दोस्तो, आज मैं आप लोगों को अपनी कहानी सुनाने जा रही हूँ, जिसे मैंने अभी तक किसी से भी नहीं बताया है. आज मेरी उम्र 35 साल की है और मैं चुदाई में बहुत माहिर हो चुकी हूँ. मेरी कहानी उस वक्त शुरू हुई थी, जब मैं किशोरावस्था में थी.
जब मैं 5 साल की थी, मेरी माँ का देहांत तभी हो गया था. मेरे पापा किसी जानी मानी कंपनी में जनरल मैनेजर थे और बहुत से लोग उन के नीचे काम करते थे. घर में पैसे की कोई कमी नहीं थी. उन्होंने मेरे लिए एक आया रखी हुई थी, जो सारा दिन हमारे घर पर ही रहती थी. पापा के पास इतनी फ़ुर्सत नहीं थी कि कभी वो मेरी तरफ भी देखते. बस आया ही मेरा सब कुछ थी.
पापा अपने ऑफिस की किसी लड़की के साथ अपना चक्कर चला बैठे. वो लड़की एक विधवा थी और उसका एक लड़का भी था, जो जवान था. उसका ये बेटा जब पैदा भी नहीं हुआ था तभी उसके पति की मौत हो गई थी. क्योंकि उसका पति मेरा पापा के पास काम करता था, इसलिए उन्होंने उसकी विधवा को अपने ऑफिस में काम पर रख लिया. क्योंकि वो काम बहुत अच्छी तरह से करती थी. इसलिए उसको उन्होंने अपनी सेक्रेटरी बना लिया.
जब मेरी माँ का देहांत हुआ तो उसने मेरे पापा से कहा कि जिंदगी बहुत लंबी है, इसे रो कर ना गुजारो बल्कि सुख और चैन से बिताओ.
क्योंकि वो पापा की सेक्रेटरी थी, इसलिए वो बहुत समय उनके साथ ही रहती थी. उसने मेरे पापा को फुसलाने का पूरा काम करना शुरू कर दिया. जब भी मौका मिलता, वो पापा को अपने मम्मों की नुमाइश करवाती और अपनी टांगों को पूरी तरह से वैक्स कर भी दिखाती. यहाँ तक वो कई बार अपनी स्कर्ट तो बहुत ऊंचा करके अपनी चड्डी तक भी दिखा देती थी. ऐसा वो उस वक्त करने का प्रयास करती थी, जब वो उनसे डिक्टेशन ले रही होती थी.
पापा को भी एक चूत की ज़रूरत थी क्योंकि उनकी पत्नी (मेरी माँ) भी संसार छोड़ कर जा चुकी थीं. मगर पापा अपनी पोज़िशन को देख कर चुप रह जाते थे.
जब पापा उसके जाल में ना फँसे तो एक दिन उसने पापा को अपने घर पर यह कह कर बुलाया कि उसके बेटे का जन्मदिन है, आपको ज़रूर आना होगा.. क्योंकि वो बेचारा बिना बाप का लड़का है.
खैर.. पापा निश्चित समय पर उसके घर पर गए. मगर वहाँ ना तो कोई और था और ना ही कोई जन्मदिन जैसा कुछ भी था.
उसने पापा से कहा कि मेरे देवर की डेथ हो गई है, इसलिए उसको वहाँ भेजना पड़ा. मगर आप अब बिना खाना खाए नहीं जा सकते.
अब घर में दो जवान मर्द और औरत अपनी प्यासी चूत और लंड लिए अकेले हों तो फिर आप सोच सकते हैं कि क्या क्या हो सकता है. उसने एक डीवीडी प्लेयर लगा रखा था और उस पर कोई ब्लू फिल्म लगी हुई थी, मगर टीवी और डीवीडी ऑफ थे.
वो बोली- मैं ज़रा बाथरूम से होकर आती हूँ, आप तब तक टीवी पर डीवीडी चला कर मूवी देखिए.
इसके आगे की कहानी मैं अपने पापा की ज़ुबानी ही लिख रही हूँ.
उस दिन मुझे घर पर बुला कर मेरी सेक्रेटरी ने सबको पहले ही से कहीं भेज दिया था और जब मैं उसके घर पर पहुँचा तो वहाँ सिर्फ वो ही थी. मुझे ब्लू फिल्म देखने के लिए बोलती हुई वो बाथरूम में चली गई. मैं भी अपनी पत्नी के देहांत के बाद लंड का पानी किसी भी चूत में नहीं निकाल पाता था. बिंदु (मेरी सेक्रेटरी) भी बिना चुदे रह रही थी. दोनों को एक लंड और चुत की जरूरत थी. मुझे नहीं पता था कि उसने डीवीडी पर कोई ब्लू फिल्म लगाई हुई है.
जैसे ही मैंने टीवी को ऑन किया, तो फिल्म देखते ही मेरा लंड टनटनाने लग गया. मुझे चूत तो मिल नहीं रही थी मगर फिल्म देख कर मेरा लंड आपे से बाहर हो गया और पूरे कपड़े फाड़ कर बाहर निकल आया. कुछ देर बाद बिंदु आई मगर मैं अपने हाथ में लंड को पकड़े हुए फिल्म देखने में मस्त था, इसलिए मुझे नहीं पता कि वो कब वापिस आ गई. उसे देखते ही मैं अपने लंड को छुपाने की कोशिश करने मगर वो साला हाथ से भी निकल निकल जा रहा था.
