आपने सेक्स स्टोरी के पिछले पार्ट में पढ़ा होगा की मम्मी को उनके कॉलेज टाइम की रियूनियन पार्टी में जाना था. और पापा को ये सब पसंद नही था, तो उन्होने सॉफ माना कर दिया और मुझे उनके साथ जाने को बोल दिया.
जिस दिन मुझे मम्मी के साथ जाना था, उस दिन सनडे था. ऑफीस की भी च्छुतटी थी. मम्मी ने पहले ही बोल दिया था की तुम ब्लॅक पहेनना. और जब मम्मी रेडी हो कर रूम से बाहर आई तो घर में सब की आँखें एक-दूं थम गयी.
उन्होने ब्लॅक नेट वाली सारी पहनी थी, जिसके अंदर से रेड सिल्क का ब्लाउस झलक रहा था. सारी उनके बदन पर इतनी टाइट चिपक रही थी की उनके कुवर्व्स एक-दूं हाइलाइट हो रहे थे. पल्लू हल्का सा साइड होते ही उनके भरे हुए बूब्स का गोल शेप सामने आ गया. डीप रेड ब्लाउस का लो नेकलिन उनका गहरा क्लीवेज दिखता था, जैसे जान-बुझ कर च्छुपाने की बजाए और ज़्यादा उभार दिया हो.
मम्मी की कमर पर टाइट बँधी सारी और ट्रॅन्स्परेंट नेट के नीचे से रेड पेटिकोट की लाइन, उनके हिप्स का गोल और उभरा हुआ कर्व सब इतना शार्प दिख रहा था की मेरा लंड एक-दूं से खड़ा हो गया.
उनके खुले लंबे बाल कंधे पर गिर रहे थे. रेड लिपस्टिक उनके लिप्स को और भी जुवैसी बना रही थी, और उनके हाथ में मॅचिंग क्लच. मम्मी एक-दूं क्लासी, सेक्सी और इर्रेसिस्टिबल लग रही थी.
मैने देखा दादी मम्मी को ऐसे घूर रही थी जैसे उन्हे मम्मी का ये इतना हॉट और खुला लुक बिल्कुल पसंद नही आया हो.
चाची ने मम्मी के पास झुक कर हल्की सी मुस्कान के साथ कहा: आज तो आप मस्त लग रही हो भाभी.
मेरी नज़र गयी तो देखा पापा के साथ-साथ चाचा भी मम्मी को घूरते रह गये. उनकी आँखों में वही भूख थी जो मैं हर रोज़ चाची के लिए महसूस करता था.
मम्मी शर्मा गयी, लेकिन फिर धीरे से मेरे पास आई और हल्की आवाज़ में बोली, चलो और मुझे चलने का इशारा किया. कार में बैठते ही मैं अपना कंट्रोल खो बैठा. मैने सीधा उनकी तरफ देखते हुए कहा: मम्मी आज तो आप जानलेवा लग रही हो.
मम्मी के होंठो पर नॉटी स्माइल आई. वो मेरी तरफ झुकी और मेरे गाल पर किस किया. किस करते हुए उन्होने धीरे से कहा: सब तेरा ही कमाल है, आराव.
उस एक पल ने मेरे लंड को और ज़्यादा सख़्त कर दिया. कार के अंदर पर्फ्यूम, लिपस्टिक और मम्मी के जिस्म की खुश्बू मिल कर इतना एरॉटिक माहौल बना रही थी, की मॅन कर रहा था अभी यहीं उनकी सारी उठा कर चुदाई कर डू.
मम्मी (मेरी पंत के उपर के उभार को देख कर): आराव, कंट्रोल कर.
मैं (उनकी आँखों में देख कर): मम्मी मैं तो कंट्रोल कर लूँगा. लेकिन आज पार्टी में सब का क्या होगा, पता नही.
