मां को बेटे से मिली चुदाई की परमिशन की कहानी

दोस्तों पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि सर मुझे मेरे घर आकर मैथ्स पढ़ाने लगे। तो पहले मैं आपको सर के बारे में बता देता हूं। मेरे सर की उम्र 40 वर्ष है। उनका नाम आदित्य है, सर हट्टे-कट्टे और सावले रंग के है।

पहले तो मां सर के सामने साड़ी या सूट सलवार में रहती थी। परंतु कुछ दिनों से मैंने नोटिस किया कि मम्मी अब सर की सामने लोअर और टी-शर्ट में चाय लेकर आने लगी। और मम्मी अब पहले से ज्यादा खुश रहने लगी और, सर और मम्मी खुल कर बात करने लगे। लेकिन मैंने ज्यादा कुछ ध्यान नहीं दिया, क्योंकि मम्मी की खुशी में ही मेरी खुशी थी।

दोस्तों जनवरी का आखरी सप्ताह चल रहा था, और मार्च मैं मेरे फाइनल एग्जाम थे। तो मैं पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहा था। एक दिन मैं खेलने गया हुआ था। शनिवार का दिन था, लेकिन मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। तो मैं 6 बजे ही वापस आ गया, सर मुझे 7 बजे पढ़ाने आते है। जैसे ही मैं घर पर पहुंचा तो देखा सर की बाइक बाहर खड़ी हुई थी।

मुझे कुछ समझ नहीं आया, मैंनै बिना बेल बजाए चुपचाप से गेट खोला, और देखा कि दरवाजा लगा हुआ था, दरवाजे पर ऑटोमेटिक लॉक लगा था और सर के जूते बाहर खुले हुए थे। मैंने गेट को चुपचाप से खोला और अंदर गया, ड्रॉइंग रूम में कोई नहीं था ना मम्मी किचन में थी।

मैं अपने रूम में गया तो वहां भी कोई नहीं था। जैसे ही मैं मम्मी के बैडरूम की तरफ गया, तो मैंने मम्मी की और सर की आवाज सुनी। मम्मी के बेडरूम का दरवाजा बंद था, लेकिन कुण्डी नहीं लगी थी। मैंनै दरवाजे पे कान लगा कर सुना।

मम्मी: क्या बात है आदि, आज तो जल्दी ही आ गए?

आदित्य सर: हां यार, क्या करूं? उस दिन जल्दीबाजी में तुमको अच्छे से चोद नहीं पाया। आज क्लास कि छुट्टी कर दी तांकि तुमको अच्छे से चोद सकूं।

मम्मी: चलो अच्छा है तुमने आज क्लास की छुट्टी कर दी। मुझे भी अच्छे से चुदवाये हुए डेढ़ साल हो गए है।

ये सुन कर मेरे तो कान ही फट गए, और मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूं। फिर मैंने चुपचाप से, धीरे से दरवाजे को हल्का सा खोल कर देखा तो मेरी आंखे फटी की फटी रह गई। मम्मी ब्रा पैंटी में थी और सर अंडरवीयर में, और दोनो मुंह से मुंह मिला कर किस कर रहे थे। ये देख कर मुझे गुस्सा आया, और मैं अपने रूम में आकर रोने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपने आपको संभाला।

मुझे इस बात का गुस्सा नहीं था कि मम्मी चुद रही थी। गुस्सा इस बात पर था कि कोई और मम्मी को चोद रहा था। मम्मी की खुशी के कारण मैंने अपने आप को समझाया और दुबारा मम्मी के बेडरूम के पास जाकर चुप चाप से बाहर खड़ा होकर मम्मी के बेडरूम में देखा। अंदर मम्मी घोड़ी बनी हुई थी, और सर पीछे से मम्मी की चूत मार रहे थे। मुझे सर के काले कुल्हे दिख रहे थे, और थोड़े से मम्मी के झूलते हुए बड़े-बड़े बूब्स‌ भी।

मम्मी: करहाते हुए आह आह आह उई राम रे, मर गई, और चोदो, चोदो, चोदो मेरी चूत को।

मम्मी के कुल्हे और सर की जांघ की थप थप थप थप थप थप की आवाज आ रही थी, और मम्मी आ आ आ ओह ओह की आवाज निकालते हुए चुदवा रही थी।

सर आह आह‌ आह की आवाज के साथ पीछे से मम्मी को झटकों के साथ चोद रहे थे।

तभी सर मम्मी से बोले: अर्चना मेरा निकलने वाला है।

मम्मी: थोड़ी देर और आदि, मेरा भी निकलने वाला है। जोर-जोर से चोदो मुझे। हां हां चोदो चोदो, मेरी चूत को अपने लंबे लंड से अपने गर्मा गर्म रस से मेरी चूत भर दो।‌ प्लीज़ आदि, चोदो जोर से, मेरा पानी भी छूटने वाला है आह आह आह आह उईईई मां मर गई रे,‌ चोदो, चोदो मेरी चूत को। हां हां ऐसे ही, और जोर से मारो मेरी चूत।

