कहानी जिसमे लड़के ने पड़ोस वाली आंटी का जिस्म टाडा

हेलो दोस्तों, मेरी पिछली कहानी को अप्रीशियेट करने के लिए मैं आप सब का आभार व्यक्त करता हू. ई होप आपको ये पार्ट पढ़ कर भी मज़ा आएगा. तो चलिए अब बढ़ते है आयेज की कहानी की तरफ.

उस दिन मैं मम्मी, पापा, और भाई को स्टेशन छ्चोढ़ कर दुकान गया, और काम करके वापस रात को 9:30 बजे घर आ गया. मैने घर आके देखा, तो अंकल और ऋषभ दुकान से घर आ चुके थे.

फिर मैं उनके घर हमारे घर की के लेने गया, तो आंटी ने मुझे कहा-

आंटी: तू ड्रेस चेंज करके आजा, खाना रेडी रखा है. हम लोगों ने तो खाना खा लिया है, और बस तू ही बचा है. तो जल्दी आके खा ले.

मोहन: मुझे कुछ खाद भूख नही है आंटी.

आंटी: कोई बहाना नही चलेगा. मैने बहुत टेस्टी खाना बनाया है. तू खाएगा, तो उंगलियाँ चाट-ता रह जाएगा. आजा जल्दी, जितना तेरा दिल करे, उतना ही खा लेना.

तो मैं अपने घर गया और ड्रेस चेंज करके आंटी के घर आ गया. मैं डाइरेक्ट किचन में गया, आंटी वही पर थी. फिर आंटी ने मुझसे कहा-

आंटी: खाना खा ले, और हमारे घर पर ही सो जाना .

मोहन: आपके घर पर, क्यूँ?

आंटी: तुम्हारी मम्मी मुझे बोल कर गयी है, की मैं तुम्हारा ध्यान रखू, इसलिए बोल रही हू.

मोहन: ओक ठीक है.

( ऋषभ और ममता एक ही रूम में सोते है, और अंकल और आंटी एक रूम में सोते है. हॉल में कोई नही सोता )

आंटी: ऐसा करना, तू ऋषभ के साथ सो जाना, और ममता हमारे रूम में सो जाएगी.

मोहन: ठीक है आंटी.

हम बातें करते-करते मैने खाना खा लिया, और उसके बाद हम सब टीवी पर मोविए देखने लग गये.

रात के 10:30 बाज चुके थे, और अब सोने का टाइम था. तो हम लोग एक-दूसरे को गुड नाइट बोल कर मैं और ऋषभ अपने रूम में आ गये, और अंकल-आंटी अपने रूम में चले गये सोने के लिए.

ममता के स्कूल की छुट्टी चल रही थी, तो वो रात को लाते सोती थी, और सुबा लाते उठती थी. अंकल और ऋषभ रोज़ सुबा 7 बजे उठ कर 8 बजे दुकान के लिए निकल जाते थे. और मैं 8 बजे उठता हू, और 9:30 बजे दुकान जाता हू.

सुबा जब मैं उठा, तो मेरे रूम में कोई नही था. फिर मैने अपने फोन में टाइम देखा, तो 8:30 बजने वाले थे. मैं हॉल में चला गया, और देखा तो ममता आंटी के रूम में सो रही थी. फिर मैं किचन की तरफ गया, तो आंटी किचन में बर्तन मांज रही थी. मैं आंटी के पास गया और बोला-

मोहन: गुड मॉर्निंग आंटी, कैसे हो?

आंटी: गुड मॉर्निंग, उठ गया तू? मैं अची हू, तुम बताओ. रात को नींद आ गयी थी आचे से.

मोहन (प्यार से): जी आंटी, नींद तो आ गयी थी. वैसे आंटी, मुझे 8 बजे उतना चाहिए था ना?

आंटी: जब मैं रूम में आई थी, तो तू गहरी नींद में था. तो तुम्हे उठना ठीक नही लगा मुझे.

