लड़के ने बहन चोदी, और चाची छोड़ने वाला था

मैं: अया अया दीदी, ई लोवे योउ. दीदी तुम बस मेरी हो.

रोशनी: ई लोवे योउ, ई लोवे योउ मेरी जान. छोड़ेगा ना मुझे? बोल मेरी जान, छोड़ेगा ना अपनी दीदी को?

मैं: दीदी छोड़ूँगा, बस आपको ही छोड़ूँगा.

रोशनी (मेरे लंड को और ज़ोर से रगड़ते हुए): कैसे छोड़ेगा मुझे बता ना मेरा बच्चा, बता ना.

मैं: आपके अंदर तक घुसा दूँगा दीदी. आपकी चीख निकाल दूँगा. दीदी पूरी रात छोड़ूँगा आपको.

तभी दीदी ने मेरे होंठ अपने मूह में लिए, और खुद पूरा उपर होके एक ही झटके में मेरा खड़ा हुआ लोहे जैसा लंड अंदर तक अपनी छूट में फ़ससा लिया. एक-दूं गरम-गरम छूट में कड़क लंड घुसते ही मेरी तो आँखें बंद हो गयी, और दीदी काँप गयी, और मेरे होंठ कस्स के चूस लिए.

दीदी पूरा उपर हो गयी और अंदर तक मेरा लंड घुस्वा लिया.

रोशनी: उम्म.

दीदी के होंठ मेरे मूह में थे, पर उसके बाद मैने बस थापा-ठप चुदाई शुरू कर दी. कसम से मैने दीदी के होंठ और दीदी ने मेरे होंठ 1 मिनिट के लिए भी मूह से नही निकाले, और मैने कस्स के खूब बुरी तरह रग़ाद कर दीदी को छोड़ा.

जितना मैं छोड़ता, दीदी उतना मुझे गरम करती. और लास्ट में मेरे लंड ने पूरी ताक़त से वीर्या दीदी की उस गीली कासी हुई गुलाब जैसी छूट में निकाल दिया. हम दोनो अकड़ गये, और एक-दूसरे को कस्स के पकड़ लिया.

दीदी ने मुझे ऐसे ही पकड़ कर रखा. 10 मिनिट, 15 मिनिट, 20 मिनिट, 1 घंटा दीदी और मैने ऐसे ही एक-दूसरे को पकड़ कर रखा, और सो गये. शाम को 5 बजे हमारी आँख खुली.

उधर अभी-अभी अपने जीजा की साली बनी मा के पीछे भी जीजा हाथ धोके पद गया था. दोपहर को कपड़े धो रही मा को जीजा ने मसल कर छोड़ा था. तो शाम को फिर उसका लंड फड़कने लगा. शाम तक मैं और रोशनी दीदी सो कर उठ चुके थे, और उधर रसोई में मा छाई बना रही थी. की तभी पीछे से जीजा आ गये. उसन्स पीछे से मा को पकड़ कर उसका पेट मसालते हुए चूचे दबा दिए.

मा: आउच! जीजा जी छाई.

मनीष: मेरी साली, तूने तो मुझे पागल कर दिया

मा ( शरमाते हुए): क्या जीजा जी आप भी. अभी दोपहर को तो.

मनीष: तो क्या हुआ, तू चीज़ ही ऐसी है. अकेला नही छोड़ूँगा तुझे.

मा: आहम्म.

उधर रोशनी दीदी बाहर आ गयी, और बाहर आते ही चाची ने उनको पकड़ ल्लिया, और रूम में ले गयी.

चाची: क्या कर रही है रोशनी तू? दिमाग़ कहा गया तेरा? शरम नही है तेरे अंदर?

रोशनी: मैने क्या करा?

चाची: बतौ अभी तुझे, खुद का मर्द होते हुए उस सुनील के साथ सो रही है तू. मैने देखा तुझे उसके साथ नंगी सो रही थी ना तू?

रोशनी दीदी थोड़ी देर चुप रही, और फिर गुस्से में बोली-

रोशनी: हा, तो क्या ग़लत किया मैने मा? जब मेरा खुद का मर्द च्चत पर जाके चाची के साथ चुदाई मचा रहा है. उसको क्यू नही बोलती?

चाची: अर्रे वो मर्द है. तू तो शरम कर थोड़ी.

रोशनी: मैं क्यू शरम करू मा?

चाची: अछा अब उस सुनील के साथ रंगरलिया मनाएगी तू पति होते हुए?.

रोशनी: वो मुझे प्यार तो करता है ना. शादी तो नही हुई ना उसकी.

चाची: तुझे पता है कितना हरामी है वो सुनील?

रोशनी: अपनी पत्नी के होते हुए मूह तो नही मारता ना. और हा मा, मुझे रोकने की ज़रूरत नही है. यहा सब के सब हरामी है. आचे से जानती हू मैं.

