मा की चुदाई और लंड की भूख

मा-बेटा सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट-

मम्मी (नॉटी स्माइल के साथ): अब चल, अपनी मम्मी को पूरी तरह से संतुष्ट कर दे.

मैने मम्मी को अपनी बाहों में उठाया और उन्हें अपने उपर ले लिया. उन्होने अपने पैर मेरी कमर पर लपेट लिए. मैने अपने लंड को उनकी गरम छूट के मूह पर सेट किया.

मैं (धीरे से सिसकते हुए): आ… मम्मी.. धीरे से…

मम्मी ने धीरे से छूट नीचे उतरी और मेरा लंड उनकी गरम छूट में उतरने लगा. पहले एक हल्का सा दबाव महसूस हुआ, जैसे उनकी छूट मेरा स्वागत कर रही हो. फिर धीरे-धीरे, इंच-बाइ-इंच, मेरा लंड उनकी रेशम सी नरम गहराइयों में समा गया. उनकी गरम नामी ने मेरे लंड को ऐसे जाकड़ लिया जैसे वो उसी के लिए तड़प रही हो. मम्मी के होंठो से एक मदहोश आ निकली, जो मेरे कानो में शहद घोल गयी.

अब वो मेरे लंड पर उपर-नीचे होने लगी. उनकी कमर की हर हरकत मेरे लंड को उनकी छूट की गहराइयों में और ज़्यादा रग़ाद रही थी. उनकी साँसें तेज़ हो चुकी थी. हर बार उपर उठते हुए एक हल्की सिसकारी लेती थी, और नीचे आते हुए मेरे लंड को पूरी ताक़त से जाकड़ लेती थी. मैं उनके चेहरे को देखता रहा, जहाँ परम आनंद और टीस के मिश्रित भाव थे. उनकी आँखें कभी बंद हो जाती थी, कभी खुल कर मुझे घूरती थी, जैसे पूच रही हो, और कितना?

मैं उनकी कमर को थाम कर उनकी रफ़्तार को कंट्रोल कर रहा था. कभी मैं उन्हें तेज़ धक्के देने को उकसाता, कभी धीमा कर देता, उन्हें और ज़्यादा तड़पाने के लिए. हर उपर-नीचे की हरकत से हमारे जिस्मों के टकराने की मधुर आवाज़ पुर कमरे में गूँज रही थी. मम्मी अपने होंठो को काट रही थी, उनका शरीर पसीने से चमक रहा था.

मैने मम्मी के उपर आया और उनके उपर चढ़ गया और उनके लिप्स को चूस्टे हुए उनकी चुदाई करने लगा. कुछ मिनिट की रफ़्तार भारी चुदाई में मैं उनके अंदर झाड़ गया.

हम दोनो की साँसें तेज़ चल रही थी, और जिस्म पसीने से चमक रहे थे. मम्मी ने अभी-अभी मेरे लंड पर उपर-नीचे होते हुए अपने चरम का अनुभव किया था, और उनकी आँखों में एक गहरा सुकून और टीस सॉफ झलक रही थी. मेरा लंड अभी भी उनकी छूट में ही था, गरम और भरा हुआ.

मम्मी ने धीरे से मुझे अपने उपर से उठाया, उनके चेहरे पर एक मदहोश मुस्कान थी. उन्होने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी.

मम्मी (धीमी, साँस लेते हुए): आराव… तेरी ताक़त तो कमाल है. लगता है तूने सच में अपनी मम्मी को पूरा खाली कर दिया.

मैं (मम्मी के होंठो को चूमते हुए): आपकी छूट का जादू ही ऐसा है, मम्मी. एक बार अंदर जाए तो बाहर निकालने का मॅन ही नही करता.

मम्मी हल्के से हस्सी, उनकी आँखों में शरारत थी.

मम्मी: अभी तो मैने सोचा था की कुछ नया सीखेगा मेरा बेटा. (उन्होने मेरे लंड को हल्का सा मसला) चल, आज मम्मी तुझे एक और तरीका बताती है खुश करने का.

उन्होने अपने पैर फैलाए और मुझे अपने बिल्कुल सामने, उनकी छूट के ठीक उपर, पालती मार कर बैठने का इशारा किया. ये एक ऐसी पोज़िशन थी जिसमें हमारे चेहरे एक-दूसरे के करीब थे, आँखों में आँखें डाल कर हम इस पल का आनंद ले सकते थे. मेरे लंड की नोक ठीक उनकी छूट के मूह पर थी. मम्मी ने मेरे हाथो को अपने कमर पर लपेट लिया, और मैं भी उन्हें कस्स कर पकड़ लिया.

मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए): अब धीरे से अंदर आ, बेटा. पूरा महसूस कर मम्मी की छूट को.

मैने धीरे से अपने कुल्हों को नीचे किया. मेरा लंड, जो अब तक आज़ाद था, अब मम्मी की छूट में सहजता से समा गया. इस पोज़िशन में घुसने का एहसास बहुत ही स्लो, गहरा और आत्मिक था. मम्मी के मूह से एक लंबी, मदहोश सिसकारी निकली, उन्होने अपनी आँखें बंद कर ली.

