लड़के ने नौकरानी की चूत सुजाई

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम कार्तिक है, और मैं एक बार फिर हाज़िर हू आपके सामने अपनी कहानी के नये पार्ट के साथ. मैं अपने सभी रीडर्स का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा, जिन्होने मेरी कहानी को पढ़ा, और मुझे मैल करके मेरा हॉंसला बढ़ाया. साथ ही मैं माफी भी माँगना चाहूँगा, की आप सब को इतना इंतेज़ार करवाया कहानी के दूसरे पार्ट के लिए.

तो चलिए जल्दी से कहानी पर आते है. जिन लोगों ने कहानी का पहला पार्ट नही पढ़ा, वो जाके पढ़ ले. अभी तक आपने पढ़ा की दीप्ति के चले जाने के बाद मैं मूठ मार के सो जाता हू. अब आयेज.

मूठ मारने के बाद मैं तक के नंगा ही सो गया था. फिर शाम को 7 बजे किसी ने मेरे रूम के गाते पे नॉक किया, जिससे मेरी आँख खुल गयी. मैने फटाफट से कपड़े पहने, और गाते खोला तो देखा दीप्ति छाई और पकोडे लेके खड़ी थी. फिर वो अंदर आई, और मैने गाते बंद कर दिया, और गाते बंद होते ही वो मुझपे झपटी.

वो मेरे होंठो पे अपने होंठ रख के चूसने लगी. मैं भी उसका साथ देने लगा. वो बहुत वाइल्ड तरह से किस कर रही थी, और हम एक-दूसरे की जीभ चूस रहे थे बारी-बारी. ये किस थोड़ी देर चलती रही. फिर हम अलग हुए और वो मुझे खा जाने वाली नज़र से देख रही थी. उसकी आँखों में हवस सॉफ दिख रही थी.

फिर मैं जाके बेड पे बैठ गया, और छाई पीने लगा. उसे शायद मेरा बिहेवियर अजीब लगा, तो वो मेरे पास आके बैठ गयी और बोली-

दीप्ति: क्या हुआ जान आपको?

मे: कुछ नही.

दीप्ति: नही कुछ तो है. आपको मज़ा नही आया क्या?कही आप नाराज़ तो नही मुझसे?

इतना बोलते ही वो बेड से उठ कर नीचे बैठ गयी, और मेरी आँखों में देखने लगी. मैं थोड़े गुस्से में तो था, पर मैने खुद को समझाया क्यूंकी मुझे उसे छोड़ना भी था. तो मैने उससे कहा-

मे: नही यार, बस सो के उठा हू ना, तभी तोड़ा अजीब सा लग रहा है.

ये सुन के उसने स्माइल की, और मेरे लिप्स पे किस करके बोली-

दीप्ति: मेरी जान सबर करो बस, अभी आके आपका मूड सही करती हू.

और इतना कह के वो नीचे चली गयी, और मैं भी फ्रेश होने चला गया. थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे आवाज़ देके बुलाया की, “बेटा मैं और तेरे डॅडी पड़ोस में चाचा जी के घर जेया रहे है मिलने. 2-3 घंटे में आ जाएँगे. और तू ध्यान रखना और दीप्ति को कह देना वो खाना बना देगी”. इतना बोल के मम्मी पापा चले गये.

मेरी तो मानो खुशी का ठिकाना नही था. मैने फटाफट से घर का मैं गाते लॉक किया, और तुरंत किचन में गया जहा दीप्ति बर्तन धो रही थी. मैने जाके उसको पीछे से पकड़ लिया, वो दर्र गयी और बोली-

दीप्ति: हट्तो यार, आंटी देख लेंगी.

मे: कोई नही देखेगा मेरी जान. मम्मी-पापा 2-3 घंटो के लिए बाहर गये है.

इतना सुनते ही दीप्ति घूमी, और मुझे किस करने लगी. मैने भी देर ना करते हुए उसका टॉप उतार दिया, और उसके बूब्स दबाने लगा. फिर हम अलग हुए, और मैने उसकी ब्रा भी उतार फेंकी, और उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरे सामने थे. मैं उसके दूधो पे झपटा, और उनको चूसना और दबाना शुरू किया.

इतने गोरे और सॉफ्ट बूब्स थे उसके, की मॅन कर रहा था निचोढ़ डू इनको. मैं उसका एक दूध दबाता, और दूसरा बूब चूस रहा था, और दीप्ति बस आँखें बंद करके सिसकियाँ लिए जेया रही थी. उसके हाथ मेरे बालों को सहला रहे थे. फिर मैने अपना फेस उसके दोनो बूब्स की बीच में घुसा दिया, और वो दोनो बूब्स को मेरे फेस पे दबा रही थी.

मैं उसकी क्लीवेज चाट रहा था, और फिर एक हाथ उसकी छूट पे रख के रगड़ने लगा लेगैंग्स के उपर से ही. इससे वो पागल होने लगी, और मज़े से अया अया जान की आवाज़े निकालने लगी. मैं भी उसकी आवाज़ सुन के पागल हो रहा था. फिर वो मेरा सर अपनी छूट की तरफ दबाने लगी, पर मैं खड़ा हो गया और वो मुझे देख के बोली-

दीप्ति: क्या हुआ जान, छातो ना मेरी छूट को.