हम दोनो हंस दिए और ऐसे ही च्चेड़-च्चढ़ करते हुए पार्टी वेन्यू पर पहुँच गये. वो एक छ्होटा सा रिज़ॉर्ट था. वहाँ मम्मी की 2–3 ओल्ड फ्रेंड्स पहले से खड़ी थी. जैसे ही मम्मी अंदर गयी, सब की नज़र उन पर टिक गयी.
जैसी ही हम दोनो अंदर गये, मम्मी के ग्रूप ने तुरंत उन्हे घेर लिया.
निधि आंटी ने मम्मी को देखते ही बोला: यामिनी, ऑम्ग! तू तो बिल्कुल बदली नही है, पहले जैसी लग रही है, वैसे ही ग्लो. कितना अछा फिगर मेनटेन किया है.
पूजा आंटी ने हस्सी में टीज़ किया: अर्रे यार तू तो हम सब के बॅच की क्रश थी. लड़के लाइन लगते थे तेरे पीछे और आज भी देख, सब की नज़रें तुझे छ्चोढ़ ही नही रही.
तभी एक और दोस्त, मीयर्रा आंटी, झट से बोल पड़ी: सच काहु यामिनी, तू पहले भी सब लड़कों की पहली पसंद थी और लगता है आज भी वही हाल है. देख ना, हमारे पति भी तुझे ही देख रहे है.
मम्मी शर्मा कर हल्की सी स्माइल दे रही थी, पर मैं क्लियर्ली नोटीस कर रहा था की उनके दोस्त के हज़्बेंड्स मम्मी के हर एक मूव, उनकी बॉडी की लाइन, क्लीवेज और हिप्स से अपनी नज़र हटा ही नही पा रहे थे.
मैं (मम्मी के कान के पास झुक कर धीरे से): मम्मी, लगता है आज आपके दोस्तों के पति भी तुम्हारे दीवाने हो गये.
मम्मी (मेरी तरफ शरमाते हुए देखा): बस आराव कंट्रोल में रहना.
इतने में पूजा आंटी ने मम्मी के पास आ कर स्माइल के साथ पूछा: यामिनी, ये हॅंडसम लड़का कौन है?
मम्मी फक्र से हँसी और बोला: पूजा, ये मेरा बेटा है, आराव.
फिर मम्मी ने एक-एक करके मुझे अपनी दोस्त और क्लासमेट्स से इंट्रोड्यूस कराया. मैं सब को स्माइल करके मिल रहा था. लेकिन मेरी आँखें मम्मी के ग्रूप में घूम रही थी. वाहा कुछ आंटीस अभी भी अपनी ब्यूटी मेनटेन किए हुए थी.
मम्मी जैसा जॉ-ड्रॉपिंग फिगर तो किसी के पास नही था.
लेकिन हा, जिन्हे मेच्यूर और थोड़ी तुली मिल्फ्स पसंद है, उनके लिए ये आंटीस भी फुल पैसा वसूल लग रही थी.
उसी बीच मेरी नज़र पूजा आंटी पर अटक गयी. उन्होने एक डार्क पिंक प्रिंटेड सारी पहनी थी. सारी उनके फिगर पर चिपक कर उनकी कमर और हिप्स का शेप निखार रही थी. उनके ब्लाउस का कट तोड़ा सिला हुआ था, लेकिन क्लीवेज का एक हल्का झलक दे ही रहा था.
सबसे इंट्रेस्टिंग बात ये थी की उनकी आँखें बार-बार मुझ पर ही टिक रही थी. जैसे उन्हे मेरी जवानी खींच रही हो. उनका चेहरा देख कर लग रहा था की वो अपने मॅन की भूख च्छुपाने की कोशिश कर रही हो, पर आँखें बार-बार मेरे उपर से फिसल रही थी.
मुझे तुरंत एक थॉट आया की ये आंटी यंग लड़कों के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखती लगती थी. और शायद मुझे देख कर उनका जिस्म भी गरम हो रहा है.