मेरी यह हालत देख कर वो बोली- सर यह आपसे काबू नहीं हो पाएगा. इसको काबू में करने के लिए मेरी ज़रूरत है.
वो अपनी चूत तो पूरी सफाचट करके आई थी, शायद यही करने के लिए वो गुसलखाने में गई होगी. इस वक्त उसने पूरी पारदर्शी नाइटी डाली थी.. जो आगे से बहुत ही ढीली और खुली हुई थी. उसको इस तरह से देख कर मेरा लंड और जोर से उछलने लगा.
बिंदु ने यह सब बोल कर आगे बढ़ कर अपने हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया और बोली- सर क्यों परेशान होते हो.. मैं हूँ ना आपकी दासी. इसे मुझे सौंप कर आप निश्चिन्त हो जाइए.
फिर उसने बिना कुछ कहे मेरा लंड, जो सात इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा था, गप्प से मुँह में ले लिया.
अब मैं अपने को छुड़ाना भी नहीं चाहता था.. इसलिए लंड चुसवाने का पूरा मज़ा लेने लगा. वो जोर जोर से लंड को चूस रही थी और मेरी गोटियों को भी सहला रही थी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था क्योंकि आज कुछ सालों बाद ही यह मज़ा मुझे नसीब हुआ था. मैंने उसके चुचे दबाने शुरू कर दिए और उसकी घुन्डियां मुँह में लेकर चूसने और काटने लगा.
वो भी चुदासी थी इसलिए मुझे उकसाए जा रही थी- सर शर्म छोड़िए.. खुल कर मुझे आज चोदो.. बहुत दिनों से मेरी चूत किसी लंड के लिए भूखी है. सर सिर्फ चुचियों को दबाने से मेरा काम नहीं बनेगा. आप अपना यह लंड मेरी चूत में घुसा दीजिए, फिर इस पर कूद कूद कर खुद भी मज़े लो और मुझे भी दो. मेरी चूत अब पूरी किसी कुंवारी लड़की की तरह सी हो चुकी है क्योंकि इसको सालों से कोई लंड नहीं मिला.
उसकी बातें सुन कर मेरा लंड अब पूरा लोहे का हो चुका था. खास कर जब से लंड उसके मुँह में गया था. मैंने अब पूरी शर्म छोड़ कर उसको बुरी तरह से चोदना शुरू कर दिया. उसने सही कहा था कि उसकी चूत किसी कुंवारी लड़की की तरह से सिकुड़ गई थी क्योंकि वो सालों से नहीं चुदी थी. जब कि उसकी चूत एक लड़का भी निकाल चुकी थी.
अब मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था, सिवा उसके मम्मों और चूत के.. जिसे मैं पूरी तरह से पेलने को आतुर हो रहा था. चूंकि मेरा लंड चुदाई से पहले ही बहुत गरम हो चुका था और फिर उसने उसे चूस चूस कर बहुत तंग किया था, इस लिए वो चूत में जाकर कुछ ही समय बाद अपना पानी छोड़ गया.
बिंदु बोली- सर, मेरी चूत को अभी पूरा मज़ा लेना है इसलिए मुझे आपके लंड को दुबारा तैयार करना पड़ेगा.
उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसके सुपारे पर जीभ फेरने लगी. लंड दुबारा से उछलने लग गया था और दो मिनट में ही फिर से ख़ूँख़ार होकर अपना जलवा दिखाने को तैयार था.
अब बिंदु मेरे लंड पर बैठ गई और खुद ही अपने चूतड़ों को उछालते हुए मेरे लंड पर धक्के पर धक्का लगाने लगी. वो ऊपर से धक्का मारती थी, मैं नीचे से गांड उछाल देता था ताकि लंड चूत से बाहर ना निकले. उसके धक्कों की वजह से उसके मम्मे उछल उछल कर डांस कर रहे थे. मैंने उसके मम्मों को जोर से दबा कर मसला और अपनी तरफ खींचता रहा.
वो बोलती रही- आह.. सर बहुत मजा आ रहा है.. और जोर से खीँचो.. आह इन साले मम्मों ने मुझे बहुत परेशान किया हुआ था. आज इनकी पूरी अकड़ निकाल दीजिए, इनको तरह से ढीला कर दो ताकि यह अपनी औकात में रहा करें.
लगभग बीस मिनट बाद मेरे लंड ने और उसकी चूत ने अपना अपना अपना रस छोड़ दिया. हम दोनों ने कोई भी सावधानी नहीं ली थी. मेरे लंड का पूरा पानी उसकी चूत में चला गया.
अब मेरा लंड मेरी कुछ नहीं सुन रहा था. उसको बस बिंदु की चूत ही नज़र आ रही थी. वो उस चुत का दीवाना बन चुका था. कुछ देर बाद वो फिर चूत को देख कर अपने रंग में आ गया.
अब मैंने बिंदु को कुतिया बना कर उस की चूत में अपना लंड डाल कर चोदा, वो बहुत खुश थी इस चुदाई से. खैर बिना किसी सावधानी से मैंने उसकी चूत मारी थी और बाद में सोचा भी कि कहीं कोई मुसीबत ना आ जाए. खैर अब जो होना था, सो हो चुका.
रात को तीन बार बिंदु की चूत पर माल निकल कर मैं अपने घर वापस आ गया. उस रात को मुझे बहुत मज़े से नींद आई क्योंकि चूत के दर्शन ही नसीब में नहीं थे कई सालों से. आज चूत के दर्शन की बात छोड़ो, तीन तीन बार चूत की चुदाई भी की और वो भी उसकी रज़ामंदी से.
