नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम परिधि है, और मैं कोलकाता से हू. मैं कॉलेज में 2न्ड एअर की स्टूडेंट हू. हाइट मेरी 5’5″ है, और फिगर मेरा 34-30-34 है. रंग मेरा सावला है, और नैन-नक्श आचे है. सीधे-सीधे बतौ तो मैं अची दिखती हू, जिसके साथ कोई भी लड़का सेक्स करना चाहेगा. इस कहानी में मैं आपको बतौँगी की कैसे मेरे बाप ने मेरी चुदाई की. तो चलिए शुरू करते है.
मेरा असली बाप बहुत शराब पीटा था, और मेरी मा को मारता था. इसलिए हार कर मेरी मा ने मेरे बाप को डाइवोर्स दे दिया. तब मैं 15 साल की थी, और मेरी मा ने मुझे अपने साथ रखा था.
मेरी मा की सरकारी नौकरी थी, और हमारे पास रहने के लिए घर था, तो हमे धक्के नही खाने पड़े. अब मैं और मेरी मा दोनो ही रहते थे. कुछ साल ऐसे ही बीट गये, और मैं स्कूल से कॉलेज में हो गयी.
फिर एक दिन मैं और मेरी मा मार्केट में शॉपिंग कर रहे थे. वहाँ एक अंकल ने मा को देखा और बोले-
अंकल: नीलम! कितने दीनो बाद. कैसी हो?
मा ने अंकल को देखा और बहुत खुश हो गयी. वो लोग कॉलेज में साथ पढ़ते थे, और शायद एक-दूसरे को पसंद भी करते थे. अंकल शहर में काफ़ी सालों बाद आए थे जॉब ट्रान्स्फर के चलते, और उनको रेंट के लिए रूम चाहिए था. तभी मा ने कहा-
मा: हमारे घर में रूम खाली है, तो अगर आप चाहे तो वहाँ शिफ्ट हो सकते है.
ये सुन कर अंकल बहुत खुश हो गये, और उन्होने तुरंत हा कह दी. अब अंकल के बारे में बता देती हू. अंकल मम्मी से आगे में 2 साल बड़े थे. उनकी पर्सनॅलिटी काफ़ी अची थी, और लगता नही था की वो इतनी उमर के थे. उनका भी डाइवोर्स हो चुका था.
फिर अंकल हमारे घर में शिफ्ट हो गये. अब मा भी खुश रहने लगी, और वो दोनो सुबा-शाम फ्री टाइम में बातें करते थे. सब नॉर्मल ही चल रहा था. मैं भी मा को खुश देख कर खुश थी.
फिर एक दिन कुछ अलग हुआ. उस रात मैं बहुत हॉर्नी फील कर रही थी, तो बेडरूम में जाके फिंगरिंग करने लगी. मैं बेड पर लेती थी, और अपनी छूट सहला रही थी. मुझे याद नही था की मैने दरवाज़ा बंद नही किया था (मतलब बंद तो था, लेकिन कुण्डी नही लगी थी).
फिंगरिंग करते हुए जब अचानक से मेरी नज़र दरवाज़े पर गयी, तो अंकल बाहर खड़े थे, और थोड़े खुले दरवाज़े से मुझे देख रहे थे. मैं एक-दूं से घबरा गयी, और अंकल वहाँ से चले गये.
अब मैं सोचने लगी की ये क्या हो गया. मुझे लगा अंकल के सामने मेरी इमेज खराब हो गयी. यही सोचते-सोचते मैं सो गयी.
अगली सुबा मुझे कुछ याद नही था. लेकिन जब मैने कॉलेज जाते हुए अंकल को देखा, तो मुझे सब याद आ गया. अंकल ने नॉर्मल ही रिक्ट किया, कुछ अलग नही था.
ऐसे ही कुछ दिन बीट गये, और ये बात मेरे दिमाग़ से निकल गयी. फिर एक दिन मा और मैं शॉपिंग के लिए जाने वाले थे. अंकल को ये पता चला तो उन्होने कहा की उनको भी समान लेना था, इसलिए वो भी हमारे साथ चलेंगे. अब हम उनके साथ उनकी गाड़ी में जाने वाले थे.
हम कुछ देर में माल पहुँच गये. वहाँ हम अपना-अपना समान लेने अलग हो गये. मुझे उपर वाले फ्लोर पर जाना था, तो मैं मम्मी को बोल के निकल गयी. जैसे ही मैं लिफ्ट में चढ़ि, मेरे पीछे अंकल भी आ गये. हमारे अलावा लिफ्ट में कोई नही था.
