गाँव के खेत में पुष्पा भाभी की चुदाई – 1

Hindi Chudai kahani – Gav ke khet mai Pushpa Bhabhi ki chudai मेरी साली की लड़की के सादी में गाँव गया हुआ था ठंडी के मौसम में करीब एक साल बाद मेरे गाँव के पास ही साली भी ब्याही है करीब 1 किलोमीटर कि दुरी पर | फरवरी का महीना था हलकी हलकी ठंडी पड़ रही थी, जिस दिन से गाँव गया उसी दिन से पत्नी जी अपनी बहन के घर चली गई और 10 दिन तक बहन के घर में ही रही मैं घर में बिना बीबी के साथ रहा जब कभी साली के घर जाता तो पत्नी से मुलाकात होती नहीं तो मैं घर में अकेला ही माँ और बड़ी भाभी के साथ रहता बड़े भाई तो दिन भर खेती के काम से घर से बाहर ही रहते,मेरी आदत कुछ ऐसी पड़ गई कि जब तक बीबी कि ठुकाई -चुदाई नही कर दू तब तक नींद नहीं आती है इस 45 साल कि उम्र में भी पर बीबी है कि सादी में ब्यस्त हो गई मुझे चुदाई करने का मोका ही नहीं मिलता लण्ड रोज रोज खड़ा होता क्योकि मैं मैं रोज सुबह साम शिलाजीत की कैप्सूल जो लेता हु दूध के साथ इस कारण लण्ड बहुत खड़ा होता है इस उम्र में भी |

10 फरवरी के दिन मैं बाहर सुबह 8 बजे धुप ले रहा था घर के सामने खुली जगह में तभी ”अहिरिन दाई ” [गाँव में बरतन धोने वाली दाई] के साथ एक 10-12 साल कि लड़की दिखी सुन्दर सा चौकोर चेहरा, गोरा रंग ,बड़ी बड़ी आँखे ,ऊपर के पतले -पतले और नीचे के हलके से मोटे लाल लाल रशीले होठ, बड़े नीबू के आकार में गोलाई लिए हुए चुचिया मैं उस लड़की कि सुंदरता को निहारता ही रहा गया मैं आंगन में जाकर उसे पास से देखा तो बहुत ही सुन्दर लग रही थी मैं उसे पहचानने कि कोशिस कर रहा था कि गाँव में कौन इतनी सुन्दर ओरत है जिसकी ये लड़की है पर कुछ याद नहीं आया तो बड़ी भाभी से पूछ ही लिया कि किसकी लड़की है तो भाभी ने बताया कि ”मांगलिया अहीर ” कि लड़की है ,तब मैंने भाभी से कहा कि उसकी तो एक ही लड़की है जिसकी सादी हो गई है तो भाभी ने बताया कि ये मांगलिया कि दूसरी ओरत कि लड़की है तो मैंने भाभी से पूछा कि मांगलिया ने 50 कि उम्र में दुसरी सादी किया क्या ,तो भाभी ने बताया कि पहली वाली उसकी ओरत मर गई तो दुसरी ले आया तब मैं कुछ नहीं बोला और बाहर आ गया और मेरी नज़रे मांगलिया कि औरत को तलासने लगी मैं कुछ देर बार घर की छत पर चढ़ गया और मांगलिया के घर कि तरफ देखने लगा जो मेरे घर के बगल में ही कच्चा घर है पर ओ दिखी नहीं , मैं दिन में कई बार छत पर गया कि सायद दिख जाए पर दिखी नहीं | अगले दिन सुबह करीब 10 मैं घर के पास वाले खेतो के रस्ते अपने खेत कि तरफजा रहा था तो मगलिया मिल गया और” दादू साहब जय राम जी ” कहा तब मैंने जैराम जी का जबाब दिया और बोला कैसे हो मंगलू दादा तो ओ बोला टीक हु हुजूर[मांगलिया निहायत सीधा -साधा है 50 कि उम्र में 60 लगता है गरीबी ने समय के पहले बूढ़ा कर दिया] मांगलिया के साथ उसकी नई -नवेली ओरत भी हाथ में कुछ लिए हुए लंबा सा घुघट निकाले मैं मांगलिया कि ओरत कि तरफ तिरक्षी निगाहो से देखा