उसके बाद पूजा आंटी ने हमे उनके हज़्बेंड से मिलवाया: ये मेरे हज़्बेंड सुभाष जी है… और ये मेरी फ्रेंड यामिनी, और उसका बेटा आराव.
ये बोलते वक़्त पूजा आंटी ने एक अजीब सी आडया के साथ अपनी कोहनी से मेरा हाथ पकड़ लिया. उस टच ने मेरी बॉडी में हल्का सा करेंट सा छ्चोढ़ दिया.
पूजा आंटी (अपने हज़्बेंड को टीज़ करते हुए): देखा सुभाष जी, मैने कहा था ना, यामिनी बहुत ही खूबसूरत है.
सुभाष अंकल (मम्मी की तारीफ पे तारीफ कर रहे थे): सच में, आप तो बिल्कुल जवान लग रही है यामिनी जी. पूजा तुमने बताया उससे कहीं ज़्यादा ये खूबसूरत है.
मम्मी शर्मा कर हल्की सी स्माइल दे रही थी, और पूजा आंटी दोनो को देख कर और भी टीज़ कर रही थी.
पूजा आंटी (उनके हज़्बेंड को कुछ इशारा करके, कॅषुयल अंदाज़ में बोली): अछा, तुम दोनो बैठ कर आराम से बातें करो. (फिर उन्होने एक-दूं से मेरी तरफ देखा और चीकी स्माइल के साथ बोला) आराव, अपनी मम्मी की खूबसूरती का तोड़ा मज़ा मेरे हब्बी को लेने दो. तुम मेरे साथ चलो, हम कोल्ड ड्रिंक पीने चलते है.
फिर मैं और पूजा आंटी साइड में खड़े होके कोल्ड ड्रिंक का सीप ले रहे थे. तभी कुछ और आंटीस हमारे पास आई और एक-दूं क्यूरियस हो कर बोली: अर्रे ये हॅंडसम कौन है?
पूजा आंटी ने तुरंत मेरा हाथ कस्स के पकड़ लिया, तोड़ा चिपक कर नॉटी स्माइल के साथ बोली: गेस करो, कौन है?
आंटीस एक-दूसरे को देख कर गेस लगती रही, पर किसी को समझ नही आया.
तब पूजा आंटी ने कहा: ये यामिनी का बेटा है, आराव.
ये सुनते ही सब आंटीस मुझे उपर से नीचे तक देखते हुए स्माइल करने लगी. फिर एक-दूसरे के कान में कुछ फुसफुसाने लगी और फिर सब मिल कर हँसी दबा कर चलने लगी.
पूजा आंटी क्यूरियस हो गयी, बोली: अर्रे-अर्रे बताओ ना, क्या बातें कर रहे थे तुम सब?
एक आंटी ने जाके पूजा आंटी के कान में कुछ कहा. उस बात को सुनते ही आंटी का मूह लिटरली खुल गया और वो हँसी रोक कर बोली: तुम सब कामिनी हो.
और फिर एक-दूं पोज़ेसिव हो कर मेरा हाथ और टाइट पकड़ के चिपक गयी और बोल पड़ी: आज तो ये सिर्फ़ मेरे साथ ही रहेगा.
वो आंटीस पीच्चे मूड के हँसी दबाते हुए सिर्फ़ इतना बोल गयी: एंजाय, पूजा.
मेरे दिमाग़ में एग्ज़ाइट्मेंट बढ़ रहा था. मैं क्यूरियस हो कर पूछा: पर आंटी वो लोग कह क्या रही थी?
आंटी ने मुझे एक नॉटी सी स्माइल दी, आँखों में शरारत भर कर बोली: बस यही की तू कितना हॅंडसम है. और तोड़ा फन करने मिल जाए तो…
मैने उनकी बात सुन कर पलट कर देखा तो वो आंटीस डोर जेया रही थी. उनके सारी में बँधे हुई मोटी-मोटी गांद देख कर मेरा लंड और भी तंन गया. वैसे सभी का फिगर ऐसा था की अगर चान्स मिले तो छोड़ने में मस्त मज़ा आए.
