मस्त मारवाड़ी भाभी की चुदाई

हेलो दोस्तो, कैसे हो आप .!मैं आपका दोस्त रवि आज आपके लिए एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ. जो की मेरे साथ बीती हुई है. पर ये कहानी बताने से पहले मैं आपको अपने बारे मे कुछ बताना चाहता हूँ.

मेरा नाम तो आप जान ही चुके हो. अब मेरी पर्सनॅलिटी के बारे जान लो. मैं दिखने मे ठीक ठाक हूँ. पर मेरी हाइट 6 फुट है. जिसके चलते मेरे लंड का साइज़ भी काफ़ी अच्छा है. मेरा जब भी मन करता है मैं अपने लंड को पकड़ कर मूठ मार लेता हूँ. मुझे मूठ मार कर काफ़ी अच्छा लगता है.

तो दोस्तो, ये तो मैने अपने बारे मे थोड़ा कुछ बता दिया है. अब मैं आपको कहानी पर ले चलता हूँ.

ये बात आज से कुछ समये पहले की है. जब मैने एक भाभी को उसके घर पर पोछा लगाते हुए देखा था. वो दिखने मे काफ़ी खूबसूरत थी और एक मारवाड़ी परिवार की लड़की लग रही थी. मैं उसे देखते ही उसका दीवाना बन गया था. वो जब पोछा लगा रही थी तो मुझे उसके बूब्स के दर्शन हो रहे थे. जिसे देख कर मेरा 9 इंच लंबा लंड भी पागल हो गया था.

मैं ये सब देख कर फटा फट घर आया और बाथरूम मे जा कर अपने लंड को उप्पर नीचे करके उसकी मूठ मारी. और जब मेरे लंड से पानी निकला तो मेरे अंदर की तड़प शांत हुई.

फिर मैं उसका दीवाना हो गया. उसकी फिगर बहोत ही मस्त थी जिसे देखते ही मैं पागल हो जाता हूँ. उसका फिगर 32-28-32 है जिसे देखते ही हर कोई लड़का पागल हो जाता है. मैं अब जैसे तैसे उससे नज़रे मिलाने लग गया. वो मुझे देखते ही नज़र मुझसे हटा देती. इसलिए मैने अब उसका टाइम समझ लिया की वो कब मुझे दिख सकती है. इसलिए मैं अब उसी टाइम उसके घर के पास जाता और उसको खड़े हो कर निहारता ही रहता. धीरे-धीरे अब वो मुझे देखने लग गई. अब हमारी ऐसे ही नज़रे एक दूसरे से टकराने लग गई.

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मैं उसे ऐसे ही निहारने लग गया और धीरे-धीरे हमारी आँखो ही आँखो मे काफ़ी बाते होने लग गई. फिर मैने उसे अपना नंबर दे दिया और उससे मिलने को कहा.

तो उसने मेरा नंबर रख लिया और मुझसे बात करने लग गई थी. मैं भी अब बड़े मज़े से उससे बात करने लग गया था.

मुझे उससे बात करने मे बहोत मज़ा आता था और साथ ही साथ मैं उसके नाम की मूठ भी मार दिया करता था. मैं उससे मिलने के लिए बेकरार होता रहता था और उससे मिलने को भी कहता रहता था.

पर वो मुझसे मिलने को मना कर देती थी. क्योकि उसकी एक छोटी सी बेटी थी जिसका ध्यान भी उसे ही रखना होता था.

पर मैं भी उससे मिलने के लिए ज़िद किया करता था और फिर एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुलाया.

कहा तो मुझसे ये था की हम बैठ कर काफ़ी बाते करेंगे. पर मेरे लिए तो यही बहोत था की मुझे उसके घर जाने का मौका मिल रहा था. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

घर जाने की खुशी मेरे चेहरे पर सॉफ दिखाई दे रही थी. मैं उसके घर उसके पति के ऑफीस जाने के बाद चला गया. उसकी बेटी आराम से सो रही थी और वो घर के काम कर रही थी.

जहा पर मैं खड़ा था वाहा से बाहर देखा जा सकता था और बाहर से भी अंदर देखा जा सकता था. इसलिए मुझे उसने अंदर कमरे मे बैठने को कहा और मुझसे कहा की मैं अभी आई 10 मिनिट तक.

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उसकी बात सुनते ही मैं सीधा कमरे मे चला गया. जहा पर कूलर चल रहा था और चले भी क्यो ना क्योकि उस समये गर्मिया ही बहोत थी. उसकी बेटी बड़ी ही प्यारी नींद मे सो रही थी.

थोड़ी ही देर बाद वो अंदर आई और मेरे पास आ कर बैठ गई. गर्मी होने की वजह से वो पूरी पसीने मे भीगी हुई थी. उसने बैठ कर पहले तो खुद का पसीना सूखाया और फिर मेरी निगाहो मे निगाहे डाल कर देखने लग गई.

हम फिर आराम से बैठ कर बाहो मे बाहे ले कर एक दूसरे से बाते करने लग गये. मुझे उसके जिस्म की खुश्बू काफ़ी अच्छी लग रही थी जिससे मैं पागल हो रहा था. मुझे खुद को कंट्रोल करने मे काफ़ी परेशानी हो रही थी.

वैसे भी उन्होने साड़ी डाल रखी थी जिसमे उसका जिस्म बहोत ही मस्त लग रहा था. मेरा मन उसे अब अपने नीचे लेने को कर रहा था. इसलिए अब मैने धीरे से अपना हाथ उसकी कमर पर रखा और उसे खींच कर बिस्तर पर गिरा दिया.

बिस्तर पर गिरते ही मैं उसके होंठो को अपने होंठो मे भर लिया और जबरदस्त तरीके से चूसने लग गया. वो पहले तो थोड़ा ना- ना करने लग गई पर बाद मे वो भी मेरा साथ देने लग गई.

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