कमसिन बेटी की महकती जवानी-4

अब तक की सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा कि बापू अपनी जवान बेटी के बदन से खेल रहा था और उसकी मिन्नत कर रहा था.
बापू घुटनों पर ही था और सर ऊपर उठाकर पद्मिनी से कहा- बस अपना यह स्कर्ट ऊपर उठाकर बापू को अन्दर की जाँघ और अपनी पेंटी दिखा दे, मैं बहुत खुश हो जाऊँगा.
पद्मिनी शरम और हल्के से गुस्से से लाल पीली होते हुए बोली- क्या??
अब आगे…

तब तक बापू उसकी स्कर्ट को उठाने की कोशिश में था और पद्मिनी झुक कर अपनी स्कर्ट पर दोनों हाथों को रखते हुए कहने लगी- आज आप क्यों टीचर की तरह बर्ताव कर रहे हैं बापू?
तब बापू ने अचानक कहा- अरे हाँ, तुमने तो अभी तक मुझको कहा ही नहीं, जो बातें की जा रही है तेरे और टीचर के बीच?
पद्मिनी ने कहा- आपको आज सब कुछ स्कूल से आने के बाद आज पक्का बताऊँगी… ठीक है बापू?

फिर बापू ने उसकी जांघों को छूते हुए कहा- मगर जाने से पहले मेरी गुड़िया यह तो दिखा दे… क्या तू अपने बापू को प्यार नहीं करती!
तब पद्मिनी को जैसे बापू पर कुछ तरस आया और कहा- अच्छा सिर्फ एक बार ठीक है? फिर मैं निकालती हूँ.
बापू ने ख़ुशी से अपने लंड पर लुंगी के नीचे हाथ डालते हुए कहा- हाँ ठीक है मगर धीरे धीरे, हौले हौले स्कर्ट को उठाना और मेरे हाथों को थोड़ा सा छूने भी देना.

पद्मिनी ने मुस्कुराते हुए सर को हाँ में हिलाया और अपने दोनों हाथों की उंगलियों से अपनी स्कर्ट की नीचे वाले हिस्से को थाम कर उठाना शुरू किया.
बापू वहीं ठीक उसके सामने घुटनों पर पड़ा था. ज्यूँ ज्यूँ स्कर्ट उठता गया, त्यों त्यों बापू की आँखों को पद्मिनी की गोरी जाँघें और भी गोरी दिखाई देने लगीं. स्कर्ट के नीचे वाले हिस्से… कहीं पर गुलाबी रंग तो कहीं सफ़ेद रंग की जांघों को देखते हुए बापू अपने लंड को एक हाथ में थामे कुछ कुछ उसको हिलाने लगा. लुंगी के नीचे लंड था तो पद्मिनी को नज़र तो नहीं आ रहा था. मगर उसको खूब पता था कि बापू उसकी जांघों को देखकर मुठ मार रहा है.

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उसका स्कर्ट और ऊपर उठता गया… और ऊपर और थोड़ा सा ऊपर… पद्मिनी अपने बापू को खुश करने के लिए स्कर्ट उठाती गयी और बापू ज़ोरों से अपना हाथ अपने लंड पर लुंगी के नीचे मारते गया… जैसे ही पद्मिनी की सफ़ेद पेंटी थोड़ा सा नज़र आयी, बापू ने अपना मुँह जल्दी से उस मुलायम पेंटी पर रख दिया और चाटने लगा. एक हाथ से मुठ मारते और एक हाथ से पद्मिनी की चूतड़ों को थाम कर अपने लंड को शांत करने लगा.

पद्मिनी ने ‘आह इस्स्स्स… उह्ह्सस…’ की धीमी सी आवाज़ दी, जब उसने अपने बापू की जीभ को अपनी पेंटी पर महसूस किया. पद्मिनी ने एक लम्बी सिसकारी छोड़ी. जब बापू का जीभ वहां से हट कर उसकी जांघों को चाटने लगा.
तभी अचानक बापू ने कराहना शुरू किया- आह… आआअह्ह…

पद्मिनी ने देखा कि बाप की लुंगी उसके झड़ने से भीग गयी. लंड की मुठ मार कर बापू सिर्फ पद्मिनी की जाँघ और पेंटी देख कर और छूकर ही खुश हो गया था.

अपने होंठों को पद्मिनी ने दांतों में दबाते हुए धीरे से बापू के कानों में झुक कर कहा- अब मैं चलती हूँ… आपको तो मज़ा आ गया ना बापू मेरे?
पद्मिनी अपने बापू के दोनों गालों पर ज़ोर से चुम्बन देकर घर से दौड़ते हुए निकल गयी.
बापू ने ज़ोर से चिल्ला कर कहा- भूलना मत कि आज शाम को तुम मुझको टीचर के बारे में सब बताओगी.
पद्मिनी जाते हुए बाहर से चिल्ला कर जवाब दिया- हाँ बापू आज वापस आने के बाद ज़रूर बताऊँगी… बाय बाय बापू…

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पद्मिनी बापू को एक फ्लाइंग किस हवा में उछालते हुए हंस दी. उसके इस फ्लाईंग किस को बापू ने हवा में से लपक लिया और अपने होंठों को चूमकर कहा- लो मेरी एक नयी जीवन अर्धांगिनी मिल गयी मुझको…

फिर आसमान को देखते हुए बापू ने कहा- हे पुष्पा… तुमने पद्मिनी के रूप में फिर से जन्म ले लिया, उसमें तुम रूबरू बसी हो, क्या तुम सच में आ गयी हो क्या अपनी पद्मिनी में? मुझे उसके जिस्म से तुम्हारी खुशबू आती है, उसकी बाज़ुओं के नीचे की महक, बिल्कुल तेरी महक है… जो मुझे बहुत पसंद था… मुझे माफ़ करना पुष्पा… अगर मैं ग़लत कर रहा होऊं तो… मगर तू उसमें बसी है तो मैं तुमको कैसे छोड़ सकता हूँ? कभी नहीं छोड़ूँगा… उसको हमेशा अपने साथ ही रखूँगा. अपनी पद्मिनी को अपनी जीवन साथी बना लूँगा. मुझको तो लगता है ये सब तुमने ही किया था, तुमको पता था कि तू चली जाएगी, इसलिए तुम उसको मेरे लिए छोड़ गयी हो… है ना पुष्पा?

पुष्पा पद्मिनी की माँ का नाम था.

बापू कुछ देर बाद सभी पुष्पा की तस्वीरों को निकाल कर देखने लगा और उसकी और पद्मिनी की तस्वीरों को मिलाकर दोनों के बीच का फर्क देख रहा था. फर्क था ही नहीं… बिल्कुल जैसे कि पुष्पा ही की तस्वीर थी, जब वह जवान थी तब जैसी ही छवि थी. बापू को एक अजीब सा मज़ा आ रहा था. यह सब सोच सोच कर कि उसको चोदने के लिए दुबारा से एक कुँवारी चूत मिल गई. उसको इतनी खूबसूरत जवान लड़की मिलेगी, ये उसने सपने में भी नहीं सोचा था.

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