लड़के के अपने परिवार वालो की रंगरलिया देखने की कहानी

ही दोस्तों, तो आज मैं आपको बताने जा रहा हू मेरे घर की कहानी जो की कुछ वक़्त पहले की है.

मैं राहुल. मैं अभी स्कूल में पढ़ता हू, और 18 साल का हू. मुझे स्पोर्ट्स में ज़्यादा इंटेरेस्ट है और मैं घर पे और स्कूल में बहुत मस्ती करता हू. मैं एक जॉइंट फॅमिली में रहता हू.

घर में मेरी मों निराल, जो 40 यियर्ज़ और मीडियम साइज़्ड बॉडी टाइप की है, और दाद जो 44 यियर्ज़ के है. मम्मी का फिगर अगर बतौ तो नॉर्मल से तोड़ा ज़्यादा है, लेकिन मोटा नही कह सकते. गोरा रंग और हमेशा हस्ती रहने वाली और मस्ती मज़ाक करने वाली है वो.

दाद भी बहुत खुश मिज़ाज टाइप है. फिर मेरे चाचा जो पापा से उमर में बड़े है, और थोड़े शांत स्वाभाव के है. फिर आती है मेरी प्यारी चाची, जो 41 यियर्ज़ की है, और बहुत सुंदर है, जो वैसे इंट्रोवर्ट टाइप की है. लेकिन जिसके साथ कंफर्टबल हो, क्लोज़ हो, उनके साथ बहुत खुल कर बातें करती है.

मेरी चाची का फिगर बतौ तो बिल्कुल पर्फेक्ट साइज़ है, अगर नॉर्मल पोज़िशन में देखा जाए तो. लेकिन हा अगर झुकते वक़्त या ऐसे ध्यान से नोटीस करोगे तो यार हर किसी का समान बड़ा ही लगता है. वैसे उनको प्यारी से डबल चीन भी है, और हस्ती है तो दोनो साइड में डिंपल्स आते है, जिसमे वो बेहद कमाल की लगती है.

वैसे उनका बेटा कुणाल भी है, जो मुझसे 2 साल बड़ा है, और इस वक़्त कॉलेज में है.

वो हमेशा क्लास में 1स्ट्रीट और 2न्ड रंक पे आता ही है, इतना पढ़कू टाइप है. तोड़ा सा चब्बी है और चश्मे लगे है. बिल्कुल गोरा, और पढ़ने में मस्त रहने वाला.

खैर कहानी पे आते है. हमारा एक बंगलो है, जिसमे टोटल 3 कमरे है. एक में मेरे मों-दाद, एक में चाचू और चाची, और एक में मैं और कुणाल. अक्सर हम 11 बजे तक सो जाते है, और सुबा सब अपने-अपने काम पर निकल जाते है.

लेकिन काफ़ी बार ऐसा होता था, की आधी रात को जब मैं किचन में आइस क्रीम खाने या पानी पीने उठता था, तो कोई ना कोई टहलने आ ही जाता था.

कभी पापा, कभी मम्मी, कभी चाचू, तो कभी चाची. कितनी बार तो ये सब अपने कमरे में ना जेया कर दूसरे कमरे में जाने लगते है. फिर मुझे उनका सही कमरा बताना पड़ता है. मुझे हमेशा लगता था की ये नींद में होने की वजह से था. लेकिन बात दरअसल कुछ और ही थी.

एक बार हुआ यू, की मैं किचन में नीचे चुपके से बैठ कर आइस क्रीम खा रहा था, और इतने में चाची आई. हम दोनो एक-दूसरे को अचानक देख कर दर्र गये, क्यूंकी काफ़ी अंधेरा था, और किसी ने ये एक्सपेक्ट नही किया था.

लेकिन कुछ सेकेंड्स बाद मैने देखा तो चाची बिल्कुल नंगी आई हुई थी, और मुझे देख कर उन्होने अपने हाथ अपनी छाती और पैरों के बीच रख दिया. घर में सभी प्यार से मुझे चॅंप कहते थे.

चाची: ओये चॅंप, यहा नीचे बैठ के क्या कर रहा है पागल? दर्रा दिया तूने मुझे.

राहुल: वो चाची आइस क्रीम खा रहा था. लेकिन आप सोई नही?

चाची: सोया तो तू भी नही. 2 मिनिट उधर देख जल्दी से.

मैने दूसरी तरफ मूह किया, तो इतने में चाची ने पास ही में से एक शॉल उठाया, और खुद पर लपेट लिया. और फिर हम बात करने लगे.

राहुल: लेकिन चाची आपने कपड़े क्यूँ नही पहने?

चाची: वो दरअसल (तोड़ा सोचते हुए) तेरे चाचू के साथ ग़मे खेल रही थी, और डरे में मुझे बिना कपड़ो में जेया कर आइस क्रीम ले आनी थी.

