मा ने अपनी चूत बेटे के नाम की

हेलो फ्रेंड्स, मैं राज आप सभी का फिरसे स्वागत करता हू बड़ी मा की प्यासी छूट स्टोरी के अगले पार्ट में. जो भी पहली बार स्टोरी को रेड कर रहे है, तो उनको मैं बता डू ख़ास कर भाभिस, आंटीस, आंड ऑल्सो गर्ल्स तट मेरे लंड का साइज़ 7 इंच है. और सबसे ज़रूरी बात मुझे छोड़ने का भी बहुत एक्सपीरियेन्स है.

इसका रियल एक्सपीरियेन्स मेरी एक प्यारी हॉट रीडर भी ले चुकी है. वो बहुत खुश है. उसे मैं पिछले 6 महीने में काई बार मिल चुका हू. वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी है, और उन्हे हार्ड आंड सॉफ्ट चुदाई पसंद है. और ये सब मैने उसे पूछा है, तभी मैने आपको बताया है. अब आयेज की कहानी-

राज: मा, दोस्तों में सब ओपन होता है.

मा: हा बेटा, मेरी भी काई औरतें दोस्त है. मैं सब जानती हू.

राज: ठीक है मा, पूछो क्या पूछना है, और बताओ क्या बताना है?

मा: राज पागल है तू. मुझे दोस्त भी बोलता है, और मा भी. तू मुझे मेरे नाम से भी बुला सकता है.

राज: मा एक-दूं से आदत नही बनती. धीरे-धीरे बन जाएगी.

मा: ठीक है बेटा, जैसी तेरी मर्ज़ी.

और अब हम दोनो एक-दूसरे को देख के हल्के से हास्से.

राज: वैसे मा आप बड़े पापा से नाराज़ क्यूँ हो?

तो मा बोली: बेटे देख, औरत के शरीर की कुछ ज़रूरत होती है, जो उसका पति ही पूरा कर सकता है. और जब वो पूरा ना करे, तो उसकी लुगाई उससे गुस्सा ही होगी. आज तक कभी तेरे बड़े पापा ने मेरे शरीर के बारे में कोई तारीफ नही की है. उन्होने तो बस जवानी में भी अपना काम किया और निकल लिए. कभी मेरी पूछी ही नही की मैं क्या चाहती हू. मेरे भी कुछ अरमान है.

राज: मा ऐसा क्या? कभी आप खुश नही हुए क्या पापा से? बेटा मैं तो खुश ही थी. बुत मुझे नही पता था ना असली मज़ा ये होता है.

और वो बोल कर चुप हो गयी

मैने उनसे पूछा: क्या होता है मा असली मज़ा?

मा: अछा एक बात बता. तेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है क्या?

राज: हा है मा, बहुत बनाई है.

मा: अछा बेटा ऐसा क्यूँ? एक से काम नही चला क्या?

राज: मा मैने पहले ही बोल कर रखा था की मैं कोई प्यार नही करूँगा सकचे वाला.

मा: उनको प्यार भी किया?

राज: हा मा, काई बार किया, पर आप ये क्यूँ पूच रही हो?

मा: अछा उन्होने क्या बोला? कोई शिकायत की या तारीफ?

राज: मा आज तक शिकायत किसी ने नही की. या तो उनकी शादी हो गयी, या पढ़ने कही दूसरे कॉलेज में चली गयी.

मा: वापस भी आई कोई प्यार करने तुझसे दोबारा?

राज: हा मा कुछ आई भी.

मा: ठीक है, तभी तो मैं सोचु की इतना ज्ञान तुझे कहा से है, मालिश का और चीखें निकलवाने का. और प्यार करने का.

राज: क्या मतलब है आपका?

मा: अछा सुन, अगर तू सुनना ही चाहता है तो. लेकिन अपने हाथो से मालिश भी करते रहो, बहुत अछा लग रहा है.

राज: हा बताओ मा, क्या बात है?

मा: शीला चाची तेरी आज कल बहुत खुश रहती है, और तू भी बहुत आता-जाता है उसके.

राज: मा उनको काम होता है, तो वो बुला लेती है.

मा: अछा बेटा, दोस्त भी बोलता है और झूठ भी बोलता है. एक बात बता, क्या तूने तेरी चाची की मालिश नही की क्या अभी तक?

राज: हा मा एक दिन उनके घुटनो में दर्द था. तो मालिश की थी बस.

मा: बस मालिश? और उनको नही बोला चेंज करने को? उनकी जांघें गोरी नही थी?

राज (मैने हस्सी पास की, और बोला): हा है मा, बुत आप से गोरी और सॉफ्ट नही.

और मेरे हाथो का जादू चल रहा था. मैं अब अपने हाथो से मा की गांद को दबाने लग गया था, जिसका असर हम दोनो पे था. अब हम सारी शरम को भूलने को तैयार थे.

मा: गोरी और सॉफ्ट मेरी क्यूँ, वो तो मुझसे जवान है. अछा उसकी चुचि, छूट, और गांद कैसी है ये बता मुझे?