मैने जब अंकल की तरफ देखा, तो वो मुझे ही देख रहे थे. फिर उन्होने अचानक से कहा-
अंकल: तुम्हारे कोई बाय्फ्रेंड है?
मैं ये सवाल सुन कर हैरान हो गयी. मैने कहा-
मैं: जी?!
अंकल: ब्फ है तुम्हारा?
मैं: नही अंकल.
अंकल: क्यूँ?
मैं: पता नही अंकल.
फिर अंकल मेरे करीब आने लगे. मैं तोड़ा घबरा गयी. वो मेरे बिल्कुल पास आए, और मेरे कान के पास आके कहा-
अंकल: तुम बाय्फ्रेंड बनाओ, तुम्हे इसकी ज़रूरत है. अपनी जवानी की गर्मी उंगली से मत निकालो.
ये कहते हुए अंकल की साँसें मेरे कान पर पद रही थी. ये एहसास बहुत अलग था. आज तक कोई मर्द मेरे इतने करीब नही आया था. मेरे बदन में कपकपि सी होने लगी.
ये बोल कर अंकल पीछे होके खड़े हो गये, और हमारा फ्लोर भी आ गया. फिर वो बाहर निकल गये. वहाँ हमने शॉपिंग की और फिर घर वापस आ गये.
अब मेरे ध्यान में वही चीज़ घूम रही थी, जब अंकल मेरे करीब आ गये. रात को बेड पर भी मुझे वहीं ख़याल आने लगे. अंकल के बारे में सोचते हुए मेरी छूट गीली होने लगी. फिर फाइनली मैने फिंगरिंग कर ली.
अगले दिन से मेरा ध्यान अंकल की तरफ बार-बार जाने लगा. जब भी वो आस-पास होते, तो मैं उनको देखती रहती. वो मेरी तरफ देख कर स्माइल कर देते. मैं उनको देख कर उत्तेजित होने लगी थी.
फिर एक रात मेरे कमरे का दरवाज़ा रात में नॉक हुआ. मैं सोई नही थी, तो उठ कर दरवाज़ा खोला. सामने देखा तो अंकल खड़े थे. उनको देख कर मैं हैरान हो गयी. मेरी सिट्टी-बिट्टी गुल हो गयी.
अंकल ने स्माइल की और आयेज बढ़ने लगे. मैं पीछे होने लगी. फिर वो बोले-
अंकल: बाय्फ्रेंड बनाया?
मैं ये सुन कर होश में आई और कहा: जी?
अंकल: बनाया कोई बाय्फ्रेंड?
मैं: नही.
अंकल: मेरी गफ़ बनोगी?
ये सुन कर मैं हैरान हो गयी. मेरा मॅन हा बोल रहा था, लेकिन मूह से कुछ नही निकल रहा था. तभी अंकल मेरे और करीब आ गये, और मेरी कमर में हाथ डाल लिया. उन्होने मुझे अपने करीब खींचा, और मेरे होंठो पर अपने होंठ लगा दिए.
अब वो मेरे होंठो को चूसने लग गये. ये मेरी पहली किस थी, और एक ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था. मैं भी अंकल का साथ देने लगी. तभी बाहर से मम्मी की आवाज़ आई-
मम्मी: परिधि, किससे बात कर रही हो?
मम्मी मेरे रूम की तरफ आ रही थी, और अंकल जल्दी से बेड के नीचे च्छूप गये. मैने मम्मी से कहा की मैं रील देख रही थी. फिर मम्मी ने कहा-
मम्मी: चल आज साथ में सोते है.
हम दोनो साथ लेट गये. मैं दररी हुई थी क्यूंकी अंकल बेड के नीचे थे. फिर पता नही कब मेरी आँख लग गयी. मेरे सोने के बाद अंकल कब बाहर गये, मुझे ये भी नही पता चला.
उस रात के बाद हमने काफ़ी बार ट्राइ किया की कुछ करे. लेकिन हमेशा मम्मी बीच में रुकावट बन जाती. दरअसल मम्मी साथ वाले कमरे में सोती थी. वो कभी भी मेरे कमरे में आ जाती थी, इसलिए पकड़े जाने का दर्र था.
फिर एक दिन मम्मी शाम को मेरे पास आई और बोली: बेटा मैने तेरे अंकल के साथ कोर्ट मॅरेज करने का फैंसला किया है.
और अगले दिन दोनो ने शादी कर ली. इस तरह से जिसके साथ मेरा चक्कर चल रहा था, वो मेरा बाप बन गया.