मा को चोद-चोद कर बेटे का लंड हुआ सुन

पिछली कहानी में बताया की कैसे हमने पहली बार सेक्स किया. ये हमारे रिश्ते का सबसे बड़ा मोड़ था. हम मा बेटे के रिश्ते से पूरा बाहर आ चुके थे. हमारे रिश्ते की शुरुआत मेरे ब’दे से हुई. इन 16 महीनो में हम यहा तक पहुँच जाएँगे हमने सोचा नही था.

सेक्स करने का मज़ा अलग ही था, वो भी मम्मी से. मेरा मॅन अब उनको छोड़ने में लगा रहता. मैं रेग्युलर 3 वीकेंड पर घर गया, और उनको छोड़ के आता. मगर शायद मम्मी को इसमे मज़ा नही आ रहा था. मुझे याद है हम एक बार ईव्निंग में बात कर रहे थे.

वो बोली: मैं कल आ रही हू.

मैं: सुषमा सॅटर्डे को आ तो रहा हू.

मम्मी: नही मैं कल सुबा आ रही हू. मुझे नही पता.

मैं: क्या बहाना बनाओगी इस बार? ज़्यादा बहाना बना के आना सही नही रहेगा. पापा को शक हो जाएगा.

मम्मी: वो मैं बहाना बना चुकी हू ऑलरेडी. मैं अपने आप देख लूँगी. आप कल छुट्टी ले लेना.

मैं: ठीक है.

अगले दिन वो 10 बजे इसबत पहुँची, और मैं लेने गया. मैं उनको कुछ खिलाने इसबत कश्मीरी गाते मेट्रो स्टेशन के मक्ड लेके गया. उनको वाहा समझने की कोशिश की ये ग़लत था यहा आना. हम घर पर कर तो रहे थे सेक्स. वो मानी नही. फिर हम 12 बजे के आस-पास रूम पर पहुँचे मेरे.

जैसे ही पहुँचे रूम पर, हमारी बॉडीस पर कोई कपड़ा नही था. वो बस सीधे लंड पर चढ़ गयी. मैने छोड़ा फुल उनको. फिर बिना कपड़े पहने हम लेते रहे. हम बातें करते रहे. 2 बजे फिरसे उपर चढ़ गयी. उन्होने लंड को हाथ में लिया, छूट में डाला, और उछालने लगी.

इस बार कुछ अलग ही एनर्जी लेके आई हुई थी. मैने उनकी गांद पर हाथ रखा, और हाथ से सिंक किया उनके उछालने को. 10 मिनिट तक कंट्रोल करने के बाद मुझसे रुका नही गया, और मैने अंदर ही छ्चोढ़ दिया स्पर्म.

मैं: आज तेरे को क्या हुआ है?

मम्मी: अब मैं इस लंड की दीवानी हो चुकी हू.

मैं: इस लंड को तोड़ा आराम दो.

मम्मी: अब ना मिलेगा इसे आराम. इसकी सुषमा इसे खा जाएगी.

फिर वो मेरे गले लग के चेहरा चेस्ट पर रख के लेट गयी.

मैं: सुषमा साची कभी नही सोचा था तेरे साथ ये करूँगा. तुमने ज़िंदगी बना दी मेरी.

मम्मी: ज़िंदगी तो आपने बनाई है मेरी. मैने नही सोचा था कभी ऐसे मज़े भी करूँगी.

मैं: कभी सोचा था छ्होटा बच्चा जो तेरी गुड में खेल रहा था कभी, तेरे को छोड़ रहा होगा फुल?

मम्मी (मज़ाक में): हा सोचती थी यही बच्चा छोड़ेगा मुझे. कैसी बात कर रहे हो आप?

ऐसे बात करते-करते हम सो जाते है. 4 बजे के अराउंड उठते है. फिर खाना मँगवाते है, और वो खा के एनर्जी आती है. मम्मी फिरसे लंड पर चढ़ जाती है. 5 घंटे में 3 बार छोड़ चुका था. उसके बाद हम मोविए देखते है. खाना बनाने वाली आती है. वो मम्मी को दीदी बोलती है, और पूछती है क्या बनाए. वो खाना बना के चली जाती है.

मोविए ख़तम होने के बाद खाना खाते है हम. 9 बजे के अराउंड फिरसे लंड पर चढ़ जाती है. मम्मी ने इतना तका दिया था मुझे. वो खुद भी तक चुकी थी. मुझे नही पता चला हम कब सो गये.

मैं जब उठा मम्मी लोड्‍ा मूह में लेके चूस रही होती है. देखा तो सुबा के 4 बाज गये थे. फिरसे चूस्टे-चूस्टे लंड खड़ा करवा देती है, और फिरसे चढ़ जाती है. ये पाँचवी बार छोड़ रहा था उसको. उसके बाद हम फिर सो जाते है.

मुझे लग रहा था वो इस बार कुछ अलग ही सोच के आई थी. 7 बजे खाना बनाने वाली आती है. वो खाना बना के जैसे ही जाती है, मम्मी फिरसे चढ़ जाती है. मेरा स्पर्म निकलना बंद सा हो गया था छोड़-छोड़ के उनको. अब 15 मिनिट आराम से पंप कर रहा था च्छेवी (6त) चुदाई में. हम नंगे ही नहाते है. फिर खाना खाते है.

11 बजे मम्मी बोलती है: 1 बार और 12 बजे से पहले-पहले.