मम्मी (आ भरते हुए): आ… बेटा … ये तो बिल्कुल अलग है… कितना अछा लग रहा है…

मैने धीरे-धीरे अपने कुल्हों को उपर-नीचे करने लगा. हर धक्के के साथ, लंड और छूट की गहरी रग़ाद महसूस हो रही थी. मम्मी अपनी गांद को मेरे साथ हल्के से हिलती थी, मेरी हर हरकत का पूरी तरह साथ देती थी.

हमारे जिस्म एक-दूसरे में पूरी तरह से घुल-मिल गये थे, जैसे एक ही यूनिट हो. उनकी छूट की हर नास्स मेरे लंड को सॉफ महसूस हो रही थी.

मैं (मम्मी के होंठो को चूमते हुए): आपकी चुदाई करने में बहुत मज़ा आ रहा है मम्मी. हर पोज़िशन में नशा है.

मम्मी (तेज़ साँसें लेते हुए, मेरी पीठ सहलाते हुए): आ… बेटा… और ज़ोर से… अंदर तक जेया रहा है… मेरी जान…

मैने उनकी बात सुन कर अपनी रफ़्तार बढ़ा दी. धक्के अब तेज़ और गहरे थे. लोटस पोज़िशन में होने के कारण, हमारी आँखें हर पल एक-दूसरे से मिल रही थी. उनके चेहरे पर अब सिर्फ़ परम आनंद और टीस थी. मम्मी अपने सर को पीछे करके आ भारती थी, उनके होंठ थोड़े खुले थे.

मम्मी (मदहोश चीख के साथ): आआहह! आराव… मैं आ गयी… ऑश…

उनकी छूट अंदर से एक बार फिर तेज़ी से सिकुड़ी, और उनका गरम रस्स मेरे लंड पर बाहर तक फैल गया. उस रस्स की गर्मी से मेरा लंड भी झड़ने लगा. मैने कुछ और तेज़ धक्के लगाए, और फिर मेरा गरम वीरया मम्मी की छूट में पूरी तरह से भर गया. हम दोनो उसी पोज़िशन में एक-दूसरे में समाए रहे, साँसें तेज़ चल रही थी, पर अब पूर्ण सुकून था.

मम्मी (धीरे से, गहरे सुकून में डूबी आवाज़ में): बेटा… तू तो मेरे हर सपने को सच कर रहा है. मैने कभी सोचा भी नही था की जिस छूट से तू निकला है, वोई छूट आज मेरी सारी प्यास बुझा देगी.

मैं (मम्मी की आँखों में देखते हुए, उनके गाल को सहलाते हुए): और मम्मी, मैने भी कहा सोचा था की जहाँ से मेरा जानम हुआ, उसी जगह पर मुझे जन्नत मिलेगी. आपकी छूट तो नशा है, मैं उसमें पूरा डूब गया हू.

मम्मी की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी, जिसमें प्यार और जुनून दोनो थे. उन्होने मेरे बालों में हाथ फेरा.

मम्मी (एक लंबी साँस लेते हुए): सच काहु, आराव, तू तो अपने बाप से और अनिरुढ़ जी से भी बहुत बेहतर है. मैने तो बस सोचा था की तोड़ा मज़ा मिलेगा, पर तूने तो उससे कहीं ज़्यादा अची चुदाई की है. मेरी छूट अभी तक झंझणा रही है.

मैं (शरारत से मुस्कुराते हुए, उनके होंठो पर हल्का सा किस करते हुए): वो तो मम्मी, आप सीखा रही हो, इसलिए और भी अछा कर रहा हू. आपकी हर सिसकारी मुझे और हिम्मत देती है.

मम्मी मेरे चेहरे को अपने हाथो में लिया और मेरे होंठो को ज़ोर से चूम लिया. उनकी किस में अब और भी ज़्यादा गहराई और चाहत थी.

मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए, उनकी आवाज़ में एक अलग सा सुकून था): आज के बाद मेरी रातों की नींद पूरी होगी, आराव. कितने सालों से तेरे पापा ने मुझे अची चुदाई का सुख नही दिया. आज… आज मेरे बेटे ने अपने बाप की सारी कमी पूरी कर दी है. सच में, मेरे राजा बेटा.

मैं (मम्मी के होंठो को फिर से चूमते हुए): आपको खुश देख कर मुझे भी सुकून मिलता है, मम्मी. अब आपकी हर रात मेरे नाम होगी. आपकी हर प्यास मैं बूझौँगा.

मम्मी ने मेरे सिर को अपने सीने से लगा लिया और मेरे बालों को प्यार से सहलाने लगी. उनकी धड़कन मेरे कानो में सॉफ सुनाई दे रही थी, धीरे-धीरे नॉर्मल होती हुई. हम दोनो बस इस पल में खोए थे, जहाँ शरम और झिझक बहुत पीछे छ्छूट चुकी थी, और सिर्फ़ प्यार, चाहत और जिस्मों का रिश्ता ही बचा था.