राहुल: चाची वो तो मैं खा चुका हू. बस 2 सपून्स बचे है.

चाची: यार और तो है भी नही. अब डरे कैसे पूरा करूँगी?, फसा दिया ना टूमे मुझे. (हल्का सा साद फेस बनाए हुए, लेकिन नाराज़ नही थी)

राहुल: तो चाची अब तो चाचू आपको पनिशमेंट देंगे हहे?

चाची: चाचू क्या तेरे पापा मम्मी भी पनिशमेंट देंगे (बहुत ही हल्की आवाज़ में. लेकिन मुझे तोड़ा बहुत सुनाई दिया)

राहुल: क्या हुआ चाची? पापा मम्मी क्या?

चाची: वो कुछ नही. एक काम कर, तू आइस क्रीम खा, मैं देख लूँगी.

इतना कहते ही चाची जाने लगी. लेकिन उन्हे ख़याल आया की पीछे से तो उनकी आस मैं देख पा रहा था. वो तुरंत पलट गयी, और पैरों के बीच हाथ रखते हुए उपर शॉल डाले हुए मेरे पास आई.

चाची: ओये चॅंप. तूने मुझे ऐसे देखा ये तेरे मेरे बीच की बात है, ठीक है? किसी को पता नही चलना चाहिए.

राहुल (तोड़ा सोच कर मौके पे चौका मारते हुए): वैसे इसमे मेरा क्या फ़ायदा है चाची?

चाची: फ़ायदा? अब तूने मुझे ऐसे देख तो लिया और क्या फ़ायदा चाहिए तुझे? (तोड़ा फ्लर्ट टोने में बोलते हुए)

राहुल: मुझे आपकी पनिशमेंट देखनी है, जो डरे आप पूरा नही कर पाए उसकी.

चाची: चुप. ये सब तेरे देखने की चीज़े नही है.

राहुल: ठीक है, फिर मैं किसी को भी बता सकता हू, की आपके रिघ्त बूम से ठीक उपर एक तिल है. और आप इस तरह रात में बिना कपड़ो के घूमती है .

चाची: नज़र बड़ी तेज़ है तेरी. अछा चल एक डील. तू सिर्फ़ देखेगा पनिशमेंट, ठीक है? और जो भी देखेगा, वो मेरे अलावा किसी और से बात नही होगी. डील?

राहुल: डील चाची.

फिर मैने आइस क्रीम जल्दी से ख़तम की, और चाची पता नही क्यू मेरे मों दाद के कमरे में जाने लगी. मैने उनको रोकते हुए कहा-

राहुल: चाची ये तो मों दाद का कमरा है.

चाची: बस चुप-छाप देखेगा बिना किसी आवाज़ के. उतना कर जितना बोला है.

राहुल: ओके चाची. लेकिन शॉल तो हटा दो, चाचू को डाउट हो जाएगा ना.

इतने में चाची ने रीयलाइज़ किया की मैने सही बोला था. और उन्होने शॉल साइड में रख दिया, और सीधे मों दाद के कमरे में जेया कर डोर बंद कर दिया. मैं काफ़ी हैरान था की डील करने के बाद चाची ऐसा कैसे कर सकती थी, और वो भी मेरे मों दाद के कमरे में.

फिर मैं करीब गया तो मैने नोटीस किया की डोर तो लॉक नही था. फिर मैने हल्के-हल्के से डोर को तोड़ा सा ओपन किया, और देखा की मेरे मों दाद चाचू और चाची सभी बिना कपड़ो के बेड पे लेते हुए थे.

मेरी मों लेती हुई थी अपना सर चाचू की थाइस पे रख कर, और पापा जस्ट वॉशरूम से निकले थे, बिल्कुल नंगे, और बाहर आते-आते एक नॅपकिन से अपनी लुल्ली को सॉफ करते-करते बेड पे आ कर बैठ गये.

दाद: अर्रे आइस क्रीम कहा है?

मों: तू बिना आइस क्रीम के आ गयी? अफ हाफ डरे. पनिशमेंट चाहिए तुझे? (और इस बार सब हस्स पड़े)

चाची: यार आइस क्रीम तो ख़तम हो चुकी थी. लगता है बच्चो में से किसी ने खा ली.

मों: और ये मेरा बेटा ही हो सकता है. कुणाल ऐसी हरकतें नही करता.

चाचू: हा लेकिन पनिशमेंट तो मिलेगी. आप लोग बताओ क्या सज़ा दी जाए?

(काफ़ी डिस्कशन के बाद)

दाद: गोलडेन शवर?

चाचू: वाउ! वेरी नाइस आइडिया.

मों: चलिए, अब तो जाना पड़ेगा वॉशरूम. लेकिन कों करेगा सस्यू?

