मकान मालिक की जवान बेटी की चुदाई की कहानी

दोस्तों, लड़कियों, और लड़कों, नमस्ते। मेरी और भी कहानियों ने आपको जैसे फील दिया है अब तक, वैसे ही ये ओरिजनल घटना भी ऐसा ही फील देगी जैसे वो खुद आपके साथ हो रहा हो। सच्ची घटना-

ये उन दिनों की बात है, जब हम काम के सिलसिले से बाहर गए थे। तो महीनों का काम था, इस वजह से कहीं रूम लेके रुकना पड़ा था। मेरा काम थोड़ा ग्रामीण इलाके में ही होता है ज्यादातर, तो वहां शहरों वाली सुविधा भले ना मिले, पर गांव के लोग जरूर अच्छे मिल जाते हैं अक्सर।

वो सपोर्ट भी करते है मेरा सौर ऊर्जा से जुड़ा काम है दोस्तों आप भी जान लो, तो ऐसे ही एक टेंडर मिला था बिहार साइड में। तो मैं और 4 लड़कों को लेके वहां गया था सारे काम देखने।

मेरे हेड का भी आना-जाना लगा रहता था। अब काम तो शुरु हो गया था, बस वहां गर्मी के सीजन में रात गुजारने के लिए कहीं छत चाहिए थी, जिसके लिए हम परेशान थे। बाकी वो चारो लेबर तो कहीं भी सो जाते थे। पर हम नहीं सो पाते थे, आदत जो नहीं थी।

ऐसे ही कई लोगो को बोल के रखे थे। तो गांव के प्रधान जी ने के जगह दिखाई रेंट पे रहने के लिए एक ब्राह्मण परिवार, जिसकी आर्थिक स्थिति नहीं ठीक थी। उनकी 2 बेटियां थी सुंदर सी और एक छोटा बेटा 4 साल का, एक बड़ी लड़की लगभग 20 साल की रही होगी, दूसरी 18 साल की।

प्रधान जी ने बताया कि, “आप इनके यहां रुक सकते हैं।” चूंकि मैं भी ब्राह्मण था, तो उन्हें कोई दिक्कत भी नहीं थी।

बात तय हुई कि दो टाइम का खाना भी देंगे, चाय-पानी सब देंगे। रहने का एक रूम भी है अलग से, तो उन्होंने अपने से 5000 महीने का मांगा। तो प्रधान जी ने थोड़ा आना-कानी की उनसे कि, “हम सब के लिए ही रुके है, थोड़ा हिसाब से बताओ।” तो उन्होंने धीरे से कहा, “जो आपकी मर्जी हो दे देना।”

पर मुझे ये ठीक नहीं लगा। मैंने सोचा मुझे रहने को घर मिला, खाना मिला, मैं पैसे बिल्कुल नहीं काटूंगा। बल्कि ठीक परिवार था, तो मैं पैसे और बढ़ा के देने को मन में सोच लिया। बस फिर क्या, हम वहां रहने लगे। सब ठीक चल रहा था। उनकी बड़ी बेटी मेरा काफी अच्छा ख्याल रखती थी चाय-पानी और खाने का। टॉयलेट बाथरूम एक ही था, तो जब तक मैं ना नहां लू सब इंतजार करते रहते थे अपने नहाने का।

कुल मिला कर सब ठीक लग रहा था। पर मैंने नोटिस किया कि जैसे दोनों लड़कियां हमको छुप-छुप के देखती थी, और किसी ना किसी बहाने कमरे में आती रहती थी। कभी कुछ लेने, तो कभी कुछ देने।

मुझे भी अजीब नहीं लगा। क्योंकि घर तो उन्हीं का था। बाहर के तो हम थे। पर अब हमें अपनापन सा लगने लगा था। क्योंकि वो दोनों कुछ देर बात करने भी लग गई थी जब भी उन्हें टाइम मिल जाता। उनकी मम्मी भी काफी घुल मिल गई थी हमसे। उनके पापा पैसे के लिए बाहर थे काफी दिनों से।