मोहन: ओक, लेकिन कल से अंकल और ऋषभ के 8 बजे दुकान चले जाने के बाद मुझे उठा लेना, ओक?

आंटी: ठीक है, उठा लूँगी बाबा. अब तू नहा कर आजा. मैं तब तक तेरे लिए छाई-नाश्ता रेडी करके रखती हू.

मोहन: ओक.

फिर मैं उनके घर से मेरे घर की के लेकर निकला, और अपने घर नहाने के लिए चला आया. नहाते वक़्त मैने एक बार आंटी के बारे में सोच कर मूठ मार ली, और रिलॅक्स फील करने लगा.

नहाने के बाद मैं वापस आंटी के घर आया, और छाई-नाश्ता करने लगा. मैं छाई-नाश्ता कर रहा था, और आंटी मेरे पास आके बैठ गयी. वो मेरे पास बैठ कर बात करते-करते टीवी देखने लगी.

ममता अभी तक सो रही थी. वो 10 बजे तक सोती थी. मैं नाश्ता करके अब दुकान पर जाने के लिए रेडी था. फिर मैं आंटी को बाइ बोल कर दुकान चला गया.

मैं दोपहर को लंच करने के लिया घर आया, तो 2:30 बाज चुके थे. मेरा लंच टाइम 1 घंटे के लिया होते है. मैं घर आया, तो आंटी सो रही थी. तो मैने आंटी को फोन करके उनको दरवाज़ा खोलने को बोला.

फिर आंटी ने आके दरवाज़ा खोल दिया, और मैं घर के अंदर चला गया. अंदर जेया कर देखा तो घर में कोई नही था. ममता उनके रिश्तेदार के घर गयी थी, जो आंटी की बेहन है उनके घर. हमारे घर से 5 केयेम है उनका घर.

फिर मैं किचन में गया, और प्लेट में रोटी और सब्ज़ी लेकर हॉल में आ कर बैठ गया. आंटी वापस रूम में सोने के लिए चली गयी. मैं उन्हे डिस्टर्ब नही करना चाहता था, इसलिए खाना खा कर फोन में देसी कहानी पढ़ने लगा.

फिर तोड़ा टाइम कहानी का मज़ा लेने के बार मेरा दुकान जाने का टाइम हो गया. तो मैं आंटी को जगाने के लिए उनके रूम में गया, और देखा तो आंटी गहरी नींद में थी.

फिर मैने उन्हे ध्यान से देखा. वो बहुत हॉट लग रही थी. उनके पेट और बूब्स के उपर की सारी नीचे गिरी हुई थी. उनको देख कर मेरा मॅन मचल गया. दिल तो कर रहा था, की उनको खा ही जौ.

फिर मैं उनके पास गया और उन्हे जगाने की कोशिश करने लगा. आंटी जाग गयी, और वो अपनी सारी ठीक करने लगी, और मुझे घूर्ने लगी.

मैने बोला: आंटी मैने कुछ नही किया. वो मैं आपके रूम में आया तो आप ऐसे ही सोई हुई थी.

आंटी: क्या हुआ, मुझे क्यू जगाया?

मोहन: आंटी मैं दुकान जेया रहा हू. आप दरवाज़ा बंद कर दो.

आंटी ( नींद में ): ठीक है बाइ.

मोहन: ओक बाइ आंटी.

ये बोल कर मैं घर से दुकान के लिए निकल गया.

दोस्तों अगर आपको मेरी कहानी अची लगी हो, तो मैल ज़रूर करे. फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की. अगर कोई भी आंटी, भाभी, या लड़की मुझसे बात करना चाहती है, तो वो भी मुझे कॉंटॅक्ट कर सकती है. अगर आपको सेक्स करना है, तो मैं सॅटिस्फॅक्षन की गॅरेंटी देता हू, और सेक्यूरिटी की भी.

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