अगले दिन जब ऑफिस में गया तो देखा कि आज बिंदु कुछ ज़्यादा ही खुश थी और उसने बहुत ही सेक्सी ड्रेस डाली हुई थी. उसने स्कर्ट और टॉप डाला हुआ था और टॉप के नीचे कुछ नहीं था. वो ज़रा सा भी झुकती थी तो मम्मे पूरे नज़र आते थे. जब सामने बैठ कर टांगों को ज़रा सा भी ऊपर करती थी तो चूत पूरी नज़र आती थी क्योंकि स्कर्ट के नीचे भी कुछ नहीं था. वो आज ऑफिस में भी मुझसे चुदवाना चाहती थी मगर मैंने उस को कोई लिफ्ट नहीं दी.
वो शाम तो ऑफिस के बाद मुझसे बोली- सर आपसे कुछ कहना है मगर यहाँ पर नहीं… या तो आप मेरे घर पर चलिए या फिर किसी होटल में चलते हैं.
मैं होटल में जाना नहीं चाहता था क्योंकि वहाँ मैं जल्दी ही पहचाना जा सकता था, इसलिए उसके घर पर ही चलने का प्रोग्राम बना. उसने अपने बेटे को शायद कहीं भेज दिया था, इसलिए वहाँ हमारे सिवा और कोई नहीं था. घर पहुँचते ही मेरा लंड फिर से उछाल मारने लगा, जो वो अच्छी तरह से देख रही थी.
उसने कहा- सर क्यों इसको तंग कर रहे हैं. इसको इसकी फ्रेंड से मिलने दो. मैं इसकी फ्रेंड को तैयार करके अभी लाती हूँ.
दो मिनट बाद वो पूरी नंगी होकर मेरे पास आ गई और बोली- पूरे कपड़े उतार कर निकाल दीजिए इसको बाहर और मिलने दो इसको, इसकी फ्रेंड से.
बस फिर चुदाई का खेल दोबारा शुरू हो गया. चुदास सर चढ़ कर झूम रही थी, तो फिर से तीन बार वासना का तूफ़ान चला.
जब तीसरी बार वो चुद रही थी तो बोली- सर इन दोनों की दोस्ती पक्की करवा दीजिए.. ताकि इनको आपस में मिलने के लिए कोई परेशानी ना रहे.
मैं समझ चुका था कि वो क्या कहना चाह रही है. मैं बोला कि देखो इसमें बहुत बड़ी प्राब्लम है.. तुम्हारा एक बेटा है और मेरी एक बेटी, इसलिए यह सब बहुत नामुमकिन है.
इस पर वो बोली कि सर आपको चूत चाहिए.. मुझे लंड चाहिए.. मेरे बेटे को बाप चाहिए और आपकी बेटी को माँ चाहिए. इन सबको जो जो चाहिए मिल जाएगा, फिर किस बात की दुविधा है. मैंने कहा- मैं सोच कर बताऊंगा.
करीब बीस दिन बाद उसने रात को मुझे फोन किया और बोली कि सर बहुत बड़ी प्राब्लम हो गई है. मैं अपनी लेडी डॉक्टर के पास रुटीन चैकअप के लिए गई थी, उसने बोला है कि मैं माँ बनने वाली हूँ.
ये सुन कर मुझे 440 बोल्ट का बिजली का झटका लग गया.
अब एक ही रास्ता था या तो मैं उससे शादी कर लूँ या फिर उसका बच्चा जो मेरा है, उसके पेट से गिरवा दूं.
बहुत सोच कर भी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.
अगले दिन मैं सुबह सुबह ऑफिस जाने से पहले उसके घर पर गया. वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई और फिर से चुदाई करवाने के लिए तैयार होने लगी.
मैंने उससे कहा- नहीं अभी मुझे इस मुसीबत से निकलने का कोई रास्ता बताओ.
उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, वो बोली कि सर क्या हुआ.. आपका ही बच्चा है ना.. यह तो आपको भी पता है फिर किस बात का डर? आप मुझसे शादी कर लो.. सारे झमेले ही खत्म हो जाएंगे.
अपनी इज्जत का डर महसूस करके मैंने उसकी बात को मान लिया.
अब तक पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मेरी सेक्रेटरी बिंदु ने मेरे साथ चुत चुदाई का खेल खेला और एक दिन उसने मुझे माँ बनने की बात कह कर मुझसे शादी करने का कहा.
अब आगे..
आखिर ना चाहते हुए भी मुझे उससे शादी करनी पड़ी. मैंने उससे कहा कि तुम आज ही ऑफिस से त्यागपत्र दे दो, जो उसने बिना किसी झिझक के मुझे पकड़ा दिया.
अगले दिन ही हम दोनों ने जा कर एक मंदिर में शादी कर ली.
अब रोज़ ही चुदाई का दौर शुरू हो जाता था. चूंकि घर में मेरी लड़की और उस का लड़का भी था, इसलिए मैंने उन दोनों को हॉस्टल में दाखिल करवा दिया ताकि वो यहां से कुछ दिनों के लिए दूर रहें.
वो दोनों हॉस्टल में रह रहे थे और इधर घर में चुदाई का नंगा डांस होता रहा.
एक महीने बाद मैंने उससे कहा कि डॉक्टर से चैकअप करवाने के लिए कब जाना है?
तो वो बोली- किस लिए?
मैंने उससे कहा कि जो तुम्हारे पेट में बच्चा पल रहा है.. उसकी जांच नहीं करानी है क्या?
