पिछला भाग पढ़े:- सेक्स जर्नी-१
गे सेक्स स्टोरी अब आगे-
वो आदमी: लड़का कहाँ है, अंदर ले आओ.
मौसी जी मुझे अन्दर ले जा रही थी और धीरे से बोल रही थी, “मोहित जैसे-जैसे वो बोलेंगे वैसा ही करना है. अपना खाली दिमाग मत लगाना.”
वो घर बाहर से देखने में बहुत छोटा लग रहा था. लेकिन अंदर से बहुत बड़ा जैसे कोई हवेली हो ऐसा था. अंदर वाइट अफगानी कुरता पजामा में २ आदमी थे. उनके सर (हेड) कपडे से कवर थे. एक सोफे पर बैठा था और दूसरा खड़ा था और उनकी हवा कर रहा था.
मौसी: मौलवी जी, ये लड़का है जिसके लिए आपसे बात हुई थी.
मौलवी के साथ वाला आदमी: तुम बाहर जाओ, लड़के से कुछ बात करनी है.
अब मौसी बाहर चली गयी. मौलवी मुझे लगातार देख रहा था. मौलवी कुछ भी नहीं बोल रहा था. सभी बातें उनके साथ वाला आदमी ही कर रहा था.
वो आदमी: मेरा नाम कासिम है. तुम यहाँ अपनी मर्ज़ी से आये हो? क्या सच में तुम्हे मर्द अच्छे लगते है?
मैं: आपको क्या मतलब?
कासिम: जो पुछा जाये उतना बोलो. तुम्हारे पापा और मौसी ने ही हमें बोलै है.
अब समझ आया वहां क्यों लाये थे.
मैंने “हां” बोल दिया.”
वो: क्या किसी मर्द के साथ हमबिस्तर हुए हो?
मैंने तुरंत बोला: नहीं-नहीं, कभी नहीं. मुझे तो खुद समझ नहीं आ रहा मेरे साथ ऐसा क्यों होता है की मुझे मर्द अच्छे लगने लगते है.
कासिम बहुत सी बातें उर्दू में कर रहा था. लेकिन मैं कोशिश करूँगा आपको हिंदी में ही समझने की
कासिम: कोई नहीं, तुम ठीक हो जाओगे. अब चुप हो जाओ.
मौसी को अंदर बुलाया गया.
कासिम: कल इसको सिर्फ वाइट कुर्ते पजामे में, सुबह ८ बजे यहाँ भेज देना और ध्यान रहे सिर्फ कुरता पाजामा ही होना चाहिए. और इनको यहाँ अकेले ही आना होगा.
मौसी: मौलवी जी ये यहाँ नया है, कैसे आएगा?
कासिम: वो सब आप सोचो, लेकिन इसको ठीक करने के लिए ये करना होगा.
हम दोनों चुप-चाप घर आ गए. मौसी जी टेंशन में थी कि अकेले कैसे जायेगा. ऐसे ही रात हो गयी. हमने डिनर किया और मौसी ने मुझे भैया के रूम में बुलाया. भाभी रसोई में थी. रूम में भैया, मौसी और मैं थे.
मौसी: उदित कल तुझे एक काम करना है. वो हवेली वाले मौलवी है न, वहां मोहित को ८ बजे तक पंहुचा कर आना है. और मोहित अभी तू सो जा, वरना कल तेरे मौसा को पता चल गया था तो पन्गा हो जायेगा.
उदित: पापा को क्यों नहीं बताना?
मौसी: वो सब कल बता दूँगी, अभी ये काम कर.
भैया ने मौसी के जाने के बाद मुझे पूछने का तरय करा. लेकिन मुझे मौसी ने मन करा था, इसलिए मैंने बोल दिया, “मुझे खुद नहीं पता भैया.”
और मैं सोने चले गए.
नेक्स्ट मॉर्निंग:-
मौसी ने हमें ६ बजे ही उठा दिया और मुझे वाइट कुरता पाजामा देकर रेडी होने के लिए बोल कर नाश्ता बनाने चली गयी. हम दोनों रेडी हो गए.
मौसी: उदित तुम वापस घर आ जाना. मौलवी जी से कॉल करके मैं पूछ लूंगी लेने कब जाना है.