हम दोनो की बातें चल रही थी, जिस्म एक-दूसरे में खोए हुए थे. मम्मी का हर शब्द मेरे अंदर एक नया जुनून भर रहा था. कुछ देर बाद, जब हमारी साँसें पूरी तरह नॉर्मल हो गयी, मम्मी धीरे से मेरे उपर से उठी. उन्होने मेरे माथे पर एक प्यारी सी किस की और फिर अपनी सारी उठाई.

मम्मी (आँखों में गहरा प्यार और शरम लिए): अब चालू मैं, मेरे राजा. रात बहुत हो गयी है. किसी को शक ना हो.

मैने उनका हाथ पकड़ लिया, पर वो बस मुस्कुराइ. उन्होने जल्दी से अपनी पीली सारी वापस पहनी, उनका हर अंग इस कमरे में अब भी अपनी महक छ्चोढ़ रहा था. सारी में वो फिर से वही घरेलू रूप में थी, पर मैं जानता था की इसके पीछे कितनी आग च्छूपी थी. मेरे होंठो पर एक लंबा, गहरा किस देकर, मम्मी धीरे से मेरे कमरे से निकल गयी, दरवाज़ा हल्का सा खुला छ्चोढ़ कर.

उस रात के बाद, हमारा ये सिलसिला एक नशीले जुनून में बदल गया. मम्मी को जब भी मौका मिलता, वो मेरे कमरे में आती. कभी दोपहर में जब घर खाली होता, तो कभी देर रात जब सब सो जाते. हर बार वो आती और अपनी प्यास बुझा कर चली जाती. ये सिर्फ़ जिस्म की प्यास नही थी, ये रूह की तलब थी, जो हमारे बीच एक अनोखा रिश्ता बना रही थी.

मम्मी ने मुझे सिर्फ़ चुदाई करना नही सिखाया, उन्होने मुझे जिस्म के हर राज़ से रूबरू कराया. उन्होने मुझे बहुत सारी नये पोज़िशन्स में सेक्स करना सिखाया. कभी हम बेड पर होते, कभी दीवार के सहारे, कभी खड़े हो कर.

उन्होने मुझे बताया की कैसे लंड को छूट में अलग-अलग आंगल से डालने पर अलग मज़ा आता है. कैसे मेरी जीभ उनकी छूट के हर हिस्से को जन्नत दिखा सकती है. उन्होने मुझे बताया की कैसे एक औरत को पूरी तरह से संतुष्ट किया जेया सकता है. उनकी हर सिसकारी, उनकी हर आ, मेरे लिए एक सीख थी, एक नया अनुभव.

उनकी बातें, उनका जुनून, उनकी हर आडया इतनी गहराई लिए होती थी की मुझे हर बार कुछ नया ही लगता था. हर बार जब वो मेरे नीचे होती थी, उनकी आँखों में वो बेचैनी और चाहत देखता था, जो मुझे और भी वाइल्ड बना देती थी. मैं उनके जिस्म के हर मोड़, हर हिस्से से वाक़िफ़ हो चुका था. वो मेरी हवस की देवी बन चुकी थी, और मैं उनका डेवटी.

लेकिन, ये जो कुछ चल रहा था, इसमें एक काँटा भी था. जब वीकेंड पर मम्मी अनिरुढ़ भाई से मिलने जाती थी. मुझे ये अब बर्दाश्त नही होता था. मेरे अंदर एक अजीब सी जलन उठने लगी थी. ये सोच कर ही मेरा खून खौल जाता था की वही अनिरुढ़ जिसको मम्मी ने मेरे लिए दांता था, अब वो मम्मी के जिस्म का आनंद ले रहा होगा. मैं अनिरुढ़ को एक प्यादा समझता था, पर उसकी मम्मी तक पहुँच अब भी मेरे लिए एक चुनौती थी.

पर, एक अजीब बात थी. जब-जब मम्मी अनिरुढ़ भाई से छुड़वा कर आती थी, वो मेरे साथ और भी ज़्यादा मज़े कर रही तीन. उनका जुनून और भी बढ़ जाता था, जैसे वो अनिरुढ़ के साथ का गुस्सा या अधूरा-पं मुझसे पूरा कर रही हो. हर बार जब वो आती थी, उनकी छूट और भी प्यासी लगती थी, और वो मुझे और भी तेज़ और बेशर्मी से छोड़ने को कहती थी.

मम्मी (एक रात, चुदाई के बाद, हानफते हुए): आराव… तूने तो मेरी छूट की आग को और बढ़ा दिया. उसकी चुदाई के बाद तो मुझे सिर्फ़ तेरी याद आती है.

मैने समझ लिया था, अनिरुढ़ से उनका रिश्ता पूरी तरह ख़तम करना इतना आसान नही था. ये मेरे लिए एक गहरी चुनौती बन गया था. मुझे अनिरुढ़ को मम्मी की ज़िंदगी से पूरी तरह हटाना था, और मम्मी को पूरी तरह से अपनी बनानी थी, इसमे चाहे कितना भी वक़्त लगे या कितनी भी हड्द पार करनी पड़े. मैं इस खेल को जीतना चाहता था.

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