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अभी कुछ समय पहले ही तो मेरी बहन श्यामा की शादी रोहित के साथ हुई थी सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था मेरे पिताजी भी कुछ समय पहले ही अपनी सरकारी नौकरी से रिटायर हुए थे लेकिन जब श्यामा की मौत की खबर हमें मिली तो सब लोग बहुत ज्यादा हैरान रह गए। मेरी मां तो श्यामा की मृत्यु की खबर सुनकर जमीन पर बेहोश होकर गिर पड़ी थी घर में गमगीन माहौल था और सब लोग बहुत ही ज्यादा उदास थे। कई दिनों तक तो मेरी मां ने और पापा ने खाना नहीं खाया था किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था श्यामा अपने पीछे ना जाने कितने सवाल छोड़ कर चली गई थी। उसकी दो वर्षीय बेटी भी अब रोहित की जिम्मेदारी थी किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कैसे श्यामा की मृत्यु को भुलाया जाए।

श्यामा बहुत ही चुलबुली और शैतान थी मैं जब उसके बारे में सोचता तो मुझे बहुत ही बुरा लगता है और बहुत तकलीफ होती लेकिन यह सब किस्मत का ही खेल था हमारे हाथ में कुछ भी नहीं था। सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि किसी को कुछ मौका ही ना मिल सका श्यामा की अचानक से हुई मृत्यु से सब लोग पूरी तरीके से आश्रयचकित है और जो भी यह खबर सुनता वह दुखी हो जाता। हमारे रिश्तेदार हमारे घर पर हमारा दुख बाँटने के लिए भी आए थे लेकिन हम लोग बहुत ज्यादा दुखी हो चुके थे और हमे श्यामा की दो वर्षीय बच्चे की देखभाल भी करनी थी। मेरी छोटी बहन शगुन बच्ची की बहुत देखभाल करती है और एक दिन पिताजी ने मेरी मां से कहा कि शगुन की शादी हम रोहित से करवा देते हैं। मुझे ऐसा लगा कि जैसे शगुन अभी इन सब चीज के लिए तैयार नहीं थी परंतु उसे इस रिश्ते में बंधना पड़ा और कहीं ना कहीं वह इस बात से दुखी तो थी लेकिन वह अपने दुख को बयां ना कर सकी और उसने दुखो का प्याला खुद ही पी लिया। यह सब बहुत ही जल्दी में हुआ एक छोटा सा अरेंजमेंट पिताजी ने करवाया था और शगुन की शादी अब रोहित के साथ हो चुकी थी। शगुन की शादी के बाद रोहित उसे खुश रखने की कोशिश करता लेकिन फिर भी उन दोनों के बीच किसी न किसी बात को लेकर अनबन हो ही जाती थी।

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शगुन तो सिर्फ उस छोटी सी बच्ची के लिए रोहित से शादी करने के लिए तैयार हुई थी लेकिन यह बात शायद रोहित को कहा मालूम थी रोहित तो शगुन पर श्यामा की तरह ही हक जताया करता था। जब रोहित के साथ शगुन की शादी हो रही थी तो उसे किसी ने कुछ भी नहीं पूछा था सिर्फ शगुन को शादी के लिए तैयार कर दिया गया और इस बात को 6 महीने होने आए हैं लेकिन श्यामा की याद अब भी हम लोगों के दिल में ताजा हैं। ऐसा लगता है कि जैसे कल की ही बात है कि श्याम हमारे साथ खेला करती थी। मम्मी पापा को यह तो गम जिंदगी भर रहने वाला था इसीलिए वह लोग अब अपनी दुनिया में ही सिमट कर रह गए थे वह किसी से भी ज्यादा बात नहीं किया करते थे। इसी बीच एक दिन शगुन और रोहित के बीच झगड़े हुए और शगुन घर चली आई जब शगुन घर आई तो पिताजी बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे तुम्हें ऐसे ही घर छोड़ कर नहीं आना चाहिए था। शगुन के पास भी शायद कोई जवाब ना था वह कहने लगी पापा मैं अब रोहित के साथ नहीं रह सकती हम दोनों के बीच ना जाने किस बात को लेकर अनबन होती रहती है। शगुन रोहित के साथ नहीं रहना चाहती थी मैं भी इन सब चीजों से बहुत परेशान हो चुका था और मैं अपनी जॉब पर अच्छे से ध्यान भी नहीं दे पा रहा था इसलिए मैंने सोचा कि मैं बेंगलुरु चला जाता हूं। मैंने बेंगलुरु में जॉब करने का फैसला कर लिया था और मैं मुंबई छोड़ कर बेंगलुरु नौकरी करने के लिए चला गया। मेरे पास 7 वर्ष का काम का तजुर्बा था इसलिए मुझे बेंगलुरु में जॉब मिल गई और मैं अब जॉब करने लगा था। मैंने बेंगलुरु में ही अपने एक पुराने दोस्त के साथ फ्लैट ले लिया था और हम दोनों फ्लैट में ही रहते थे। मैं अपने घर से दूर था मुझे अपने घर की याद बहुत सताती थी और कई बार मुझे लगता था कि शायद मुझे मुंबई से बेंगलुरु नहीं आना चाहिए था लेकिन अब धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होता जा रहा था।

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मैं अपने घर से दूर जरूर था लेकिन अपने माता पिता को हर रोज मैं फोन किया करता वह लोग काफी परेशान थे लेकिन उनके पास भी शायद अब कोई और रास्ता नहीं था। मैं उनसे पूछता कि शगुन और रोहित के रिश्ते कैसे हैं तो मेरी मां कहती कि बेटा अब भी वह दोनों आपस में झगड़ते रहते हैं और बस जैसे तैसे अपने रिश्ते को आगे खींच रहे हैं। मैं काफी अकेला हो चुका था क्योंकि मैं अपने घर से दूर था मैं ज्यादातर अपने ऑफिस में ही रहता था अपने ऑफिस से लौटने के बाद मेरी दुनिया मेरे फ्लैट तक ही सीमित थी। मैं आसपास के लोगों को भी नहीं जानता था परंतु मेरा दोस्त बिल्कुल मेरे विपरीत था वह सब लोगों को जानता था और उसके आसपास काफी दोस्त भी थे। कई बार वह मुझसे कहता कि कमल तुम अपनी दुनिया में ही खोकर रह जाओगे तुम ने अपने आप को सिर्फ एक कमरे में ही कैद कर के रख लिया है तुम्हें मेरे साथ पार्टियों में आना चाहिए और बाहर का भी आनंद लेना चाहिए। मुझे भी लगा कि शायद वह बिल्कुल सही कह रहा है और इसी के चलते मैं अब अपने दोस्त के साथ पार्टियों में जाने लगा जब मैं उसके साथ पार्टी में जाने लगा तो मुझे शराब की लत ने अपनी ओर जकड़ लिया था मैं पूरी तरीके से शराब के नशे में ही रहने लगा था। मैं जब भी अपने ऑफिस से वापस लौटता तो मुझे जैसे अब शराब का ही सहारा था इसी बीच मेरे ऑफिस में मेरी दोस्ती आकांक्षा के साथ हुई। आकांक्षा दिल्ली की रहने वाली थी और आकांक्षा के साथ मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी एक दिन उसने मुझसे पूछा कि तुम काफी परेशान रहते हो तुम्हारी परेशानी की वजह क्या है।

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