उदित भैया बार-बार मौसी से पूछ रहे थे. लेकिन वो बार-बार बात को घुमा देती.
भैया और मैं बाइक पर वहां १ घंटे बाद पहुँच गए अभी ७:४५ हुए थे.
उदित: अंदर तक चलता हु.
मैं: कोई नहीं, मुझे रास्ता पता है. आप चले जाओ, आपको ऑफिस भी जाना है.
उदित भैया बहुत बोलने के बाद वहां से चले गए. मैं अन्दर गया, लेकिन आज पहले जितने लोग नहीं दिख रहे थे हवेली में. अंदर जा कर मैं एक सोफे पर बैठ गया, तभी कसिम आया.
आज कासिम ने क्रीम कलर का लम्बा थवब (दुबई शेख जो पहनते है) पहना हुआ था. आज वो बहुत खुश और स्मार्ट लग रहा था.
फेस पर लम्बी बियर्ड, गोरा फेस, ब्राउन आईज. आँखों में काजल, बॉडी में गुलाब का परफ्यूम, ५’८″ हाइट, एक-दम फिट बॉडी.
कासिम: बहुत शानदार, जनाब खुश हो जायेंगे, मेरे साथ आओ.
मैं उसके पीछे-पीछे ऊपर हवेली के फर्स्ट फ्लोर पर चला गया. हम एक बहुत बड़े कमरे में पहुँच गए जहाँ बहुत मोमबत्तिया और झूमरों से पूरा कमरा रोशन हो रखा था.
कासिम ने मुझे नीचे बैठने को बोला और एक परदे के पीछे चला गया. कुछ देर बाद मौलवी जी और कसिम दोनों परदे के पीछे से बाहर आये. मौलवी जी का रंग तोडा सांवला था, लेकिन बहुत खूबसूरत थे. उनकी भी शामे ड्रेस थी, लेकिन वाइट कलर की, ५.६ फ़ीट हाइट. लेकिन जिस्म एक-दम मरदाना, कोई भी देखते ही फ़िदा हो जाये.
कासिम: बीटा मौलवी जी आज तुम्हारे परेशान जिस्म को पाक करने का तरीका करेंगे. लेकिन तुम्हारा साथ देना बहुत ज़रूरी है. वरना तुम्हारे साथ साथ तुम्हारी फॅमिली पर भी प्रॉब्लम आ सकती है. बोलो मंज़ूर हो तो करते है शुरू?
मैं (बहुत सोचने के बाद): जी आप करो. जैसा आप बोलोगे मैं वैसा ही करूँगा.
मौलवी: सबसे पहले हमें तुम्हारा जिस्म साफ़ करना होगा.
ये फर्स्ट टाइम था जब मौलवी जी ने कुछ बोला था. कासिम ने मुझे नीचे बैठे-बैठे ही मेरे सर पर एक बाल्टी पानी धीरे-धीरे डालने लगा. गीला होने से मेरे कपड़ों में से मेरा जिस्म साफ़ दिख रहा था.
कासिम: गलत है ये, अब क्या होगा?
मैं: क्या हुआ?
कासिम: तुम्हे कल ही बोल दिया था की सिर्फ कुरता और पाजामा ही पहनना है. लेकिन तुमने इनके नीचे चड्डी पहन रखी है.
मैं: सॉरी माफ़ कर दो, प्लीज.
मौलवी: तुम्हारी गलती की वजह से अब हम दोनों को तुम्हारे साथ ये विधि पूरी करनी होगी.
मैं: माफ़ कर दो. आप करो दोनों जो करना है. अब गलती नहीं होगी.
मौलवी: तुम्हारे जिस्म में कितने टिल है? उनको पाक करना होगा.
मैं: जी वो तो पता नहीं.
मौलवी: अपने कपडे उतार दो जल्दी.
मैं कुछ बोलता उससे पहले ही कासिम ने मेरे कान में बोलै, “ये विधि रुक गयी तो तुम्हारा परिवार मुश्किल में आ सकता है.”
मैं जल्दी से आपने कपड़े उतार कर ओनली अंडरवियर में आ गया.
इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा.
ईमेल: लोवेगुरुदेल२१@जीमेल.कॉम
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