एक दिन की बात है। मैंने अपने लिए एक कूलर लिया हुआ था। दिन में अचानक से आया तो देखा मेरे ही रूम में दोनों लड़कियां सोई हुई थी कूलर चला के। क्योंकि मैं ताला बंद करके नहीं जाता था। मेरे आने की उन्हें आहट भी नहीं हुई, तो मुझे अच्छा लगा सच में कि वो मेरे रूम में सोई थी।

आपको बता दूं कि पहले मेरे मन में कुछ ऐसा वैसा नहीं था। पर उस दिन वो इतना पागल जैसे सो रही थी क्या बताऊं। बड़ी वाली स्कर्ट पहनी थी, और छोटी वाली फ्रॉक पहनी थी। वो कूलर की तरफ पैर करके सोई थी, तो हवा से उनके फ्रॉक और स्कर्ट ऊपर उठ गए थे। पेट खुला था, और दोनों के पूरे अंडरवियर एक की ब्लैक और दूसरी की प्रिंट में थी पूरे जिस्म से चिपके हुए थे। पूरी उनकी चूत की लकीर तक साफ साफ दिख रही थी।

मैं कुछ देर ऐसे देखता रहा। मन किया जाके बगल में बैठ के सहलाऊं, पर ऐसे ही चुप-चाप देखता रहा। उनकी मम्मी अपने छोटे बेटे को लेके अपने कमरे में सोई थी। उनके घर ज्यादा किसी का आना जाना भी नहीं है। और उनके पास कूलर भी नहीं था। बस एक पंखा था रूम में, एक जिसमें मैं रुका था, और दूसरा जिसमें मम्मी थी उसकी। ले देके बस दो कमरे।

मुझसे रहा नहीं गया, तो मैं बगल में जाके उनके साथ ही लेट गया।

मेरे लेटने के बाद बड़ी वाली जाग गई। वो उठ के बैठ गई शर्म के मारे, और छोटी वाली के कपड़े ठीक करने लगी

वो बोली: भईया गर्मी लग रही थी, तो आपके रूम में लेट गए। सॉरी।

हमनें कहा: कोई बात नहीं। घर आपका ही है ना।

तब बोली: हां, पर मम्मी डाँटेगी जान गई तो।

मैंने बोला: कुछ नहीं कहेंगी। मैं बोल दूंगा कि सो जाने दिया करिए मेरे रूम में।

तो वो मुस्कुराने लगी। तब तक छोटी वाली भी जाग गई।

सॉरी दोस्तों, नाम बताना मैं भूल गया उनका। बड़ी वाली का नाम पिंकी और छोटी का नाम नेहा था। दोनों शरीर से एक दम मस्त सेक्सी लगती थी, जिसके लिए लड़के पागल होते हैं। कुछ वैसा ही था एक दम टाइट जिस्म, गोल-गोल बूब्स, कमर के नीचे की बनावट बढ़िया, एक दम पागल कर देने वाले जिस्म थे दोनों के। और इसके अलावा दोनो कुंवारी भी थी।

पिंकी पानी लेके आई तो हम पानी पिए, और तब तक नेहा फिर से लेट गई नींद में। तो उसको देख के फिर वो मुस्कुराते हुए बोली-

पिंकी: जगा दीजिये, आपको सोना होगा ना।

मैंने कहा: जाने दो।

तो बोली: मम्मी कुछ बोले ना आपको, डर लग रहा।

तो मैंने पिंकी का हाथ पकड़ के बेड पे अपने बगल बैठा लिया। वो बैठ गई और मेरी तरफ देखने लगी।

मैं बोला: क्या हुआ?

