मालिक की बेटी को चोदा फिर उसकी बहन की चुदाई

में आपने पढ़ा कि बुआ जी ने मुझे और अनु दीदी को सेक्स करते हुए देख लिया था. अनु मेरे नीचे लेटी थी और उस वक्त वो अपनी चुत में मेरा मस्त लंड लिए हुए पड़ी थी. अनु बुआ जी को नहीं देख पाई थी. शर्म या अपनी इज़्ज़त को ध्यान में रखते हुए शायद बुआ जी ने उस समय कुछ नहीं कहा.. लेकिन यकीन मानिए मेरी जबरदस्त गांड फट गई थी. मुझे पूरा यकीन था कि अब नौकरी तो जाएगी ही, मालिक जेल में भी बंद करा दे, तो कोई बड़ी बात नहीं होगी. इससे हुआ यह कि मेरा अच्छा ख़ासा मस्त खड़ा लंड.. एकदम से चूहा हो गया.

मैंने लंड निकालते हुए अनु से कहा कि कुछ गड़बड़ लग रही है. शायद उधर कोई था.
उसने मेरी बात सुनी तो तुरंत कपड़े पहने और वहाँ से निकल गई.

शाम तक का टाइम बिताना मेरे लिए पहाड़ जैसा हो गया था और बहुत डर भी लग रहा था. मैंने सोचा कि चाचा को फोन करके सब बता देता हूँ, लेकिन सोचा कि अभी देखते हैं, जब ज़्यादा ग़लत लगेगा तो चाचा को फोन करूँगा.

शाम के करीब 5 बजे बुआ जी का फोन मेरे मोबाइल पे बजा. उनका नंबर देखते ही मेरा शरीर काँपने लगा. मैंने डरते हुए फोन उठाया.
बुआ जी गरजती आवाज़ में कहा- कहाँ हो तुम, तुरंत ऊपर मेरे पास आओ.
इससे पहले कभी उन्होंने मुझसे ऐसे बात नहीं की थी. मैं समझ गया कि आज तो थप्पड़ पड़ेंगे और जेल भी जाना पड़ेगा.

खैर हिम्मत करके ऊपर गया और चुपचाप उनके सामने आंखें नीची करके खड़ा हो गया.
बुआ जी ने गुस्से से गरजते हुए कहा- मैं तुम्हें अपने घर का सदस्य समझती थी, भाई जैसा प्यार दिया तुमको… और तुमने, जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया, नमकहराम.. भैया को आने दो, तुम्हें जेल में ना करवाया तो कहना, तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आई, अपनी छोटी बहन से गंदा काम करते हुए?

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मैं बहुत डर गया था कि आज तो सब खत्म हो गया है, बस किसी तरह से जान बच जाए और मैं यहाँ से भागूं.

तभी मेरे दिमाग़ ने कहा कि बुआ को बात सब खुल कर बताना चाहिए, हो सकता है जान बच जाए.
मैंने हाथ जोड़ कर कहा- प्लीज़, आप मुझे कुछ कहने का अवसर तो दो.
उन्होंने घूर कर देखा और मुझसे गुर्राते हुए कहा- बोलो.

तो मैंने हिम्मत करके उनको शुरू से लेकर अब तक का सब कुछ बताया कि कैसे उस लड़के ने अनु दीदी को प्रेगनेंट किया था और मैंने उनका अबॉर्शन करवाया था और किन हालत में अनु दीदी और मेरे बीच में सेक्स हुआ, अगर मैं नहीं करता तो अनु दीदी किसी और से मजा लेतीं और फिर से चक्कर में फंस जातीं.
मैंने बुआ जी को ये भी बताया कि मैं अनु दीदी से शादी नहीं करूँगा और अनु दीदी भी एकदम क्लियर है, हमारा रिश्ता सिर्फ़ अनु दीदी की शादी तक का है और मैं आज ही नौकरी छोड़ कर चला जाता हूँ. बस आप मुझे माफ़ कर दो और किसी को कुछ ना कहो.

कुछ देर तक डांट पिलाने के बाद बुआ जी ने उस टाइम मुझे जाने दे दिया. बड़ी मुश्किल से रात कटी. इस बीच अनु दीदी का फोन आया तो मैंने कहा कि कुछ नहीं हुआ है. लेकिन मुझे डर है कि शायद किसी ने हमें देख लिया है, इसीलिए हमें अब सावधान रहना चाहिए और कुछ दिन तक ज़्यादा बात नहीं करनी चाहिए.

अनु भी मान गई. सुबह सब नॉर्मल था, सेठ जी, सेठानी जी ने कुछ नहीं कहा. सारे काम हर रोज की तरह हो रहे थे. मैं सेठ जी फैक्ट्री में छोड़ कर आया. इस सब का मतलब यही था कि बुआ ने अभी तक बम्ब नहीं फोड़ा था.
यह महसूस करके मुझे थोड़ी सी राहत हुई कि शायद जेल तो नहीं जाना पड़ेगा, पर हां नौकरी तो पक्का जाएगी. क्योंकि बुआ अब मुझे घर में तो रहने नहीं देगी.

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करीब 12 बजे बुआ जी का फोन आया, उन्होंने गुस्से में कहा- गाड़ी निकालो, मुझे कुछ मार्केट में काम है.
मैं तैयार हो गया था. बुआ जी ने गुस्से से मुझे देखा और पीछे बैठ गई. मेरी गांड फट रही थी कि ये औरत जाने क्या करेगी.

उन्होंने एक पार्क के सामने गाड़ी रुकवाई और मुझे पार्क में चलने को कहा.
वहाँ उन्होंने दुबारा से विस्तार से सारी बात पूछी. मैंने सब कुछ बताया और कहा कि सिर्फ़ आपके घर की इज़्ज़त की खातिर ऐसा हो गया है, वरना मैं कितने साल से काम कर रहा हूँ. आज तक आपको भी नज़र उठा के नहीं देखा.

और ये सच भी था.

बुआ जी को यकीन हो गया था और मुझे कहा कि मैं नौकरी और इज़्ज़त की खातिर आज के बाद कभी अनु से बात नहीं करूँगा.
मैंने भी हां कर दिया.

मैंने सारी बात फोन करके अनु को बताई कि उस दिन बुआ जी हमें देख लिया था और उन्होंने मुझे तुमसे दूर रहने को कहा है.. वरना मुझे जेल जाना पड़ेगा.
अनु मान गई कि अब हम कुछ दिन बिल्कुल बात नहीं करेंगे. वो भी बहुर डर गई थी.

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