उसका जवाब था- उसमें तो बस तुम्हारा लंड ही जाता है रोज़ रोज़ और कुछ नहीं है. वो तो तुम मान नहीं रहे थे, इसलिए डॉक्टर को साथ मिला कर एक ड्रामा करना पड़ा था और उसका नतीजा भी निकल आया, मैं फर्स्ट डिवीजन डिस्टिंग्शन से पास हो गई.
उसकी बात सुनका मुझे गुस्सा तो बहुत आया मगर अब कुछ हो नहीं सकता था इसलिए खिसयानी हँसी हंस कर रह गया.
खैर.. मेरा लंड आज कल बिंदु की चूत से मज़े ले रहा था और उसकी चूत मेरे लंड से अपनी भूख मिटा कर मजे ले रही थी.
इस तरह से दो साल निकल गए.
इधर मैंने अपनी बेटी (नेहा) को हॉस्टल से वापिस घर बुला लिया और उसके बेटे (आशीष) को हॉस्टल में ही रहने दिया.
इस पर बिंदु ने मुझसे कहा कि वो भी अभी छोटा है, उसको मेरे पास ही रहने दो.
मैंने कहा कि उसके फ्यूचर को देखो.. वो वहाँ पढ़ कर किसी अच्छे कॉलेज में चला जाएगा.
उसकी समझ में आ गया और वो अब पता नहीं दिखावा करती थी या कुछ और.. वो मेरी बेटी को बहुत ही प्यार से रख रही थी. वो भी उसे अपनी रियल मदर ही समझती थी.
एक दिन मुझे आशीष के हॉस्टल से फोन आया कि आप यहाँ आ जाइए.
बिना बिंदु को बताए में हॉस्टल में गया तो वहाँ मुझे बताया गया कि आपका लड़का गंदा सेक्सी साहित्य और ब्लू फिल्मों की डीवीडी देखता है, जो कि उसके रूम से पकड़ी गई हैं.
आशीष मुझसे माफी माँगता रहा और वार्डन से भी माफी माँगता रहा.
वो बोला- सर आगे से आपको किसी भी शिकायत का कभी कोई मौका नहीं मिलेगा.
मैं वार्डन से बाद में जाकर उसके कमरे में उससे बोला- सर बच्चा है, अभी नासमझ है.. इसे माफ़ कर दीजिए, वरना इसका फ्यूचर खराब हो जाएगा.
मैंने उसको दस हजार रुपए भी यह कहते हुए दिए कि मैं आपके लिए और भाभी जी के लिए कोई गिफ्ट नहीं लाया हूँ.. प्लीज़ उनकी पसंद की कोई गिफ्ट खरीद लीजिएगा. मना मत कीजिएगा, मैं आपसे पहली बार मिल रहा हूँ.
इसका नतीजा यह हुआ कि आशीष का केस रफ़ा दफ़ा हो गया और मैं वापिस आ गया.
मगर आप लोग जानते ही हैं ना कि जब किसी लड़के को सेक्सी किताबें और ब्लू फिल्मों की लत लग जाए तो वो छूटती नहीं है. उसकी लुल्ली पूरा लंड बन जाती है और वो किसी चूत को ढूँढता रहता है. यही सब आशीष के साथ हुआ.
मुझे बाद में पता चला कि उससे दो तीन औरतों ने उससे पैसे ले कर अपनी चूत चुदवा थी और उसको अच्छी तरह से चुदाई सिखा दी.
जब मुझे यह सब पता लगा तो मैंने बिंदु से कहा, तो वो मुझ पर ही नाराज़ हो गई और बोली- जब बच्चे के पास लंड है, तो वो खड़ा भी होगा और जब खड़ा होगा तो चूत ही माँगेगा ना.. इसमें क्या बुराई दिखती है.. मुझे लगता है आपको तो मेरा बेटा अच्छा ही नहीं लगता. जिस लड़की को अपनी चूत चुदवानी होगी, वो ही उसके पास आएगी ना.. वो किसी के साथ ज़बरदस्ती करे, तब तो मैं उससे कुछ कहूँ भी. अब उसका लंड खड़ा होता है तो वो किसी चूत को खोजेगा ही ना.
मैंने चुप ही रहना ठीक समझा. मगर मुझे नहीं पता था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा था.
इसके आगे की कहानी नेहा की ज़ुबानी सुनिए.
वैसे तो बिंदु मेरी सौतेली माँ है, मगर वो मुझसे जिस तरह से प्यार करती है, वो अपनी माँ से भी कम नहीं महसूस होता था. मेरा एक भाई आशीष यानि बिंदु माँ का लड़का हॉस्टल में रह कर पढ़ाई करता है. अब छुट्टियों में वो एक महीने के लिए घर पर आने वाला था. इधर पापा से माँ की कुछ कहा सुनी हुई थी, जो मुझे नहीं पता था कि क्या बात है, मगर इतना तय था कि वो बात आशीष को लेकर ही थी.
खैर पिछले दो तीन दिनों से मैं माँ के व्यवहार में कुछ चेंज देख रही थी. वो मुझसे कुछ कम बात करती थीं और मैं अगर कुछ पूछती भी थी तो छोटा सा जवाब देकर अपने रूम में चली जाती थीं.
एक दिन वो मुझसे बोलीं- बेटी मैं ज़रा बाहर जा रही हूँ और शाम तो देर से आऊंगी, ज़रा घर का ख्याल रखना.
मैंने कहा- ठीक है.
