मजबूरी ने रंडी बनाया – मलिक से चुदाई

ही दोस्तो मेरा नाम राधा है और मई 21 साल की हू. मैने 18 साल मई ही घर से भाग कर शादी कर ली थी. शादी के एक साल के अंदर ही हुमारा बेटा भी पैदा हो गया हुमनाई उसका नाम अजीत रखा है. मगर शादी के एक साल बाद ही मेरे और मेरे पति मई जगृेह होना शुरू हो गये.

जगरो का मैं कारण यही था की मेरा पति ना तो मुझे सामजिक सुख दे पा रहा था ना ही शरीरक सुख. मेरी भारी जवानी मई मानो बुरहापा आ गया था और हम ग़रीब भी थे क्यू की मेरा पति ठीक से कमाता भी नही था. जागृह इश्स हद तक बढ़ गया की एक दिन वो मुझे और मेरे बेटे दोनो को चोर कर चला गया.

क्यूकी मैने भाग के शादी की थी तो मा-बाप ने भी सहारा देने से माना कर दिया. मेरे पास कोई डिग्री तक नही थी जो मई कोई जॉब कर लेती. मजबूरन मे लोगो के घर झारू बर्तन करती हू और मुंबई के छोटे से चाव्ल मे अपना ज़ुज़रा चलती हू.

अब मई अपने फिगर के बारे मई बताती हू. मेरा रंग सफेद, लंबे काले बाल और मेरा शेप 32-27-35 है. मुझे सेक्स किए भी कई दिन हो गये है. अजीत के पैदा होने के बाद तो मैने और मेरे पति ने कभी सेक्स ही नही किया था.

तो अब कहानी पर आते है. हुमेशा के तरह मई मलिक के घर मई झारू लगा रही थी. मेरे मलिक का नाम सुरेश है. उनकी नज़र हुमेशा से मुझपर थी. मई जिसस रूम मई काम किया करती वो उससी रूम मई आ कर मेरे बूब्स को तारा करता. मई सब कुछ जानते हुए भी कुछ नही बोल पति थी.

उस दिन मालकिन घर पर नही थी और मलिक को जो मौका चाहिए था वो उन्हे मिल गया. उस दिन मैने डार्क ग्रीन सारी पहनी थी. सारी के ब्लाउस का बटन टूट चुका था तो मैने सेफ्टी पिन से ब्लाउस को अटकाया हुआ था.

मेरा बेटा 3 साल का होने वाला था और मई उससे काइंडेगॅर्टेन स्कूल मई डालना चाहती थी. मैने सब काम ख़तम कर के मलिक के पास गयी.

मे: मलिक… मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

मलिक: हन.. बोल क्या बोलना है?

मे: मेरा बेटा 3 साल का हो गया है और मई उससे काइंडेगॅर्टेन स्कूल मे डालना चाहती हू.

मलिक: अछा ये तो बहुत आक्ची बात है…

मे: हन… मगर अजीत के अड्मिशन के लिए पैसे नही है मेरे पास. आप मेरी थोड़ी मदद कर दो… सॅलरी से तोरा तोरा कर के काट लेना.

मलिक: कितने पैसे चाहिए?

मे: 6000 रुपय…

मलिक: 6000!!! तेरी सॅलरी ही 2500 है 500 भी कटु तो साल भर लग जाएँगे और बीच मे तू भाग गयी तो?

मे: नही भागुंगी… मेरा भरोसा कीजिए.

मलिक: अड्वान्स तो नही दे सकता… हन एक और तरीका है पैसे कामाने का अगर तू चाहे तो.

मे: कौन सा तरीका?

मलिक: मेरे साथ सोना होगा..

मे: ये क्या बोल रहे हो आप मई ऐसी वैसी लड़की नही हू.

मलिक: तो डाल दे अपने बाकछे को किसी सरकारी स्कूल मे. ना तेरे पास इतने पैसे होंगे ना तेरा बेटा अकचे स्कूल मे पढ़ लिख पाएगा, सोच ले.

