मा-बेटे के छुप-छुप के चुदाई करने की कहानी

जैसा की आपने पिछले भाग में पढ़ा की मा की गांद चुदाई हुई, और उन्हे चलने में दिक्कत आ रही थी. मैने उनके लिए छाई बनाई, और दादी भी आने वाली थी. अब आयेज पढ़िया और मज़े लीजिए.

शाम हो चुकी थी. करीब 7 बजे तक पापा दादी को लेकर आ गये. मैने और मम्मी ने उन्हे प्रणाम किया. फिर हम सब ने बैठ के ढेर सारी बातें की. फिर मैं अपने रूम में चला गया. मा किचन में खाना बनाने चली गयी.

बस दादी और पापा बरामदे में बैठ के टीवी देख रहे थे, और इधर-उधर की बातें कर रहे थे. मुझे रूम में अकेले मॅन नही लग रहा था, और मा को प्यार करने का दिल कर रहा था. फिर मैं चुपके से रूम से निकला, और धीरे-धीरे चल के किचन में पहुँचा.

मा खाना बना रही थी. मैने पीछे से जा कर उनके कंधे पर हाथ रखा. फिर मा जैसे ही पलटी मैं उनके होंठो पर किस करने लगा. मा भी तोड़ा साथ दी, और फिर डोर हो कर धीरे से बोली-

मा: क्या कर रहा है? तू निकलवाएगा हमे घर से.

ये बोल के वो खुद मुझे किस करने लगी, और बोली-

मा: चल अब जेया रूम में, खाना बनाने दे.

मैं: नही मा, आपके पास ही रहने का मॅन है.

और उनको पीछे से हग कर लिया, और आयेज हाथ करके उनकी चूचियों को सहलाने दबाने लगा. मा मचलने लगी और बोली-

मा: बेटा तू हमेशा आग लगा देता है.

मैं बोला: क्या करू, मुझे आपको देखते ही आग लग जाती है. ऐसे ही हम दोनो रोमॅंटिक बातें कर रहे थे. तभी दादी की आवाज़ आती है-

दादी: बहू, गरम पानी लेते आना.

मा: जी मा जी, लाती हू.

और फिर मेरे से बोली-

मा: चल भाग अब यहा से. काम करने दे.

मैं बोला: ठीक है, जेया रहा हू.

और मैं अपने रूम में चला गया. थोड़ी देर में मा किसी बहाने से मेरे रूम में आई. मैं लेट कर फोन चला रहा था. वो बोली-

मा: क्या कर रहा है?

मैं बोला: ऐसे ही कुछ ना कुछ देख रहा था. खाना बन गया क्या?

मा: नही, बस बन ही चुका है.

फिर वो मेरे करीब आई, और पकड़ के झट से किस करने लगी. मैं उनकी चूचियों को दबा रहा था. फिर मा उठी, और बोली-

मा: वॉशरूम में आजा.

मेरे रूम में अटॅच्ड वॉशरूम है. मा अंदर चली गयी. फिर मैं गया, और वॉशरूम लॉक किया. उसके बाद मैने मा को पकड़ा, और होंठ से होंठ लगा के स्लॉपी किस करने लगा. फिर नीचे बैठ के मा ने मेरी पंत को नीचे करके लंड निकाला, और धीरे से बोली-

मा: बेटा हमे ऐसे ही काम चलना पड़ेगा.

मैं बोला: कोई नही मा, बस साथ ही रहना.

तो वो बोली: हा जान.

और मूह में लंड लेकर चूसने लगी, और करीब 5 मिनिट में ही मेरे लंड ने अपना पानी छोढ़ दिया. मा पूरा पानी पी गयी और बोली-

मा: ये मुझे भी रोज़ चाहिए. इसकी आदत हो गयी है.

फिर वो उठी, और होंठ से होंठ मिला के किस किया. उसके बाद वो धीरे से रूम से निकली और किचन में पहुचि. मैं निकला और बेड पर अपने लेट गया. थोड़ी देर बाद मा ने आवाज़ दी-

मा: बेटा आजा, खाना तैयार है.

मैं गया और बैठा. मैं और मा एक साइड और पापा और दादी एक साइड थे. हम खाना खा रहे थे, और मेरा एक हाथ मा की छूट पर था. खाना खा कर हम सब अपने-अपने रूम में चले गये.

सोने का टाइम हो गया था. मैं अपने रूम में गया, और दादी भी आ गयी रूम में. अब मैं और दादी बात-चीत कर रहे थे. वो इधर-उधर की बातें बता रही थी. करीब 10:30 मुझे मा ने आवाज़ दी-

मा: बेटा ज़रा सुनना.

मैं बोला: आता हू.

दादी को मैने बोला: मैं तुरंत आता हू. फिर बात करते है.

दादी बोली: जेया.

फिर मैं मा के पास गया, और बोला: क्या हुआ मा?

मा: पापा गहरी नींद में सो गये है. दादी जागी है क्या?

मैं बोला: हा जागी तो है, पर आप बोलो क्या बात है?

तो मा बोली: मेरे पीछे-पीछे आजा.

मैं बोला: कहा?

तो बोली: चुप कर, और आजा.

मैं उनके पीछे हो लिया. मा स्टोर रूम में गयी. मैं भी घुसा, और मा ने रूम धीरे से लॉक कर दिया. फिर वो भूखी शेरनी की तरह मुझ पर टूट पड़ी. रूम में हल्की लाइट आ रही थी रोशन-दान से. ज़ोर की किस करते हुए मा बोली-

मा: बेटा आज रहा नही जेया रहा. आज यही खड़े-खड़े कर लेते है.