मैं तोड़ा साइड हो कर अपने लंड को अड्जस्ट कर रहा था की तभी पूजा आंटी की नज़र पद गयी. उन्होने मेरी पंत के उभार को सीधा देख लिया और चुपके से हँसी दबा दी. फिर एक-दूं आँखों में शरारत भर कर बोली: लगता है इसको शांत करना ही पड़ेगा.
मेरी साँस रुक सी गयी. मैने उनकी आँखों में देखा तो उनका चेहरा पूरी तरह हवस भारी नज़र से चमक रहा था. उस पल मुझे समझ आ गया की मैं उनके कंट्रोल में आने वाला था.
बिना कुछ बोले आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींच कर रिज़ॉर्ट के उपर ले गयी. जैसे ही हम सीढ़ियाँ चढ़ने लगे, मैने देखा उपर एक पूरा फ्लोर था जहाँ बहुत सारे रूम्स बने हुए थे और सब खाली दिख रहे थे.
मैं (हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा): आंटी, हम यहाँ क्यूँ आए है?
उन्होने सीधा मेरी आँखों में देख कर हस्की वाय्स में कहा: तुम इतने भी बच्चे नही हो आराव. सब समझ रहे हो. तुम्हारी आँखों में ही लिखा है की तुम भी एक खिलाड़ी हो.
ये सुन कर मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा. आंटी ने पहले इधर-उधर देखा. फिर बिना देर किए एक रूम का दरवाज़ा खोला और मुझे अंदर खींच लिया.
दरवाज़ा लॉक करते ही उन्होने सीधा अपने हॉट लिप्स मेरे लिप्स पर चिपका दिए. उनके लिपस्टिक वाले रस्स भरे लिप्स मेरे होंठो को चूस रहे थे, जैसे वो अपनी पूरी भूख मुझ पर उतार रही हो.
मैं भी अपने आप को रोक नही पाया. मेरा हाथ सीधा उनके कमर पर गया और मैने आंटी को टाइट पकड़ लिया. वो किस करते-करते मेरी गर्दन, मेरे होंठो को चाट रही थी और मैं भी उनके साथ पुर जोश में रेस्पॉन्स देने लगा.
हमारी किस जब टूटी, मैने हल्की सी साँस लेते हुए कहा: आंटी, मम्मी तो नीचे अकेली है.
उन्होने अपने लिप्स को मेरी गर्दन पर रख कर हल्की सी बीते दी और चिढ़ते हुए बोली: इतना बड़ा हो गया और अभी भी मम्मी के बिना नही रह सकता? चिंता मत कर, आज तेरी मम्मी के आस-पास इतने दोस्त है, सब उसका ख़याल रख लेंगे. अभी तू सिर्फ़ मेरे साथ मज़े कर.
उनकी बातों ने मेरे अंदर की आग और तेज़ कर दी. मैने बिना वेट किए एक हाथ उनकी गोल-मटोल गांद पर रख दिया, दूसरा सीधा सारी के उपर से उनके बूब्स को टाइट पकड़ लिया. आंटी के होंठ फिर से मेरे होंठो पर चिपक गये और मैं उनके रस्स भरे लिप्स चूसने लगा जैसे कभी छ्चोढना ही ना हो.
उनकी साँस तेज़ हो गयी थी, सारी का कपड़ा मेरे हाथो के नीचे गरम जिस्म को च्छूपा ही नही पा रहा था. रूम में अब सिर्फ़ हमारी हेवी साँसें और किस की आवाज़ गुनगुना रही थी. इतने में किसी ने डोर पर आवाज़ लगाई. हम दोनो की साँस अटक गयी.
तो बे कंटिन्यूड…