मई धरम संकट मे थी. मगर मेरे बेटे का अक्चा बविस्या मेरे लिए सब कुछ है. मेरी ज़िंदगी तो वैसे भी बर्बाद है.

मे: ठीक है मुझे मंज़ूर है.

मलिक: सोच ले.. तुझे मेरी कुटिया बनना होगा.

मे: हन मंज़ूर है…

मलिक उठ कर मेरी तरफ आए और मेरा सारी का पल्लू गिरा दिया और मेरे ब्लाउस के बीच मई हाथ डाल कर उससे फार दिया. मलिक के ब्लाउस फर्टे ही मेरे बूब्स ऐसे बाहर आए जैसे जैल मई बंद कैदी जब जैल से निकलता हो. मई काम करते के कारण मुझे पसीना चल रहा था.

मलिक मेरे चेरे का पसीना छत गये ओए मेरे बूब्स दबाने लगे. मेरे बूब्स से तब भी दूध निकलता था जिससे मलिक पूरा पीने लगे और कभी कभी तो दंटो से मेरी निपल को कीचते. मई बस बेबस खरी थी.

फिर मलिक ने मुझे टेबल पर झुका दिया और मेरी सारी उठाई. फिर उन्होने मेरी पनटी उतार दी और एक पतली चारी से मेरी गांद पर एक ज़ोरर से मारा. चारी पारट ही मेरी चीख निकल गयी. मेरी गांद पर चारी का निशान झाप गया था.

मगर मलिक को मानो मेरी चीख सुनाई ही ना दी हो. वो चारी से मेरी गांद पर मरते गये और मई चीखती गयी. लगभग 10-12 चारी के बाद जाकर वो रुके. मेरी गांद पूरी तरह लाल हो चुकी थी और मई रो रही थी.

फिर मलिक से मुझे झूटनो पर बैठाया और सेम तारएके से मेरे बूब्स पे चारी से मरने लगे. मई दर्द से तिलमिला रही थी अगर मई अपने आप को बचाने की कोशिश करती तो अगर हिट और ज़ोर से होता. लग भाग 9 चारी मेरे बूब्स पर मरने के बाद मलिक जाकर सोफे पर बैठ गयी और मुझे अपनी तरफ बुलाया.

मई जाने के लिए उठ ही रही थी की मलिक ने बोला- “एक कुट्टिया कैसे चलती है… वैसे ही चल के आ”. मई फिर जुटनो के बाल चल कर उनके पास गयी. फिर उन्होने मुझे ज़ुबान बाहर निकालने को कहा. मैने वैसा ही किया. मलिक ने थोड़ी देर मुझे लीप किस किया फिर मेरे मूह पर ही थूक दिया.

उसके बाद मलिक ने मेरा सिर पाकारा और अपना लंड निकल कर मेरे मूह मई दे दिया. मलिक का लंड 9 इंच लंबा और 4 इंच मोटा था. बरी मुस्किल से मई उनके लंड को मूह मई ले पा रही थी. फिर मलिक मेरे मूह को छोड़ने लगे. उनका लंड मेरे गले मई जाकर लग रहा था जबकि उनका लंड आधा भी मेरे मूह मई नही जा रहा था.

फिर उन्होने पूरा लंड मेरी मूह मई देने की कोशिश की मई साँस नही ले पा रही थी. मेरा पूरा चेहरा लाल हो गया था. मेरी आँखो से आँसू आने लगे थे. मई बेहोश होने ही वाली थी की मलिक ने लंड बाहर निकल तब जाकर कही मुझे साँस आई.

इतने मे अजीत भी सोक उठ गया. क्यूकी अजीत छोटा था तो मई उसको अपने साथ ही काम पे लेकर जया करती थी. अजीत मेरी आवाज़ सुनकर रूम मई आ गया.

मलिक: देख… तेरा बेटा तुझे चूड़ते हुए देखने आया है.

मई सिर झुकाए बैठी हुई थी. फिर मलिक से मुझे टेबल पर लेता दिया और मेरी दोनो टाँगे फैला दी और मुझे ही दोनो टॅंगो को पकड़ने को कहा. क्यूकी मैने काफ़ी दीनो से सेक्स नही किया था जिसके कारण मैने झट के बाल भी नही शेव किए थे.

