मा बाप की चुदाई से हुई गरम

तो अभी तक आपको मेरे और मेरे बाप के रिश्ते के बारे मे तो पता चल ही गया है. कहानी का ये हिस्सा उसी रिश्ते को एक नये मोड़ पर ले जाता है.

मुझे पापा से चूड़ते हुए लगभग एक साल होने को था. अब मई भी खूब एंजाय करती थी पापा के साथ सेक्स करना. पापा का मुझे छोड़ने का नये तरीके ढूंदे रहते थे. अब तो मई खुद भी इंटरनेट पे नये तरीके सीखती थी.

एक दिन की बात है रात के 2 बाज रहे थे. मेरी नींद प्यास से खुल गयी. मैने ब्लू कलर की टशहिर्त और वाइट पँति पहें के सोई थी. मेरे बॉटल मई पानी भी पानी नही था तो मई किचन मे पानी लेने गयी.

हुमारे घर का किचन का रास्ता मा पापा के रूम के पास से होके जाता था. मई उनके रूम के पास से ही गुजर रही थी की मैने मा की मोनिंग की आवाज़ आ रही थी. इतेफ़ाक से उनके रूम की खिड़की थोरी सी खुली थी और अंदर नाइट बल्ब ओं था. जिससे मई सॉफ सॉफ अंदर देख सकती थी.

मैने पहले इग्नोर करने का सोचा मगर मेरे अंदर की रॅंड कही ना कही ये सब देखना चाहती थी. मैने ना कहते हुए भी खिड़की से देखना शुरू कर दिया.

पापा मम्मी की छूट चाट रहे थे. मम्मी नंगे बिस्तर पर लेती मोन कर रही थी. अब मम्मी खुद के हाथो से अपना मूह बंद करने की कोशिश के रही थी. मम्मी को भी खूब मज़ा आ रहा था.

फिर पापा मम्मी छूट से किस करते हुए उनके बूब्स तक गये और उनके बूब्स चूसने लगे. मम्मी के बूब्स इतना बारे थे की पापा के हाथो मई नही आ रहे थे. फिर मम्मी ने बेड के नीचे से कॉंडम निकाला और पापा को पहेने को दिया. पापा ने पहले माना कर दिया मगर मम्मी के कहने पे मान गये. मई उनकी आवाज़ नही सुन पा रही थी मगर उनके फेस के एक्सप्रेशन्स से पता चल जा रहा था.

फिर पापा ने कॉंडम पहें के धीरे से मम्मी की छूट मई अपना लंड डाल कर मम्मी को छोड़ने लगे. पापा का मोशन बहुत स्लो था जो की मेरे साथ कभी नही होता था. वो मुझे जनवरो की तरह छोड़ते थे. पापा ने फिर छोड़ते छोड़ते मम्मी के गले को सक करने लगे. मम्मी भी पूरे जोश मई लंबी साँसे ले रही थी. उनकी सांसो की आवाज़ मई बाहर तक सुन पा रही थी.

थोरी देर बाद पापा बेड पर बैठ गये और मम्मी को अपनी गोड्ड़ मई बैठ कर छोड़ना स्टार्ट किया. इस बार मम्मी उछाल रही थी और साथ मई उनके बूब्स भी. मुझे भी हलक्स हल्का जोश चाड़ने लगा और मई अपनी पनटी मई हाथ डाल कर अपनी छूट सहलाने लगी.

पापा अभी भी मम्मी के साथ एकद्ूम प्यार से सेक्स कर रहे थे. मानो ये वो आदमी हो ही ना जो ऑलमोस्ट हरर दिन मौका पा कर मुझे जनवरो की तरह छोड़ता हो और गली देता हो. मई तो उनकी रखैल थी जो जब मॅन चाहता अपनी हवस भुजने मेरे पास आ जाते.

मुझे कुछ देर बाद रीयलाइज़ हुआ की पापा मम्मी के साथ जो कर रहे है उससे प्यार कहते है और मेरे साथ जो करते है उससे हवस मिटाना कहते है. पापा बीच बीच मई मम्मी को लिप्स पर किस भी कर रहे थे.