जब वो चली गईं तो मुझे लगा कि माँ के रूम में कुछ खास चीज़ है, ज़ो वो मुझे नहीं हाथ लगाने देती हैं. आज मैं घर की सुलतान थी, इसलिए सोचा कि देखती हूँ कि ऐसी क्या चीज है, जो वे मुझसे हमेशा छुपा कर रखती हैं.
मैंने देखा कि उनके रूम में एक फोटो का एल्बम था, जिसमें पापा और माँ की चुदाई की फोटो लगी हुई थीं. वो देख कर मेरा सारा शरीर काँपने लगा. मुझे नहीं पता था कि ऐसे फोटो भी माँ ने अपने पास रखे हुए हैं. वो शायद जानबूझ कर उस एल्बम को टेबल पर रख कर चली गई थीं. उस एल्बम के पास ही कुछ डीवीडी भी पड़ी थीं. मैंने सोचा इन में भी ज़रूर कुछ मसाला होगा. मैं उनमें से एक को चला कर देखने लगी. वो पूरी ब्लू फिल्म थी, जिसमें शुरू से ही लंड और चूत का मसाला था. मैं उस वक़्त किशोरावस्था में थी. मैं गर्म भी हो गई और डर भी गई. फिर मैं जल्दी से उस कमरे से बाहर हो गई. मगर मुझे नहीं पता था कि उसने वहाँ सीसी टीवी कैमरा फिट किया हुआ था.
अगले दिन माँ ने मुझ को बुलाया और बोली- तुम मेरे कमरे में क्यों आई थीं?
मैं बनने की कोशिश करते हुए बोली- कब?
माँ- कल जब मैं बाहर गई हुई थी और अगर तू आई भी थी तो मेरी चीजों से छेड़छाड़ क्यों की?
जब मैंने कहा कि मैं तो आई ही नहीं.
तो वो बोलीं- तुम झूठ कब से बोलने लग गईं, आने दो तुम्हारे पापा को शाम को मैं उनसे सब बता दूँगी, जो तुमने कल किया है.
इतना कह कर माँ ने सीसी टीवी कैमरा का क्लिप जो रिकॉर्ड हुआ था, मुझे दिखा दिया.. जिसमें मैं एल्बम को देख रही थी और ब्लू फिल्म भी देखी थी.
मैं हाथ जोड़ कर माँ से माफी माँगने लगी. मगर वो मान ही नहीं रही थीं. अब सिवाए रोने के मेरे पास कुछ भी नहीं था. जब मैं दो तीन घंटे रो चुकी.
तो उन्होंने मुझे फिर से बुलाया और बोलीं कि अच्छा अगर मैं तुम्हारे पापा को ना बताऊं तो तुम क्या करोगी?
मैंने कहा- जो भी आप कहोगी, मैं करूँगी.
माँ- ठीक है, मैं नहीं कहूँगी.. मगर अपना कहा हुआ याद रखना.
जैसे ही मैं कमरे से बाहर जाने लगी, तो वो बोलीं- नहीं जा कहाँ रही हो, अभी तो कहना मानना है ना.. तो ज़रा इसी रूम में रुको.
इतना कह कर माँ ने टीवी पर कोईब्लू फिल्म लगा दी, जिसमें दो लड़कियां एक दूसरे की चूत को चाट रही थीं.
वो बोलीं- तुमको मेरे साथ यह करना पड़ेगा.
मैंने अन्दर ही अन्दर खुश होते हुए मरी सी आवाज में कहा- ठीक है.
उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी हो गईं, फिर मुझे भी नंगी कर दिया. मेरी चूत पर अभी बाल पूरी तरह से नहीं निकले थे मगर फिर भी बहुत ही मुलायम से निकले हुए थे. मगर माँ की चूत पर तो कोई बाल का निशान भी नहीं था. उन्होंने मुझसे अपनी चूत चटवाई और मेरी चूत चाटी. इसको भी उन्होंने सीसी कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया और मुझको दिखा कर बोलीं- अगर कभी मुँह खोला तो यह सब तुम्हारे पापा को दिखा दूँगी.
खैर अब यह उनका रोज़ का काम हो गया था, मुझसे अपनी चूत चटवाना और मेरी फुद्दी चाटना. इसका नतीजा यह निकला कि मैं भी पूरी सेक्स की भूखी बन गई.
एक दिन वो रबर का लंड लेकर आईं और बोलीं- इसको मेरी चूत में डाल कर गोल गोल हिलाओ.
मैंने वो सब किया तो देखा मेरी माँ उछल उछल कर मज़े ले रही थीं. उन्होंने मुझको बताया कि चूत हम लोगों की वो ख़ान है, जिससे पूरे मज़े मिलते हैं और लड़के इसके दीवाने बनने घूमते हैं.
फिर एक दिन मुझसे माँ बोलीं- तुमको अब मैं असली लंड का मज़ा दिलवा दूँगी तभी तुम को पता लगेगा कि चूत की महिमा क्या होती है.
दो तीन दिनों बाद वो मुझसे बोलीं कि आज रात को तुम मेरे दरवाजे के की-होल से देखना, जब मैं कमरा में जाते समय और जोर से बोलूं कि पानी पी कर सोना और दरवाजा बंद कर लूँ. तो तुम वहाँ इसी की-होल से देखना कि चुदाई किस तरह से होती है.
रात को लगभग दस बजे माँ ने जोर से बोला कि पानी पी कर सोना और अपना रूम बंद कर लिया.
यह मुझको इशारा था कि आकर देखो. मैं कुछ मिनट बाद की-होल में से जाके देखने लगी. मैंने देखा कि मेरे पापा बिंदु माँ की चूत को खोल खोल कर चाट रहे हैं और माँ उनके लंड के सुपारे का मजा नीचे करके मुँह में लंड लेकर चूस रही थी.