तो सर नीचे कर ली और बोली: कुछ नहीं हुआ।

और धीरे से मुस्कुरा दी।

मेरी हिम्मत बढ़ गई सच में, तो मैं उसे गाल पे किस कर दिया। वो मुझे अब इतने प्यार से देखी कि कोई भी लड़का होता ना तो बाहों में भर लेता ऐसे में लड़की को।

फिर उसने नेहा को जगाया और दोनों चली गई। बोल के गई कि-

पिंकी: आज से नहीं आऊंगी कमरे में।

पर उसके बोलने के अंदाज ने बता दिया कि मेरे ही साथ रहना चाहती थी रूम में। मैं हंस के टाल गया।

ऐसे ही कई दिन बीत गए। दिन में मैं आ नहीं पाया तब से। वो रोज मेरे ही रूम में सोती अब दिन में, क्योंकि मैंने उनकी मम्मी से बोल दिया था, कि हमें कोई दिक्कत नहीं थी।

फिर ऐसे होते करते एक दिन मैं 8 बजे रात काम से पहुंचा तो पता चला उनके घर गेस्ट आये थे। एक चाची, एक बुआ, और एक लेडीज और थी। मैं समझ गया कि आज रात तो सोने के लिए दिक्कत होगी उनको, पर मैं कुछ नहीं बोला। नार्मल था एक दम। टाइम से खाना मिल गया, और खा लिया मैंने। मैं लेटा था न्यूज़ देखते हुए, तो नेहा बुलाने आई हमें-

नेहा: भइया आपको मम्मी बुला रही किचन में।

तो मैं गया।

तो वो बोली: बेटा इतने लोग आ गए हैं, तो नेहा और पिंकी को अपने रूम में नीचे चटाई बिछा के सो लेने देना। कल ये लोग चली जायेगी।

मेरी तो खुशी का ठिकाना नहीं था। पर उन्हें प्रतीत नहीं होने दिया।

मैं बोला: कोई नहीं, आपका ही घर है। मेहमान तो हम है।

तो वो हंसने लगी और मैं आ गया रूम में वापस। मेरी नींद जैसे अब उड़ गई हो। मैं बस लेटे लेटे अब उन दोनों का ही वेट करने लगा।

फिलहाल काम धाम निपटा के वो दोनों 10 बजे तक आई रूम में चटाई लेके। रूम छोटा था तो चटाई बिछाने पे भी एक ही लोग लेट पाता।

तो हमने बोला: पिंकी बेड उठा दो फिर तीनों लोग लेट पाएंगे कूलर में, वरना सब को हवा नहीं लगने वाली।

नेहा फट से मान गई क्योंकि उसको गर्मी कुछ ज्यादा सताती थी। खैर हम अब जमीन पे लेट चुके थे। सबसे आगे नेहा थी फिर पिंकी, और दीवार की साइड में मैं। नेहा कूलर की साइड मुंह करके लेट गई, और 10 मिनट में सो गई।

पिंकी को नींद नहीं आ रही थी। आप समझ ही गये होंगे कि क्यों। क्योंकि आज वो किसी लड़के के साथ रात में सो रही थी, वो भी एक दम बगल में। मैं भी जाग रहा था, और मोबाइल में देख रहा था। मैंने देखा वो भी सर को मेरी तरफ घुमा के मोबाइल देखने लगी थी। मुझे अच्छा फील हो रहा था कि बयां नहीं कर सकता। 10 मिनट मोबाइल देखने के बाद मैंने फ़ोन रख दिया।

वो बोली: लाइट जला के सोते हैं क्या आप?

तो मैं बोला: नहीं, बंद करता हूं।

तो बोली: बन्द कर दो। हम भी बंद करके सोते हैं।

हमने कहा’ ठीक है बंद कर दो।

वो शायद बाहर गई, और बाथरूम करके आई।

तो मैंने बोला: दरवाजा भी बंद कर दो, वरना बिल्ली आती है रात में।

तो वो कुंडी लगा के, और लाइट बंद करके आ गई, और लेट गई। नेहा काफी सीधी लड़की थी। वो सो गई थी। पिंकी काफी समझदार और सयानी थी। वो दिखने में काफी हॉट थी। जब वो लेट रही थी, तो उसका पिछवाड़ा मेरी कमर में लगा। इतना सॉफ्ट था, कि क्या कहें। फिर वो सरक गई।

मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ, कहां से कैसे सुरु करूँ, क्योंकि मुझे आज इसके साथ प्यार करना था और सेक्स भी। मैंने जान बूझ के अपना हाथ उसके हाथ में दे दिया। वो पहले तो हाथ खींची, पर फिर बाद में अपने हाथ से मेरे हाथ को कस के पकड़ ली। तब मैं समझ गया कि जैसा मैं सोच रहा था, वैसे ही वो भी सोची थी आज रात के लिए।

मैं उसके कान में चुपके से बोला: पिंकी तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो।

वो बोली: क्या सच में?

हमने बोला: हां। पर पहले बोलने की हिम्मत नहीं हुई थी।

वो बोली: पहले बोल देते तो क्या मैं काट लेती आपको? या मम्मी से बता देती?

मैं हंस दिया तो वो मेरे गाल पे चुटकी काट ली। अब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था।

मैं बोला: प्यार करोगी आज रात हमसे? क्या पता मौका ऐसा मिले ना मिले।

तो वो शर्म के मारे मुंह घुमा ली। तो मैंने उसके पेट पे अपना हाथ रख दिया। वो मेरा हाथ पकड़ ली।

मैं उसकी तरफ एक दम सट गया, एक पैर उसके ऊपर रख दिया, और गाल पे चुम्मी ले ली।

तो वो धीरे से बोली: एक और चुम्मी दो प्लीज।

तो हममें दे दी। दोस्तों पिंकी ने आज भी स्कर्ट पहना हुआ था, और टी-शर्ट, और मैंने फुल लोअर और टी-शर्ट पहना हुआ था।

मैंने उसके पेट से हाथ धीरे-धीरे उसकी चूत की तरफ सरकाया, तो उसकी सांस तेज-तेज चलने लगी। पर उसने रोका भी नहीं। नेहा चुप-चाप सो रही थी, और कूलर की आवाज की वजह से हम दोनों को सुन भी नहीं पा रही थी।

मैं अब उठ के बैठ गया, और एक हाथ से उसकी स्कर्ट को ऊपर किया। फिर अंडरवियर के ऊपर से ही चूत को सहलाने लगा। मैंने महसूस किया कि अब उसकी चूत गीली होने लगी थी। मैंने धीरे से उसकी टांगो को फैलाया, तांकि ठीक से मैं चूत को महसूस करूँ।

उसने फैला ली टांग। अब मुझसे रहा भी नहीं जा रहा था।

मैं नीचे लेट गया, और अपने मुंह को उसकी चूत के पास ले गया। बता नहीं सकते दोस्तों अंडरवियर के ऊपर से ही इतनी सेक्सी महक आई, कि मैं जैसे पागल हो गया। मैंने ऊपर से ही किस किया, तो जोर से आहें भरने लगी। तो मैंने ऊपर हाथ से उसके मुंह को दबा दिया। इससे वो समझ गई कि आवाज नहीं करनी है।

अब मैं दोनों हाथों से उसके बूब्स दबाना शुरु किया, और नीचे मुंह से किस करने लगा, तो वो पगलाने लगी जैसे। फिर मैं एक हाथ से उंसकी चड्ढी उतार दिया धीरे से, और दोनों हाथों से पहले उसकी पूरी नंगी चूत को फील किया। उसके बाल कम थे, तो मैं समझ गया कि उसने हाल ही में साफ किया होगा।

अब मैं उसकी चूत में उंगली डाल के धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते-करते उसपे किस करने लगा, तो वो उचकने लगी, मचलने लगी, जैसे तड़प रही हो सेक्स के लिए।

इसके बाद मैं फिर उसके बगल में आके लेट गया, और उसके हाथों को मैंने अपने लोवर में डाल दिया। वो मेरे एक दम से तने हुए लंड को हाथों में झट से पकड़ ली, और मसलने लगी।