चाची के पास अब कुछ बोलने के लिए बचा नही था. वो भी कोई दूध की धूलि नही थी. मैने दोनो की आवाज़ सुनी तो मुझे लगा की यार छ्चोढो रहने देता हू. घर में लड़ाई हो क्या फ़ायदा. तो मैने सोचा अब दीदी के पीछे नही पड़ूँगा.

फिर मैं तो चुप हो गया. लेकिन दीदी कुछ और ही सोच रही थी. शाम को खाने की टेबल पर दीदी मेरा कुछ ज़्यादा ही ख़याल करने लगी थी.

रोशनी: अर्रे सुनील, तुम इतना कम क्यू खा रहे हो. ये लो, और खाओ. ये लो सब्ज़ी.

मैं: नही-नही दीदी, बस.

रोशनी: अर्रे इतने जवान हो, खाओगे नही तो ताक़त कैसे आएगी? चलो खाओ चुप-छाप, वरना मैं नाराज़ हो जौंगी.

चाची तोड़ा गुस्सा हो गयी, और जीजा जी तो बस मा को घूर रहे थे. डिन्नर टेबल पर दीदी ने मेरा बड़ा ख़याल रखा. मुझे तो सच में लगा दीदी को क्या हो गया था, और वो इतना प्यार कैसे दिखा रही थी.

उपर से चाची मुझे ही घूर रही थी. मैने सोचा भाड़ में जाए चाची, जब दीदी को कोई प्राब्लम नही तो. सब ने खाना खा लिया था. मैं अब सोने ही जेया रहा था. की तभी दीदी आई, और मेरा हाथ पकड़ कर बाहर खेतो में ले गयी.

मैं: अर्रे दीदी, क्या हुआ?

फिर एक जगह जाके हम बैठ गये.

रोशनी: क्यू, मेरे साथ नही आना था क्या?

मैं: अर्रे नही दीदी, ऐसी बात नही है. वो तो बस ऐसे ही, वो जीजा जी भी है ना.

रोशनी: उनको छ्चोढो, यहा तो बस हम दोनो है ना.

मैं: हा दीदी, वो तो है. दीदी वो दोपहर को आपके साथ बहुत अछा लगा था.

रोशनी: हमको भी, तभी तो यहा आए है तुम्हारे साथ. पता है हमको कैसे निचोढ़ कर पी गये थे तुम.

मैं शर्मा कर मुस्कुराने लगा. दीदी मेरे और पास आ गयी.

रोशनी: हमारा दूध अछा लगता है ना तुमको?

मैं: हा दीदी, नही वो मतलब अछा दीदी, वो बस.

रोशनी: इतना क्यू शर्मा रहे हो? तब तो दीदी को निचोढ़ रहे थी पुर.

मैं शर्मा गया. दीदी बहुत रोमॅंटिक तरीके से बात कर रही थी सच में. खुले खेत में चाँदनी रात में दीदी बहुत आचे से मूड बना रही थी, तो मैं भी रोमॅंटिक होने लगा.

मैं: दीदी आप आचे लगते हो मुझे बहुत.

रोशनी: तुम भी हमको आचे लगते हो. तभी तो यहा लेके आए है. हम जानते है तुम्हे दूध बहुत पसंद है मेरे.

मैं और शर्मा गया.

मैं: हमे अभी बहुत दूध बनता है. ब मेरा मुन्ना तो पीटा नही, तो तुम ही ख़तम करो इसको.

दीदी के ब्लाउस में निपल कड़क हो रहे थे, और दूध की बूँद तपाक रही थी. ये देख कर मेरे मूह में पानी आ गया. फिर दीदी मेरे करीब आ गयी, अपना पूरा पल्लू साइड कर दिया, और उनका मुलायम पेट, दूध, और टपकते हुए निपल देख कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था.

मैं ( हवस भारी आवाज़ में): दीदी ब्लाउस भी हटा दो ना.

रोशनी (मदहोशी भारी आवाज़ में): तुम खुद ही हटा लो.

दीदी की मदहोशी बढ़ने लगी थी, और साँस फूलने लगी थी. उनके चूचों में दूध और तेज़ टपकने लगा. वो तड़प रही थी जैसे बस अभी उनका ब्लाउस फाड़ कर उनका दूध निचोढ़ डालु.

रोशनी: ह्म अया.

दीदी को लगा की मैं उनके ब्लाउस बटन से खेलूँगा, पर जब मैने उनके ब्लाउस में हाथ डाला और खींचने लगा, वो समझ गयी की मैं गरम हो गया था, और अब उनका ब्लाउस फाड़ कर चूचा पियुंगा उनका. मैं दीदी का ब्लाउस खींच कर फाड़ने लगा, और दीदी ने भी मेरा साथ दिया, और ज़ोर से अपना ब्लाउस खीचने लगी.