उसके गोर गोर हाथ और साडी के नीचे बड़े बड़े बूब्स के सिवा कुछ नहीं दिखाई दे रहा था, जिस्म मस्त कठोर मोटापा लिए हुए है जब दोनों जाने लागे तो मैं मांगलिया कि ओरत को देखने लगा जो मांगलिया के पीछे पीछे जा रही थी ,क्या सुन्दर जिस्म था मांगलिया कि ओरत का बड़े बड़े कसे हुए चूतड़ जब ओ चलती तो चुड़त हिलते तो बहुत सेक्सी लगती मैं उसे कुछ देर तक देखते रहा, कुछ दूर जाने के बाद मांगलिया कि ओरत मेरी तरफ देखी घुघट को उठा कर ,जब ओ मेरी तरफ देखी तो मैं उसे देखकर दंग रहा गया क्या बला कि खूबसूरती थी उसके चेहरे में बिलकुल स्मिता पाटिल कि तरह उसका चेहरा था मैं उसकी तरफ अपलक देखे जा रहा था मैंने देखा कि उसने मांगलिया से कुछ कहा जो सुनाई नहीं दिया मुझे और फिर ओ तुवर के खेत के घुस गई ,मांगलिया चला गया तो मैं जल्दी से उसके पास पहुच गया तो देखा कि ओ खेत से पेसाब करके बाहर निकल रही था मैं पास पहुंचा और नमस्ते ”भौजी जी ” कहा तो जबाब में उसने ”गुड मॉर्निंग ” लाल साहब कहा तो मैं चौक गया उसकी अंग्रेजी अभिवादन सुन कर मैं समझ गया इसे इंग्लिश भी आती होगी थोड़ी बहुत तभी इसने ‘गुड मॉर्निंग’ कहा मैंने बोला बहुत सुन्दर हो भौजी जी आप तो पलट कर बोली कि आप भी तो गबरू सुन्दर जवान है , तब मैंने पूंछा कि जानती हो मुझे तो बोली कि हां जानती हु आप कोठी वाली ठाकुर साहब के भाई है ना ,तो मैं बोला हां ,पर आप कैसे जानती हो तो बोली कि आप उस दिन छत पर घूम रहे थे तो देखा था तभी मैं समझ गई थी कि आप बड़े ठाकुर के भाई होगे फिर ज्यादा कुछ बात नहीं हुई और ओ हाथ हिलाकर बाय बाय किया और चली गई हलकी से मुस्कान छोड़कर लम्बे लम्बे कदम बढ़ाते हुए जल्दी जल्दी जब ओ जाने लगी तो मैंने बोला नाम तो बताती जाओ तो बोली ”पुष्पा ” और जबाब का इन्तजार किये बिना चली गई | पुष्पा कि उम्र करीब 32 साल के आस पास होगी हाइट करीब 5 फिट 4 इंच के आसपास होगी ,पुष्पा मांगलिया से लम्बी दिखाई देती है क्योकि गाँव में दूसरी तरफ हरियाली लिए हुए खेत है

मांगलिया कि हाइट ज्यादा नहीं है, मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा कि पुष्पा कि चुदाई कैसे करू ,पुष्पा पट तो जायेगी क्योकि पुष्पा चंचल स्वभाव कि लगती है येही प्लान बनाते बनाते मैं खेतो कि तरफ से घूम कर घर वापस आ गया और बाहर बैठ गया ,मैं कुछ देर बाद उठा और घर के सामने बनी पानी कि टंकी के पास बाथरूम में नहाने लगा तो कुछ ही देर मैं पुष्पा बाल्टी लिए हुए बाथरूम में घुस आई पर मुझे देख कर जल्दी से वापस चली गई तो मैं उठकर