झोपड़ी मे एक मस्त भाभी के साथ सेक्स

हेलो फ्रेंड्स कैसे है आप सभी, मेरी आज की कहानी बिल्कुल अलग है. जिसमे काफ़ी ट्विस्ट और रोमॅन्स और भरपूर सेक्स है. तो देर ना करते हुए स्टोरी को शुरू करते है.

मई अपनी फॅमिली के साथ एक हिल स्टेशन पर गया था. हम एक तौर ऑपरेटर के द्वारा गये थे तो हमारे साथ और भी काई फॅमिली थी. बस मे जब हम लोग च्छड़े तो मेरी नज़र एक फॅमिली पर रुकी गयी.

उस फॅमिली मे एक भाभी उनका हज़्बेंड और एक शरती बेटा था जो 4 साल का था. मई तो बस भाभी को देखता रहा. क्या कमाल की भाभी थी कामुकता तो उनके अंग अंग से तपाक रही थी.

उन्होने ग्रीन कोलेर की कट स्लीव की कुरती पहनी थी और उनकी कुरती का गला तोड़ा बड़ा था. जिसमे से उनके बूब्स की नली सॉफ दिख रही थी. भाभी का रंग एक सॉफ ऐसा लग रहा था जैसे अभी दूध मे से नहा कर निकली हो. उनके गाल एक दम लाल और चिकने थे.

भाभी ने अपने उपर कोई दुपट्टा नही डाला था. जिस कारण मुझे उनके मोटे मोटे और टाइट बूब्स सॉफ दिख रहे थे और उनके बूब्स की नली भी. भाभी ने पिंक कोलेर की एक दम टाइट स्लेक्ष पह रखी थी. जिस कारण उनकी मोटी गांद काफ़ी मस्त लग रही थी.

यूयेसेस भाभी का बदन काफ़ी हरा भरा था और काफ़ी सेक्सी लग रही थी, मेरी सीट उनके सामने वाली थी. उनके बेटे ने अपना एक खिलोना नीचे गिरा दिया. जब वो उसे उठाने के लिए झुकी तो मुझे उनके बूब्स के दर्शन हो गये. क्या बूब्स थे उनके एक दम गोल गोल और एक दम साफ मेरी तो नज़र उन भाभी से हट नही रही थी.

थोड़ी देर बाद बस चल दी और मई भाभी को निहारता रहा. और मॅन ही मॅन उनके साथ कामुकता के आतुर हो गया. उस समय मेरे लंड फूल गया और मुझे परेशन करने लगा. मई बस मे थे तो भाभी के नाम की मूठ भी नही मार सकता था.

फिर थोड़ी देर मे भाभी की फॅमिली और मेरी मम्मी मे काफ़ी अची जान पहचान हो गयी. मैने चुपके से भाभी का एक फोटो अपने मोबाइल मे ले लिया.

लगभग 3 घंटे बाद बस एक ढाबे पर रुकी. मई सीधा टाय्लेट मे गया और भाभी का फोटो देखते हुए मूठ मार दी. तब जाकर मुझ को तोड़ा सा रेलेक्ष मिला.

फिर मैने खाना ऑर्डर किया और भाभी के सामने वाली टेबल पर बैठ कर खाना खाने लगा. कुछ देर बाद बस चलने लगी बातो बातो मे भाभी ने अपना नाम शिवनगी बताया और मेरी उनसे काफ़ी अच्छी जान पहचान हो गयी.

हम लोग नाइट मे हिल स्टेशन पर आए और तौर ऑपरेटर ने जो होटेल बुक कराया था उसमे हम सभी अपने अपने रूम मे चले गये.

नेक्स्ट दे जब हम सब इकट्ठे हुए तो मई शिवनगी भाभी को देखता रह गया. उसने ग्रीन कोलेर की सारी इतनी सेक्सी स्टाइल मे पह रखी थी की क्या बतौ मेरा लंड फिर खड़ा हो गया.

भाभी ने सारी को अपनी नाभि से 4 इंच नीचे बँधा था. जिस कारण उनका सिकना पेट एक दम सॉफ दिख रहा था.

तौर ओपरेतॉर बोला आज हम ज़ू जाएँगे, हम सभी लोग बस मे चले गये. रास्ते मे हमारी बस खराब हो गयी तो हुमको दूसरी बस रुकवानी पड़ी.

उस बस मे एक भी सीट न्ही थी तो मई खड़ा हो गया और मेरे आयेज भाभी खड़ी हो गयी. अब भाभी की गांद मेरे लंड को मसल रही थी. भाभी ने हाथ उपर करके डंडा पकड़ रखा था. उस समय क्या बतौ उनकी कमार कितनी मस्त लग रही थी.

