मा को पहली बार बेटे का लंड महसूस हुआ

हेलो मैं राज आप सभी का फिरसे स्वागत करता हू. स्टोरी देरी से सब्मिट करने के लिए माफी चाहूँगा. अगर मेरे कारण किसी को कोई प्राब्लम हुई है तो उसके लिए भी मैं आप सभी से माफी माँगता हू.

आप सभी ने जो प्यार दिया है मेरी स्टोरी को, उसके लिए आप सभी का धन्यवाद. आप अपना प्यार और फीडबॅक देते रहे. अब आप सभी का इंतेज़ार ख़तम करते हुए चलते है स्टोरी पर. अगर लिखने में कुछ ग़लती हो तो माफ़ करे.

जैसा की आप सभी ने पढ़ा की मेरी बड़ी मा सुमन मेरी बड़ी मामी सुनीता से फोन पे बात कर रही थी. और उनको बोल देती है की, “ठीक है, अगर मुझे राज का लंड मेरी छूट में मिलता है, तो मैं तेरे लिए भी ज़रूर उसको तैयार करूँगी. की तेरी छूट को भी अपने लंड से शांत करे”. और फिर उसको बाइ बोल कर फोन कट कर देती है.

मे: अर्रे मा फोन पे ही लगे रहोगे या कुछ खाने पीने को भी डोगी आज? या फिर ऐसे ही भूखा रहना पड़ेगा?

मा: हा आ रही हू, कर दिया फोन कट. तेरी मामी सुनीता का था.

मे: सुनीता मामी का नामे सुनते ही मेरे पुर शरीर में करेंट लगा. क्यूंकी वो भी सुमन मा की तरह चलता-फिरता बॉम्ब थी, और वो मा से उमर में भी छ्होटी थी. वो चाची की आगे की थी.

मा: भूख लगने का क्या कारण है? क्या हाल चला के आया है तू? सारा दिन पड़ा-पड़ा खाट ने तोड़ रहा है. कुछ कर भी लिया कर.

( दोस्तों वैसे तो हम हरयान्वी बोलते है. लेकिन मैं आपको इधर हिन्दी और कुछ वर्ड्स इंग्लीश के उसे कर रहा हू. ताकि आपको रेड करते टाइम कोई प्राब्लम नही हो)

मे: अछा अब आपने क्या पसीना निकाल लिया फोन पे बातें करते-करते?

मा: तूने तो निकाल लिया होगा पसीना अपने रूम में ही रहते-रहते.

ऐसा बोल कर वो हासणे लगी.

मे: मुझे वैसे तो उनका डबल मीनिंग समझ आ गया था, और मुझे ये भी पता था की बड़ी मा को पता था की मैं उनको बातरूम से देख रहा था. तो मैने भी बात को आयेज बढ़ाना ही अछा समझा.

मैने उनको बोल दिया: हा पसीना निकालने का कुछ देखा है मैने भी मा.

और मैने भी थोड़ी सी स्माइल की.

मा: अछा, बता ऐसा क्या देख लिया तूने?

मे: बस मा एक भूखी बिल्ली थी कुछ देर के लिए मेरी आँखों के सामने.

मा: अछा बेटा भूखी बिल्ली. कब और कहा देख ली?

मे: अर्रे मा जब आप नहा रही थी, और मैं बातरूम से वापस आया था, तो देखा वो बिल्ली दूध को निहार रही थी.

ऐसा सुनते ही मा के गाल लाल हो गये.

मा (बात को टालते हुए): अछा क्या खाएँगा चल बता? ज़्यादा बातें मत बना.

मे: मा मुझे आज खाना नही पीना है.

मा: क्या पीना है तुझे?

मे (आपके चुचि का दूध): दूध पीना है मुझे भी आज.

मा मेरा इशारा समझ गयी थी.

मा: अछा बेटा आज दूध पीना है तुझे.

और ये बोल कर नीचे चली गयी खाना लेने मेरे लिए. इधर मैं रूम के अंदर तब ये प्लान बना रहा था की बड़ी मा को कैसे छोड़ा जाए. क्यूंकी अब ये तो क्लियर हो गया था की वो भी चाहती थी. बुत खुद ट्राइ नही कर रही थी.

और ख़ास कर गाओं की महिला में ये प्राब्लम ज़्यादा है, अगर हम सिटी की महिलाओं से तुलना करे तो. बुत अभी तोड़ा-तोड़ा माहौल गाओं में भी चेंज हो रहा है. मैं अपने विचारो में ही खोया हुआ था, की तब तक मा मेरे लिए खाना लेकर आ गयी थी.