मगर मलिक को ये पसंद आया. वो मेरी छूट झटने लगे साथ ही साथ मेरी झट के बालो से खेल रहे थे. मुझे काफ़ी दीनो बाद किसी मर्द का साथ पाकर अक्चा लग रहा था. मेरा पति तो 2 मीं मई ही झार जाता था. मई भी अब गीली होने लगी थी.

थोड़ी देर ऐसे ही चलने के बाद मलिक खड़े हुए और अपने लंड मेरी छूट कर आस पास फेरने लगे.

मलिक: बोल साली कुटिया चूड़ना है मुझसे?

मे: हन.. मलिक छोड़िए मुझे. मई आपकी कुटिया हू..

मलिक: तो ले फिर कुटिया…

फिर मलिक ने एक बार मई सारा लंड मेरे अंदर डाल दिया. मलिक का लंड मेरे अंडर इतना गहरा गया की मेरे पति का इसका आधा भी नही जाता था.

मे: आहह… मलिक धीरे कीजिए… दर्द हो रहा है…

मलिक: चुप साली कुटिया..

मलिक जनवरो की तरह मेरी लेने लगे. वो तो मानो थकने का नाम ही नही ले रही थी. धीरे धीरे मेरा दर्द भी मज़े मई बदल गया. अजीत वही खरा सब देख रहा था. मुझे उसके लिए बुरा लग रहा था मगर ये सब उससी के लिए था.

फिर मलिक ने मेरी दोनो टाँगे अपने कंधो पर रख ली और फिर से मेरी चुदाई चालू कर दी. मुझे भी अब मज़ा आने लग गया था. लगभग 30 मीं ऐसे ही चूड़ने के बाद मलिक सोफे पे बैठ गये और मई जर उनके लंड को अपने छूट मई फिट किया और बैठ गयी. कभी मई मलिक के लंड पर उपेर नीचे करती तो कभी मलिक नीचे से मुझे छोड़ते.

थोड़ी देर बाद मलिक ने मुझे घोरा बनाया और मुझे पीछे से छोड़ने लगे. मलिक के हर एक शॉड मई उनका पूरा लंड मेरे अंदर बाहर हो रहा था.

बीच बीच मई मलिक ने मुझे गंदी बाते भी करने को कहा, जैसे…

“छोड़ो मुझे..”

“और ज़ोर से…. ”

“फार डीजेए मेरी छूट को..”

ये सब बोलनाय से मुझे भी मज़ा आ रहा था और मलिक की स्पीड भी बर्हते जा रही थी. यह सब होते हुए अजीत देख रहा था. ऐसे ही अलग अलग तरीके से मलिक मेरी चुदाई करते गये. लगभग 2 घाटे मई चूड़ते रही तब जा कर मलिक से अपना सारा माल मेरे मूह मई गिरा दिया और मुझे उससे छत जाने को कहा. मई भी उनकी हर एक बूँद छत गयी.

मेरी छूट का भोसरा बन चुका था. ऐसे चुदाई मेरी आज ट्के कभी नही हुई थी. मेरे पूरे सरीर मई दर्द था मगर अंदर एक सुकून सा भी था. मई कुछ देर वैसे ही लेती रही.

मलिक ने जेब मई से 7000 रुपय निकले और मुझ पर फेक दिए और बोले – “इससे अपने बेटा का अड्मिशन करा लेना और बचे पैसो से अपने लिए कपारे खाद लेना…” ऐसा बोल कर वो वाहा से चले गये.

मई वही लेते सोच रही थी की मैने आज कुछ पैसो के लिए अपनी इज़्ज़त बेच दी. मगर मुझे इसमे मज़ा भी आया था.

तो दोस्तो कैसी लगी आपको मेरी ये कहानी. मुझे कॉमेंट मई ज़रूर बताईएएगा. इसके आयेज की सफ़र की कहानी भी जल्द ही आएगी.

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