देखा तो पुष्पा पानी कि टंकी में लगे बाहर के नल से पानी भर रही थी मैंने इसारा करके बुलाया तो पास आई तो मैंने बोला ”क्या हुआ इतना डर गई मुझे देखकर” तो बोली”नहीं लाल साहब आप नहा रहे थे इस लिए बाहर के नल से पानी ले लिया रोज इसी नल से भर्ती थी पानी” तो मैं बोला ”आज भी भर लो” तो बोली कि ”नहीं आप नहा लो बाद में भर लुंगी पानी” इतने में पुष्पा कि बाल्टी भरा गई पानी से तो ओ चली गई तब मैं नहा कर चढ्ढी पहन कर टावेल लगाकर नंगे बदन बाहर धुप लेने लगा इतने में पुष्पा फिर से आई और बाथरूम वाले नल से पानी लेने लगी ,मैं नहाते समय मेरी गीली चढ्ढी बाथरूम में ही छोड़ दिया था जिसे पुष्पा ने साबुन लगाकर धो दिया और बाहर के तार में फैला दिया तो मैंने आकर बोला ”क्यों धोया मेरी चढ्ढी ” तो पुष्पा बोली ”छोटी नहीं हो जाउगी आपकी चढ्ढी धोने से ,बड़ी बहु और माँ जी कि कपडे भी धोती हु ” तब मैंने बोला कि. ”मुझे अच्छा नहीं लगता” तो पुष्पा कुछ नहीं बोली और मेरी सरीर कि तरफ बड़ी ललचाई निगाहो से देखने लगी ,मैं बाहर धूप लेता रहा और पुष्पा 6 बार पानी लेने आई और मुझे देखते हुए चली जाती जब पुष्पा ने आना बन्द कर दिया तब मैं अंदर चला गया अपने कमरे में दोपहर में खाना खाया और सो गया 4 बजे नींद खुली तो फ्रेश होकर साली के घर जाने के लिए तैयार हुआ और बाहर खड़े होकर बड़े भाई का इन्तजार करने लगा कि आ जाए तो बाइक लेकर जाउ कुछ ही देर में पुष्पा आई और घर के अंदर चली गई फिर कुछ समय में भाभी बाहर आई और मुझे बोली कि आपके पास 50 रुपये हो तो दे दीजिये इसे मेरे पास खुल्ले नहीं है [पुष्पा कि तरफ इसारा किया] तो मैं बोला टीक है और भाभी ने पुष्पा को मेरे पास भेज दिया और भाभी अंदर चली गई माँ ने आवाज लगाया तो तब मैंने पर्श में से 500 कि नोट निकाला और पुष्पा कि तरफ बढ़ा दिया तो पुष्पा ने बोला 50 रुपये चाहिए 500 नहीं तो मैंने बोला रख लो ”भौजाई साहब ” खुल्ला करवा कर बाकी वापस कर देना तो पुष्पा ने रख लिया 500 कि नोट और मुस्कुरा कर बोली कि आप मुझे साहब मत बोलिये तो मैंने बोला आप मेरी भौजाई साहब हो तब पुष्पा ने कहा कि ”ओ तो हु” और फिर पुष्पा चली गई जब गेट के पास पहुची तो मेरी तरफ पलट कर एक बार देखा और नजरो से ओलझ हो गई | कुछ देर में भैया आ गए और मैं मोटर साइकल लेकर साली के गाव चला गया और फिर वहा बहुत देर तक रहा साम को 8 बजे वापस आने लगा तो पत्नी को बोला कि चलो तो ओ बोली जब तक सादी नहीं हो जाती यही रहूगी काम बहुत है यहाँ तो मैंने बीबी के कण में धीरे से कहा कि आज चलो यार कई दिन हो गए तो मुस्कुराई और बोली इन्तजार करिये कही भाग नहीं रही हु आपके पास ही आउगी और मैं निरास हो गया और वापस आ गया कुछ देर तक बड़े भाई के पास बैठा बाते किया और अपने कमरे में जाकर सो गया रात में 9 बजे तक |