सर: आह आह आह अर्चना, लो मेरा निकलने वाला है। लगता है तुम्हारी गुलाबी कसी हुई चूत मेरा पूरा रस पी जाएगी। ( मम्मी का ये रूप देख कर मेरा लंड लोहे जैसा कड़क हो गया)

सर सांड की तरह मम्मी के लंबे काले बालों को पकड़ते हुए ताबड़-तोड़ धक्के मरते हुए और हांफते हुए तेज-तेज मम्मी को चोदने लगे और अब तेज-तेज थप-थप की आवाजें आने लगी (पूरा कमरा गूंजने लगा) जिसकी आवाज दरवाजे तक जा रही थी, शायद बाहर तक भी। मम्मी की इतनी भयंकर चुदाई देख कर मेरा तो अंडरवीयर में ही पानी निकल गया।

फिर थोड़ी देर में ही दोनों बेहाल होकर पड़ गए। मम्मी उल्टी लेटी और सर भी मम्मी के ऊपर लेटे हुए थे। मैं तुरंत अपने रूम में जाकर सो गया। पूरी घटना को देख कर मेरा शरीर गरम हो गया था। 15 मिनट बाद 7 बजने वाले ही थे। मम्मी मेरे रूम में आई और बोली-

मम्मी: बेटा तुम कब आए? तुम तो खेलने गए थे ना? तुम्हारे सर आए है। उठो और टयूशन पड़ लो।

मैं: मम्मी मेरी तबियत खराब है। मुझे आज नहीं पड़ना।

( मम्मी के चहरे पर एक अजीब सी चमक थी। और मुझसे ऐसे बोल रही थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं)

मम्मी: चलो तुम आराम करो। मैं सर को चाय पिला के भेजती और सर को मना कर देती हूं। तुम्हारे लिए भी चाय बना कर लाती हूं।

थोड़ी देर बाद मम्मी चाय लेकर आई और चाय पीने को बोली। मैंने मम्मी से चाय पीने को मना कर दिया। मेरे चेहरे पर उदासी देख, मम्मी के चेहरे का रंग फीका पड़ गया।

वो बोली: क्या बात है बेटा? क्या हुआ तुम्हें? और तुम घर कब आए?

मैं: मम्मी मेरी तबीयत खराब थी, और मैं आधे घंटे बाद 6 बजे ही वापस आ गया।

मम्मी: तुमने बताया नहीं, और ना ही बेल बजाई।

मैं: मम्मी दरवाजा खुला था, सर की बाइक बाहर खड़ी थी। तो मैं अंदर आया, मैंने आपको ड्राइंग रूम और किचन में देखा तो आप नहीं दिखी। फिर मैंने आपके बेडरूम से आपकी और सर की आवाज सुनी, और देखने गया तो आप और सर…

ये कह कर मैं चुप हो गया।

ये सुनते ही मम्मी की आंखों से आंसू टिपकने लगे, और दोनो हाथो को मुंह पर रख कर रोने लगी।

मम्मी: प्लीज बेटा मुझे माफ कर दे। मैं बहक गई थी। ये सब अब दुबारा नहीं होगा।

मुझे थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था, और मेरी आंखों में आसूं आ गए।

मैं: प्लीज मम्मी मुझे अकेला छोड़ दो।

मम्मी रोती हुई अपने बेडरूम में चली गई। मैं काफी देर तक सोचता रहा। फिर मैंने सोचा मम्मी की अभी जवानी बची हुई थी, और अभी सेक्स करने की उम्र थी तो मम्मी का भी मन करता होगा। फिर भी मम्मी ने मेरी खुशी के लिए इधर-उधर नहीं गई, और मुझे खुश रखा। तो मेरा भी हक बनता था कि मम्मी की खुशी का ध्यान रखा।

रात के 9 बज गए थे। मैं मम्मी के बेडरूम में गया तो मम्मी करवट लेकर लेटी हुई थी, और रो रही थी।

मैं मम्मी के पास गया और मम्मी के सर पर हाथ फेरा तो मम्मी बैठ गई। मैं भी मम्मी के पास बैठ गया, मम्मी मेरे गले लग कर रोने लगी और बोली-

मम्मी: बेटा मुझे माफ कर दो।

मैंने मम्मी को अलग किया और मम्मी से बोला: मम्मी मेरी तरफ देखो।

मम्मी मुझसे नजर नहीं मिला रही थी। फिर धीरे-धीरे नजर मिलाने लगी। मैंने मम्मी के सिर को चूमते हुए बोला-