मे: सबर करो मेरी जान. पहले एक बार मेरे इस हथियार को भी तो प्यार कर लो.

उसने ये सुनते ही मेरा लंड पकड़ लिया, और उसे दबाने लगी, और बोलने लगी-

दीप्ति: हाए जान, ये तो कितना बड़ा है.

मे: तुम्हारे लिए ही है मेरी जान. चलो अब इसे प्यार करो.

दीप्ति: रूको ज़रा पहले देख तो लू ढंग से.

इतना बोल के उसने अपनी लेगैंग्स और पनटी उतरी, और घुटनो पे बैठ गयी, और मेरा शॉर्ट्स भी उतार दिया. अब हम दोनो पुर नंगे थे. शॉर्ट्स उतरते ही मेरा 8 इंच का लंड उसके सामने आ गया. लंड को देख के उसकी आँखें बड़ी हो गयी. उसने लंड को पकड़ा, और अपने हाथ से नापने लगी, और फिर बोली-

दीप्ति: जान ये तो इतना बड़ा और मोटा है. ये कैसे जाएगा मेरी छूट में?

मे: चिंता मत कर मेरी जान, तू इसे चूस-चूस के चिकना कर दे. फिर देख कैसे आराम से अंदर जाएगा.

दीप्ति ने लंड हिलना शुरू किया, और उसके गोरे-गोरे छ्होटे हाथो में मेरा बड़ा काला लंड बहुत ग़ज़ब लग रहा था. फिर उसने उसने लंड के टोपे को जीभ से चाटना शुरू किया. वो बहुत ग़ज़ब चाट रही थी. उसकी गरम जीभ अपना कमाल दिखा रही थी. तभी उसने अपना मूह खोला, और लंड का टोपा अपने मूह में लेके चूसने लगी.

दोस्तों मैं बता नही सकता की क्या मस्त चूस रही थी वो. मानो कोई पोर्नस्तर चूस रही हो. मेरा टोपा उसके मूह में था, और वो उस पर अपनी जीभ फेर रही थी. उसके मूह की गर्मी उफ़फ्फ़, मेरी जान निकाल रही थी. खैर उसने 2-3 मिनिट तक टोपा चूसा. उसके बाद वो बोली-

दीप्ति: बस अब मुझसे नही होता, वरना उल्टी आ जाएगी.

मैने भी समझदारी दिखाते हुए उसको बाहों में उठाया, और बाहर दीवान पे ले जेया कर लिटाया, और नीचे घुटनो पे बैठ के उसकी छूट चाटने लगा. दोस्तों मैं आपको उसकी छूट के बारे में पहले भी बता चुका हू. बुत आज उसकी छूट और ज़्यादा टेस्टी लग रही रही. मैं बस उसकी छूट चाट रहा था, और अपने अंगूठे से उसके छूट के दाने को मसल रहा था. और वो बस मेरे बाल पकड़ के खींच रही थी और चिल्ला रही थी.

फिर जब मुझे लगा की वो झड़ने वाली थी मैं उठ कर खड़ा हो गया, और उससे डोर हो गया. वो बस मुझे देख रही थी. उसने अपना हाथ आयेज बढ़ाया, और मैं उसकी तरफ गया. फिर उसने मेरा लंड पकड़ा, और स्माइल करके उसे हिलने लगी. वो मुझे देख के बोली-

दीप्ति: डाल भी दो अब इसे.

मैने तुरंत थूक लिया अपने हाथ में, और टोपे पे लगाया, और उसकी छूट पे लंड रख के दबाव बनाया. फिर पहले झटके के साथ टोपा अंदर चीरता हुआ घुसा.

दोस्तों यकीन मानो, क्या मस्त टाइट छूट थी उसकी. मैने काई लड़किया छोड़ी है, पर ऐसी टाइट छूट पहली बार नसीब हुई थी. खैर वो दर्द से झटपटाने लगी. मैने भी देर ना करते हुए उसके दूध पकड़ लिए, और निपल सहलाने लगा.

फिर एक हाथ से उसकी छूट के उपर सहलाने लगा, जिससे उसको दर्द में राहत मिल रही थी. इसी बीच मैने अपना अगला झटका दिया, जिससे आधे से ज़्यादा लंड उसकी छूट की गहराई में घुसता चला गया. वो चिल्लाई ज़ोर से-

दीप्ति: आअहह मा, में मॅर गयी. निकालो इसे बीसी, जलन मच रही है.

बुत मैं नही रुका और उसकी छूट सहलाता रहा. फिर 2 मिनिट के बाद उसका चिल्लाना बंद हुआ, तो मैने अपने शॉट मारने स्टार्ट किए. लंड अंदर-बाहर करने में तकलीफ़ हो रही थी, क्यूंकी उसकी छूट बहुत टाइट थी, उससे भी जलन हो रही थी.