बिंदु से अपनी चुदाई और चुत चटवाई का एंगल इस तरह से रखा हुआ था कि की होल से पूरी सीन देखा जा सके. माँ ने रूम में पूरी लाइट जला रखी थी ताकि सब कुछ साफ़ साफ़ दिखाई दे.
पापा ने चूस चूस कर चूत को लाल कर दिया था. फिर उन्होंने माँ के मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद दोनों ने अपने लंड और चुत की लड़ाई शुरू कर दी. जब पापा का लंड माँ की चूत में जाकर वापिस आता था तो चूत झट से उछल कर लंड को बाहर जाने से रोकती थी. इस तरह से दोनों एक दूसरे के साथ गुत्थम गुत्था होते रहे.
पापा ने माँ से कुछ बोला, जो मुझे सुनाई नहीं पड़ा क्योंकि दरवाजा पूरी तरह से बंद था और आवाज़ बाहर नहीं आ सकती थी. पापा ने जो कुछ कहा होगा, उसे सुन कर माँ झट से अपने घुटनों और हाथों के बल जानवर की तरह से हो गईं. पापा ने पीछे से आकर अपना पूरा लंड एक ही झटके में बिंदु माँ की चूत में घुसेड़ दिया और फिर धक्के पर धक्का मारने लगे पापा आगे को झटका मारते थे और बिंदु माँ पीछे को अपनी गांड पापा के लंड पर मारती थीं. इस तरह से दोनों बहुत देर तक चुदाई करते रहे.
फिर शायद पापा का माल निकल गया था, वो सीधा लेट गए. माँ भी उन पर उल्टी होकर लेट गईं, जिससे माँ के चूचे पापा की छाती से दब रहे थे.
कुछ देर बाद रूम में लाइट बंद हो गई और मैं अपने रूम में वापिस आ गई. अब मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी, मुझे भी चूत में डालने के लिए एक लंड चाहिए था, जो नहीं मिल पा रहा था.
दो दिनों बाद आशीष घर आ गया. उसको मेरे साथ वाला कमरा दिया गया था. जिसका दरवाजा मेरे रूम में भी खुलता था मगर मुझसे पापा ने कहा हुआ था कि अपना रूम अन्दर से बंद करके रखा करूँ.
जब पापा ऑफिस चले गए तो माँ ने अपना रंग दिखाना शुरू किया. वो मुझसे बोलीं- आज रात को अपने रूम का दरवाजा अन्दर से बंद ना करना क्योंकि आज तेरी सुहागरात मनवाई जाएगी.
उस दिन पापा को ऑफिस के किसी काम से बाहर जाना था और अगले दिन ही वापिस आना था. उस रात को बिंदु माँ मेरे रूम में आईं और उन्होंने ही अपने हाथों से रूम का दरवाजा खोल दिया. फिर उसको खुला ही रहने को कहा.
माँ मुझसे बोलीं- आज रात को मैं तेरे पास ही रहूंगी.
उधर उन्होंने आशीष को पूरी तरह से समझा दिया था कि आज तुमको इस मुर्गी को अच्छी तरह से चोद कर हलाल करना है और मैं सब कुछ देखने के लिए वहीं पर रहूंगी.
मेरी चुत की सील टूटने की तैयारी हो गई थी.
अब तक मेरी सेक्स स्टोरी ले पिछले भाग में पढ़ा था कि मेरी सौतेली माँ बिंदु ने मेरी चुत की सील तोड़ने के लिए अपनी मेरे सौतेले भाई को कह दिया था.
अब आगे..
रात को दस बजे बिंदु माँ मेरे कमरे मे आकर बोलीं- अपने कपड़े उतारो और चूसो मेरी चूत को. आज तेरी चुदाई का शिलान्यास होगा.
मुझको पूरी तरह से नंगी करवाकर उन्होंने आशीष को आवाज़ दी. आशीष भी पूरी तरह से नंगा ही कमरे में आया. वो अपने लंड को खड़ा किए हुए था. अब रूम में हम तीन लोग ही थे, आशीष, मैं और बिंदु माँ.
आशीष की रियल माँ और उसके बेटे समेत हम तीनों नंगे थे. आशीष से बिंदु माँ ने अपनी चुत खोलते हुए कहा- देख… तेरी जन्मभूमि, जिसमें से तू पैदा हुआ है.
यह कह कर बिंदु माँ ने अपनी चुत को खोल कर अपने बेटे को दिखाया. फिर मेरी तरफ इशारा करके बोलीं- यह मेरे पति ने एक चूत पैदा की है, जिसकी आज तुझे नथ उतारनी है. आज पूरा दम लगा कर चोद दे इस कली को.. वरना मेरी चूत भी बदनाम हो जाएगी कि इस चूत ने दुनिया में किस गांडू लंड को निकाला था.
आशीष तो अपने लंड के लिए चुत को खोजता रहता था. उसे तो उसकी माँ ने आज थाली में सज़ा कर चोदने को दे दी थी.
वो बोला- माँ, मैं तो तुम्हें भी चोद देता मगर माँ का रिश्ता ही ऐसा है कि मैं नहीं कर सकता… मगर इसको तो आज किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ूँगा.
बिंदु माँ ने मेरी चूत के होंठों को खोल कर अपने बेटे को परोसा और उसका बेटा मेरी चूत की फांकों में अपना लंड रख कर सहलाने लगा.
