कहानी जिसमे लड़के को मिला आंटी के साथ सेक्स का मौका

हेलो दोस्तों, ये मेरी फर्स्ट स्टोरी है, जो मेरे साथ 2015 में हुआ था. मेरा नाम मोहन है. मैं उस समय 18 साल का था. मेरी बिल्डिंग में 7 घर है, उसमे 3 फ्लोर है, और 2-2 घर आजू-बाजू में है. और एक घर टॉप फ्लोर पर था जिसमे कोई नही रहता था.

मेरा घर 3र्ड फ्लोर पर था. मेरे बाजू में एक आंटी रहती थी, जिसका एक पति था, और दो बच्चे थे. एक लड़का 14 साल का था, और एक लड़की 16 साल की. आंटी का नाम प्रिया था. उसके लड़के का नाम ऋषभ था, और लड़की का नाम ममता था. अब मैं स्टोरी पर आता हू.

मैं और ऋषभ क्रिकेट के बहुत शौकीन थे. इसलिए हम दोनो, मेरा भाई, और हमारी बिल्डिंग में एक दोस्त रहता था, हम 4 लोग हमारे टेरेस पर रोज़ 5 बजे से 6:30 बजे तक क्रिकेट खलते थे. कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा.

एक दिन हम लोग क्रिकेट खेल रहे थे, तभी प्रिया आंटी उपर आई, और वो ऋषभ के साथ बात करने लगी. फिर वो एक कॉर्नर पर जेया कर चेर पर बैठ गयी.

मेरी नज़र उन पर ही जेया रही थी, और वो बहुत सेक्सी दिख रही थी. ऐसे ही कुछ दिन निकल गये. आंटी रोज़ उपर बैठने लग गयी थी, और मेरी नज़र उन पर ही जाती रहती थी.

फिर कुछ दीनो के बाद मेरे 12त के एग्ज़ॅम्स चालू हो गये. मैं पढ़ाई पर ध्यान देने लगा, तो मेरा क्रिकेट खेलना और बाकी सब बंद हो गया. कुछ दीनो में मेरे एग्ज़ॅम्स ख़तम हो गये.

मेरे 12त के एग्ज़ॅम ख़तम होने के बाद, मैं घर पर ही रहता था नौकरी ना मिलने के कारण. अब कोई काम तो था नही, तो मैं घर में मम्मी की हेल्प करता था. इसके साथ मैं मेरे छ्होतते भाई को पढ़ाई में हेल्प करता था.

एक दिन हम लोग उपर क्रिकेट खेल रहे थे, तो आंटी उपर आ गयी, और कॉर्नर में जेया कर चेर पर बैठ गयी. फिर ऋषभ ने एक शॉट मारा, और बॉल डाइरेक्ट बिल्डिंग के बाहर चली गयी.

हमारा रूल था, जो बॉल बाहर मारता था, वो ही बॉल लेने जाता था. तो ऋषभ बॉल लेने चला गया. फिर मैं आंटी के पास जेया कर खड़ा हो गया. आंटी ने मुझे कहा-

आंटी: एग्ज़ॅम्स कैसे रहे तेरे?

मोहन: आचे रहे आंटी.

आंटी: पास तो हो जाओगे ना?

मोहन ( हेस्ट हुए ): हा आंटी, बिल्कुल हो जौंगा.

( मैं किसी लड़की से ज़्यादा बात नही करता था, तो तोड़ा शर्मीले टाइप का था)

तबी ऋषभ बॉल लेकर उपर वापस आ गया. हमने क्रिकेट खेलनी वापस चालू कर दी. 5 मिनिट बाद मेरी मम्मी भी उपर ही आ गयी, और वो आंटी से बातें करने लगी.

मम्मी: मोहन का कुछ करना पड़ेगा.

आंटी: क्यूँ क्या हुआ?

मम्मी: ऐसे ही क्रिकेट खेलता रहेगा, तो कुछ नही होगा. किसी नौकरी पर लगाना पड़ेगा इसको.

आंटी ( कुछ सोचते हुआ): मेरे रिश्तेदार को पूच कर डेक्त्ी हू.

मम्मी: हा जितना जल्दी हो पूच लेना.

आंटी: ठीक है, आप चिंता मत करो. मैं देख लूँगी.