यह कहानी भी पड़े  सगी मामी ने मुझे समर्पित कर दिया अपनी चूत का बगीचा

अगले दिन 11 फरवरी को सुबह 7 बजे नींद खुली और बाहर आकर आग तापने लगा करीब 7 बजकर 20 मिनट पर पुष्पा अपनी लड़की के साथ आई इस भयंकर ठंडी में भी पुष्प और उसकी लड़की के वदन में कोई साल या स्वेटर नहीं था दोनों कांपते हुए घर के अंदर घुसी और किचेन से बर्तन समेटने कि आवाज आने लगी मुझे कुछ देर में माँ बेटी दोनों बर्तन लेकर बाहर निकली और बर्तन रखकर साफ़ करने लगी पुष्पा काप रही थी उसकी लड़की दौड़ कर आई और जहा पर मैं आग ताप रहा था वही खड़ी हो गई तो मैं उससे बाते करने लगा नाम पूछा तो बताया ”रेणुका ” जब मैंने पूछा कि स्वेटर क्यों पहन कर नहीं आई तो बोली कि नहीं है ,बहुत दया आई मुझे उन दोनों पर भगवान् भी कितना निष्टुर है ये सोचता रहा इतने में पुष्पा ने आवाज लगाया तो ” रेणुका ” दौड़ कर उसके पास चली गई फिर कम करके रेणुका आग के पास आ गई पुष्पा उस ठंडी में बर्तन साफ़ करके अंदर रखकर और आग के पास आकर खड़ी हो गई कुछ दूर तो मैंने बोला कि ”भौजी साहब” आप इतनी दूर क्यों खड़ी हो पास आकर हाथ सेक लो ठन्डे हो गए होगे तो पुष्पा मेरी तरफ देखी और बिना कुछ बोले आग के पास आकर खड़ी हो गई तो मैं बोला कि बैठ जाओ कब तक खड़ी रहोगी हाथ गरम कर लो बैठकर तो पुष्पा पास आकर बैठ गई और हाथ को आग के पास ले जाकर सेकने लगी तो मैं पुष्पा से बोला कि ”इस ठंडी में स्वेटर क्यों नहीं पहनती ” तो पहले पुष्पा ने कुछ नहीं बोला जब फिर से बोला तो पुष्पा ने कहा कि ”स्वेटर नहीं है ” तब मैंने पुष्पा से कहा कि जो रुपये दिया था ओ मुझे वापस नहीं करना उसी से स्वेटर ले आना कल दूकान से तो पुष्पा कुछ नहीं बोली और मेरी तरफ प्यार से देखने लगी और बोली ”आप कितने दयालु है लाल साहब ” तब मैंने कुछ नहीं कहा और पुष्पा कि तरफ देखने लगा ,पुष्पा जब आग के सामने हाथ सेक रही थी तो पुष्पा कि साडी का पल्लू कुछ नीचे खिसक गया और पुष्पा के बड़े बड़े बूब्स दिखने लगे मैं पुष्पा के बूब्स को देखने लगा तो ओ सर्मा गई और पल्लू कि टीक कर लिया और मेरी तरफ देख कर हलके से होठ को दबाकर मुस्कुरा दिया तब मैं पुष्पा को देखकर एक आँख को हलके से दबा दिया तो जबाब में पुष्पा ने फिर से होठो को दबाया दात से और मुस्कुरा दिया और कुछ देर बाद चली गई मैं पुष्पा को जाते हुए देखते रहा पुष्पा जब चलती तो उसके बड़े बड़े चूतड़ हिलते तो बहुत ही आकर्षक लगती मैं मन मसोस कर रह गया कि कब मिलेगी ये चोदने के लिए | यही सोचते हुए बैठा रहा कि कुछ देर में पुष्पा कि लड़की चाय लेकर आई तब मैं उसके हाथ से चाय ले लिया और उसे पास में बिठा लिया और प्यार से बाते करने लगा जब चाय पी लिया तो रेणुका कप लेकर चली गई |

