शादी शुदा औरत को फुसलाकर उसकी चूत से मजा लिया

हेलो दोस्तों मैं अनुपम सिंह आप सभी का इंडियन में स्वागत करता हूँ। मैं कई सालों से इंडियन सेक्स कहानी पढ़ रहा है। मेरे एक दोस्त ने मुझे इसके बारे में बताया था। तबसे हर रात मैं इसे पढता हूँ और मजे लेता हूँ। आज मैं आपको अपनी कहानी सूना रहा है। आशा है आपको पसंद आएगी।
मेरी उम्र 40 की हो चुकी थी पर मेरी चूत मारने की इक्षा खत्म ही नही होती थी। मेरा बदन गठीला और ताकतवर था। मेरी शादी हो चुकी थी और 3 बच्चे थे। मेरी कपड़े की दूकान थी जो अच्छी चलती थी। मुझे नई नई औरतों को चोदना बेहद पसंद था। मेरा लंड 8″ से भी जादा लम्बा था। मेरा स्टेमिना बहुत जादा था। मैं किसी भी औरत को 2 घंटे तक लगातार चोद सकता था। मैं तरह तरह के प्रोटीन विटामिन लेता था जिससे मेरी ताकत बनती रहे और लंड में माल बनता रहे। अपनी बीवी को मैं रोज रात में नंगा करके पेलता था। उसकी गांड भी मारता था। पर इसके अलावा मैं आस पड़ोस की औरतों को पटाकर उनकी चूत बजा देता था। मुझे सेक्स करना बहुत पसंद था।
मैं हर वक़्त सेक्स और चुदाई के बारे में ही सोचता रहता था। मैं औरतों के साथ तरह तरह से सेक्स करता था। उसको लिटाकर, घोड़ी और कुतिया बनाकर, लंड पर बिठाकर, आगे से, पीछे से, 69 में, मुंह में देकर सब तरह से उनकी चूत बजाता था। पर दोस्तों मेरी सेक्स की इक्षा खत्म ही नही होती थी। मन करता था की कोई काम ना करूं बस सुबह शाम खूबसूरत औरतों की चूत और गांड बजा दूँ। मेरा यही मन करता था। मुझे औरतों से लंड चुसाना बहुत पसंद था। मैं आधे घंटे तक हर औरत से लंड चूसाता था। फिर उनके पैर खोलकर उनकी चूत पीता और चाटता था। मुझे बुर पीने में बहुत मजा आता था। मुझे औरतों की चूत और गांड के छेद में ऊँगली करने में विशेष मजा आता था। इस तरह से मैं काफी सेक्सी आदमी था। दोस्तों मुझे रात में भी सेक्स के ही सपने आते थे। रात में मैं अपनी सगी बहन, दीदी, भाभी और मम्मी को नंगा करके चोद चुका था। दोस्तों जिस दिन मेरी बीवी चूत देने से मना करती थी मैं घर से बाहर जाकर माल पटाता था। बिना चूत के मैं जी नही सकता था।
मेरी बीबी कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गयी थी। वो बच्चो को भी साथ ले गयी थी। मेरे पड़ोस में शिखा नाम की लड़की रहती थी। उसका पति छोटा मोटा मजदूर था और बहुत कम पैसे कमा पाटा था। मैं शिखा को बहुत पसंद करता था। मैं उसकी चूत बजाना चाहता था। मेरे घर वो अक्सर बर्फ लेने और फ्रिज की बोतल लेने आती थी। वो मुझे अनुपम भैया कहकर बुलाती थी। शाम को शिखा मेरे घर आ गयी। उसने दरवाजे की कुण्डी पटकी।
“कौन है???” मैंने आवाज लगाई। मैं घर के आँगन में बैठकर अखबार पढ़ रहा था।
“अनुपम भैया!! मैं शिखा। बर्फ चाहिए” शिखा बोली