आशीष बोला- लो माँ, अब गया इसकी चूत में…
इतना कहते ही उसने जोर का झटका मारा तो उसका लंड फिसल गया और लंड मेरी चुत के अन्दर नहीं गया.
मुझे हंसी सी आ गई.
उसने अपने लंड के सुपारे को गुस्से से देखा. तब तक बिंदु माँ ने उसके सुपारे को अपने मुँह में ले कर चाटा और बहुत सारा थूक उसके लंड पर लगा कर बोलीं- अब मार साले जोर का झटका.
उसने वैसा ही किया तो उसका सुपारा मेरी चूत में जाकर फँस गया और मेरी चीख निकल गई. साथ ही चूत से खून भी बहने लगा. बिंदु माँ ने मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर दबा दबा कर चूसना शुरू किया ताकि मेरी आवाज़ ना निकले. इसी के साथ उन्होंने आशीष को इशारा किया कि लंड के झटके पर झटके मारता रह.. जब तक पूरा लंड अन्दर ना चला जाए.
मेरी आवाज़ नहीं निकल पा रही थी क्योंकि बिंदु माँ ने अपने मुँह से मेरे मुँह को दबा कर रखा हुआ था. मुझे चुत में बहुत दर्द हो रहा था और मैं मरी जा रही थी. उधर आशीष ने भी पूरा लंड मेरी चूत में घुसा कर ही दम लिया.
चूत में पूरा लंड घुसा कर उसका ध्यान मेरे मम्मों पर गया मगर वहाँ तो अभी अच्छी तरह से कुछ निकला ही नहीं था. मेरी छाती पर मेरी चुची अभी छोटी छोटी सी ही थी. वो फिर भी मेरी छाती पर अपना हाथ फेरता रहा और मेरे निप्पलों को जो अभी चने के जितने ही थे, अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
उसके द्वारा यह सब करने से मुझे मज़ा भी आ रहा था और कुछ अजीब सा भी लग रहा था. मैं चाहती थी कि वो ऐसा ही करता रहे.
फिर वो अपनी माँ बिंदु को देख कर बोला- माँ इसमें यहाँ तो कुछ है ही नहीं!
बिंदु माँ ने जवाब दिया कि अब तू आ गया है तो मुँह में भर कर खींच खींच कर इसके नींबुओं को संतरा बना दे ना.
आशीष बोला- माँ, मेरा बस चले तो मैं तो इनको खरबूजा बना दूं.
बिंदु माँ बोलीं- तो ठीक है, संतरे के बाद खरबूजा बना कर चूस लेना, दोनों को बहुत मज़ा आएगा.
अब तक मेरा दर्द भी कुछ कम हो गया था और बिंदु माँ ने मुझे पूरी तरह से छोड़ कर अपने बेटे के हवाले कर दिया था. मगर वो खुद अभी भी वहीं नंगी बैठी थीं और अपने लड़के को चुदाई के डायरेक्शन दे रही थीं कि चुदाई किस तरह से करनी है.
वो बार बार बोल रही थीं- धक्का मार जोर से.. लंड को आधा ही बाहर निकाल.. फिर जोर से अन्दर कर.. होंठों को किस करके चूस.. लंड का पानी नहीं निकलना चाहिए.. तू पूरा लंड बाहर निकाल कर इसकी चूत को किस करके चूस, अपना लंड भी इसके मुँह में डाल कर इससे चुसवा.
माँ मुझसे बोलीं- तुमने देखा नहीं था कि तुम्हारे पापा मुझसे क्या कर रहे थे और मैं उनसे क्या कर रही थी. अब तू बिंदु बन जा और आशीष को पापा मान ले.. फिर करो उसी तरह से, जैसे मैंने उस दिन तुमको दिखाया था.
एक तो मैं डर रही थी कि कहीं यह सब पापा को कुछ बता ना दे और दूसरा मुझे भी लंड चाहिए था, जो आज मिल रहा था इसलिए मैं बिंदु माँ की बातों के अनुसार सब कुछ करती रही.
फिर वो आशीष से बोलीं- अब इसके मुँह से लंड को निकाल ले और दबा कर मार इसकी चूत में..
इस तरह से चुदाई फिर से शुरू हो गई. पूरी रात वो मुझे चोदता रहा और बिंदु उसको चुदाई के उपदेश देती रहीं.
सुबह लगभग चार बजे वो आशीष से बोलीं- जाओ अपने रूम में और किसी को कुछ भी भनक नहीं लगनी चाहिए कि आज यहाँ पर क्या हुआ है.
फिर माँ ने मेरे रूम को अन्दर से बंद करके मुझसे अपनी चूत चुसवानी शुरू की वो भी पूरी रात भर चुदाई को देख कर अब तक बहुत गरम हो चुकी थीं. मगर कुछ कर नहीं पाई थीं क्योंकि आशीष उनका बेटा था.
जब माँ का मूत उनकी चूत से निकल गया तो वो अपने कमरे में चली गईं.
जब सुबह मैं जागी तो वो मुझसे बोलीं- तुम अपने पापा से कुछ ना बोलना, मैं सब संभाल लूँगी.
मुझे सोता देख कर जब पापा वापस आए तो उन्होंने पूछा कि क्या हुआ है इसको, जो अभी तक सोई हुई है.
बिंदु माँ ने उनसे कहा- इसको माहवारी शुरू हो गई है इसलिए इसे आराम करने दो, मैं सब देख लूँगी.