मैं: कोई बात नहीं मम्मी मैंने आपको माफ कर दिया। आपकी कोई गलती नहीं है।

और मम्मी के आंसू पोछने लगा।

मम्मी ने मुझे तुरंत गले लगा लिया और बोला-

मम्मी: बेटा अब ऐसा नहीं होगा।

फिर मैंने मम्मी को बोला: मम्मी भूख लगी है।

तो मम्मी उठी और हमारे लिए मैगी बनाई, हम मैगी खाकर सो गए। अगले दिन सन्डे था, तो मैं और मम्मी देर से उठे। मम्मी उठ कर फ्रेश होकर चाय बनाने चली गई और मैं वाशरूम में फ्रेश होने। मैंनै देखा बाथरूम के अंदर मम्मी के ब्रा पेंटी और बेडरूम की चद्दर पड़ी हुई थी, जिस पर धब्बे लगे हुए थे।

मैं समझ गया था सर ने मम्मी की अच्छे से चुदाई की थी। क्योंकि मम्मी की चाल भी बदली-बदली लग रही थी। ये सब घटना को याद करके मेरा लंड खड़ा होने लगा, और फिर मैंने बाथरूम में लंड को हिलाया और पूरा वीर्य मम्मी की पैंटी में छोड़ दिया।

फिर हाथ मुंह धोकर वापस आया तो मम्मी ने चाय बना ली थी। मैं और मम्मी ने चाय पी और मैं अपने रूम में आकर पढ़ाई करने लगा और मम्मी घर का काम।

दोपहर मैं लंच के बाद में सोने के लिए अपने रूम मैं आ गया, और मम्मी अपने रूम में, सुबह से मैंने नोटिस किया मम्मी उदास-उदास सी दिख रही थी। मुझे मम्मी की ये उदासी देखी नहीं जा रही थी, और मैं ये भी समझ गया कि मम्मी उदास क्यों थी। मैं मम्मी के बैडरूम मैं गया तो मम्मी करवट बदल कर लेटी हुई थी।

मैं: मम्मी, क्या मैं अंदर आ जाऊं? मुझे आपसे बात करनी है।

मम्मी उठ कर बैठ गई और बोली: हां-हां बेटा आ ना, इसमें पूछने की क्या जरूरत है।

मैं जाकर मम्मी के पास बैठ गया और बोला: मम्मी आप सुबह से उदास हो, क्या बात है? आपके चेहरे पर उदासी अच्छी नहीं लगती।

मम्मी: बेटा ऐसी कोई बात नहीं है, बस वैसे ही।

मैं: मुझे सब पता है आप क्यों उदास हो।

मम्मी बोली: क्या पता है तुझे?

मैं: नहीं बताऊंगा, नहीं तो आप गुस्सा करोगी मुझ पर।

मम्मी: अरे नहीं करूंगी, बता तो सही।

मैं: मेरी कसम खाओ।

मम्मी: तेरी कसम।

मैं: मम्मी जब से सर आए है आप खुश रहती थी। लेकिन कल की घटना के कारण आप उदास हो।

मम्मी: ऐसी बात नहीं है बेटा।

मै: खाओ मेरी कसम की ये बात नहीं है।

मम्मी: नहीं, मुझे नहीं खानी कोई कसम।

मैं: कोई बात नहीं मत, खाओ। लेकिन आपको मेरी एक बात माननी पड़ेगी।

मम्मी: कोन सी बात?

मैं: पहले प्रोमिस करो, मानोगी?

मम्मी: ठीक है, प्रोमिस।

मैं: जैसे कल सर ने आपको पढ़ाया (चोदा) था। वैसे ही आप अब सर के साथ रोज पढ़ाई ( चुदाई) कर सकती हो।

मम्मी: पागल हो गया क्या तू? ये क्या बोल रहा है?

मैं: मम्मी मैं सही बोल रहा हूं। आपने मेरी खुशी के लिए इतना कुछ किया, तो क्या मैं आपके लिए इतना भी नहीं कर सकता। और आपको कही जाना भी नहीं पड़ेगा। ये बात हम दोनों के बीच रहेगी।

ये बोल कर मैं मम्मी के गले लग गया, और बोला: मम्मी आपको भी अपनी जिन्दगी जीने का हक है। आपको भी खुश रहने का हक है। प्लीज मम्मी मुझे गलत मत समझना। क्योंकि आपकी खुशी में ही मेरी खुशी है।

मम्मी थोड़ी देर सोचने लगी। फिर मुस्कराते हुए मुझे गले लगा लिया और बोली: थैंक्स बेटा।

