मा ने चूत देके बेटे को खुश किया

ही दोस्तों, मेरा नाम अनिल है, और आज मैं आपको अपने जीवन की एक सॅकी घटना सुनने जेया रहा हू. मैं अपने बारे में बता डू. मेरी आगे 21 यियर्ज़ है. मेरे घर में मेरी मा कोमल 43 यियर्ज़, दाद आलोक 46 यियर्ज़ है.

बात आज से 3 मंत्स पहले की है. मेरा और मेरी गफ़ का ब्रेकप हो गया था. कारण उसके बाप ने उसकी शादी किसी और से करा दी. मैं उसकी याद में शराब पीने लगा था. मेरे घर वालो को ये बिल्कुल पसंद नही आ रहा था. मगर मैं फिर भी दारू पीटा रहा.

पहले मैं दारू बाहर पीक नशा बाहर ही तोड़ के आता था. मगर जैसे ही मेरे पापा ने मुझे मारा पीटा. मैं अब दारू पीक घर भी आने लगा था.

एक बार की बात है. मैं दारू पीक घर आया. मेरे पावं डगमगा रहे थे. मेरे बाप ने मुझे दो गालियाँ दी, और चले गये. बुत मेरी मों ने मुझे कंधे का सहारा दिया, और मुझे मेरे रूम तक ले गयी.

मैं नशे में अपनी गफ़ का नाम ले रहा था, और अंजाने में मेरे हाथ मा के बूब्स को टच हो रहे थे. मों ने कुछ नही कहा, और मुझे सुला के सोने चली गयी. नेक्स्ट दे भी वही बाप की गाली और मा का समझना चलता रहा.

11 बजे सुबा की बात है. मैं अपने कमरे में बैठा था. तभी मेरे कमरे में मा आई.

मा: बेटा मुझे कुछ बात करनी है.

अनिल: मा मुझे कोई बात नही करनी. तू चली जेया प्लीज़.

मा: देख तू नही माना तो अछा नही होगा. हम तुझे इस तरह नही देख सकते. फिर बात क्या है तू बता तो सही. तू बात तो कर. हर सवाल का जवाब होता है.

अनिल: क्या सवाल-जवाब करू बताओ? तुम जानती हो मैं रश्मि से कितना प्यार करता था. छ्चोढ़ के चली गयी मुझे.

मा: बेटा लाइफ में ये सब आम बात है. तू अभी रश्मि को याद कर रहा क्यूंकी तुझे कोई दूसरी नही मिली. जैसे ही तुझे दूसरी लड़की मिलेगी, तू रश्मि को याद भी नही करेगा.

अनिल: ऐसी बात नही है मा. रश्मि ख़ास थी. हमने क्या-क्या पल साथ बिताए है आपको क्या बतौ.

मा: कुछ मत बता, मुझे सब पता है. इस उमर में सेक्स ही किया होगा. और इसी वजह से तुम पागल हो रहे हो.

अनिल: मा ये क्या बात कर रही हो?

मा: चल अब ज़्यादा भोला मत बन. और सब सच-सच बता उसकी कों-कों सी चीज़ तू भूल नही पा रहा. मैं हेल्प करूँगी समाधान निकालने का.

अनिल: मा तुमने जो कहा, बस उसी से रिलेटेड. तुम तो जानती ही हो, मैं क्या बतौ?

मा: ओक, तुझे शरम आ रही है. मैं पूच रही, तू बताना ये बात है के नही. क्या रश्मि तेरा नूनन्ू चूसा करती थी?

अनिल: ह्म मा.

मा: क्या तुम उसके दूध पिया करते थे?

अनिल: ह्म मा.

मा: क्या तुम दोनो बहुत सेक्स करते थे?

अनिल: ह्म मा.

मा: अछा बताओ रश्मि के बूब्स कैसे थे? और उसकी बर कैसी थी?

अनिल: बिल्कुल गोल-गोल बूब्स, आंड पिंक बर थी.

मा: अछा मैं अगर कुछ टाइम के लिए रश्मि बनू तुम्हारे लिए, तो तुम उसे भूलने की कोशिश करोगे?

अनिल: मा आप ये क्या बात कर रही है.

मा: मैं जितना पूछी उतना ही बता.