मैं बोला: पिंकी आराम से प्लीज़, दर्द होता है।

तो वो आराम से करने लगी और ऐसे लेटे हुए हम दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए और मैं भी उसकी‌ चूत को सहलाते हुए मजे ले रहा था। डर भी लग रहा था कहीं नेहा ना जाग जाए। 10 मिनट ऐसे ही सहलाये। फिर उसने मेरे कान में कहां-

पिंकी: अब करो प्लीज़।

तो मैं समझ गया कि उसको अब मेरा लंड उसकी गर्म चूत में चाहिए। मैं भी देर नहीं किया, मैं भी पागल हो रहा था ये सब के लिए। फिर मैंने धीरे से अपना लोअर उतारा, और पूरा नंगा हो गया, और उसको पूरा नंगा किया। क्योंकि बिना पूरा शरीर टच हुए सेक्स में मजा नहीं आता।

अब दोनों पूरे नंगे थे। मैं उसके ऊपर आ गया‌ तो उसने मेरे लंड को पकड़ के अपने चूत के छेद में लगाया। तो इतना चिकना था कि बिना मेहनत के थोड़ा सा जोर लगाने के बाद फट से चूत में चला गया, और उसकी चूत फट गई। उसके मुंह से आवाज निकल गई, और मैं घबरा गया। पर नेहा नहीं जागी, और ये अच्छा हुआ।

फिर हम दोनों एक-दूसरे को लिप किस करने लगे और हम धीरे-धीरे उसको चोदने लगे। वो भी कमर हिला-हिला के साथ देने लगी। ऐसे ही लगभग 5 मिनट तक मैं उसको चोदता रहा जब तक कि वो नहीं बोल दी “बस करो प्लीज़”। तब मैं समझ गया कि वो अब झड़ गई थी। क्योंकि वो हमें चिपक के पकड़ ली थी कसके।

मैं बोला उसके कान में: मेरा अभी नहीं हुआ।

तो धीरे से बोली: जल्दी करो वरना नेहा ना जाग जाए।

तो मैं जोर-जोर से चोदने लगा। एक दम पानी-पानी हो गया था उसकी चूत में।

फिर मैं बोला: डॉगी स्टाइल में करते हैं।

और वो मान गई। अब मैं डॉगी स्टाइल में उसको पीछे से जोर से चोदने लगा। मेरा भी वीर्य निकलने ही वाला था, तो मैं रुका कि कहीं दिक्कत ना हो जाये। फिर मैंने उसको सीधा किया और उसको लंड मुंह में लेने को बोला। तो वो मना कर दी पर प्लीज़-प्लीज़ दो बार बोलने पे मान भी गई। अब वो मेरा लंड मुंह में लेके चूसने लगी। मुझे जैसे जन्नत मिल गई हो इतना मजा आ रहा था।

वो जोर से चूसने लग गई, और मैं पूरा उसके मुंह में भी झड़ गया। वो पूरा चूसती चली गई, और उसे भी मजा आने लगा था। अब हम दोनों झड़ने के बाद 5 मिनट ऐसे ही लिपटे रहे एक-दूसरे से नंगे बदन।

फिर हमने उसको चूम लिया, और कान में बोला-

मैं: कपड़े पहन लो पिंकी। नेहा ना जाग जाए।

तो हम दोनों ने कपड़े पहन लिए। इत्तेफाक से उनके गेस्ट तीन दिन रुक के गए, तो हमने लगातार तीन दिन ऐसे ही मजे किये, और किसी को पता नहीं चला।

आज भी उसके काल आते है मुझे।

वो हमसे प्यार करने लगी है।

ये घटना आपको कैसी लगी बताना जरूर। मेरी जी-मेल आईडी है।

यह कहानी भी पड़े  मेरी जीफ़ शेफाली की सील तोड़ी मेरे घर पर


error: Content is protected !!