पापा निश्चिन्त होकर ऑफिस चले गए. जब मैं उठी तो रात भर की चुदाई से मेरी टाँगें पूरी तरह से खड़ी नहीं हो पा रही थीं. बिंदु ने मेरी टांगें मरोड़ कर आशीष से मेरी चुदाई करवाई थी.
खैर.. कुछ देर बाद वो मुझसे पूछने लगीं- बोलो मज़ा आया या नहीं असली लंड से.. चख लिया ना स्वाद.. अब नहीं रहा जाएगा इसके बिना. जब तक आशीष है, तब तक तो तुझे लंड की कोई चिंता नहीं, वो तुमको मिलता ही रहेगा. जब यह चला जाएगा, तब मैं सोचूँगी कि क्या करना है. बस तुम्हारा काम है रात को सोने से पहले दरवाजा खोल देना और जब वो पूरा काम कर ले तुम्हारे साथ तो डोर को बंद कर लेना.
मैं रात को सबसे गुड नाइट करके अपने रूम में चली गई और फिर दरवाजा जो आशीष के रूम में खुलता था, उसे खोल दिया. वो तो इंतज़ार ही कर रहा था कब दरवाजा खुले और कब वो अन्दर कर मुझे चोदे.
दरवाजा खुलते ही आकर बोला- गुड नेहा.. आज हमें कोई कुछ नहीं कहने वाला आज हम अपनी मर्ज़ी से ही जो करना है करेंगे. माँ समझती है कि मैं अनाड़ी हूँ. मैंने उनकी उम्र वाली भी चोदी हुई हैं.. तो वो किस खेत की मूली है. तुम देख लेना, जाने से पहले मैं उनको भी चोद कर ही रहूँगा, वो भी तुम्हारे सामने ही चोदूँगा. क्या मैं समझता नहीं हूँ कि उनका मेरे सामने नंगी होकर आने का क्या मतलब था.
मैं कुछ नहीं बोली.
फिर उसने मुझको नंगी किया और खुद भी नंगा होकर मुझे चोदने में लग गया. मुझे आज मजा आ रहा था और मैं भी उसके लंड के साथ अपनी चूत को नचवा रही थी.
इस तरह पूरा महीना भर वो मुझको चोदता रहा और मेरे निंबुओं को खींचता रहा.. जो अब कुछ बड़े होने लगे थे.
फिर जाने से पहले वो बोला- अगले साल जब मैं वापिस आऊँगा तब तक यह पूरे संतरे बन चुके होंगे.
जाने से एक दिन पहले जब पापा ऑफिस में गए हुए थे और हम तीनों ही घर पर थे तो उसने बिंदु माँ से कहा- माँ आज फिर फर्स्ट डे जैसा प्रोग्राम करो ना.
बिंदु माँ ने हंस कर कहा- ठीक है मैं आती हूँ.. तुम चलो अपने रूम में.
बिंदु माँ अपने रूम में जाकर नंगी होकर मेरे रूम में आ गईं और आशीष और मेरे कमरे के बीच का दरवाजा खोल दिया. आशीष भी पूरा नंगा ही था और लंड को खड़ा किए हुए था. बिंदु माँ ने मुझसे बोला आकर चुदाई रिकॉर्ड करवा ले.. कल भी देखेंगे.
मगर आज आशीष के मन में तो कुछ और ही था. जैसे ही बिंदु माँ ने मुझे कुछ कहना चाहा तो आशीष बिंदु माँ को पीछे से पकड़ कर उनके मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा. बिंदु माँ ने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है.
वो बोलती रहीं- बेटा मैं तेरी माँ हूँ यह काम सही नहीं है.
आशीष बोला- मैं जानता हूँ तुम्हारा नंगी होकर मेरा सामने आना कहाँ तक ठीक है. अब मैं सिर्फ एक लंड हूँ और तुम सिर्फ एक चूत हो.. और चूत और लंड का आपस में जो रिश्ता होता है, वो तुम जानती हो. इसलिए बिना किसी फालतू की बात किए मुझसे कोऑपरेट करो.
जब तक वो कुछ सोच पातीं, उसने माँ को पलंग पर चित लिटा दिया और बिना समय गंवाए अपना खड़ा हुआ लंड अपनी माँ की चूत में घुसेड़ दिया. पूरा लंड अन्दर करने के बाद वो बिंदु माँ से बोला- अब तुम मेरे ऊपर होकर मुझे चोदो.
अब तक माँ जान चुकी थीं कि आशीष के ऊपर चुत चुदाई का भूत सवार है और वो बिना चोदे नहीं मानेगा.
तो उन्होंने कहा- ठीक है मैं ही तुमको चोदती हूँ. मेरी किस्मत भी क्या है, जिसके लिए यह सब किया, वो ही मुझे आज चोद रहा है. यही दिन देखना बाकी बचा था. जिस लंड को नौ महीने पेट में रख कर अपनी इसी चूत से निकाला था. क्या पता था कि एक दिन वो इसी चूत को चोदेगा.
अगले दिन मैंने बिंदु माँ से कहा- माँ, देखो आपका बेटा आपके साथ क्या कर गया. आपने इस बेटी को पराया समझ कर अपने बेटे से चुदवा दिया और आपका असली बेटा आपको ही चोद कर वापिस गया है. अब उसके मुँह में खून लग चुका है, अब जब भी उसका दिल करेगा, वो आपको चोद देगा.
बिंदु माँ कुछ कह नहीं पाईं, बस एक अजीब से निगाह से मुझे देखती रहीं.
इसके आगे भी बहुत कुछ हुआ पर अभी आपसे विदा ले रही हूँ.