फिर 2 दिन बाद आंटी ने मुझे बुलाया और कहा-

आंटी: मैं तुम्हे एक अड्रेस देती हू. तुम कल सुबा उधर जेया कर मेरा नाम बोल देना.

मोहन: ठीक है आंटी.

और अगली सुबा मैं घर से बाइ बोल कर निकल गया. वो अड्रेस पर जेया कर मैने आंटी का नाम बोला, और उन्होने मुझे 7000 पगार कहा, और दूसरी ब्रांच में जाने को कहा. उनका नाम देखा, तो दिनेश था.

फिर कुछ दिन निकल गये, और मेरा एक महीना पूरा हो गया था. मैने तब आंटी को स्वीट्स दी, और थॅंक योउ बोला. कुछ दीनो बाद मैने दीपावली को नया फोन भी ले लिया.

दीपावली को मैं और ऋषभ उपर पटाखे फोड़ रहे थे. उस वक़्त उपर कोई नही था, और हम दोनो ही थे. तभी आंटी उपर आई ऋषभ को बुलाने के लिए, तो मैं आंटी को देखता ही रह गया.

क्या मस्त दिख रही थी आंटी. पहली बार मेरे मॅन में उन्हे छोड़ने का ख़याल आया. रेड कलर की सारी और क्रीम कलर का ब्लाउस पहन रखा था उन्होने. फिर आंटी ने ऋषभ को नीचे भेजा, और खुद धीरे-धीरे नीचे जाने लगी.

तभी मैने देखा की आंटी के पीछे कमर पर टॅटू दिख रहा था. वो टॅटू पहली बार मेरे को दिखाई दिया था. फिर मे के महीने में मेरे रिश्तेदार के शादी थी. इसलिए उनके घर हम सब लोगो को गाओं जाना था.

मगर मुझे नौकरी पर गये हुए 6 महीने भी नही हुए थे, और वाहा काम के लिए आदमी भी कम थे, तो ओनर ने मुझे गाओं जाने को माना कर दिया. मैने घर आ कर मम्मी को कहा, तो मम्मी ने आंटी से बात की. फिर आंटी ने कहा-

आंटी: मैं बात करके देखती हू. देखती हू क्या कहते है वो.

फिर अगले दिन आंटी ने मम्मी से कहा: मोहन के ओनर ने कहा है, की एक महीने पहले बोल दिया होता तो भेज देता. अभी उनके पास बस 3 आदमी है, तो कुछ नही हो सकता. मेरी भी मजबूरी है.

मम्मी तोड़ी नाराज़ थी और बोली: अब ये खाना कहा ख़ायगा? अकेला कैसे मॅनेज करेगा?

तो आंटी ने कहा: मैं भी इस बार यही पर हू. खाने की चिंता आप मत लो, अप गाओं जेया कर आओ. मैं हर तरह से इसका ध्यान रखूँगी.

ये बात सुन कर मम्मी बहुत खुश हो गयी. फिर रात को जब मैं घर आया तो मम्मी ने या सब बात मुजसे कही. मैं उन दीनो में बहुत सारी देसी कहानिया पढ़ता था. मैं मेरे मॅन में बहुत खुश हुआ. मुझे अब आंटी के साथ कुछ होने के चान्सस नज़र आ रहे थे. यही सोच कर मैने 2 बार मूठ मार ली.

फिर अगले हफ्ते मेरे घर के सब लोग गाओं के लिए रेडी हो गये. मैं उन्हे रेलवे स्टेशन पर छ्चोड़ने चला गया. गाओं जाने के लिया हमे 3 दिन ट्रेन ट्रॅवेल करना पड़ता है. मैं उन्हे ट्रेन में बिता कर, बाइ बोल कर दुकान चला गया.

अब मेरे मॅन में एक ही चीज़ थी, की कब मुझे मौका मिलेगा आंटी को छोड़ने का, और अपने लंड को असली छूट का मज़ा देने का.

तो बे कंटिन्यूड…

अगर आपको मेरी फॅंटेसी अची लगे तो मैल ज़रूर करे. मुझसे मिलने के लिए सेक्सी औरतें मुझे कॉंटॅक्ट कर सकती है. मैं आपको आचे से संतुष्ट कर सकता हू. आपकी प्राइवसी का ध्यान रखा जाएगा.

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