कविता भाभी के साथ चुदाई-1

हेलो दोस्तो मेरा नाम प्रशांत है और में पहली बार यह स्टोरी लिख रहा हूँ. उमीद है आपको अच्छी लगे.

मेरी यह स्टोरी रियल है जोकि बहुत साल पहले की है. देखिए कैसे मैने अपनी कविता भाभी को पटाया और उनके साथ बहुत मजेदार सेक्स किया और बाकचा भी हुआ उनके साथ लेकिन किसिको अब तक मालूम नही की वो हमारा बच्चा है.

यह बॅयात तब की है जब में हयदेराबाद में नौकरी के सील सिले में अपने भाई के साथ रहता था. में और मेरा भाई हम दोनो अकेले ही रहते थे.

भाई की तब एंगेज्मेंट हुई थी लेकिन उनकी एक आक्ची नौकरी नही होने की वजह से उनकी शादी नहीं हो रही थी. भाभी मेरी मुंबई की थी और वो कई बार हयदेराबाद आती थी क्यूंकी वो एंगेज्मेंट 6-7 साल तक चला.

मेरी कविता भाभी इतनी गोरी और बहुत सुंदर एकदम लव्ली बूब्स और उनका पूरा गोरा बदन में देखता ही रह जाता था. और वो जब बी अपने घर आती थी मेरे भाई को मिलने तो मेरे को वो बहुत ही आक्ची लगती थी.

मॅन ही मॅन सोचता था काश में उनके साथ शादी कर लून और में उससे प्यार करने लगा. लेकिन कुछ बोल नही पाता था. वो मेरे से सिर्फ़ एक महेना बड़ी थे. में बहुत ही उत्तेजित हो जाता था और मेरा लंड खड़ा हो जाता था.

दो साल के बाद भाई की एक आक्ची जॉब मिल गयी अच्छे 5 स्तर होटेल में और उनकी शादी हो गयी. और क्यूंकी में भी साथ में रहने लगा तो हुँने एक बड़ा सा घर लिया और हम तीनो साथ में रहने लगे.

अब तो क्यूंकी भाभी साथ में रहने लगी तो में उनको देखता ही रहता था. काई बार भैया रात को जब वो बेडरूम जाते थे तो में काई बार उनके बेडरूम के बाहर उनकी काई बार किस्सिंग और छीलाने की आवाज़ आती थी. तो में उनके बेडरूम के दरवाज़े के बाहर चले जाता था और कविता भाभी को इमॅजिन करता था और मेरा लंड बहुत ही बड़ा हो जाता था.

हुमारा बातरूम एक ही कामन रहता था और अटॅच्ड नही था. मैने देखा भैया के साथ सेक्स होने के बाद वो बाहर आती थी और बातरूम जाती थी और उनकी पनटी बातरूम में ही रख के जाती थी. और फिर जब भैया जाते थे सबेरे 7 बजे तो वो उठ थी थी और वो ही पनटी पहन कर फिर सो जाती थी और 8.30 बजे उठ थी थी.

लेकिन काबी काबी भाभी नही आती थी बातरूम में. तो में समाज जाता था की वो आज सेक्स नही किया भैया के साथ. एक दिन मैने रात को बातरूम गया भाभी के जाने के बाद और उनकी ब्लू पनटी उठाई जो की उसने रखी थी और उनको सुँगा….

भाभी के पेशाब और उनकी छूत की पानी को बी सुँगा…. एक दम से लंड खड़ा हो गया…. ह्म कविता भाभी को इमॅजिन किया और फिर अपने अंडरवेर से मसाज किया भाभी की ब्लू पनटी को… में पागल हो गया…

फिर मैने लंड जो की घीली हो चुकी थी उनकी ब्लू पनटी पर रगड़ा. और अपना पूरा पानी उस पनटी पर निकल दिया भाभी को इमॅजिन करते करते.. वो ब्लू पनटी पूरी घीली हो चुकी थी मेरे लंड के पानी से..

मैने इमॅजिन किया की अब वो सबेरे पहने गी और मेरा पानी उनके छूत को टच करेगा. और खुश होने लगा और दर्र भी रहा था. लेकिन उसने सबेरा कुछ बोला नहीं और नज़र अंदाज़ किया या फिर शर्मा रही थी शायद.

मेरा ऑफीस बिल्कुल पास में था तो में देर से बे जाता था और लंच के लिए बे घर आता था. भाभी को देर से उठाने की आदत थी इसीलिए वो भैया जाने के बाद उठती थी और मेरे जाने से करीब 1 घंटा पहले उठती थी. उठकर वो सब नहाना वगेरा सब करती थी.

तो उनको काई बार बातरूम के बाहर खड़े होकर भाभी को इमॅजिन करता था. और मेरा लंड बहुत बार खड़ा हो जाता था और बहुत ही बड़ा भी हो जाता था. वो मेरे पॅंट्स में बड़ा दिखता था और मेरे को मुश्किल हो थे थी पॅंट्स को अड्जस्ट करने में. एक दो बार उन्होने मेरे पॅंट्स को बाहर से मेरे लंड को अड्जस्ट करते हुए देख भी लिया. लेकिन शरम के मारे उन्होने कुछ बोला नहीं यह फिर नज़र अंदाज़ कर लिया.

