडरवियर बाथरूम में छोड़ आया था। अभी मैं सिर्फ कैप्री और एक शर्ट में था। अब मैं वापस अपने बिस्तर पर आ गया, और सोच रहा था कि किस तरह से शुरुआत की जाए।

फिर मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैं मम्मी की तरफ मुंह करके पेट के बल लेट गया, और अपने हाथ को मम्मी के पीछे पीठ पर सटा दिया। 5 मिनट तक कोई हरकत ना होने पर मैंने उस हाथ को धीरे-धीरे नीचे की तरफ ले जाना शुरू किया। ऐसा करते हुए मैं मम्मी की पीठ को धीरे-धीरे सहलाने लगा। मेरा हाथ मम्मी की कमर तक जाता फिर वापस ऊपर आता है। जब अगली बार मेरा हाथ ऊपर आया तब मैंने पाया कि मेरे हाथ पर कोई चीज टच हुई। मैंने जैसे ही उसे हल्के सा दबाया, तो मुझे पता चला कि यह ब्रा की स्ट्रिप थी।

मैं धीरे-धीरे 10 मिनट तक ऐसे ही सहलाता रहता हूं, फिर मुझे महसूस होता है कि मम्मी का शरीर बहुत गर्म हो रहा था कल की तरह। फिर भी मम्मी कोई हलचल नहीं करती है। अब मैं हिम्मत करते हुए थोड़ा आगे सरक कर मम्मी के एक-दम से पास आ जाता हूं। पर अभी भी मेरे और मम्मी के बीच में 1 उंगली जितनी दूरी होती है। पर फिर भी मम्मी के पीठ की तपन मेरे पेट पर महसूस कर पा रहा था।

आज भी मम्मी पैर मोड़ कर ही सोई थी, जिससे मम्मी की कमर मेरी तरफ से बाहर निकली थी। पर क्योंकि मम्मी ने चादर ओढ़ी थी, तो वहां तो मुझे मम्मी के शरीर की गर्मी महसूस नहीं हो रही थी। अब मैंने अपने नीचे वाले हाथ को अपने सिर के नीचे तकिए के उपर रखा, तांकि मैं इस हालत में खुद का बैलेंस बना सकूं, और दूसरे हाथ को वापस पीठ के पिछले हिस्से में सटा कर बिना हिलाए रुका रहा।

जब कोई हलचल नहीं दिखी तो फिर मैंने अपने हाथ को धीरे-धीरे उपर की तरफ करते हुए कमर के उपरी हिस्से पर हाथ रखा। तो मुझे अपने हाथ पर गर्म स्किन सी महसूस हुई। साथ ही साथ मैंने महसूस किया कि मम्मी की सांसे सामान्य से तेज हो गई थी। अब मेरा हाथ मम्मी के सांसों के हिसाब से उपर नीचे हो रहा था।

अब मेरा भी अपने उपर से काबू खो रहा था। फिर भी किसी तरह से मैं अपने आप को कन्ट्रोल करने की कोशिश कर रहा था। फिर मैं हिम्मत करते हुए अपने हाथों को आगे करते हुए पेट की तरफ ले जाने लगा। जैसे ही मेरे हाथ ने मम्मी के पेट के बीच में छुआ, तो मैंने मम्मी के शरीर में 1 हल्की से सरसराहट को महसूस किया, और हड़बड़ी में मेरा शरीर मम्मी के शरीर से सट गया।

मेरे पेट और सीने में तो मानो आग की तपन लग रही थी। मैंने इस गर्मी को बर्दाश्त करने की बहुत कोशिश की, पर आखिरकार आज भी मेरे लंड ने मुझे धोखा दे दिया, और कैप्री में ही सारा काम-रस छोड़ दिया। मेरे शरीर में आने वाले झटके मैंने पहले ही महसूस कर लिए थे, इसलिए मैं पहले ही मम्मी से दूर हो गया था। पर आज फिर लंड को धोखा देते देख मुझे गुस्सा आ रहा था।

मैंने मम्मी की तरफ देखा। उनकी तरफ से झड़ने का कोई निशान नहीं दिख रहा था। मैं समझ गया था कि ऐसे तो काम नहीं चलेगा। खैर मैं बाथरूम जाकर कैप्री साफ करके आकर सो गया।

फिर 5-6 दिन के लिए मम्मी बुआ के घर रहने चली गई। क्योंकि उनके बेबी हुआ था। बुआ का घर अगली कॉलोनी में ही था। खैर दसवें दिन के बाद वापस वो रात आ ही गई, जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था।

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