मैं 10 बजे के आसपास घर कि बाउंड्री के गेट के पास खड़ा था तो देखा कि पुष्पा हाथ में एक छोटा से पानी का डिब्बा लिए लेट्रीन करने के लिए जा रही थी पुष्पा जब पास से निकली तो मेरी तरफ देखी और मुस्कुराई और तुवर के खेत कि तरफ जाने लगी जब रोड को छोड़कर खेत कि तरफ वाली गली में घुसी तो फिर से मेरी तरफ पलट कर देखी तो मैं भी इधर उधर देखा जब कोई नहीं दिखा पास तो मैं भी पुष्पा के पीछे पीछे चल दिया कुछ दूर जाने के बाद पुष्पा तुवर के खेत में घुस गई ,तुवर के खेत में करीब 6 फिट से भी ज्यादा उचाई कि तुवर के घने पेड़ है जंगल कि तरह कोई अंदर घुस जाए तो कुछ दिखाई नहीं देता ,मैं जल्दी जल्दी खेत कि तरफ चलने लगा जब तक मैं पहुचा तब तक पुष्पा खेत में घुस गई और मुझे नहीं दिखाई दिया तो मैं खेत कि
गली में खड़े हो कर पुष्पा के निकलने का इन्तजार करने लगा तब तक खेत से चूड़ी खनकने कि आवाज आई और खेत में एक तरफ
पुष्पा भाभी की चुचिया १००% ऐसी है
तुवर के कुछ पेड़ हिल रहे थे तो मैं खेत में नीचे कि तरफ झुककर देखा तो पुष्पा खेत के काफी अंदर खड़ी थी मैं खेत के अंदर पुष्पा के पास पहुच गया तो पुष्पा मुझे देख कर मुस्कुराई और धीरे से बोली ” किसी ने आपको आते हुए देखा तो नहीं ” तो मैंने बोला कि नहीं और इतना कह कर पुष्पा को पकड़ के किस कर लिया और पुष्पा के बूब्स को दबा दिया पुष्पा भी लिपट गई मेरे से और मेरे गालो को किस करने लगी जोर जोर से मैंने पुष्पा कि साड़ी के पल्लू को स्तनो के ऊपर से हटा दिया और ब्लाउज के हुक खोलने लगा तो पुष्पा ने हाथ पकड़ लिया और बोली नहीं यहाँ नहीं और कही करेगे तो मैं बोला कि नहीं अब मैं रुक नहीं सकता हु बहुत तड़पा तुम्हे देख देख कर और पुष्पा के हाथ को खिसकाते हुए हुक खोल दिया ,पुष्पा ने ब्रा नहीं पहन रखा था इस कारण पुष्पा के बड़े बड़े बूब्स ब्लाउज से आजाद होते ही लटक कर बाहर दिखाई देने लगे तो मैं झुक कर दाए बूब्स को मुह में डाल कर चूसने लगा और एक हाथ से के बूब्स को दबाने लगा ,पुष्पा कि बूब्स बड़े बड़े होने के कारण लटके हुए है पर है बहुत टाइट मैंने बूब्स कि तारीफ करते हुए पुष्पा को कहा कि बहुत टाइट है बूब्स आपके तो पुष्पा बोली जब कोई मसलेगा नहीं तो टाइट ही रहेगे तो मैंने बोला क्यों ”मंगलू दादा” नहीं दबाते क्या तो बोली एक साल होने को आ गए साथ रहते अभी तक सिर्फ 4 बार ही मेरे साथ सोये है ओ भी आधा -अधूरा तो मैंने धीरे से पूछा कि ‘आधा -अधूरा’ का मतलब तो पुष्पा ने कान में धीरे से कहा कि डालते ही फुस्स हो जाते है पानी कि तरह बहने लगता है उनका रुक नहीं पाते और इतना कहते हुए पुष्पा ने मेरे लण्ड को लोवर के ऊपर से पकड़ लिया , लण्ड पुरे सबाब में तन कर लोवर के अंदर खड़ा था मैं पुष्पा के बूब्स को