मम्मी के चहरे पर खुशी देख कर मुझे भी अच्छा लगा।

मैं: मम्मी आज तो संडे की छुट्टी है सर आज तो आयेंगे नहीं। कल आप मेरे से पहले सर से पढ़ ( चुद) लेना।

मम्मी (मुस्कुराती हुई): हां हां शैतान, पहले मैं आराम से सर के साथ पढ़ाई (चुदाई) कर लूंगी। फिर सर तुझे मैथ्स पढ़ा देंगे।

फिर रात को खाना खाने के बाद मैं और मम्मी टीवी देखने लगे।

मैं: मम्मी कल जब मैं खेलने जाऊंगा और पीछे से सर आयेंगे, तो लोग क्या सोचेंगे?

मम्मी: ये बात तो सही है तेरी, तो क्या करें?

मैं: मम्मी कल से मैं खेलने नहीं जाता हूं। और मैं अपने रूम में सोता रहूंगा, और आप सर से चुद लेना। ओह सॉरी पढ़ लेना।

मम्मी: लेकिन बेटा तेरे घर में रहते हुए ये सब कैसे करूंगी मैं?

मैं: वैसे भी मम्मी मैंने आपको और सर को सेक्स करते हुए देख ही लिया है, तो फिर क्या शर्माना?

मम्मी: ठीक है, लेकिन आ मत जाना मेरे बेडरूम में।

मैं: फिकर मत करो मम्मी, नहीं आऊंगा।

मम्मी: और हां, सर को पता नहीं लगना चाहिए कि तुझे सब पता है।

मैं: ठीक है मम्मी।

अगले दिन शाम को 6 बजे मैं रूम में बैठ कर पढ़ाई कर रहा था। मम्मी चाय लेकर आई तो मैंने देखा मम्मी सजी हुई थी, और टाईट शॉर्ट कुर्ता और व्हाइट कलर की लेगिंग पहनी थी, जिसमें से काले रंग की ब्रा पेंटी साफ दिख रहे थे। मम्मी को देख कर मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया।

मैं: क्या बात है मम्मी, आज तो आप बहुत सुंदर लग रही हो। लगता है आज अच्छे से पढ़ाई (चुदाई) करोगी।

मम्मी: अब चुप कर, और अब सो जा। सर आने ही वाले है। मैं चुदाई करके (मम्मी के मुंह से चुदाई निकल गया, जिसे सुनते ही मेरे लंड ने करवट लेना शुरू कर दी) ओह सॉरी, तुझे जगाने आ जाऊंगी।

मैं: मम्मी नींद तो नहीं आ रही फिर भी सोने का नाटक करता हूं। आप आराम से सर के साथ चुदाई करो ओह सॉरी ( मेरे मुंह से चुदाई निकल गया, लेकिन मैंने जान बूद कर बोला)।

जैसे ही डॉरबेल बजी मैं सोने का नाटक करने लगा, और मम्मी दरवाजा खोलने चली गई।

( उनकी बाते हल्की-हल्की मुझे सुनाई दे रही थी)

सर: क्या बात है अर्चना, आज ध्रुव खेलने नहीं गया?

मम्मी: वो क्या है कि ध्रुव देर रात तक पढ़ता रहा, तो अब दिन में स्कूल से आकर सो जाता है। वो जगे उससे पहले तुम मुझे एक बार फटा-फट चोद लो।

सर: लेकिन ध्रुव।

मम्मी: तुम उसकी चिंता मत करो, मुझे पता है, वो कैसे सोता है। अगर उसके रूम में ढोल बजाए तो भी नहीं जागेगा।

सर: चलो फिर देर किस बात की।

मम्मी और सर बेडरूम में चले जाते है। मैं भी अपने रूम से निकल कर मम्मी के बेडरूम के पास जाता हूं। लेकिन इस बार मम्मी ने कुण्डी लगा रखी थी। हां उनकी आवाज़ जरूर सुनाई दे रही थी।

मम्मी: हां आदि, चोदो मुझे, आह‌ चोदो और जोर से।

सर: हां जान लो और लो मेरा लंड क्या चूत है तुम्हारी।

कुछ देर बाद मैं वापस आकर अपने रूम में सो गया।

थोड़ी देर बाद मम्मी आई और बोली-

मम्मी: बेटा उठो, सर आ गए, पढ़ाई कर लो।

मैंने मम्मी की तरफ देखा तो मम्मी बहुत खुश थी, लेकिन उनका मेकअप पूरा गायब था। सर ने मुझे मैथ्स पढ़ाई, और चले गए।

मिलते है अगले पार्ट में। और पर कमेंट जरुर करे, ताकि अगला पार्ट जल्द ही लेकर आऊ, थैंक्स।

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