अनिल: मगर मा आपके लिए मेरी ऐसी फीलिंग्स नही है.

मा: फीलिंग तेरी अभी जगा दूँगी. उससे पहले तू प्रॉमिस कर ये बात सिर्फ़ हमारे बीच रहेगी. कोई दोस्त से शेर नही करेगा, और तेरे दाद के सामने तो बात आनी ही नही चाहिए.

अनिल: ओक प्रॉमिस मा.

अब मा अपने सारी पेटिकोट खोल कर पनटी ब्रा में आ गयी.

मा: बता मैं कैसी लग रही हू?

अनिल: अन्बिलीवबल मा. मुझे नही मालूम था आप इतनी हॉट हो.

मा: चल तू अपने कपड़े उतार. आज मैं तेरे नूनन्ू को चूसूंगई.

फिर मों ने मेरे लंड को चूसना स्टार्ट किया. करीब 5 मिनिट चूसने के बाद मेरा लंड पूरा टाइट हो गया. अब मैं इससे आयेज बढ़ना चाहता था.

अनिल: मा क्या मैं आपकी पनटी खोल डू?

मा: ओक, तुझे आज ही छूट मारनी है?

अनिल: हा मा.

फिर मों ने अपनी पनटी ब्रा खोल दी. दोस्तों क्या बतौ रश्मि से ज़्यादा सुंदर छूट थी मेरी मा की. मैने अपना लंड मा की छूट में सेट किया, और आराम-आराम से धक्के मारने स्टार्ट किए.

मा: आ बेटा, आराम से.

अनिल: मा आपकी छूट तो मस्त है. मैं बेकार में रश्मि के पीछे पागल था.

मा: एयेए उउउ ईयीई ऊओ आ बेटा देखा मैने कहा था ना फीलिंग तेरी अभी जगा दूँगी. तू रश्मि को याद भी नही करेगा.

अनिल: एस मा क्या मस्त बूब्स है आपके, मॅन कर रहा पीटा राहु.

मा: हा बेटा, पी ले बेटा.

पुर रूम में छाप-छाप की आवाज़ चल रही थी. मैं मा की छूट मारता रहा, और उनके बूब्स चूस्टे रहा.

अनिल: वैसे मों तुम्हे ये प्लान कैसे आया मुझे ठीक करने का? और अगर मैं ना कर देता तब?

मा: बेटा हम भी तुम्हारी आगे से गुज़रे हुए है. और रही बात ना करने की, आज तक कोई मर्द औरत की बर को देख कर ना नही कर पाया है. और वो भी जब बर मेरी जैसी हो.

अनिल: एस मों, मैं ऐसे ही तुम्हे रोज़ छोड़ूँगा. मों ई लोवे योउ.

नेक्स्ट दे:-

अनिल: वैसे मा, हमे सेक्स करने में मज़ा तो बहुत आ रहा है. मगर पापा से च्छूप-च्छूप के दर्र-दर्र के अछा नही लग रहा.

मा: मगर हम लोग कर भी क्या सकते है?

अनिल: क्यूँ ना पापा को भी मिला लिया जाए?

मा: तू पागल है. वो हमारा सेक्स भी बंद करवा देंगे.

अनिल: कोई अछा प्लान तो बनाओ

मा: मेरे पास कोई प्लान नही इसका.

अनिल: मेरे पास है. मैं एक कॉल गर्ल बुक करूँगा और उसे अपने घर मेरी फ्रेंड बना कर लौंगा. सनडे दाद घर पे होते है तो. वो घर पे रहेंगे, और तुम बाहर चली जाना घूमने वैसे ही. वो कल्लगिर्ल घर में आएगी और दाद को रिझाएगी, और अपनी छूट दिखाएगी. फिर जैसे ही वो सेक्स करेंगे, हम आ जाएँगे, और उस कल्लगिर्ल को भगा देंगे. बाकी तुम्हे मालूम है आयेज क्या करना है.

मा: अगर तेरे पापा ने उस कल्लगिर्ल के संग सेक्स नही किया तब?

अनिल: अर्रे मा, तुम्ही ने तो कहा था कोई मर्द छूट को ना नही कह सकता.

मा: फिर इस सनडे का प्लान फिक्स कर.

सनडे:-

मा: सुनो मैं अनिल के संग बेज़ार जेया रही हू. तुम घर पे ही रहना, हमे टाइम लगेगा.