चाचू: मुझे तो नही आई सस्यू.

दाद: मुझे भी नही.

मों: मुझे थोड़ी-थोड़ी लगी है. हहे, आएगा ना मज़ा अब.

चाची: यार अंदर क्या जाना. यही कर दे ना. मैं नीचे बैठ जाती हू.

मों: यही तेरी मर्ज़ी है तो ठीक है.

फिर चाची अपनी नीस पे नीचे बैठ गयी, और अपने बाल बाँधने लगी. दोस्तों ये नज़ारा काफ़ी देखने लायक था. खैर फिर मों आई, और चाची के सामने खड़े हो कर कुछ सेकेंड्स बस अपनी पुसी पे देखती रही. फिर मों ने धीरे-धीरे सस्यू करना शुरू किया चाची के मूह के उपर.

चाचू: वाउ! तीस वाज़ बदसस.

दाद: काश मुझे भी सस्यू आ रही होती. ये मौका मुझे भी मिलता.

चाची: दररो मत आयेज के राउंड्स में आपके उपर भी हो सकता है.

सब हस्स पड़े, और चाची ने एक नज़र च्छूप-च्छूप के डोर की तरफ देखा, और मुझे वाहा देख कर वो उनके साथ मिक्स हो गयी. फिर नेक्स्ट रौंद ऑफ ट्रूथ आंड डरे शुरू हुआ.

कुछ राउंड्स तक तो मैं देखता रहा, और मुझे ये देखने में मज़ा काफ़ी आ रहा था. फाइनली चाची के फेवर में एक रौंद आया जहा मों ने चूज़ किया ट्रूथ.

चाची: अछा एक सिचुयेशन है, और उसपे मुझे ऑनेस्ट आन्सर चाहिए, ठीक है?

मों: डन.

चाची: अछा मान ले की हम ऐसे एंजाय कर रहे है, और राहुल या कुणाल में से कोई हमे देख रहा है. जस्ट इमॅजिन हा. तो तेरा क्या रिक्षन होगा? वॉट विल बे युवर नेक्स्ट स्टेप?

मों: ये कैसी अजीब सिचुयेशन है?

मतलब ऐसा कभी मैने सोचा नही.

दाद: कोई नही. सोच लो, बस एक सिचुयेशन ही तो है.

चाचू: और ऑनेस्ट आन्सर चाहिए बिल्कुल.

चाची: बताओ-बताओ.

मों: वैसे दोनो में से कोई देख भी रहा हो तो ई थिंक वी शुड मेक देम सीट आंड वॉच और सेक्स ग़मे.

चाची: ओहो, क्या बात है, क्या ही बात है. सिर्फ़ उसको सामने बिता कर देखने कहेंगे या (तोड़ा इशारो में बात करते हुए)

मों: ई डॉन’त नो. ई मीन अगर वो देख ही रहे हो तो उन्हे यहा बुला लेंगे. 2 से भले 3 लंड या 4 भी हो सकते है, अगर दोनो देख रहे है तो.

चाची: वाउ! नाइस इमॅजिनेशन हा.

चाचू: मतलब आप दोनो को अब हमारे लंड पसंद नही आ रहे?

मों: मतलब ऐसी बात नही है. इट’स जस्ट आ सिचुयेशन, तो मैने अपना इमॅजिनेशन बताया.

चाची: देख ले. कही डरे में आ गया ऐसा कुछ, तो करना पड़ेगा.

मों: वैसे भी ये सिर्फ़ एक सिचुयेशन है ना? और अगर ऐसा हुआ भी तो इट’स ओके. अट लीस्ट बच्चे बड़े भी तो हो रहे है. आंड ई आम प्रेटी शुवर, उनके लंड उनके पापा से तो ज़्यादा ही बड़े होंगे.

चाची: और लंड की जगह प्यारी-प्यारी से छ्होटी-छ्होटी लुल्ली हुई तो?

दाद: तो बड़ा करने में तो तुम दोनो एक्सपर्ट ही हो ना.

मुझे बाहर से ये सब सुन के मॅन कर रहा था की मैं बस अंदर चला जौ. लेकिन मैने कुछ देर और वेट किया. और कुछ और राउंड्स के बाद मों ने जब डरे लिया, तो चाची ने कहा.

चाची: वाउ! फाइनली डरे हा? डेरिंग बाज़ी अफ. वैसे चलो फिर जब तुम चाह ही रही हो, तो एक मस्त डरे है मेरे पास.

मों: क्या?

(चाची उठी बेड से और डोर यानी मेरी तरफ आने लगी. फिर चाची कमरे के बाहर आई, और मुझे पूछने लगी)

चाची: चलना है अंदर? ऐसा मौका तुझे नही मिलेगा हमारे साथ ग़मे खेलने का.