भाभी की नरम मखमल सी नरम गांद का स्पर्श पाकर मेरा लंड बाज़ जितना टाइट हो गया. और बस मे इतनी भीड़ थी की लोग एक दूसरे से चिपके खड़े थे.

जब मेरा मोटा लंड भाभी की गांद को स्पर्श कर रहा था. तो शायद भाभी को भी इस बात का एह सास हो गया पर वो कुछ न्ही बोली.

अब मैने अपना एक हाथ भाभी की चिकनी कमार पर रख दिया. उन्होने मेरी तरफ मूड कर देखा और एक हल्की सी सिंले दी. उन्होने फिरसे मेरी तरफ अपनी गांद कर दी. मुझसे अब कंट्रोल नही हो रहा था मई. मई तो अब बस शिवनगी भाभी की छूट मारना चाहता था.

थोड़ी देर बाद मैने अपना लंड बाहर निकल लिया. जैसे ही मैने भाभीब्की गांद के बीच मे अपना लंड सहलाया भाभी ने तुरंत मेरा लंड पकड़ लिया, मई बुरी तरह दर गया.

भाभी मेरे कान मे बोली – बहुत मोटा है तुम्हारा लंड, सब कुछ यही करोगे क्या?

उनके मूह से ये बस्त सुनकर मई शोकेड हो गया.

मैने कहा – भाभी अगर आप चाहो तो यही हो जाएगा और किसी को कुछ पता भी नही चलेगा.

और मैने कहा – भाभी आज दोनो एक नया कारनामा करते है.

भाभी ने हन मे सिर हिलाया और बोली – तुम इस साअ अपने लंड को शांत कर लो, बाकी प्रोग्राम बाद मे.

मैने कहा ओक.

फिर मैने ढेरे से भाभी की सारी को उपर उठा दिया और भाभी की गांद को सहलाने लगा. क्या मस्त गांद थी भाभी की. फिर उनकी पनटी नीचे की और अपने लंड को उनकी मोटी गांद के बीच मे रख दिया.

बस मे बार बार पिच्चे से धक्का लग रहा था तो मेरा लंड भाभी की छूट को च्छू कर आ रहा था.

मैने भाभी से कहा – भाभी थोड़ी सी टाँगे फैला लो.

भाभी ने अपनी टाँगे फैला ली और अब मैने अपने लंड का टोपा उनकी छूट मे घुसा डियै.आ और धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करने लगा. मई ज़्यादा की उत्तेजित था तो थोड़ी देर मे ही भाभी की छूट पर माल निकल दिया.

भाभी बोली इतनी जल्दी?

मैने कहा भाभी तुम्हारी गांद ने मेरे लंड को ज़्यादा ही उत्तेजित कर दिया था तो जल्दी हो गया.

भाभी बोली – मेरी भूख को कैसे शांत करोगे?

फिर हुँने एक प्लान बनाया, जब हम ज़ू पर आए तब वो अपने हज़्बेंड से बोली की तुम जाओ मई थोड़ी देर मे आ रही हू. इधर मैने भी बहाना बना दिया.

उसके बाद हम दोनो सेक्स के लिए जगह ढुड़ने लगे. मेरी नज़र एक झोपड़ी पर पड़ी वाहा एक आदमी बैठा था. मैने उससे कहा की मेरी वाइफ की तबीयत खराब है. ये 500 र्स लो और थोड़ी देर को अपनी झोपड़ी दे दो, वो मान गया.

मई शिवनगी को लेकर झोपड़ी के अंदर गया और गाते को बंद कर लिया. अंदर जाकर शिवनगी बोली जल्दी करो. मैने कहा भाभी तुम मेरे साथ सेक्स करने को टायर कैसे हुई?

तो वो बोली जब तुम्हारा लंड मेरी गांद को च्छू रहा था तब मुझे बड़ा मज़ा आया. और मैने सोचा क्यू ना इस मोटे लंड के मज़े लू. भाभी ने बताया की उनका हज़्बेंड उनको सिर्फ़ सनडे वेल दिन ही छोड़ता है.

मैने भाभी को अपनी बहो मे लिया और उनके नरम गुलाबी होंटो को चूसने लगा. भाभी भी मेरा पूरा साथ देने लगी. मैने भाभी की सारी को उठाया और उनकी मोटी गांद को कस कर दबाने लगा.

भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे लंड को देख कर बोली – इतना मोटा और लंबा लंड आज तक नही देखा… और मेरे लंड को अपने हाथ मे ले लिया.

इधर मैने भाभी का ब्लाउस खोल दिया. उसने रेड कोलेर की ब्रा पहनी थी. मई उसको पागलो की तरह किस करने लगा और भाभी को दीवार के सहारे खड़ा करके उसके बूब्स और पेट पर किस करने लगा. वो भी मदहोश होने लगी और सिसकिया भरने लगी.

भाभी बोली जल्दी करो.. मैने कहा हन भाभी.. उसके बाद मैने भाभी को चारपाई पर उल्टा लेता दिया और उसकी ब्रा खोल कर उसकी चिकनी कमार को सहलाने और चाटने लगा.

अब भाभी चुदाई के लिए पागल हो गयी. फिर मैने शिवनगी को सीधा लेटया और उसकी सारी उसकी झंघो तक उठा दी. भाभी ने ब्लू पेंटी पहनी थी. अब मैने भाभी की थाइस पर किस और चाटना शुरू कर दिया. अब भाभी चुदाई के लिए तड़प रही थी.

मैने फिर शिवनगी भाभी की पेंटी को उतार दिया. क्या छूट थी, एक दम गुलाबी मख़मल सी कोमल. भाभी बोली राजा अब और मत तड़पाव जल्दी से मेरी छूट को शांत कर दो.

तो मैने भाभी की टाँगे फैलाई और अपने लंड को उनकी झंघो पर रगड़ने लगा. इधर भाभी के बूब्स के पिंक निपल खड़े हो गये थे जिनको मई चूसने लगा. फिर मैने भाभी की छूट पर लंड सेट किया और एक धक्का मारा, मेरा आधा लंड भाभी की छूट मे समा गया.

भाभी की चीख भी निकली, तुरंत ही उनके होंटो को किस करने लगा और अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा. क्या बतौ भाभी की छूट मे लंड डाल कर कितना मज़ा आ रहा था.

मैने फिर एक धक्का मारा और पूरा लंड भाभी की छूट मे जाकर भाभी की बच्चेड़नी को चोट मारने लगा. अब मई ज़ोर ज़ोर से भाभी की छूट पर धक्के मारने लगा. भाभी ने अपनी टॅंगो से मेरी कमार पकड़ ली और अपनी गांद हिला हिला कर चुदाई के मज़े लेने लगी.

फिर मैने भाभी को गोद मे उठाया और दीवार के सहारे रोक कर छूट पर ज़ोर ज़ोर से शॉट्स मारने लगा. उसके बाद भाभी को चारपाई पर झुकाया और पिचगे से लंड डाल कर शिवनगी की चुदाई करने लगा. फिर भाभी को सीधा लेटया और उनको ज़ोर ज़ोर से छोड़ने लगा और शिवनगी भाभी के मोटे बूब्स का रस पं करता रहा.

लगभग 30 मिन्स बाद मैने भाभी की छूट मे ही डिस्चर्गे हो गया. और भाभी की छूट मेरे माल से भर गयी. इतनी देर मे शिवनगी की छूट 2 बार अपना माल निकल चुकी थी.

मेरी जबारजस्ट चुदाई से भाभी की छूट सूज कर मोटी और लाल हो गयी.

फिर हमने कपड़े पहने, मुझसे चूड़ने की वजह से उनको चक्कर आ रहे थे और छूट मे दर्द होने के कारण लगदा कर चल रही थी.

मैने कहा भाभी जब तुमको पहली बार देखा था उसी समय तुमको छोड़ने का सोच लिया था. फिर हुँने एक दूसरे को हग किया और जोपदी से बाहर आ गये.

भाभी के हज़्बेंड ने पुचछा की तुम ऐसे क्यू चल रही हो?

तो वो बोली की पैर मे झटका आ गया… और मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी.

मैने मॅन मे सोचा की इसकी ऐसी चल पैर मे झटके से नही छूट पर झटके खाने से हुई है.

हम लोग हिल स्टेशन पर 6 दिन रहे. शिवनगी हर नाइट मुझसे चूड़ी अपने पति को नींद की गोली खिला कर. मैने भी उसकी छूट को छोड़ छोड़ कर उसको तिरपत कर दिया.

फिर हम सब वापस आ गये और फिर शिवनगी भाभी यहा भी मुझसे चुड्ती रहती है.

तो कैसी लगी ये कहानी अपनी नेक्स्ट स्टोरी थोड़ी अलग होगी जिसका नाम होगा “चुदाई का सफरनामा”

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