फिर अगले ही झटके में दीदी का ब्लाउस फटत गया. उनके मोटे दूध से भरे गोरे-गोरे चूचे मेरे सामने थे. मैने आव देखा ना ताव, और सीधा उनके निपल पर काट कर कुत्टो की तरह चबा कर दूध निचोढ़ने लगा उनके निपल से.

रोशनी: आहह मेरे राजा, उऊँ पी ले, निचोढ़ दे मेरी जान मुझे.

दीदी के निपल से क्या तेज़ दूध निकल रहा था. मुझे अपने चूचों में दबा कर दीदी भर के अपना दूध पिलाने लगी. कसम से मा के बाद एक दीदी के चूचे पीने में इतना मज़ा आ रहा था. इतने मुलायम और गोरे चूचे चबा कर मैने खा लिए, और कुत्टो की तरह चूस्टा रहा. दीदी बहुत तेज़ सिसकियाँ ले रही थी

रोशनी: आअहह सुनील, ई लोवे योउ मेरे बच्चे.

बहुत दूध बन रहा था दीदी को सच में. 10 मिनिट तक मैने कस्स के निचोढ़ डाला, और एक बूँद भी नही छ्चोढा. लाल पड़ा हुआ चूचा देख दीदी मुस्कुराने लगी. दीदी का दूध पीक अब मैं और जोश और ताक़त से भर गया था.

अब मुझे उनके जिस्म का एक-एक कोना चूस-चूस कर लाल-नीला करना था. इतना गोरा और जवान जिस्म, कसम से आज की रात बहुत मादक होने वाली थी. मैने दीदी को धक्का दिया.

रोशनी: आअहह.

और दीदी के चूचे और मुलायम पेट को मसल कर नोचने लगा.

रोशनी: अया आ.

मैं: दीदी बहुत मुलायम जिस्म है तुम्हारा. मॅन करता है कक्चा चबा जौ.

रोशनी ( मेरे हाथ अपने चूचे पर मसालते हुए): मुझे रोशनी बोलो ना, तुम्हारी रोशनी उऊँ.

फिर मैने एक ज़ोरदार थप्पड़ रोशनी के पेट पर मारा, और कुत्टो की तरह टूट पड़ा, और चूसने लगा. रोशनी की आँखें बंद हो गयी. उम्म, मलाई जैसा रोशनी का पेट मैने अपने मूह में भर कर दांतो से चबा कर चूस लिया.

रोशनी: ह सुनील.

बहनचोड़ दीदी के पति ने भी कभी उसका ऐसा मुलायम पेट चूसा नही होगा. कसम से पूरा पेट और नाभि दीदी की चूस कर खा गया, और दीदी जोश में आ गयी, और नीचे बैठ गयी. फिर वो मेरा लंड पकड़ कर मसालने लगी.

मैं: उम्म आहह, दीदी इसको मूह में लो ना प्लीज़.

और अगले ही सेकेंड मेरी आँखें बंद थी, और मेरा लंड दीदी बड़े प्यार से चूस रही थी.

मैं: आहह रोशनी, ई लोवे योउ उऊँ अया.

फिर मैने रोशनी का मूह पकड़ कर अंदर तक लंड घुसेध डाला, और रोशनी ने बिना रोके गले तक लंड ले लिया और चूसने लगी. अब मेरी आँखें बंद थी. मैं लेट गया, और कब रोशनी ने मेरा लंड चूस्टे हुए उसको अपनी कासी हुई छूट में डाल लिया. मुझे तब एहसास हुआ जब मेरे खड़े लंड पर रोशनी दीदी सिसकिया लेती हुई बैठ गयी.

रोशनी: आहह उम्म्म.

और मेरे उपर लेट कर दीदी अपनी गरम क़ास्सी हुई छूट में मेरे लंड को लेके चूड़ने लगी. दोनो ने एक-दूसरे को कस्स के पकड़ लिया, और मैं दीदी को छोड़ने लगा.

रोशनी: आहह सुनील.

पूरी रात दीदी ने हर पोस्टीओं में मेरा लंड लेके मुझे संतुष्ट कर डाला. दीदी की जवान कासी हुई गुलाबी छूट को छोड़ने के बाद मैं भी बहुत खुश था. फिर जब तक सुबा के सूरज की किरण हमारे जिस्म पर नही पड़ी, हम दोनो नंगे ही लिपट के सोते रहे.

रात भर जीजा कुछ खास कर नही पाए, क्यूंकी मा और चाची साथ ही सो रहे थी. लेकिन चाची अपनी फूल जैसी सुंदर बेटी को मेरे से चूड़ते हुए देख नही पा रही थी, वो भी उनके दामाद के होते हुए.

चाची: अर्रे गत्री, देख ना तेरा सुनील रोशनी के उपर भी चढ़ गया.