पापा: ओक, आराम से जाओ.

कुछ समय बाद हम घर से निकल गये, और उसके कुछ पल बाद कल्लगिर्ल घर आई मेरी फ्रेंड बन के. फिर उसने अपना काम करना स्टार्ट किया.

दाद (फोन में): अनिल तुम्हारी फ्रेंड आई है.

अनिल: कोई बात नही, उसे बाद में आने को बोल दीजिए.

दाद (कल्लगिर्ल से): बेटा वो बाद में आने को बोल रहा है.

कल्लगिर्ल: अंकल मैं थोड़ी देर बैठ जौ, बाहर बहुत गर्मी है?

दाद: ओक शुवर, बैठो मैं जूस लेके आता हू.

ये सब हम बाहर की खिड़की के होल से देख रहे थे. कल्लगिर्ल ने अपनी त-शर्ट उतार दी. अब वो सिर्फ़ स्पोर्ट्स ब्रा में थी. दाद रूम में आए, और बस उसे ही देखे जेया रहे थे.

दाद: वैसे तुम लोग कितने पुराने फ्रेंड हो?

कल्लगिर्ल: अंकल अभी नयी-नयी फ्रेंडशिप हुई है. दरअसल मुझे कुछ पैसों की ज़रूरत थी, इसी वजह से आई हू.

दाद: कितने पैसे.

कल्लगिर्ल: 1000.

दाद: बस, ये लो 1000.

फिर दाद ने कॉल गर्ल को 1000 रुपय दिए आंड कॉल गर्ल दाद को हग करने लगी. दाद भी मज़े में हग कर रहे थे.

कल्लगिर्ल: अंकल आपका ये एहसान मैं नही भूलूंगी. मैं आपके लिए कुछ कर सकती हू तो बताइए.

दाद: तुम क्या करोगी? वैसे भी तुम मेरे बेटे की फ्रेंड हो.

कल्लगिर्ल: अर्रे आप चिंता मत कीजिए. ये बात हमारे बीच रहेगी.

दाद: फिर क्या तुम वो करोगी?

कल्लगिर्ल: अर्रे अंकल आप खुल के बोलिए ना. सेक्स आज कल आम बात है. ये लीजिए देखिए.

फिर कल्लगिर्ल ने अपने सारे कपड़े उतार दिए, और दाद के पास चली गयी. दाद से भी रहा नही गया. उन्होने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए, और दोनो मस्त मगन हो गये.

अनिल: मा चलो चाबी मेरे पास है. डोर खोल के अंदर जाते है. बिकॉज़ कल्लगिर्ल से सेक्स की डील नही हुई है. कही दाद सेक्स ना करने लगे.

फिर हमने दरवाज़ा खोला और अंदर चले गये.

मा: हे भगवान, ये क्या कर रहे हो?

अनिल (कल्लगिर्ल से): तुम जल्दी कपड़े पहनो और भागो यहा से.

कॉल गर्ल प्लान के मुताबिक फटत से भाग गयी.

दाद: ई’म सॉरी, मैं बहक गया था.

मा: मुझे भी काफ़ी मॅन होता है. मैं बहकी कभी? ओक अब मैं भी बहकुंगी.

दाद: ऐसा नही करना, बाहर बड़ी बदनामी होगी अगर तुम गैर मर्द से सेक्स करोगी तो.

मा: ओक तुमको बदनामी का दर्र है ना, तो ठीक है. मैं अनिल के साथ करूँगी. अनिल आ जाओ यहा बेटा.

दाद: पागल हो? अनिल बेटा है तुम्हारा.

मा: मैं कुछ नही जानती. अनिल तू मेरा साथ देगा ना बेटा.

अनिल: अब मैं क्या बोलू मा?

मा: अब कुछ मत बोल, बस मैं जैसा कह रही हू करते जेया.

फिर हमने अपने सारी रासलीला चालू की. मा ने मेरा लंड चूस के खड़ा किया. फिर हमने चुदाई स्टार्ट की. मेरे पापा वही बैठ के हम दोनो की पूरी चुदाई देखते है. मैं मा को हर पोज़िशन में छोड़ता रहा.

इससे आगे की कहानी अगले पार्ट में.

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