एक दिन भाभी बीमार थी और सुबह को भैया जाने के बाद उठी नहीं थे तो में जाके पूछा-

में : भाभी आप ठीक हो?

भाभी : कुछ नहीं बस तोड़ा सा तबीयत खराब है.

में : क्या हुआ भाभी?

भाभी : जाने दो तुम नही संजोगे… लॅडीस प्राब्लम है

में : ओक ठीक है.. भाभी बुखार है क्या?

और में उसके गाल पर हाथ लगाया बुखार चेक करने के लिए.

अब तो मेरे को करेंट जैसे लग गया क्यूंकी पहली बार भाभी को टच किया. तो मेरा लंड एक दम से खड़ा हो गया और मेरा पंत से खड़ा होते दिख रहा था.

भाभी ने गुस्से से बोला हटाओ अपना हाथ और जाओ इडार से. क्यूंकी उसने देख लिया मेरे पॅंट्स में लंड को अड्जस्ट करते हुवे. तुम्हारे भैया को बोल दूँगी तुम्हारी यह सब हरकत देख रहीं हूँ काई दीनो से.

मैने बोला सॉरी भाभी मेरे को पेशाब में तकलीफ़ है इसके लिए खुजली हो रही है. अभी में कभी नही करूँगा क्यूंकी भाई मेरे को घर से बाहर निकल देंगे. और मेरे पास अकेले रहने की ताक़त अभ नहीं है… प्लीज़ करके उनको गिड गीडया और माफी माँग ली. वो मान गयी और में उनको बोला बभी में छूती लेता हूँ आपको डॉक्टर को दिखाते आती हैं. उसने बोला ठीक है और बोला तुम्हारा बी तकलीफ़ देखा दो.

भाभी को पहली बार बिके पर लेजने का मौका बहुत ही उतेजिक हो रहा था. भाभी को बोला मेरा कमर पर हाथ पकड़ कर रखो और फिर जान बूज के ब्रेक मारता रहा. और भाभी का बूब्स का टच मिलता रहा और मेरा लंड खड़ा होता जेया रहा था. बहुत ही बड़ा हो गया था.

एक बार तो खड्डे के वजह से सडन ब्रेक मारा और उसका हाथ सीडा मेरे लंड जो की पहले से ही बड़ा हो चुका था. भाभी ने उनको पकड़ा और में तो बहुत ही पागल हो गया.

वो शर्मा गयी और नज़र अंदाज़ कर लिया. फिर हुँने लॅडीस डॉक्टर को दिखाया और मेरे को बाहर रुकने के लिए बोला डॉक्टर ने. मैं बाहर रुका और बहुत देरी हो चुकी थी भाभी आ ही नही रही थी तो में अंदर गया…. तो में देखते ही रह गया…

डॉक्टर तो भाभी के गांद में अपना हाथ ग्लव्स पहन कर दल रही थी…. ऊऊओप्सससस में तो बहुत ही उतीजित हो गया. क्यूंकी उनकी पूरी गोरी गोरी झांगे और उनकी गांद जोकि थोड़े बालों से डक्का हुआ था मैने पहले बार देखी…. उसको देखते ही रह गया….

डॉक्टर चिल्लाया….. और भाभी बी… बाहर जाओ… क्यूँ आया अंदर…. ऐसे करके डन बोले… में फिर बाहर आ गया. वो छूट और उनकी गोरी गोरी जांगो को पागल की तरह सोचने लगा. क्यूंकी मैने पहले बार किसी लड़की की चूत और गोरी गोरी जांगो को देखा और वो भी मेरे भाभी का. जिससे में बहुत प्यार करता हूँ..

ऐसे सोचते सोचते मेरा लंड बहुत ही बड़ा हो चुका था और पंत में बाहर बहुत बड़ा दिख रहा था. फिर में जल्दी से टाय्लेट चला गया और भाभी और उनकी जांगो और छूट को इमॅजिन करते हुए मूठ मार दी.

हम फिर घर आ गये. भाभी बहुत ही शरमाई हुई थी और फिर उसने मेरे को बोली की में अब भैया से बोल दूँगी तुम्हारी शादी जल्दी से करवा दो और पूच रही थी कैसी लड़की चाहिए.

मैने बोला भाभी मेरे को आप ही चाहिए और में आप से बहुत ही प्यार करता हूँ. ऐसे सुनके वो बहुत शर्मा गयी.. और बोली प्रशांत तुम बहुत ही बेशरम हो.

हुमारी घर की चाबी हम तीनो के पास रहती थी.. में भाभी और भैया के पास जिससे हम कभी बी घर का दरवाज़ा खोल के आ सके. एक दिन में जब लंच पे आया तो देखा भाभी घर पर नही हैं. तो में टाय्लेट चला गया और देखा भाभी का मेली रेड पनटी पड़ी थी…

तो मैने उस को अपने लंड से मसाज करने लगा… लेकिन दरवाज़ा अंदर से लॉक करना भूल गया उतेज़िक होके…फिर भाभी आ गयी बाहर से और वो बातरूम खोली तो उसने मेरा बड़ा लंड देख ही लिया और शर्मकार दरवाज़ा बंद कर लिया और चली गयी.

दोस्तों आगे देखते हैं में फिर कविता भाभी को कैसे पटाया और उनको काई बार छोड़ा और अपना बचा भी हुआ.

आयेज की स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में जारी रहेगी.

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