जो दर्द होना था हो गया 2

गतांक से आगे……………….जो दर्द होना था हो गया
उसे अपनी इस हरकत पे बहुत शर्म आई और उसने अपना हाथ लंड से हटा कर नीचे देखने लगी और मुस्कुराने लगी |भैया ने जब माला को शरमाते देखा तो बोले : “अब क्या शर्मा रही है , अब तो मज़ा लेने का वक्त आ गया है . रुक जा मैं तेरी बाकि की शर्म भी दूर कर देता हू ” ये कहते हुए भैया ने अपनी चड्डी को नीचे करना चालू कर दिया , माला बहुत उत्सुकता से बाहर आते लंड को देख रही थी |थोड़ी देर मैं भैया ने अपनी चड्डी को पूरी तरह से निकाल कर अपने कपडो की तरफ उछाल दिया |मैंने देखा भैया का लगभग ७ इंच लंबा और करीब २.५ इंच मोटा लंड सीधे ऊपर की तरफ देखते हुआ फुफकार रहा था जैसे कोई नाग हो | भैया के लंड को देखकर माला का गला सुख गया बहुत धीरे से बोली : “बाप रे कितना बड़ा और मोटा हो गया है ये .” भैया ने कहा “सब तेरी वजह से ही तो हुआ है ,

देख तुझे देख कर कैसे उछल रहा है मेरा लंड “.माला बिना पलके झपकाये उस गोरे-चिट्टे लंड को देखे जा रही थी | भैया अब थोडा बेशरमी पे उतर आये थे उन्होंने ने माला से कहा : “एक बार पकड़ के देख ना कितना गरम हो गया है . “. माला जैसे नींद से जागी और बोली : ” नहीं मैं इसे हाथ भी नहीं लगाउंगी ,मुझे इसे देखकर डर लग रहा है “|भैया ने जबरदस्ती माला का हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया और ऊपर नीचे करने लगे | थोड़ी देर बाद माला की झिझक भी खत्म हो गयी और वो खुद ही हाथ चलाने लगी |भैया की मज़े से आखे बंद होने लगी थी ओर उनके मुह से सिसकियाँ निकलने लगी थी |माला जब लंड पे हाथ फेरते हुए नीचे करती तो चमड़ी के नीचे आते ही मुझे भैया का लाल रंग का सूपाड़ा दिखने लगता |थोड़ी देर बाद ही भैया ने माला से कहा : “एक बार मुह में ले कर देख ना कितना मज़ा आता है “…..भैया की बात सुनते ही माला ने अपने हाथ चलाना बंद कर दिया ओर बोली : “छी कैसी गन्दी बाते करते हो ,

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यहाँ से तो पेशाब करते है मैं मुह में कैसे ले सकती हू “. इसपर भैया ने कहा : “कुछ गन्दा नहीं है , येही जब तेरे अंदर जायेगा तो तुझे इतना मज़ा आएगा कि तू सोच भी नही सकती “. माला ने इसपर आश्चर्य से कहा “ये मेरे अंदर कैसे जायेगा , ये तो कितना मोटा है “. भैया ने कहा: ” मेरी रानी बड़े आराम से जायेगा तेरे अंदर देखना तुझे कितना मज़ा आएगा , अच्छा चल मुह मैं मत ले पर एक बार चाट के तो देख जैसे आईसक्रीम चाटती है “. माला भैया की बात मानते हुआ घुटनों के बल बैठ गयी ओर लंड को एक हाथ से पकड कर अपना मुह उसके पास लायी.| लंड के पास आते ही उसकी मादक सी महक माला की नाक में गयी तो वो थोड़ी मदहोश सी हो गयी और धीरे से अपना मुह खोलकर जीभ को बाहर निकाला | उसके छोटे से मुह के सामने लंड काफी विशाल लग रहा था |

माला ने भैया की आखो में देखते हुए धीर से लंड पे अपनी जीभ रखी , और मुह को ऊपर की तरफ ले जाते हुए लंड का पहली बार स्वाद चखा | भैया की तो मज़े से आह निकल गयी और वो लंड चटाई का मज़ा लेने लगे |भैया ने थोड़ी देर बाद माला से कहा ” एक बार सुपाडे को तो चाट के देख “.माला ने वैसा ही किया .|माला की जीभ सुपाडे पे पड़ते ही लंड ने मज़े में ठुमका लगाया और थोडा सा उछल गया | लंड को ऐसा करते देख माला की हंसी निकल गयी | उसे इस खेल में अब मज़ा आने लगा था , वो बार -२ अपनी जीभ सुपाड़े पे ले जाकर चाटने का प्रयास करती और हर बार लंड एक ठुमका लगता |भैया तो मज़े से दोहरे हुए जा रहे थे माला की इस हरकत पे |माला अपना काम किये जा रही कि तभी भैया ने उसे रुकने का इशारा किया और माला लंड चाटना छोड कर भैया के बगल में सर नीचे करके खड़ी हो गयी और भैया के अगले आदेश का इंतज़ार करने लगी | भैया ने एक हाथ से अपना लंड पकड़ा और माला को इशारे से बिस्तर पे लेटने को कहा | माला चुपचाप बिस्तर पे पीठ के बल लेट गयी और भैया कि अगले हरकत का इंतजार करने लगी .

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……. भैया माला को बिस्तर पे लेटने को कह कर खुद अपने कपड़ो कि तरफ चले गए ओर पैंट कि जेब से कुछ निकाल कर माला कि ओर मुड़े | मैंने देखा भैया के हाथो में एक छोटी सी तेल कि शीशी थी जिसे उन्होंने बिस्तर के सर के पास रख दिया | माला ने भैया से पूछा : ” ये तेल किस लिए लाए हो .” तो भैया ने मुस्कुराते हुए कहा : “अभी पता चल जायेगा , क्यों परेशान हो रही है “. मुझे लग रहा था कि भैया को काफी अनुभव था , सायद वो पहले भी ये सब कर चुके थे , पूरी तैयारी के साथ आये थे वो | मुझे ये सब बाते उस वक्त तो नहीं पता थी , जब मैं जवान हुआ तो मुझे एहसास हुआ था उस दिन की घटना का | भैया अब माला के दाहिने तरफ बैठ गए , भैया तो पूरी तरफ नन्गे थे पर माला के शरीर पर अभी भी एक चड्डी बाकी थी जिसने उसकी प्यारी सी कुवारी चुत को ढक रखा था | भैया उठ कर अब माला के पैरों की तरफ आ गए थे , और उनके हाथो ने माला की चड्डी कि इलास्टिक को दोनों तरफ से पकड़ लिया था |

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