मेरे ऑफ़िस की लड़की ने चूत चुदवाई

‘हाय राम.. सरला भाभी के नाम का क्यों.. साले बदमाश खड़ा तो मैंने किया है.. चल आज मैं तेरा सड़का मारती हूँ।’ पम्मी मस्ती में मुस्कराते हुए अपनी मस्त गोल-गोल मक्खन जैसी चूचियां मेरी छाती से रगड़ रही थी।

मुझे भी उसकी गर्म मस्त चिकनी जवानी को कमर और पेट पर छूकर और उसके हाथ में लन्ड पकड़ने से बहुत मज़ा आ रहा था।
मैंने भी एक हाथ पेट से हटा कर टी-शर्ट के ऊपर चूची पर रख कर सहलाने लगा।

पम्मी मस्ती और चुदास में सिसियाने लगी- हाय.. सी.. उफ़.. राजा.. यह क्या कर रहा है.. अहह.. यहीं पर खड़े-खड़े ऐसे ही निकलवा देगा क्या.. तू बहुत जालिम बदमाश है राजा..

पम्मी पीछे को हटने की कोशिश करने लगी.. पर मैंने अपना हाथ उसकी कमर से जकड़ रखा था।

‘अब कहाँ भागने की कोशिश कर रही है पम्मी.. अभी तो कह रही थी कि तू मेरा सड़का मार कर निकालेगी.. चल आज मैं तेरी चूत में उंगली करके तेरा सड़का मारता हूँ।’ मैंने पम्मी की कमर पकड़ कर कमरे के अन्दर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया।

‘हाय राम मैं भाग कहाँ रही हूँ.. मेरे जालिम राजा.. पर तेरा यह छूना बहुत खतनाक है। पूरे बदन में आग लग जाती है और चूत एकदम से लफ्फारे मारने लगती है।’ पम्मी मुझे अपनी बांहों में लेकर जोर से लिपट गई और हमारे होंठ एक-दूसरे से चिपक गए।
अब हम दोनों जीभ एक-दूसरे के मुँह में डाल कर चूस रहे थे।

मैंने उसकी निक्कर नीचे खींच दी और उसने मेरी लुंगी खोल कर निकाल दी।

‘उफ़.. वाह.. पम्मी तेरे चूतड़ तो एकदम मक्खन हैं यार.. और चूची एकदम मलाई जैसी मुलायम.. निप्पल भी क्या तन कर खड़े हैं..’
मैं एक हाथ से पम्मी के मस्त गोल-गोल चिकने-चिकने चूतड़ से खेल रहा था और दूसरा हाथ उसकी मस्ती चिकनी कमर सहला रहा था और टी-शर्ट के अन्दर डाल कर चूची से खेल रहा था।

पम्मी आहें भर रही थी- हाय.. सीईई.. उहह.. अहह.. मेरे राजा.. तेरा लौड़ा भी तो क्या मस्त मोटा तगड़ा कड़क गर्म-गर्म हो रहा है।

पम्मी एक हाथ में मेरा कड़ा लौड़ा पकड़ कर धीरे-धीरे आगे पीछे हिल रही थी और दूसरे हाथ को मेरी गर्दन में डाल कर अपनी मस्त चूचियों को मेरे सीने में दबा कर मसल रही थी।

दो जवान नंगे बदन
मैंने उसकी टी-शर्ट उसके हाथ ऊपर करके निकाल दी।
पम्मी ने मेरा कुरता निकाल दिया, अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक-दूसरे की बांहों में समाए हुए मस्ती में डूबे हुए थे।
इस तरह हम एक-दूसरे को कई मिनट तक चूमते चाटते रहे।

मैं उसकी मस्त गोरी-गोरी चिकनी-चिकनी मस्त जवानी का रस उसकी कमर, पेट नाभि जांघें चूतड़ पर अपनी जीभ लगा-लगा कर चूस रहा था।
पम्मी मेरी इस मस्त चुसाई की मस्ती में झूम रही थी और आहें भर रही थी ‘सी.. अहह.. मर गई राजा.. मार ही डालेगा क्या..’

उसके जवान बदन.. रसीले होंठों को चूस कर एक हाथ से लौड़ा पकड़वा कर मज़ा लेते हुए जवानी की और चुदास की आग में मैं मचल रहा था।

मैंने जांघ पर फिसलता हाथ पम्मी की बिना बालों वाली गोरी चिकनी मोटे-मोटे होंठों वाली फूली हुई चूत की लाइन में लगा कर उसके दाने को मसल दिया।

पम्मी उछल पड़ी- हाय.. आहह.. हहह उफ़ राजा.. अब चूत में उंगली कर दे न.. साले बहुत जोर से फड़क रही है.. सारा जवानी का रस ऐसे ही निकल जाएगा.. तूने प्रॉमिस किया था कि तू मेरी चूत में उंगली करके मेरी चूत का रस निकालेगा.. पर तूने तो पूरे बदन से ही रस निचोड़ डाला।

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