मामी की चूत का अहसान

दोस्तो, मेरा नाम योगेश है, मैं बीटेक के तीसरे वर्ष का छात्र हूँ और आगरा का रहने वाला हूँ।

आज मैं आपको मेरी जिंदगी की एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ।

बात तब की है जब मैं स्कूल में पढ़ता था, गर्मी की छुट्टियों में मामा जी ने मुझे अपने पास उदयपुर में कुछ दिन बिताने के लिए बुलाया।

मामी जी अजमेर में जॉब करती थीं और मुझे उनको लेते हुए उदयपुर जाना था।

मामा जी ने हम दोनों के लिए एसी बस में डबल स्लीपर बुक करवा दिया।

मैं घर से रवाना हो गया और बस अजमेर पहुँच गई।

मैंने मामी जी का सामान रखवा दिया और वो स्लीपर में आकर लेट गईं, साथ में उनकी एक साल की बेटी भी थी।

रात हो चुकी थी और हम सोने लगे।

मामी जी ने बेटी को दूध पिलाने के लिए जैसे ही अपनी चूची निकाली.. तो मेरा मन डोलने लगा.. मैं छुप-छुप कर तिरछी निगाहों से उनके बोबे देखता रहा।

मेरा मन कर रहा था कि बच्ची को हटा कर खुद चूसने लग जाऊँ.. पर ऐसा मुमकिन नहीं था।

रात बढ़ी और ठण्ड भी बढ़ गई।
एसी और मामी की जवानी दोनों मेरे शरीर को और ठंडा किए जा रहे थे.. लेकिन लण्ड तो आग उगल रहा था।

मैं कुछ देर तक ठिठुरता रहा.. फिर मामी को भी ठण्ड लगने लगी और उन्होंने बस वालों से एक कम्बल ले लिया।

मैं भी उसी कम्बल में घुस गया.. फिर भी ठण्ड कम होने का नाम नहीं ले रही थी। गर्मी के दिन होते हुए भी खूब ठण्ड लग रही थी.. मन में गुदगुदी हो रही थी।

मैंने मामी से जब ज्यादा ठण्ड होने की बात कही.. तब वो मेरे और करीब आ गई।

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उनके जिस्म की गर्मी से मेरी ठण्ड कुछ कम हो गई और मामी जी सो गईं।

इस सफ़र से पहले मैंने कभी मामी को गलत निगाहों से नहीं देखा था लेकिन आज उनसे चिपक कर सोने से और उनके बोबों को देखने से मेरे अन्दर की वासना जग चुकी थी।

मामी सो रही थीं और मैंने मौके का फायदा उठा कर उनके बोबे और चूतड़ सहला लिए और उनको कुछ पता नहीं चला।

मैंने मुठ मार कर अपने आपको शांत किया और सो गया.. सुबह हम मामा जी के घर पर पहुँच गए।

मामा जी उदयपुर की एक दवाई की कंपनी में काम करते थे।

करीब 9 बजे मामा जी कंपनी चले गए और घर पर सिर्फ मामी.. मैं और उनकी एक साल की बेटी थे।

मामी घर का पौंछा लगा रही थीं और मैं नहा कर पलंग पर बैठा था।

झुक कर पौंछा लगाने की वजह से मामी के बड़े-बड़े बोबे साफ़ दिखाई दे रहे थे।

मेरा मन उन आमों का रस पीने के लिए बेचैन हो उठा..
पर मैं उनकी नज़र में एक दुबला-पतला शरीफ बच्चा था इसीलिए कोई भी प्रयास करना मैंने सही नहीं समझा और किसी तरह खुद को रोक लिया।

कुछ देर में मामी नहाने चली गईं और मैं दरवाजे के की-होल से उनको नहाते हुए देखने लगा।

मामी ने अपने कपड़े उतारे और साबुन से रगड़ कर नहाने लगीं।

क्या हसीन नज़ारा था.. मुझे उम्मीद नहीं थी कि इस छुट्टियों में मुझे किसी जबरदस्त माल के दर्शन होंगे।

उनकी उम्र 27 साल.. गोरा रंग.. दिलकश हसीन चेहरा और उनके मादक जिस्म का उतार-चढ़ाव तो लाजवाब था.. 34-26-34 रहा होगा।

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उस समय तो इतना मालूम नहीं था.. पर आज याद करता हूँ तो लगता है कुछ इतना ही रहा होगा।

शाम को मामा जी आए और हमने खूब मस्ती की.. रात को हम बाहर छत पर बिस्तर नीचे लगा कर सो गए।

मैं मामा और मामी के बीच में सोया हुआ था।

थोड़ी देर में मामा ने कहा- मच्छरों के कारण उन्हें नींद नहीं आ रही है।

और वो अन्दर कमरे में कूलर चला कर सो गए.. कुछ देर में मामी भी सो गईं.. पर मैं उनका नंगा बदन याद करके उत्तेजित हुए जा रहा था।

कुछ हिम्मत जुटा कर मैं उनके करीब गया और नींद में होने का नाटक करते हुए उनके बोबों पर अपना हाथ रख दिया।

कुछ देर हाथ वैसे ही रखा और फिर हल्का-हल्का दबाना शुरू किया।

मैं तो मदहोश हुए जा रहा था लेकिन अचानक मामी उठ गईं और मेरा हाथ उठा कर दूर कर दिया।

मुझे बहुत डर लगा कि कहीं उन्होंने मामा से कुछ कह दिया तो बहुत बेइज्जती होगी.. पर सब कुछ ठीक रहा।

फिर कुछ दिन मैंने यूँ ही उनके मोटे चूतड़ और बोबे देखते हुए निकाल दिए, शायद उन्हें भी मेरे इरादे समझ आने लगे थे।

मेरी छुट्टियाँ खत्म हो गईं और मुझे अपने अधूरे सपने लेकर घर जाना पड़ा। मैं घर पर अक्सर सोते समय मामी की हसीन जवानी को याद करता और इससे मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था और मैं कई बार मामी को सपनों में भी चोद दिया करता था.. जिससे मेरी चड्डी गीली हो जाती थी।

दिन यूँ ही बीतते गए और मेरी प्यास और बढ़ने लगी.. लेकिन मैंने पढ़ाई में कभी कोताही नहीं बरती..

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