चूसने लगा तो पुष्पा भी गर्म पड गई और लोवर के अंदर हाथ डालकर लण्ड को पकड़ लिया और बोली लाल साहब बहुत मस्त है आपका और इतना कहते हुए लोवर को खिसका दिया तो मेरा 10 इंच लंबा और मोटा लण्ड ऊपर कि तरफ 40 डिग्री में खड़ा लण्ड बाहर निकल गया तो पुष्पा घुटने के बल खड़ी हो गई जमीन पर और लैंड को चूमने लगी तो मैंने पुष्पा कि साड़ी को खीचते हए वदन से अलग कर दिया और तुवर के कई पेड़ को पाँव से दबा दबा कर लेटने लायक जगह बना लिया और साड़ी को बिछा दिया और पुष्पा को पीठ के बल लिटा कर पेटीकोट को उतारने लगा तो बोली मत उतारो इसे और अपने हाथो से पेटीकोट को कमर तक उठा लिया तो पुष्पा कि मोटी मोटी गोरी गोरी चिकनी जांघे दिखने लगी मैं जांघो को सहलाने लगा और बुर पर हाथ घुमाया , बुर के ऊपर बड़े बड़े बाल थे लगता है कभी सफाई नहीं किया बाल के कारण बुर का छेद दिखाई नहीं दे रहा था मैंने पुष्पा से पूछा कि इसे साफ़ नहीं करती हो क्या तो बोली कैसे साफ़ करू पता नहीं ,जब रेणुका हुई तब नर्स ने एक बार साफ़ किया था उसके बाद कभी साफ़ नहीं किया तो मैंने बोला मतलब 11 साल से साफ़ ही नहीं किया , इसे साफ़ करते है तो बोली कैसे तो मैंने उसे बताया कि कल मैं तुम्हे दुगा हेयर रिमूवर क्रीम उससे साफ़ कर लेना तो बोली टीक है और मैं पुष्पा कि बुर के छेद को हाथ से फैलाया और चाटने के लिए झुका तो पुष्पा ने मेरे सर पर हाथ लगाते हुए ठेल दिया और बोली ये क्या कर रहे हो ,ये कोई मुह लगाने कि चीज है क्या तो मैंने बोला हां क्या बुराई है तो बोली गन्दी है अभी अभी पेसाब किया है तो मैंने बोला क्या फर्क पडेगा पेसाब तो निकल कर बाहर हो गई और इतना कह कर पेटीकोट को खीच कर पुष्पा कि बुर को साफ़ कर दिया और बोला ”अब टीक है ना ” तो पुष्पा कुछ नहीं बोली तब मैंने पुष्पा कि बुर को जीभ से चाटने लगा पुष्पा मेरे सर पर हाथ घुमाने लगी मैं पुष्पा कि बुर को 2 मिनट तक जीभ डाल -डाल कर चाटते रहा पुष्पा अब मेरे सर को फिर से बाहर करने लगी और मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी तरफ खीचने लगी ,फिर भी मैं पुष्पा कि बुर को चाटे जा रहा था ,पुष्पा खेत कि मिटटी में पानी मछली कि तरह तड़प रही थी ,कुछ समय में पुष्पा बैठ गई और मुझे जोर से अपनी तरफ खीच कर चिपक गई और मेरे होठो को जोर जोर से चूसने लगी और एक हाथ से लण्ड को पकड़ कर अपनी तरफ हलके से खीच लिया और दोनों टांगो को फैलाते हुए बाए हाथ को मेरी कमर में डाला और खीच कर नजदीक कर लिया और लण्ड के पास बुर को ले आई तो मैंने हलके से धक्के के साथ लण्ड को बुर के मुहाने में लण्ड को टिका दिया और पुष्पा को लिटा दिया उबड़ -खाबड़ खेत में और लण्ड को पुष्पा कि बुर में घुसाने लगा तो पता चला कि पुष्पा कि बुर अभी भी टाइट है , पुष्पा कि बुर में खूब चिकनाई आ गई थी फिर भी मैंने बुर में थूक कर बुर को और चिकनी कर दिया और लण्ड को पहले हलके हलके घुसाया जब लण्ड का सूपड़ा घुस गया तो एक जोर का झटका मारा तो पुष्पा ने मुह से आआआआआआअ आह आह कि आवाज निकाली और पूरा का पूरा लण्ड घुसेड़ कर लेट गया पुष्पा के ऊपर और पुष्पा के कान में धीरे से बोला ”दर्द हुआ क्या ” तो पुष्पा ने ”न” में सर हिला दिया और मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे गोरे -गोरे लाल टमाटर कि तरह चिकने गाल को किस किया मैं पुष्पा कि बड़ी बड़ी चुचियो को मुह में डाल कर चूसने लगा और हलके हलके झटके मारने लगा पुष्पा कि बूर में पुष्पा मजे के साथ चुदाने लगी 3 मिनट बाद ही पुष्पा ने कान में धीरे से कहा कि जल्दी कर लो कोई जान नहीं जाय तब मैं जल्दी जल्दी झटके मारने लगा और पुष्पा उ उ उ उ आह आह आह आह आ आ आ कि हलकी हलकी धीरे धीरे आवाज निकालने लगी और जल्दी ही चिपक गई मेरे साथ मैं समझ गया पुष्पा झर चुकी है तब मैं 10 -15 झटके जल्दी जल्दी मारा और वीर्य को पुष्पा कि चूत में उड़ेल दिया तो पुष्पा जल्दी से उठकर बैठ गई और चूत से बहते हुए गाढ़ा वीर्य को देखने लगी और फुसफुसा कर कान में बोली कि आपका ‘माल ‘ तो बहुत गाढ़ा है ,तब मैंने कुछ नहीं बोला तो पुष्पा ने चुम लिया और बहते हुए वीर्य को पेटीकोट से पोछ लिया और जल्दी से उठी और मुझे बोली आप इस रास्ते से निकल जाओ मैं दुसरी तरफ से आती हु ,तब मैंने पुष्पा को बोला कि कल तुम्हे बाल साफ करने कि क्रीम दुगा उससे बाल साफ़ कर लेना और ब्रा दुगा उसे पहनना तो पुष्पा मुझे ठेलते हुए बोली कि अभी तो आप जाओ यहाँ से जल्दी कल मिलूगी वही बात करुँगी नदी किनारे वाले खेत में तब मैंने बोला टीक है और मैं खेत से तुवर के पेड़ हिलाए बिना धीरे धीर बाहर निकल कर घर पहुच गया और बाहर कुर्शी में बैठ गया मोबाइल में देखा तो 10 बजकर 20 मिनट हो रहे थे करीब 11 बजे पुष्पा बाल्टी लेकर आई और बाथरूम कि टंकी से पानी भरने लगी तो मैं टंकी के पास गया और कुछ बात करता इतने में पुष्पा बोली जाइये यहाँ से कोई आ नहीं जाए तो मैंने पुष्पा को बताया कि अभी अभी मम्मी और भाभी उस गाँव चली गई है तो पुष्पा ने कहा कि बड़े ठाकुर आ जायेगे तब मैं कुछ नहीं बोला और बाथरूम से बाहर आ गया और पुष्पा पानी लेकर चली गई तो मैं टावेल -साबुन -सैम्पू लेकर नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया तब तक पुष्पा फिर से आई बाल्टी लेकर और बाथरूम में जैसे ही मुझे देखा बाहर निकलने लगी तो मैंने बोला यही से भर लो पानी तो पुष्पा ने नल के नीचे बाल्टी लगा दिया और बगल में खड़ी हो गई तो मैंने बोला लो मेरे पीठ कि मैल निकाल दो घिस कर तो पुष्पा बाथ रूम के बाहर झांक कर आई कोई