मैं बोला: ठीक है मा. बुत कोई आया तो?

वो बोली: जड़ी करना बस.

फिर मैने उनकी निघट्य उठाई, और पीछे से लंड को छूट में डाल दिया, और धीरे-धीरे करके शॉट लगाने लगा. फिर मैने स्पीड तेज़ की तो मा आवाज़े निकालने लगी.

मैं रुका और बोला: मा क्या कर रही हो? कोई सुन लेगा तो?

वो बोली: तू करता जेया.

और मा ने अपना दुपट्टा अपने मूह में डाल लिया, और जल्दी ही मैं झाड़ गया. मा भी शांत हो गयी. फिर हम दोनो निकले, और अपने-अपने रूम में जेया कर दरवाज़ा लगा लिया.

दादी बोली: आ गया बेटा?

मैं बोला: हा.

जब मैने दादी की तरफ देखा तो चौंक ही गया. वो बैठी हुई थी बेड पर. उन्होने पल्लू हटाया हुआ था, और उनकी 40द की चूचियाँ सॉफ पता चल रही थी, और भरा हुआ पेट भी.

दादी बोली: क्या हुआ? आजा बेड पर.

फिर मैं बेड पर बगल में गया, और बैठ गया. और हम कुछ देर बात किए. मेरी नज़र दादी की चूचियों पर ही थी. ये बात दादी को पता चल चुकी थी.

दादी हमेशा कॉटन की रंगीन सारी ही पहनती थी, और बड़ी-बड़ी चूचियों की वजह से उनका ब्लाउस डीप हो जाता था. बहुत सेक्सी लगती है दादी मेरी. मैने रूम की लाइट ऑफ की, और नाइट बल्ब जला दिया, ताकि उनकी चूचियों को निहार साकु.

फिर दादी मेरे छाती पर हाथ रखी और बोली: पता है बेटा, जब तू छ्होटा था, तब तू मेरे से चिपक के सोता था.

फिर उनको ज़ोर से पकड़ के मैं बोला: हा याद है मुझे दादी. पिछली बार भी मैं सोया था. वैसे भी उस टाइम भी मैं छ्होटा ही था ना आपके लिए.

तो वो बोली: हा, तू तो मेरे लिए छ्होटा ही रहेगा.

और मुझे ज़ोर से पकड़ के अपने मैं सता लिया. पहले मुझे सतने में या पकड़ के सोने में दिक्कत नही होती थी, क्यूंकी पहले दादी के बारे में कभी ग़लत नही सोचता था. पर अब दिमाग़ में ग्लात ख़याल चल रहे थे, तो तोड़ा अजीब लग रहा था.

पर इस हरामी दिमाग़ का क्या करू? मैं पलटा, उसी टाइम दादी ने भी पलट के मेरी पीठ पर हाथ रखा, और मुझे सता लिया. मैं सीधा जेया कर उनकी चूचियों मैं टकराया. बड़ा ही कोमल एहसास हुआ. फिर मैं भी हाथ पीछे करके दादी की पीठ पर फेरने लगा, और चिपक के आँखें बंद कर ली. तो दादी बोल रही थी-

दादी: क्या हुआ बेटा? बड़ा प्यार जाता रहा है.

मैं बोला: मुझे भी अपनी दादी से प्यार है. मेरी दादी इतनी सुंदर जो है.

तो दादी बोली: चल, बदमाश हो गया है तू. चल अब आँखें बंद कर और सोजा.

तो मैने उनकी चूचियों पर अपने होंठ सताए, और हटा कर पलट के सो गया. फिर दादी आ कर पीछे से चिपक के हग करके सो गयी. मुझे पता नही कब नींद आ गयी.

अगली सुबा मेरे हाव-भाव ही बदले हुए थे. मेरे मॅन में बस दादी की चुदाई ही चल रही थी, की कैसे उनको पत्ता के छोड़ा जाए. पर ये स्टोरी मैं अलग से लिखूंगा.

मैं उठा, और मा के पास गया किचन में. फिर मैं उनको हग करके बोला-

मैं: मा आपके बिना रात नही काट रही थी. बहुत याद आई है आपकी रात में.

तो मा बोलती है: मुझे भी बेटा. पर कोई बात नही. हम दोनो को अब शांति से रहना होगा. क्यूंकी दादी आई हुई है. बहुत शक्की टाइप की औरत है. तो उनकी निगाहों से बचना होगा. और हा, याद रखना उनके जाने के बाद हम दोनो अपने हनिमून पर चलेंगे, और खूब मज़े करेंगे.

ये बोल कर मा ने मुझे एक ज़ोरदार किस की, और मैने उनकी गांद को ज़ोर से पकड़ के दबा दिया.

फिर मा बोली: बेटा अब भी दर्द है गांद में हल्की-हल्की. पर बहुत अछा लग रहा है.

तो मैं बोला: जब अछा लग रहा है तो हनिमून पर आपकी गांद और छूट दोनो का स्वाद लूँगा, वो भी जाम कर.

मा बोली: ठीक है, मैं रेडी हू.

और गले लगा कर गर्दन पर दाँत काट दी, और होंठ चूम कर अलग हुई.

फिर वो बोली: चल अब मुझे काम करने दे. बहुत काम पड़ा है.

इस सीरीस में बॅस इतना ही. अब ये सीरीस आएगी अलग नाम से. पर पहले दादी पोते की स्टोरी आएगी. तो मेरे से जुड़े रहे, और गरमा-गरम स्टोरी का आनंद ले. मिलते है अब न्यू स्टोरी में. तब तक के लिए अलविदा. लोवे योउ ऑल.

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