गैर मर्दों से चूत चुदाई और गैंग-बैंग की इच्छा-2

होटल में मुझे अपनी पुरानी पहचान वाली मिल गई थी उसके पति के साथ मैंने उसे चोदा और उसकी इच्छानुसार बहुत सारे लौड़ों से चुदने की उसकी इच्छा के लिए व्यवस्था बनानी शुरू कर दी..

नेहा के जाने के बाद जब मैं शाम को सोकर उठा तब मैंने अपने कुछ खास दोस्तों को नेहा की इच्छा के बारे में बताया। करीब 20 लोग तैयार हो गए और आज शाम का प्रोग्राम फिक्स हो गया।

मैंने उसी होटल में 4 रूम बुक करवाए और एक पार्टी का आर्डर होटल मैनेजर को दे दिया।

मैनेजर मेरे जान पहचान वाला था.. सो उसने एक बैंक्वेट हॉल बुक कर दिया.. जिसमें शराब.. खाना और म्यूजिक की व्यवस्था कर दी।

उसके पति के सामने चोदा
मैं करीब 5 बजे नेहा और करण के कमरे में गया। वो दोनों नंगे ही थे और शायद नेहा का जी अभी चुदाई से भरा नहीं था।
मैं जैसे ही उनके कमरे में गया.. नेहा ने मुझे अन्दर खींच लिया और दरवाजा बंद कर लिया।

करण अपने आपको ढकने की कोशिश कर रहा था.. तो नेहा ने कम्बल खींच लिया।

मेरी आँखों के सामने दोनों ही नंगे थे। करण का लण्ड ठीक-ठाक था और मोटा भी था.. पर लुल्ला टाइप का था।
नेहा उसके लण्ड को खड़ा करने की कोशिश कर रही थी पर खड़े होने की समस्या थी।

नेहा ने मेरी तरफ देखा और मेरे पास आ गई और मुझे चूमने लगी।
वो अपने पति के सामने मेरे साथ सेक्स करने की चाह रखती थी शायद.. तो मैं भी नंगा हो गया और उसको चूमने लगा।

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एक मिनट में मैं उस पर सवार हो गया और ज़ोरदार ठुकाई करने लगा।
यह देख कर करण का लण्ड भी खड़ा हो गया और वो बाजू में आकर खड़ा हो गया।

पर जैसे ही उसने लण्ड नेहा के मुँह में दिया.. उसने मना कर दिया और गाण्ड की तरफ इशारा किया।
आज पहली बार मेरा आकलन गलत साबित हुआ था… यह नेहा तो काफी खेली-खाई निकली थी।

खैर.. करण अब हमारे नीचे था.. मैं हट गया। नेहा ने धीरे-धीरे उसका लण्ड अपनी गाण्ड में डलवा लिया.. और वो झटके भी लेने लगी थी।
अब मैं नेहा के ऊपर सवार हो गया और नेहा अब हम दोनों के बीच में थी।

हम दोनों के लौड़े उसकी गाण्ड और चूत को पीट रहे थे, वो जोर-जोर से चिल्ला रही थी और हमें चीयर कर रही थी।

देर तक ठुकाई के बाद हम लोग शांत हो चुके थे और वहीं थोड़ी देर सो गए।
मैंने धीरे से नेहा को आज शाम के प्रोग्राम के बारे में बताया तो वो खुश हो गई और बाथरूम में चली गई।

करण जाग रहा था तो उसने मुझसे पूछ लिया।
मैंने उसे बताया तो करण गुस्से में उठकर बाथरूम में घुस गया, वहीं उन दोनों में झगड़ा होने लगा था और दोनों एक-दूसरे को मार रहे थे।

गैर मर्दों से चुदने की तैयारी
इतने में मैं वहाँ गया और दोनों का झगड़ा रोकते हुए बोला- करण भाई, तुम्हें अगर दो औरतें दो.. तो भी रात भर में तुम उसको संतुष्ट नहीं कर पाओगे और औरत की मजबूरी तो समझो कि वो क्या चाहती है। आज का दिन उसको खुला छोड़ दो और मज़ा देखो वो जिंदगी भर तुमसे ही प्यार करेगी और तुम्हें कभी भी धोखा नहीं देगी।

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करण- वो बात नहीं है.. मैंने तुमसे करने को मना नहीं किया.. पर 20 लोग और वो अकेली.. मर जाएगी यार वो..

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