किरायेदार की बीवी को कुतिया बनाकर जम के पेला

kamkukta sex stories हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रवि है। मेरी उम्र 27 साल में कोटा (राजस्थान) का रहने वाला हूँ, दोस्तों में पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़कर बहुत मज़े ले रहा हूँ और आज में अपनी भी एक सच्ची कहानी आप लोगों के लिए लेकर आया हूँ। दोस्तों यह मेरी कहानी आज से करीब पांच साल पहले की है जब हमारे मकान में नीचे वाले हिस्से में एक परिवार रहता था। दोस्तों वो केवल पति पत्नी ही रहते थे और उसके कोई बच्चा नहीं था। पति का नाम सुनील और पत्नी का नाम रेखा था। पति राजस्थान रोडवेज में बस का कंडक्टर था, जिसकी वजह से वो हमेशा ही बाहर अपनी नौकरी पर ही रहता था और उसको कोटा से दिल्ली की बस में जाना रहता था और वो करीब तीन चार दिन में एक बार रात को सोने ही अपने घर पर आता था और वैसे भी उसकी अपनी बीवी से बनती भी कम थी, क्योंकि उसकी बीवी थोड़ा मॉडर्न टाइप की थी और वो गाँव का सीधासाधा आदमी था। हम लोग भी परिवार में ज़्यादा लोग नहीं थे और मेरे पापा, मम्मी और एक छोटा भाई था। दोस्तों में अक्सर करके गौर करता था कि रेखा जब भी मुझे देखती थी तो उसकी आखों में एक अजीब सी चाहत रहती थी, चूँकि वो लोग राजपूत थे इसलिए उन लोगों में परदा सिस्टम थोड़ा ज़्यादा ही रहता है और इस वजह से हम लोग भी उन लोगों से ज़्यादा बातें या मज़ाक नहीं कर सकते थे, लेकिन यह सोच हमारी थी, रेखा की नहीं।

एक बार मेरे घर वाले किसी जरूरी काम से 4-5 दिन के लिए झालवाड़ चले गये और उनके साथ में मेरा छोटा भाई भी चला गया, इसलिए अब में अपने घर में अकेला था और वो सर्दियों की बात थी। में दिन में घर की छत पर पेपर पढ़ रहा था और उस समय रेखा भी दाल साफ करने के लिए धूप में आ गयी। फिर कुछ देर बाद उसने ही अपनी तरफ से इधर उधर की वो बातें छेड़ी और फिर वो कुछ देर बाद फ़िल्मो के टॉपिक पर आ गई और वो मुझसे कहने लगी कि रवि जी यह जो फ़िल्मो में प्यार होता है क्या वो सच में होता है? मैंने कहा कि हाँ, तो वो कहने लगी क्या हिरोइन को ऐसा काम करने में शरम नहीं आती होगी? तब मैंने उससे कहा कि यह तो उनका काम होता है और फिर आजकल तो यह सभी बातें आम बात है। अब वो अपनी बात पर आगे बढ़ी और वो मुझसे पूछने लगी कि जो फ़िल्मो में बलत्कार होता है वो भी क्या सही में होता है? तब मैंने उससे कहा कि वो थोड़ा सही और थोड़ा सा उनके कैमरे का कमाल होता है और मैंने उससे कहा कि इंग्लिश फ़िल्मो में तो सब कुछ साफ साफ होता है, हिन्दी फ़िल्मो में कुछ तो बहुत हद में होता है। अब वो मुझसे बोली कि में आपकी यह बात मान ही नहीं सकती कि ऐसा भी कुछ होता होगा? आप मुझे बेवकूफ बना रहे है और वो हंसने लगी थी। दोस्तों में अब अच्छी तरह से समझ रहा था कि वो मुझसे क्या चाह रही है और उसके दिमाग में क्या चल रहा है और कौन किसको पागल बना रहा है? तो मैंने उससे कहा कि भाभी जी अब में आपको कैसे अपनी बात पर यकीन दिलाऊँ? और मैंने उससे कहा कि अगर आपको बुरा ना लगे तो में आपको ऐसी कोई एक इंग्लिश फिल्म दिखा सकता हूँ? जिसको देखकर आपको मेरी बात पर विश्वास हो जाएगा। फिर वो तुरंत मेरी इस बात को सुनकर मुझसे बोली कि हाँ ठीक है, में बुरा नहीं मानूंगी, तुम मुझे वो कब दिखाओगे? मैंने कहा कि में आपको आज ही वो फिल्म दिखा देता हूँ और में उसी शाम को इंग्लिश सीडी ले आया और उसके साथ में कुछ सोचकर एक ब्लूफील्म की सीडी भी ले आया। उस रात को में बाहर होटल से खाना खाकर आया था और वो भी घर पर मेरा इंतजार कर रही थी, वो सर्दी की रात थी इसलिए सभी आस पड़ोस के लोग अपने अपने घरों में जल्दी ही बंद हो गये थे और करीब रात को दस बजे में पानी पीने के बहाने से अपने रूम से बाहर आया तो मैंने देखा कि वो भी उस समय तक जागी हुई थी और मुझे देखकर वो भी अपना कमरा बंद करके तुरंत ऊपर मेरे कमरे में आ गयी। फिर वो मुझसे पूछने लगी कि रवि क्या वो फिल्म लाए हो? तो मैंने कहा कि हाँ चलो में आपको दिखा देता हूँ नहीं तो आपको हमेशा मेरी वो बात झूठ ही लगेगी, आपको देखकर विश्वास होगा। अब में अपने बेड पर था और वो पास वाली कुर्सी पर बैठी हुई थी। मैंने प्लेयर को शुरू किया और में कुछ इस तरह से बैठा हुआ था कि में रेखा को देख सकूँ, लेकिन उसकी नज़र मुझ पर ना पड़े। फिर वो फिल्म शुरू हो गई और जब उसमे वो द्रश्य आए तो मैंने देखा कि अब रेखा की आँखों में एक अजीब सी चमक थी और थोड़ी सी शरम भी थी। तब मैंने उससे पूछा क्यों भाभी जी अब आपको मेरी बात पर यकीन हो गया ना? फिर मैंने कहा कि भाभी जी आप भी मेरे पास इस रज़ाई में आ जाओ ज़मीन बहुत ठंडी होगी और वैसे भी सर्दी का मौसम है। दोस्तों पहले तो उसने साफ मना कर दिया, लेकिन फिर कुछ देर देखने के बाद वो मुझसे कहने लगी कि हाँ ठंड तो मुझे लग रही है। अब मैंने उससे कहा कि में तो आपसे पहले ही कह रहा था और फिर वो भी मेरे साथ उस बेड पर मेरी रज़ाई में आ गयी थी, लेकिन अब भी हम दोनों के बीच में बहुत दूरी थी, क्योंकि हम लोग उस डबल बेड पर थे। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि यार हम दोनों पहले ही इतना करीब तो गए है तो क्यों ना इसके आगे भी बढ़ने की कोशिश की जाए और यह बात सोचकर मैंने उनसे कहा कि भाभी जी इस फिल्म में तो कुछ भी नहीं है में एक और फिल्म अपने साथ में लाया हूँ जिसको अगर आप देखोगी तो देखती ही रह जाओगी।

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