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मैं दरवाजा खोला। हमेशा की तरह आज भी शिखा मस्त माल लग रही थी। शिखा बहुत गोरी और सुंदर लड़की थी। उसका बदन बहुत गोरा, भरा हुआ और सुडौल था। फिगर कमाल का था। वो बहुत सेक्सी और हॉट माल थी। 34, 28, 30 का फिगर था उसका। छरहरा और बिलकुल फिट जिस्म था। वो 25 साल की एक जवान, आकर्षक नवयौवना है। उसके ओठ, मम्मे, रेशमी काले बाल उसकी खूबसूरती बढ़ा देते थे। उसके मम्मे 34″ के थे। बहुत बड़े बड़े गोल गोल और रसीले थे। कोई भी लड़का उसके नंगे बूब्स को अगर एक बार देख लेता तो उसे चोदकर ही मानता। शिखा इतनी खूबसूरत माल थी।
“अरे आओं आओ शिखा! कैसी हो???” मैंने उसको मस्का लगाया
“ठीक हूँ अनुपम !!” वो बोली
मैं उसको लेकर रसोई में चला गया। उसके वास्ते मैंने फ्रिज खोलकर बर्फ निकाल दी और कुछ पानी की बोतल भी निकाल दी। फिर मैंने उसे कसके पकड़ लिया और उसके रसीले होठ चूसने लगा। वो डर गयी और हाथ छुड़ाने लगी।
“छोड़ो ना अनुपम भैया!!” शिखा बोली
“ओए शिखा मैं तो तेरा सैंया बनने को तैयार हूँ। देख आज मेरा लंड बड़ी जोर से खड़ा है। तेरी भाभी भी नही है। तू आज मुझे चूत दे दे” मैंने कहा और शिखा की कलाई मैंने कसके घुमा दी। वो अपने आप घुमती हुई मेरे पास आ गयी। मैंने उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया और दीवाल से चिपकाकर किस करने लगा। वो खुद को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी। पर मैंने नही छोड़ा। फिर मैं उसे अपने कमरे में ले गया। मैंने शिखा को बिस्तर पर धकेल दिया और उसके उपर चढ़ गया। शिखा ने साड़ी ब्लाउस पहन रखा था। उसकी साडी का पल्लू मैंने उनके सीने से हटा दिया। शिखा जल्दी जल्दी सांसे भर रही थी। उसने गहरे गले का काला ब्लाउस पहन रखा था। काली रंग की साड़ी में थी वो।वो जल्दी जल्दी सांसे ले रही थी। उसकी 34″ की भरी भरी चूचियां नीचे उपर जा रही थी। मैंने उसकी बेताब छातियों पर अपने हाथ रख दिए और जल्दी जल्दी दबाने लगा।
शिखा “ओह्ह माँ..ओह्ह माँ.उ उ उ उ उ..अअअअअ आआआआ..” की सेक्सी आवाजे निकालने लगी। वो बर्फ की ट्रे मैंने उसके लिए निकाली थी वो पिघल रही थी। मैं उसके ब्लाउस के उपर से उसकी छातियाँ दबाने लगा। शिखा कसमसाने लगी।
“क्या शिखा की बच्ची बोल आज चूत देगी की नही???” मैंने कहा
“अनुपम भैया!! कहीं मेरा पति घर आ गया तो???” वो घबराकर बोली
“वो गांडू तो अपने काम पर गया होगा” मैंने कहा फिर जल्दी जल्दी मैं उसके ब्लाउस के उपर से उसके मम्मे दबाने लगा। वाह दोस्तों कितना कातिला माल थी शिखा। धीरे धीरे मैंने उसके ब्लाउस के बटन खोल दिए और फिर उसकी ब्रा को खोल दिया। शिखा की बेताब चूचियां तो बहुत खूबसूरत थी। मैं जल्दी जल्दी अपने हाथों से उसके दूध दबाने लगा। शिखा “ओहह्ह्ह.ओह्ह्ह्ह.अह्हह्हह.अई..अई. .अई. उ उ उ उ उ.” की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मैंने अपने हाथ से उसकी नंगी छातियों को पकड़कर सहला रहा था। दोस्तों गोल बैगन की तरह उसकी चूचियां थी। मैं हाथ से दबाने लगा और मुंह में लेकर पीने लगा। शिखा को भी अच्छा लग रहा था। वो मेरे सिर के बालों में ऊँगली घुमाने लगी।

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