राहुल: नेकी और पूच-पूच. क्यूँ नही, बिल्कुल खेलना चाहूँगा.

चाची: लेकिन सिर्फ़ देखेगा ठीक है? डील? मैं मेरी डील पूरी कर रही हू. (ये कहते ही चाची ने मेरे बालों पे हाथ घुमाया, और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने पीछे-पीछे मों दाद के कमरे में लेकर गयी.)

मैं जैसे ही अंदर गया, तो मों दाद और चाचू सभी शॉक में आ गये क्यूंकी वो सभी नंगे थे.

मुझे ऐसे देख कर मम्मी ने तो एक ब्लंकेट से खुद को ओढ़ लिया, और चाचू ने भी ब्लंकेट की दूसरा साइड से उनका लंड छुपाना शुरू किया. लेकिन पापा को इतना फराक नही पड़ा, और वो ऐसे ही बैठे थे.

दाद: क्या बात है राहुल? सोया नही?

राहुल: वो चाची मुझे यहा ले आई.

चाची: चलो फिर, तुम्हारा डरे ये है की तुम राहुल के सामने इन दोनो का लंड चूसोगी फॉर 2 मिनिट्स. (चाचू और मेरे पापा की तरफ इशारा करते हुए)

फिर मम्मी सब से पहले तो अपने हाथ उठा कर खुद के बाल सेट करने लगी, और अपने खुले बालों को सेट करके उन्होने सब से पहले एक बड़ा सा जूड़ा बनाया. जैसे चेहरे पर बस ज़ुल्फोन की 2 लाते जो बार-बार आ रही हो, और बाकी बाल पीछे जूड़ा बना हुआ.

फिर उन्होने कोमल-कोमल हाथो में मेरे पापा का बिल्कुल बालों से भरा हुआ मोटा काला लंड पकड़ा, और अपने 1 हाथ में तोड़ा थूक कर वो हाथ पापा के लंड पे लगा के हिलने लगी.

फिर मों दूसरी तरफ देख कर चाचू का लंड पकड़ा. उनका लंड शेव्ड तो था, लेकिन उस पर बाल अभी आ रहे थे, और तोड़ा रफ सर्फेस जैसा था. जैसे की काफ़ी बार शेव करने के बाद प्यूबिक हेर थोड़े हार्ड आने लगते है.

खैर फिर मम्मी ने दूसरे हाथ में भी थूक ली, और दोनो हाथो में दोनो का लंड लेकर हिलने लगी. फिर मों ने देखा की किसका लंड पहले खड़ा हो चुका है, तो उस हिसाब से मम्मी ने चाचू का लंड पहले झुक कर अपने मूह में लिया और स्किन पीछे करके सिर्फ़ उनके लंड का उपर का पोर्षन चूसने लगी.

वाहा चाची एक साइड में बैठी रही. थोड़ी डोर मैं एक सोफा पर बैठा देख रहा था, और मेरे ठीक सामने मम्मी झुकी हुई थी, और उनकी मोटी सी गांद बहुत मस्त लग रही थी, और उनके ठीक आयेज मेरे दाद और चाचू अपना लंड चुस्वा रहे थे.

करीब 2-3 मिनिट बाद मों ने लंड मूह से निकाला, और मूह को तोड़ा सॉफ करके गहरी साँस ली, और बेड पर बैठ गयी. चाचू और पापा ने अपने-अपने लंड को तोड़ा सहलाया, जो डोर से ही काफ़ी ज़्यादा मोटे और बड़े लग रहे थे. और सभी अपनी-अपनी पोज़िशन में आ गये.

चाची: कैसा लगा राहुल बेटा?

मे: बहुत अछा लगा देख कर.

मों: लेकिन तू इसको यहा कैसे ले आई?

चाची: वो अलग कहानी है, बाद में बतौँगी. चलो आयेज बढ़े?

चाचू: यार अब काफ़ी देर हो चुकी है. कल जल्दी भी जाना है ऑफीस. अब सो जाते है.

दाद: हा यार चलो सो जाते है. काफ़ी तक चुके है.

मों: चलो फिर ये भी ठीक है.

चाची: चलो चॅंप, तू भी सो जेया.

फिर सभी अपनी-अपनी जगह से उठे और चाचू और चाची अपने अपने कमरे में जाने लगे. वो शायद कपड़े अपने कमरे में उतार कर ही यहा आए थे, इसलिए ऐसे ही बाहर जेया रहे थे. फिर चाची ने मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ घुमाई, और हम सब सो गये.

तो दोस्तों यहा तक की कहानी आपको कैसी लगी मुझे नीचे दी गयी मैल ईद पे मैल करके ज़रूर बताए. और अपने कॉमेंट्स से आपका प्यार दिखाए.

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