मा गरम हो चुकी थी ये तो मालूम था, लेकिन इतनी जल्दी वो पत्ते खोल देगी, और छूट और गांद की बात करेगी, ये नही मालूम था. लेकिन माहौल और खुले-पन्न का असर हो रहा था.

तो मैने भी बोला: मा कहा देखने दी उन्होने अपनी छूट और गांद.

मा: अछा मेरे बच्चे ने अभी तक चाची की छूट और गांद नही देखी? तो उस दिन किसे थोक रहा था स्टोररूम के अंदर घोड़ी बना के?

राज: अछा मा तो वो आप थी जिसने मुझे चाची को छोड़ते टाइम देखा था? अब आप से क्या च्छूपा है फिर. और वैसे भी अब आप मेरे दोस्त हो, तो आपसे अपने सेक्स की बातें भी शेर कर सकता हू.

मा: बिल्कुल कर सकता है. लेकिन…

राज: लेकिन क्या मा?

मा: क्या तू नही जानता जो इतने दीनो से हम दोनो के बीच में चल रहा है, उसका कारण क्या है? कभी तुम्हे सोचा है?

राज: नही मा, बुत अब मुझे तोड़ा सा अंदाज़ा हुआ है.

मा: अंदाज़ा ही नही बिल्कुल सही है तू. क्यूंकी जब से मैने तुझे तेरी चाची की चुदाई करते देखा है, तब से मैं अंदर ही अंदर जले जेया रही हू. क्यूंकी जिस तरह से तुमने तेरी चाची को छोड़ा है, उसे देख के मुझे लगा की आज तक तेरे बड़े पापा ने तेरी बड़ी मा की छूट की प्यास नही बुझाई कभी भी.

मा: मैं भी उसे ही चुदाई समझती थी, लेकिन उस दिन जब से तुम्हे तेरी चाची को छोड़ते देखा है, मैने तब से ये मॅन बना लिया था की मैं अब अपनी छूट की प्यास तेरे इस लंड से ही शांत करूँगी. और इसमे हेल्प मेरी तेरी चाची ने ही की है. क्यूंकी मैने उनको उस दिन की बात बता दी थी. और उससे वादा लिया था की तुझे नही बताए. बस तुझे मेरे खिलाफ उकसाए.

मा: और एक सबसे बड़ी जो सकचाई है बेटा. जिस औरत की छूट में लंड की खुजली हो जाए, वो ज़रूर चुड्ती है. अगर कोई अपना उसे छोड़ देता है तो घर की बात घर में ही रह जाती है. नही तो उसे बाहर छुड़वाना पड़ता है मजबूरी में. लेकिन बाहर के पर्सन पर ट्रस्ट मॅटर वाली प्राब्लम आ जाती है.

राज: मा मैने भी आपकी गांद को मटकते देख कर काई बार अपना लंड हिलाया है. कुछ दिन पहले आपको बातरूम में नंगा भी देखा, पर सही तरह से देख नही पाया.

मैं ऐसा बोल के चुप हो गया.

मा: तुझे किसने रोका है? तू दोस्त है मेरा, और दोस्ती में सेक्स हो सकता है. और मैं तो खुद कब से तुझसे चूड़ना चाहती हू. लेकिन आज वो सपना सच हो जाएगा.

राज: तो ठीक है सुमन मा, आज से आपकी छूट कभी प्यासी नही रहेगी. मैं इसको फिरसे जवान बना दूँगा. पर मेरी एक शर्त है

मा: अर्रे मैने तुझे हर आज़ादी डेडी, तो अब शर्त कैसी?

और ऐसा बोल के मा ने मूह को तोड़ा सा चढ़ा लिया अदा से. दोस्तों यही अदयें और बनावटी गुस्सा ही तो औरत को सुंदर बनता है.

राज: अर्रे मा, मैं ये बोल रहा था की मैं जैसे बोलू आपको वैसा ही करना होगा. तब जाके ही मेरा लंड आपकी छूट में जाएगा और उसकी प्यास को ठंडा करेगा.

मा: अछा ये शर्त थी. मुझे कोई प्राब्लम नही है, जब मैं सारी ही तेरी होने जेया रही हू. बस तू मेरी छूट की प्यास बुझा दे बेटा.

ऐसा बोल कर मैने आयिल को साइड में रख दिया, और उनको लेटने के लिए बोल दिया और कहा-

राज: अब देखो मेरा असली जादू मा.

मैने मा के पैरों को अपने हाथो में लिया, और उन्हे किस किया. मा की सिसकी निकल गयी आहह. मैं मा को बोला-

राज: मा अभी से?

तो वो बोली: इसी प्यार भरे पल के लिए मैं कब से वेट कर रही थी.

मैने उनसे पूछा: आप अपना घग्रा निकाल दो.

वो बोली: सब तेरा है. अब कुछ मेहनत तो कर.

और ये बोल कर उन्होने गर्दन नीचे कर ली. मैने जैसे ही उनके घग्रे को हाथ लगाया, तो डोरबेल बाज पड़ी.

आयेज की कहानी अगले पार्ट में. तब तक आप अपना प्यार यू ही भेजते रहे.

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