मुझे ये सब देख के जोश भी चॅड रहा था साथ ही साथ जलन भी हो रही थी. मई भी चाहती थी की पापा मेरे साथ भी ऐसा वहवार रखे. मुझे उनका रफ तरीका भी पसंद था मगर कभी कभी मई भी प्यार डिज़र्व करती हू.

फिर मम्मी पापा दोनो लेट गये और पापा ने पीछे से मम्मी की टाँग उठाई और छोड़ना दुबारा से चालू किया. इश्स वक़्त मेरे पनटी भी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. आख़िर मेरे अंदर की रांड़ मेरे आत्मसम्मान से जाड़ा बरी थी.

मम्मी अब कंट्रोल नही कर पा रही थी. मम्मी खूब मचल रही थी. पापा ने फिर मम्मी की छूट मई दो उंगली डाली और उनके अंदर का सारा पानी निकल दिया. मम्मी थोरी शांत हुई.

फिर पापा लेट गये और मम्मी पापा के लंड को लेके अपने बूब्स के बीच मई रख कर हिलने लगी. मेरी मम्मी के बूब्स वैसे भी बहुत बारे है. मम्मी बीच बीच मई पापा के लंड को किस भी कर रही थी. फिर मम्मी पापा का लंड पूरी तरह से चूसने लगी.

मई हैरान थी की मम्मी इतने आक्ची तरह से ब्लोवजोब दे सकती है. फिर मम्मी पापा के उपेर चार गयी और पापा के लंड को अपने अंदर लेकर उछालने लगी साथ ही साथ मम्मी के बूब्स भी उछाल रहे थे.

फिर मूमी ने दोनो हाथो से अपने बूब्स को पकड़ कर दबाने लगी. थोरी देर बाद मम्मी पापा के उपेर झुक गयी. मम्मी के बूब्स पापा के मूह के उपेर झूल रहे थे.

पापा उन्हे मूह से चूसने की कोशिश कर रहे थे मगर मम्मी उन्हे पीछे कर ले रही थी. फिर दोनो तोरा से मुस्कुराए. मम्मी को पापा को टीज़ करते देख मुझे पूरा जोश चार गया था. मई भी पापा से उससी वक़्त चड़ना चाहती थी.

फिर मम्मी ने पापा के मूह कर बूब्स रख दिए और पापा उन्हे चूसने लगे. फिर उन्होने पोज़िशन चेंज की. इश्स बार पापा उपेर थे और मम्मी उनके नीचे.

दुबारा पापा मम्मी को छोड़ना स्टार्ट कर दिए. इश्स बार पापा की नज़र मुझपर पर गयी मगर पापा नही रुके. उन्होने मुझे गुस्से वाला लुक दिया. मगर मई इतना एंजाय कर रही थी की मैने ध्यान ही नही दिया.

थोरी देर बाद पापा मम्मी के अंदर ही झार गये. मई भी बाहर पूरे ज़ोर से अपनी छूट मसल नही थी. फिर मई भी झार गयी. तब मुझे जाके एहसास हुआ की ना पापा ने मम्मी को उल्टा सीधा बोला सेक्स के वक़्त, ना स्पॅंक किया, उनकी बात भी मानी, कॉंडम भी पहना था.

पापा मम्मी की हरर बात मान रहे थे जो की वो मेरी कभी नही मानते जब वो मेरे साथ होते है. मुझे मम्मी से जलन हो रही थी. मेरे मॅन मई पापा के लिए कही ना कही जगह बन गयी थी. मई पापा को अपना बनाना चाहती थी. मगर बेबस थी, मई कर ही क्या सकती थी.

पापा मम्मी दोनो तक कर बेड पर लाते गये. मम्मी पापा के कंधे पर सिर रख कर सो गयी. पापा ने दुबारा मेरी तरफ देख, मई गुस्से मई वाहा से चली गयी और अपने रूम मई जा कर दरवाज़ा बंद कर लिया.

अब इससे आयेज की कहानी इसके अगले भाग मे. आप सब को ये कहानी कैसी लगी मुझे कॉमेंट्स मे ज़रूर बताईएएगा.

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