फिर मैं उसे वैसे ही छ्चोढ़ के तुरंत किचन की तरफ भागा, और ढेर सारा सरसो का तेल अपने लंड पे लगाया, और तोड़ा सा अपने हाथ में लेकर दीप्ति के पास गया. फिर अपनी उंगलियों से उसकी छूट में डालने लगा. उसके बाद मैने फिरसे अपना लंड उसकी छूट पे रखा (अब तक उसी छूट से खून आ चुका था). फिर मैने एक झटके में अपना पूरा लंड उसकी छूट में उतार दिया.

वो चिल्लाई, पर इस बार हल्के से, और उसने अपने नाख़ून मेरे कंधो पे गाड़ दिए, जिससे मुझे जलन हुई. फिर मैं उसकी छूट में धक्के लगाने लगा. वो सिसकियाँ ले रही थी. बहुत ज़ोर से उसकी आवाज़ पूरी बैठक में गूँज रही थी.

इससे मेरे अंदर और हवस जाग रही थी, और मैं उसके अंदर और ज़ोर से झटके मार रहा था. फिर थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ, और उसने अपनी टांगे फैलाई. मैने उन्हे पकड़ के अपने कंधो पे रख लिया, और उसके दूध पकड़ के धक्के मारने लगा.

अब मैं सातवे आसमान में था. उस वक़्त मुझे बस उसकी आहें सुनाई दे रही थी. अया आह जान आराम से जान, आराम से आ. वो भी मज़े ले रही थी. करीब 5 मिनिट हो गये उसको छोड़ते हुए. फिर मैने उसको उठाया, और मैं दीवार के सहारे से ज़मीन पे बैठ गया, और उसको अपने लंड पे बैठने को कहा.

उसने मेरा लंड पकड़ा, और खुद अपनी छूट में घुसते हुए उस पर बैठ गयी और कूदने लगी. मैं जन्नत की सैर कर रहा था, और वो भी तेज़ी से कूद रही थी. पर 2 मिनिट में वो तक गयी और बोली-

दीप्ति: अब मुझसे नही होता तुम ही छोड़ो मुझे.

फिर मैने उसको ज़मीन पे ही लिटाया, और एक तकिया उसकी गांद के नीचे रखा. दो झटके में मैने पूरा लंड उसकी छूट में उतार दिया, और उसको छोड़ने लगा. मैं उसको उसके दूध पकड़ के छोड़ रहा था, और वो बस चिल्लाए जेया रही थी.

अब हमे चुदाई करते हुए 10-12 मिनिट हो गये थे, और हम दोनो झड़ने वाले थे. तो मैने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी, और झटके मारते-मारते वो बोली-

दीप्ति: अयाया अयाया जान, मैं झाड़ गयी.

और इतना बोल के वो झाड़ गयी. मैने लंड निकालने की कोशिश करी, पर लंड निकालते-निकालते मैं भी झड़ना शुरू हो गया, और मेरी सारी पिचकारी उसकी छूट के उपर छोढ़ दी. अब हम दोनो तक चुके थे, पर अभी मॅन नही भरा था. मैं फिर दीवार से टेक लगा के बैठ गया, और वो ज़मीन पे लेती रही.

उसकी छूट से माल बह रहा था, और मेरा सारा माल भी उसकी छूट पे और उसके पेट पर पड़ा हुआ था. क्या ही सेक्सी सीन था. पर इतने में मेरी नज़र सीडी की और गयी और मुझे लगा शायद वाहा कोई खड़ा था. बुत जब ध्यान से देखा तो वाहा कोई भी नही था. तो फिर मैने अपना वहाँ समझ के जाने दिया.

फिर 5 मिनिट रेस्ट करने के बाद मैने दीप्ति को उठाया, पर उससे ढंग से उठा नही जेया रहा था. उसकी छूट सूज गयी थी. फिर मैं उसे वॉशरूम लेके गया, और उसे गरम पानी से नहलाया, क्यूंकी उसके जाने का टाइम हो रहा था, और फिर उसने कपड़े पहने और वो घर चली गयी. मैं यू ही नंगा अपने रूम में आ गया.

तो दोस्तों ये थी स्टोरी मेरी दीप्ति की पहली चुदाई की, जिसका वेट आप सब इतने दीनो से कर रहे थे. मैं माफी चाहूँगा आप सब को इतना वेट करवाने के लिए. और अभी ये अंत नही है. अभी दीप्ति से रिलेटेड और कुछ और किरदारों से रिलेटेड कहानिया आती रहेंगी. तो बने रहिए, और मुझे अपनी फीडबॅक देते रहिए. मेरी मैल ईद है [email protected]

और अगर किसी महिला को मेरे साथ सेक्स छत करना है, या फिर फिज़िकली मिल कर मज़े करना है, तो वो मुझसे मैल पे बात कर सकती है. सब की प्राइवसी का सम्मान किया जाएगा, मेरी भी और आपकी भी. चलिए आप सब से अगली कहानी में मिलता हू.

यह कहानी भी पड़े  चंडीगढ़ की टीचर कविता की चोदा


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