नहीं दिखा तो वापस आकर मेरे पीठ को घिसने लगी अपने कड़क हाथो से [काम करने से पुष्पा के हाथ कठोर हो गए है, काम करने के कारण ही पुष्पा का जिस्म भी टाइट है] हाथ से पीठ को साफ़ करते हुए पुष्पा बोली ”आपका शरीर बहुत मस्त है इस उम्र में भी इतना कड़क और जवान है ” और मेरी पीठ को आगे के हिस्से छाती को यहाँ तक कि मेरी छाती कि निप्पल को खूब घिस घिस कर मुझे उत्तेजित कर दिया तो मैं उठकर पुष्पा के स्तनो को मसल दिया और पकड़ कर किस कर लिया तो पुष्पा जल्दी से बाथरूम से बाहर निकल गई और बाहर से बोली अब नहीं आउगी आप बहुत बदमास हो लाओ मेरी बाल्टी दे दो तो मैंने बाल्टी को निकाल कर दे दिया और पुष्पा चली गई मैं बाथरूम से नहाकर निकला और बाहर ही बैठकर तेल मालिश करने लगा इतने में पुष्पा फिर से आई पानी लेने और मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराते चली गई पानी भरने के लिए इतने में दादा आ गए और अपनी बुलट रोक कर उतरे तो पुष्पा दिखी तो उसे आवाज देकर अपने पास बुलाया और बोला कि नदी किनारे वाले तेरे खेत [पुष्पा ने बटाई में खेत ले रखा है] में जो प्याज लगी है उसकी घास कल निकाल देना तो पुष्पा बोली ”जी दादा साहब” दादा इतना कहा कर घर के अंदर चले गए और पुष्पा मेरी तरफ मुस्कुराते हुए चली गई ,मैं साम को गाँव कि दूकान से ”वीट ” हेयर रिमूवर क्रीम और एक छोटी से कैची लाया और रख लिया साम को साली के घर चला गया वही से खाना खाकर रात में 11 बजे आकर सो गया सुबह 8 बजे तक उठा फ्रेश होने बाद नास्ता किया और बाहर आकर बैठ गया कुछ देर में पुष्पा आई और भाई साहब से बोला मैं जा रही हु नदी किनारे वाले खेत में प्याज कि घास निकालने तो भाई साहब ने कहा टीक है जा, मैं समझ गया पुष्पा मुझे इसारा करने के लिए आई है जब पुष्पा चली गई तो मैं भी 50 मिनट बाद बाइक से मैं भी चल दिया जाने के पहले एक वियाग्रा कि गोली खा लिया जिससे कि पुष्पा कि अच्छी चुदाई कर सकू आज मैं 5 मिनट में ही खेत पहुच गया जहा पर पुष्पा नरम नरम घास उखाड़ उखाड़ कर रख रही थी मैं जाते ही पुष्पा को बोला कि कुछ घास बोरे में डाल दो तो पुष्पा ने पूछा क्या करोगे तो मैंने बोला घास दाल दो बाद में बताऊगा तो पुष्पा ने दो बोरे में आधा आधा भर कर घास डाल दिया मैं दोनों बोरो को उठा कर तुवर के खेत में घुस गया और वहा पर कुछ तुवर के पेड़ को झुका कर बोरो को बिछा दिया घास सहित और बढ़िया मुलायम गद्दा बना दिया और पुष्पा को इशारा किया तो पुष्पा इधर उधर देखी और जल्दी से [नदी के किनारे यहाँ पर बहुत सुनसान है कोई भी घर नहीं है 2 किलोमीटर तक बिलकुल सुनसान है कोई नहीं आता सभी खेत हमारे ही है यहाँ पर ]

यह कहानी भी पड़े  मस्त राम सेक्स कहानी - वफ़ा या हवस

error: Content is protected !!