अब कुछ दीनो में हमारे लिए अब सब कुछ बदल चुका था. ये हम दोनो का पता था की अब हम दोनो की सोच एक-दूसरे के साथ मा और बेटे वाली नही थी. अब उनमे भी अपनी जवानी वाले दिन बाहर आ रहे थे. शायद वो इस पल को दोबारा जीना चाह रही थी, इसलिए अब मुझसे खुल के हस्सी मज़ाक करने लग गयी थी. अब हम दोनो के बीच डबल मीनिंग वाली बातें और एक-दूसरे के उभर को देखना नॉर्मल हो गया था.

एक दिन की बात है. दोपहर को जब सभी खेतों में गये हुए थे, तो बड़ी मा कपड़े दो रही थी, और मैं वही कमरे से उनको देख रहा था. वो वैसे ही मुझे कभी चुचि तो कभी अपनी गांद की शेप के दर्शन करवा के मेरा बुरा हाल कर रही थी. अब उनको भी पता था की मैं उनकी गांद और चुचि की इन सब हरकतों को देख रहा था, और मुझे भी पता था की बड़ी मा सुमन को इस सब का पता था.

वैसे मैं इधर एक बात आड करना चाहूँगा दोस्तों. कोई महिला, या औरत, या लड़की, अगर आप उनके बारे में जानते हो, और वो ये हरकते कर रही हो तो बहुत मज़ा आता है.

सुमन मा मुझे गांद के और चुचियों के दर्शन करने में इतनी मस्त हो चुकी थी, की उनका ध्यान सिर्फ़ मुझ पर ही था. जिसके कारण उनका पावं पास मैं रखे साबुन पर चला गया, और वो फिसल कर हिप की और से बहुत ज़ोर से गिरी. उनकी मस्त अदाएँ तुरंत चीखों में बदल गई. मेरा ध्यान भी उदार टूटा और मैं उठ के तुरंत भागा.

मा की गांद को देखने के कारण मेरा लंड खड़ा ही था, और जब मैं उनके सामने गया, तो तब भी मेरा लंड खड़ा ही था. उसपे मेरी मा की नज़र गयी, और वो बोली-

मा: अब डेक्ता ही रहेगा या मेरी मदद भी करेगा?

मैने उनको हाथ दिया और खड़ा किया, और उनको चलने के लिए बोला. लेकिन मा से दर्द के कारण चला नही गया.

तो वो बोली: मुझे अपनी गोद में उठा के चल.

मैने उनको देखा और पूछा: मैं कैसे उठा सकता हू मा आपको?

मा: अछा बेटा, और ये जो शॉर्ट में उठा रखा है उसका क्या? जल्दी से उठा, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.

मे: अर्रे मा, ये तो आपने ही इसका ये हाल किया है.

ऐसा बोलने के बाद मैने मा को अपनी गोदी में उठा लिया. जैसे ही मैने उनको अपनी गोदी में उठाया, उनकी गांद का सुराख साइड मेरे लंड पर आयेज लगा. उससे मेरे पुर शरीर में करेंट सा लगा, जिसके कारण एक बार तो मैने मा को नीचे ही गिरा दिया होता.

मा बोली: क्या कर रहा है? तेरा किधर ध्यान है? मुझे पहले ही काफ़ी दर्द है, और उपर से तू भी नीचे गिरा दे मुझे. और ये मुझे नीचे क्या चुभ रहा है (मा मेरे मज़े लेती हुए. उनको कोई दर्द नही था, ये भी मुझे बाद में पता चला. वो तो एक उनका बहाना था ताकि हम दोनो का जो ये खेल चल रहा था, उसको पूरा कर सके)?

मैने उनको बोला: कुछ नही मा, बस ऐसे ही. बुत मा को मेरा लंड आज पहली बार फील हुआ था, चाहे कपड़ों के उपर से ही सही. जिसका मज़ा उनकी बातों से और हरकतों से मुझे चल रहा था.

अब मैं मा को अपने कमरे में लेके आया, और उनको पेट के बाल लिटा दिया. उनका शरीर क्या मस्त लग रहा था. और उधर वो दर्द से करहने की आक्टिंग कर रही थी.

तो मा ने बोला: सुन एक काम कर, जेया गरम पानी और तेल लेके आ.

मैने पूछा: वो किस लिए?

तो मुझे गुस्से में देख कर बोली: जेया लेके आ, अपने आप पता चल जाएगा तुझे किसलिए.

दोस्तों स्टोरी जारी रहेगी, आप सभी का फिर से धन्यवाद सबर बनाए रखने के लिए, और अपना प्यार और फीडबॅक यू ही बनाए रखे. आप मुझे एमाइल कर सकते है हॉटमास्ती190@गमाल.कॉम पर.

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