किचन में भूखी बहन को चोदा

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की कैसे मैने वियाग्रा टॅबलेट ले कर शिखा की 1स्ट्रीट रौंद की चुदाई की. और वो कितनी खुश थी उस रौंद से. अब आयेज-

किस तोड़ कर हमने एक-दूसरे को हानफते देखा और हमारी हस्सी निकल गयी.

शिखा: भैया यार आप कितने हवसी हो. एक तो बेहन की छूट पेलते हो. फिर उसे किस करके उसकी साँस फूला देते हो. मतलब उपर और नीचे दोनो लिप्स पर क़ब्ज़ा कर लिया है आपने.

विवेक: बेहन अभी तो सिर्फ़ साँस फूला रहा हू. मौका मिलेगा ना, तो तेरा पेट भी फूला दूँगा.

शिखा: अछा जी, तो फिर कर लो बात मेरे मम्मी-पापा से, और ले चलो मुझे इस फ्लॅट से अपने फ्लॅट पर. फिर दिन रात मेहनत करना मेरी छूट पर, और फूला देना जो-जो फूलना हो

विवेक: बिल्कुल शिखा, मुझे बस सेट्ल हो जाने दे. फिर तू बोलेगी तो तुझे भगा कर भी ले चलूँगा कही डोर इन सब से.

शिखा: फिलहाल तो भैया बहुत भूख लग रही है. यार रात से अभी तक कुछ नही खाया है, और उपर से आपने छोड़ डाला आ कर, तो एनर्जी नही बची बिल्कुल भी. तो भाग कर जाओ, और कुछ खाने को ले आओ.

मेरे दिमाग़ में शिखा की बात सुन कर किचन फॅंटेसी जागी.

विवेक: अर्रे पागल बाहर जाने की क्या ज़रूरत है. हम यही पका लेते है ना. चल किचन में साथ खाना बनाते है.

थोड़ी देर बहस की उसने की एनर्जी नही है ब्लाह ब्लाह. पर मैने उसको उठा कर खड़ा कर दिया बेड से. तो फिर चल पड़ी साथ. फिर किचन में पहुँच कर देखा तो सिर्फ़ चावल पके हुए थे. तो हमने उन्हे फ्राइ करने का सोचा. शिखा और मैने मिल कर मिर्च काटी, टमाटर काटे, और बाकी सारी वेजिटेबल्स काटी.

इतने टाइम से मेरा लंड बार-बार उछाल रहा था. शिखा ऑनियन लेने के लिए झुकी, तो उसकी गांद मेरे सामने थी. मैने एक थप्पड़ रख दिया गांद पर.

शिखा: आउच भैया, यार लगती है. प्लीज़ मस्ती नही करो.

मैं कहा सुनने वाला था यार. मैने उसकी कमर पकड़ी, और अपना लंड पीछे से उसकी छूट पर रब करने लगा. वो खड़ी होने को हुई तो स्लॅब से सर टकरा गया.

शिखा: बहनचोड़ माना किया था मस्ती नही करो. मेरे सर पर चोट लग गयी. हट्तो अब यहा से.

मैने अनसुना किया, और लंड धीरे से छूट में पेलता चला गया. वियाग्रा के असर की वजह से लंड फुल टाइट था, और उसकी छूट में धस्ता हुआ फील हो रहा था. शिखा भी छूट टाइट किए थी, तो और मज़ा आ रहा था.

शिखा: भैया एम्म यार प्लीज़ कुछ खाने दो, फिर करना 2न्ड रौंद. अभी मेरे अंदर बिल्कुल आअहह माआ फक आअहह.

वो कुछ बोल रही थी. पर मैं सुन नही रहा था. मैने लंड पेल कर स्पीड में धक्के देना शुरू कर दिया. छूट गीली थी तो लंड के 5-6 शॉट्स में ही पच पच की आवाज़े किचन में गूंजने लगी, और साथ ही शिखा की आहें.

शिखा: उम्म्म एमेम माआ भैया यार प्लीज़ नही, एम्म्म आहह सस्सस्स मा रूको यार. धीरे तो छोड़ो प्लीज़, दर्द हो रहा है छूट में. बहनचोड़ कैसा छोड़ू भाई मिला है, जो छूट में ही घुसा रहता है.

विवेक: मेरी कोई ग़लती नही है शिखा. तेरी आहह ये तेरी छूट है ही इतनी कमाल की, की जी नही भरता. यार मेरा बस चले तो दिन रात तेरी छूट में लंड डाल कर तेरी मोन्स सुनता राहु.