24 घंटे में 7 बार हो जाएगा. इस बार तो लंड टाइट भी नही हो रहा था इतना तका दिया था उन्होने. उनको तो डालना है, हमे तो खड़ा भी करना होता है. जैसे-तैसे उन्होने मूह में लेके जीभ से लंड के साथ खेल के खड़ा किया. फिर उसके उपर चढ़ि. इस बार फिरसे छोड़ना स्टार्ट किया. मैं छोड़ता रहा उसे. स्पर्म निकालने का नाम नही ले रहा था.

पहली पोज़िशन वो उपर लंड पर थी. जब वो कूदते-कूदते तक गयी. फिर उसको नीचे लिया, और फिर पंप मारे. अब वो भी तक गयी थी. मगर मेरा निकल ही नही रहा था. मैं पंप मारता रहा उसमे. फिर थोड़ी एनर्जी ली उसने, और फिर मेरे उपर आई. उसके बाद हम दोनो ने एनर्जी लगाई. वो भी उछाल रही थी, और मैं भी नीचे से ज़ोर-ज़ोर से पंप कर रहा था. तब जाके स्पर्म निकला.

मैं: अब खुश हो पूरी ऐसी की तैसी कर दी. कहा से लाई हो इतनी एनर्जी?

वो हासणे लगी. उसके बाद हमने कुछ नही किया. ईव्निंग में वो बेड पर लेती हुई थी नंगी ही. वो पेट के बाल थी. मतलब गांद उपर थी. मैं टाय्लेट करके बातरूम से निकला. वो लॅपटॉप पर कुछ देख रही थी. मेरे मॅन में पता नही क्या आया, की उसकी गांद देखते ही उसके उपर कूद गया.

लंड को मैने उसकी गांद के बीच में च्छूपा दिया. हॉट डॉग की तरह करके आयेज-पीछे होने लगा. जैसे घोड़ा चला रहा हू. एक-दूं से सुषमा बोली-

मम्मी: क्यूँ ना इसको मेरी गांद में डाल दो.

मैं हैरान था. इतना वो सोच रही है. मुझे यकीन नही हो रहा था. मैं बोला ठीक है. फिर वो 4 पैरों पर आई, और उसने गांद को उठाया. मैने पहली बार उसकी गांद का च्छेद देखा. उस वक़्त पता भी नही था गांद में लंड ऐसे नही जाता, और तोड़ा लूब्रिकॅंट लगाना पड़ता है. और मैं तका हुआ भी था.

लंड खड़ा तो हुआ. मगर जैसे पत्थर की तरह बन जाता है सुषमा हो देख के, उस वक़्त नही बना. मैने डालने की कोशिश की उसकी गांद में, बुत नही जा पाया. मुझे दर्द भी हो रहा था ज़्यादा ज़ोर लगाने पर. उसका मॅन उदास सा हो गया.

मैने बोला: कोई नही, तुझे छूट से छोड़ देता हू.

फिर मैने उसकी छूट में लंड डाल दिया. मैने पहले एक उंगली उसकी गांद में डाल दी. वो देखी तो मैने बोला-

मैं: लंड नही तो उंगली ही डाल देता हू.

फिर आधी से ज़्यादा उंगली डाली उसकी गांद में. साथ में आयेज से छोड़ा. उसके बाद दूसरी उंगली भी डाली, मगर वो ज़्यादा नही गयी. छोड़ने के बाद हमने खाना खाया. मुझे लगा शायद अभी खुश नही थी वो.

मैने बोला: फिरसे कुटिया पोज़िशन में आ. मैं मूह उसकी गांद की च्छेद के पास लेके गया. उसको कुछ नही पता था क्या होने वाला था. मैं जीभ लेके गया च्छेद के पास, उसके उपर लगाई. वो एक-दूं से आयेज हुई जैसे करेंट लगा हो. फिर उसको पकड़ा, और जीभ से च्छेद पर सहलाया. मैने च्छेद खोलने की कोशिश की जीभ से.

इससे उसको अछा लग रहा था. फिर 5 मिनिट बाद उसके पास गया, और पूछा कैसा लगा. वो खुश हो गयी. अब ये नयी चीज़ शुरू हो गयी थी. अगले दिन च्छेद को जीभ से 3 से 4 बार लीक किया. अब वो इसकी बार-बार डिमॅंड करने लगी.

अब हमारी सेक्स जर्नी में एक नयी चीज़ जुड़ गयी थी. घर जाता उसको नही छोड़ता, तो गांद में उंगली से छोड़ता. और कभी-कभी उसके कहने पर गांद के च्छेद को जीभ से चाट-ता. अब हमारे सेक्स का ये लास्ट पीक था. इसके बाद हमने कुछ भी ट्राइ नही किया.

वो स्पर्म तो बोलती थी पीने के लिए, लेकिन मैने कभी पीने नही दिया. एक से 2 बूँद तो टेस्ट की थी उसने, लेकिन पीने नही दिया. गांद को लंड से नही छोड़ा. ये 2 चीज़ नही की हमने. सेक्स की 1 न्यू पोज़िशन आड की. आयेज बतौँगा वो कब हुई आड. मगर वो लंड छूट में ही जाना था, कुछ न्यू नही था उसमे. इस सेक्स जर्नी की कहानी यहा तक है. हमने क्या चीज़ कब ट्राइ की, और कैसे उसको आदत बना लिया.

अब इस रीलेशन में उतार-चढ़ाव की कहानी स्टार्ट करूँगा. कैसे मेरा गुस्सा बढ़ता ही गया उस पर. फिर कैसे मेरी शादी का दर्र हम दोनो पर था. उससे मेरे बिहेवियर और उसके बिहेवियर पर फराक पड़ा.

चलो बाइ.

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