मा ( हेस्ट हुए): हा तो दीदी क्या हुआ? आपकी बेटी इतनी संदर जो है.

चाची: गत्री ऐसा ठीक नही है ना. दामाद जी भी आए हुए है. तू उसको माना कर ना.

मा: चाची पहले अपने दामाद को रोको. वो कैसे मेरे ब्लाउस खोल कर मेरे निपल चूस रहे है. अपनी बेटी को रोकना फिर. वो तो मेरा सुनील अभी बिज़ी है, वरना आपके दामाद को मैं सीधा कर देती अभी.

चाची चुप हो गयी. बात भी सही थी. एक तरफ से बात थोड़ी बनती है.

चाची: गत्री अब क्या करू? देखा नही जाता ना. मेरी एक ही बेटी है, वो भी ऐसी.

मा: अर्रे दीदी, आप ही ने तो कहा था ये मर्द जात है, जवान औरतों के जिस्म की भूख होती है इनको. तो अब भूख मिटाने दो ना.

चाची मुस्कुराने लगी.

मा: लगता है चाची आपकी भूख शांत नही हो रही. सुनील को भेजू क्या?

चाची ( मुस्कुराते हुए): क्या तू भी. मेरी बेटी घर आई हुई है, और तू ये सब.

मा:( चाची की कमर मसालते हुए): क्यू चाची तुम गरम नही होती क्या. जानती हू मैं गाओं का गीयी खा-खा कर तुम्हारे जिस्म में भी बहुत आग लगती होगी, की कोई मर्द तुम्हे आके निचोढ़ दे.

ये सुन कर चाची मुस्कुराने लगी.

मा: तो बुलाओ ना चाची अपने मर्द को.

चाची: तेरा भी तो मर्द है वो.

मा: अर्रे चाची, अब उसको तोड़ा गरम करोगी तभी तो आएगा ना. अपना से कॅसा हुआ जिस्म. ये दूध से भारी हुई चूचियाँ उसको दिखाओ, तभी तो तुम्हारी ये चिकनी कमर पकड़ कर तुम्हे छोड़ेगा.

चाची ( शरमाते हुए): क्या गत्री, तू भी ना दामाद जी के सामने ये सब.

मा: क्यू चाची, तुमहरा मॅन नही करता क्या चूड़ने का? सब पता है मुझे, भारी बैठी हो तुम. तुम जैसी गओब की औरत गीयी ख़ाके और दूध पीक कैसी गरम होती है सब पता है मुझे.

चाची उदास होके बोलने लगी: तो बोल ना उसको गत्री, मैं भी तो उसकी औरत हू. मैं खा जौंगी उसको. कब से तड़प रही हू. वो तो बस रोशनी के उपर चढ़ा हुआ है.

चाची का जिस्म और शकल देख कर मा समझ गयी थी, की चाची कितनी प्यासी थी.

मा: तो चाची जो मैं बोलती हू वो करना पड़ेगा. वरना ऐसे ही तड़प कर रह जाओगी.

चाची: वो आएगा मेरे पास?

मा: आएगा नही चाची तुम्हारी चीख निकाल कर तुम्हारा पानी निकाल देगा.

चाची शर्मा कर मुस्कुराने लगी.

चाची: क्या करना है?

मा: चाची वो गीयी कहा है जो आज ताज़ा निकाला था?

चाची: वो रहा.

फिर मा ने गीयी गरम करा.

मा: चाची जाओ अपनी लाल वाली चोली पहन कर आओ, जो तुम्हे बहुत टाइट आती है, और घग्रा भी.

चाची मुस्कुराती हुई गयी, और कुछ देर बाद आ गयी.

चाची ( शरमाते हुए): ये तो बहुत टाइट है. मेरे निपल बाहर आ रहे है.

मा: तभी तो तुम्हारा पानी बाहर निकलेगा वो चाची.

और चाची शर्मा गयी.

मा: अब लो इस गरम गीयी को अपनी छ्चाटी और पेट और कमर पर मसल लो. उर गरम दूध में गीयी मिला कर ले जाओ उसके पास.

चाची ने मुस्कुराते हुए अपनी आधी बाहर निकली छ्चाटी और पेट पर गीयी लगा लिया. बहनचोड़ एक-दूं चिकनी बन गयी थी वो. उसका पेट एक-दूं चिकना चमकने लगा, और दूध से भारी उसकी छ्चाटी फटत कर बाहर आने को हो रही थी.

मा: चाची एक-दूं चिकनी लग रही हो.

चाची सच में अची लग रही थी. एक-दूं गीयी में लिपटी हुई मादक चूड़ने के लिए तैयार औरत. तभी मा ने एक गोली निकली, और दूध में डाल दी.

इसके आयेज की कहानी अगले पार्ट में.



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