शिखा: उम्म्म एस भैया, एस, फक मे हार्डर. भैया आपने मेरी छूट को भी बिगाड़ दिया यार. कितनी जल्दी गरम हो गयी आपके लिए. छोड़ो अब मुझे एस, फक मे.

मैने उसे सीधा किया, और उठा कर स्लॅब पर बिताया. और लंड फिरसे एक शॉट में अंदर कर दिया. उसका मूह दर्द से खुला और खुला ही रह गया. इतना कातिल एक्सप्रेशन था यार क्या बतौ.

ये पोज़िशन हर भाई को ट्राइ करनी चाहिए अपनी बेहन के साथ. उसे अपने सामने टांगे फैला कर बिताओ स्लॅब पर. फिर एक झटके में लंड उतार दो, और उसकी आँखों में देखो चुदाई की भूख. उफ़फ्फ़ कातिल लग रही थी

विवेक: उफ़फ्फ़ मेरी रंडी, साली क्या ग़ज़ब लग रही है तू. जी में आ रहा लंड आर-पार कर डू तेरे.

शिखा: तो कर दो ना मेरे छोड़ू भैया. किसने रोका है?

मैने एक हाथ उसकी कमर के अराउंड घुमाया, और एक हाथ से पीछे से उसकी गर्दन को पकड़ा, और लंड पेलने लगा उसकी छूट में फुल स्पीड में.

शिखा: आअहह आअहह भैया ऐसे ही छोड़ो आ. फाड़ दो मेरी छूट आ. मा इस कमीने के भरोसे छ्चोढ़ गयी थी आप अपनी कुवारि बेटी को. मा इसने छोड़ दिया मुझे एम्म्म एस भाई पेलो अपना लंड.

विवेक: उफ़फ्फ़ शिखा, तेरी छूट ने पागल कर दिया यार.

आज से गुलाम हो गया मेरा लंड तेरी छूट का. तू जब बोलेगी तेरी छूट की सेवा करने आ जाएगा ये. आअहह एस शिखा फक योउ बिच.

शिखा: एस भाई छोड़ो भैया आ. ई आम कमिंग भाई आ फक.

शिखा के चेहरे पर पसीना और हवस थी. वो अपने होंठो को बीते कर रही थी, और मुझे ये देख कर और जोश चढ़ रहा था. मैं फुल स्पीड में धक्के लगा रहा था सता-सात सता-सात. उसकी छूट से पानी निकला, पर मैं नही रुका.

शिखा: एम्म्म मा भैया रूको. छूट को झड़ने तो दो यार एम्म.

पर मैं छोड़ रहा था उसे लगातार. उसका चेहरा इतना सेडक्टिव लग रहा था की मैं पागल हो रहा था. मैने उसे स्लॅब से नीचे उतरा, और घुटनो पर बिताया, और लंड सीधा उसके मूह में डाला. अब मैं उसका मूह छोड़ने लगा. वो एम्म एम्म करके मोन कर रही थी.

मैं लंड फुल अंदर डाल कर मूह में धक्के देने लगा, और लंड मस्त अंदर-बाहर होने लगा. वो अपने हाथो से मेरी स्पीड कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. पर नाकाम रही. अब मुझे लगा मेरा माल निकालने वाला था, तो उसका फेस पकड़ कर डीप स्ट्रोक्स देने लगा.

लंड गले तक टच हो कर वापस आता, और फिर अंदर तक जाता. उसके आँसू निकल रहे थे, पर मैं फुल जानवर बना हुआ था. फिर मेरे लंड से पिचकारी निकली. मैने लंड से फाइनल झटका दिया, और वही होल्ड करके सारा माल उसके गले के आखरी चोर पर निकाल दिया.

वो गत-गत करके पीने लगी मजबूरी में. लगभग 2-4 मिनिट बाद मैने उसका फेस छ्चोढा तो हाथ ज़मीन पर रख किसी कुटिया की तरह अपने पैर और हाथ पर बैठी हाँफने लगी. मुझे उसे ऐसे देख कर बहुत अछा लग रहा था. मैं उसे जैसे छोड़ना चाहता था, आज कुछ-कुछ वैसे ही छोड़ डाला.

आयेज क्या-क्या हुआ वो आयेज के पार्ट्स में.

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